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सर्वार्थ साधिनी श्री पराम्बा वन देवी साधना पीठ निवासिनी असिद्ध साधिनी बम भवानी नमो नमः

yog tantra sadhna peeth for practical teaching.SHRI PARAMBA VAN DEVI SADHNA PEETH

योग तंत्र मंत्र साधना का प्रायोगिक साधना पीठ
श्री पराम्बा वन देवी साधना पीठ

क्रीं कुण्ड के बाल रवि से अघोर आकाश के प्रचंड सूर्य तक।प्रिय अघोर मित्रो सादर ॐ श्री अघोरेश्वराय नमः ॐ माँ क्रीं ।क्रीं ...
04/08/2026

क्रीं कुण्ड के बाल रवि से अघोर आकाश के प्रचंड सूर्य तक।

प्रिय अघोर मित्रो सादर ॐ श्री अघोरेश्वराय नमः ॐ माँ क्रीं ।

क्रीं कुंड बाबा कीनाराम स्थल के नाम से विख्यात यह सिद्ध अघोर पीठ जहाँ अघोर पथ की पूज्यनीय देवी माँ हिंगलाज का यंत्र स्थापित है,जहाँ वो अंश रूप से निवास करती हैं। पूज्य दत्तात्रय अवतार बाबा कालूरामजी की साधना भूमि, गंगा और असि दो नदियों के संगम पर स्थित इसी स्थल के मंदार वन में राजा हरिश्चंद्र के पुत्र रोहित को सर्प ने डसा था।सुमेधा ऋषि का आश्रम इसी स्थान पर स्थित था। इसी स्थान पर आदि गुरु दत्तात्रय अवतार पूज्य बाबा कालूराम जी ने पूज्य अघोराचार्य महाराजश्री कीनाराम जी को यह स्थल सौंप स्वयं को उनके शरीर में धुंए के रूप में विलीन कर दिया था।पूज्य बाबा कीनाराम जी सहित अनेक औघड़ अघोरेश्वरो की यह पवित्र साधना स्थली विश्व को सर्वमान्य सर्वोच्च अघोर पीठ है।बाबा कीनाराम और अन्य औघड़ संतो की समाधि सहित यहाँ बाबा कीनाराम द्वारा प्रज्वल्लित अखंड धुनि भी विराजमान है।

पूज्य बाबा कीनाराम जी के अपने शब्दों में " क्रीं कुण्ड गिरनार है और यहाँ सभी तीर्थों का वास है"।

यहाँ क्रीं कुण्ड नामक प्रसिद्द पवित्र कुण्ड औघड़ तख़्त के साथ महाराजश्री कीनाराम जी की गद्दी भी स्थापित है, जिसके वर्तमान पीठाधीश्वर सकल विश्व के अघोर साधू सन्यासी मुड़िया एवं गृहस्थ साधक पथिकों के सर्वोच्च आचार्य पूज्य अघोराचार्य महाराजश्री सिद्धार्थ गौतम रामजी हैं। #अघोर_मित्र_मंडल

पूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु और पूज्य पीठाधीश्वर को प्रणाम करते हुए कुछ संकलन प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिससे अघोर परंपरा के तीन जन्मों की साधना के पुंज वर्तमान पीठाधीश्वर गौतम बाबा के बारे में हम सब कुछ जान सकें।इसके लिए सर्वप्रथम मैं श्री दया नारायण पाण्डेय जी को प्रणाम करता हूँ,जिनकी किताब "क्रीं कुण्ड के बाल रवि औघड़ सिद्धार्थ गौतम राम सारनाथ के आँगन में" से बहुत सी सामग्री का उपयोग मैंने इस पोस्ट में किया है।साथ ही अघोर शोध् संस्थान क्रीं कुण्ड द्वारा प्रकाशित "औघड़ पीर की मस्ती" से भी कुछ अंश इस पोस्ट में उपयोग किये गए हैं।

आदरणीय श्री विश्वनाथ प्रसाद अस्थाना जी ने पूज्य गौतम बाबा के अवतरण के विषय में जो दयानारायण पाण्डेयजी से बताया वो थोडा संपादित कर प्रस्तुत करना चाहता हूँ।

" ईस्वी सन 1969 में सरकार ने मुझको अपने किस निर्माण कार्य को सौंप दिया था,आज मैं उस तिथि या तारीख को तो नहीं बतला पाउँगा।बस इतना ही समझिये कि 1969 की एक रात थी,जब मैं रात्रि पड़ाव आश्रम में रुक गया था।उस दिन मेरी नींद चार बजे भोर में खुल गयी थी।अतः पांच सवा पाँच बजे प्रांगण स्थित मंदिर के पश्चिम खड़ा होकर दातौन करने लगा था।यह मुझको बाद में पता चला की उस रात सरकार तीन बजे ही अपने मुक्की लगाने वालो को अपने कमरे से बाहर कर दिए थे,पाँच बजे जब मैं दातौन कर रहा था,उसी समय सरकार का दरवाजा खुला और वह अपने कमरे से निकल कर अपने बरामदे में खड़े हो गए।अतः उनकी दृष्टि से बच कर दातौन करने की गरज से मैं वही एक पौधे की आड़ लेकर खड़ा हो गया।

मैं जिस आड़ में खड़ा था,वहां से सरकार साफ़ दिखाई पड़ रहे थे,मैंने देखा कि बरामदे में जब वो खड़े थे,तो उनका एक हाथ बाहर की और निकलता दिखाई पड़ा।उनके उस निकले हुए हाथ के देखने से लगा जैसे उसकी काँख से निकलता हुआ सा कोई वस्त्र उनके पूरे हाथ पर लिपटा है।

एक मिनट बाद सरकार ने एक आदमी का नाम लेकर बुलाया और अपने हाथ में लिपटे हुए वस्त्र को उसी आदमी को थामा दिए।घंटे भर बाद मुखे पता चला सरकार के हाथ में कोई वस्त्र नहीं बल्कि यही गौतम रामजी शिशु रूप में थे जो आज क्रीं कुण्ड के पीठाधीश हैं।

श्री पाण्डेय के यह पूछने पर कि आपके इस कथन से क्या मैं नहीं कह सकता कि सिद्धार्थ गौतम राम के उपजनन में सरकार की कुक्षी है,तो आदरणीय अस्थानाजी का जवाब था,
"मैं श्री सिद्धार्थ गौतम रामजी को अयोनिज नहीं कहता, मैं कहता हूँ कि औघड़ सिद्धार्थ गौतम राम का जन्म औघड़ भगवन राम की विधा के अंतर्गत है"

प्रिय मित्रों दूसरा उल्लेख भी श्री दयानारायण पाण्डेय और अस्थानाजी का अभिषेक दिवस पर वार्तालाप से ले रहा हूँ।

आदरणीय अस्थानजी के शब्दों में ही प्रस्तुत कर रहा हूँ।
" अघोर पीठ क्रीं कुण्ड, काशी का पीठाधीश्वर होने के अर्थ में है, हरिश्चंद्र घाट का कालूराम अथवा शमशानेश्वर होना।धूतांग के शमशानिकांग में निषणात होना।10-02-1978 दोपहर साढ़े ग्यारह बजे के लगभग जब गौतम बाबा अपनी किनारामी गद्दी पर विराजमान थे, उसी समय उनको देखने एक महात्मा का आगमन हुआ जो अकथ्य है।उनका वेश रूक्ष रूप श्याम था,आँखों में तीव्र तेज था,हाथ में कमंडल और दाढ़ी नाभि तक झूलती और सर पर जटा वस्त्र के नाम पर मात्र एक लंगोटी।उस भीड़ में से किस आदमी से महात्मा जी ने पुछा इस मठ का महंत कौन है, आदमी ने पूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु की तरफ इशारा कर दिया,उस आदमी का उत्तर सुनते ही महात्माजी का चेहरा तमतमा गया और उन्होंने गुस्से से फिर पुछा कौन, क्रोधित मुख मुद्रा देख वो आदमी भाग खड़ा हुआ, तभी बाजू खड़ी एक अधेड़ स्त्री ने अपनी तर्जनी ऊँगली को गद्दी पर बैठे हुए श्री सिद्धार्थ गौतम राम की और दिखाते हुए कहा "इहाँ का महंत उहै का ना देखात हउवै समनवां भीतरा घरवा में देखा गद्दी पर बईठल झलकत हउवै।आजै त गद्दी पर बईठलन हैं।बाकी अबहीं बच्चा हउवै"।उस स्त्री के यह कहने के बाद उन महात्माजी का चेहरा शांत हो गया खिलखिला कर हंसने लगे किन्तु मिनट भर में रोने भी लगे।

प्रिय मित्रों इन महात्मा के वृत्तांत से मुझे वो ऋषि याद आ गए जो गौतम बुद्ध के जन्म के समय आये थे, बालक सिद्धार्थ को देख पहले वो मुस्कुराये और फिर रोने लगे यह कहकर कि जब आप जागेंगे तब तक मैं चिरनिद्रा में जा चूका रहूँगा।आपका वो स्वरुप देखने से वंचित रह जाऊँगा।

प्रिय मित्रों तीसरा वृत्तांत"औघड़ पीर की मस्ती" से ले रहा हूँ।

एक दिन अघोर परंपरा की वैष्णव गद्दी महुवर के महंथ श्री शंकर दासजी,जो पूज्य बुढऊ सरकार के कनिष्ठ भ्राता भी थे, क्रीं कुण्ड स्थल पर पधारे।पूज्यवर के दर्शन के बाद महंथजी वही बैठ उनसे बात करने लगे।अचानक पूज्यवर ने उनसे प्रश्न किया " हमरे बाद यहाँ का महंथ के के सोचत हउवा "इस एकाएक प्रश्न के जवाब में श्री शंकर दासजी ने कहा श्री अवधूत भगवान् रामजी। इसपर पूज्यवर ने कहा नहीं "बालक"और चुप हो गए।अपने महानिर्वाण के डेढ़ वर्ष पूर्व भी आपने यही प्रश्न किया और जवाब आपको वही मिला पर तब आपने बालक गौतम रामजी की तरफ इशारा कर स्पष्ट कर दिया।

प्रिय मित्रों यह बात निर्विवाद रूप से सत्य है,कि परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु बाबा कीनाराम के बालरूप में पुनरागमन किये थे।स्वयं बुढऊ सरकार कहते थे,कि मैं जानता हूँ आप कीनाराम हैं।गद्दी स्वीकार करने की बात पर विनम्रतापूर्वक इनकार कर कहते थे,मुझे दूसरा कार्य करना है,पर अपने पूर्व जन्म में की गयी घोषणा और अंतिम सन्देश का पालन भी उन्हें सदा याद रहा कि " ग्यारहवीं गद्दी में पुनः बाल रूप में आऊंगा तब इस स्थली का और जगत का पुनर्निर्माण और पूर्ण जीर्णोद्धार करूँगा"

उपरोक्त सभी दृष्टान्तों से मेरी छोटी बुद्धि से इतना ही समझ पाया हूँ,कि सरकार ने जाते जाते अपनी अघोर साधना की शक्ति का अंश सभी उत्तराधिकारियों साधू शिष्यों को दे दिया किसको क्या दिया यह महात्मागण ही जानते हैं,और सबसे अंत में सरकार ने स्वयं को पूज्य बाबा सिद्धार्थ गौतम रामजी को दे दिया या दुसरे शब्दों में कहूँ तो परकाया प्रवेशी ने अपने ही इस नवीन शरीर में प्रवेश कर लिया।आखिर उन्होंने दोनों कार्य संपन्न किये, जगत उद्धार श्री सर्वेश्वरी समूह पड़ाव् तथा अन्य आश्रमो का विस्तार करके और क्रीं कुण्ड स्थली का जीर्णोद्धार अपने ही नवीन स्वरुप वर्तमान पीठाधीश्वर पूज्य बाबा सिद्धार्थ गौतम रामजी के माध्यम से और अब भी यह दोनों महान कार्य अनवरत इस स्थली से संचालित हो रहे हैं।

मित्रों आश्रम मंदिर बहुत सारे हैं और भी बहुत सारे बनेंगे परंतु अखंड धुनि अघोर गद्दी और क्रीं कुण्ड एक ही है और एक ही रहेगा।किसी भी परंपरा की सर्वोच्च गद्दी एक ही होती है,भले ही उसके साधू संतो की कितनी भी शाखाएं हो। पीठ का अर्थ ही पॉवर हाउस होता है। इस स्थल से समस्त जगत के अघोर पथ का आध्यात्मिक और भौतिक संचालन होता है,यहीं पूज्य सरकार ने अपनी समस्त ऊर्जा को समाहित कर दिया।

मित्रों पूज्य अघोराचार्य महाराजश्री सिद्धार्थ गौतम रामजी को मैं निजी रूप से पूज्य महाराजश्री कीनारामजी पूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु और स्वयं गौतम बाबा के पांच वर्ष की आयु से की गयी अघोर साधना का एकीकृत पुंज मानता हूँ।ज्ञात हो कि पूज्य गौतम बाबा का दीक्षा संस्कार मात्र पांच वर्ष की आयु में हो गया था।अतः यह तीन जन्मों की साधना और तपस्या की जीती जागती मूरत हैं।कीनाराम स्थल में महाराजश्री कीनाराम जी के बाद कुर्सी पर दो ही लोग विराजमान हुए एक पूज्य सरकार दूसरे पूज्य गौतम बाबा।क्रीं कुण्ड स्थल में कोई चीज़ इधर से उधर नहीं हुई बाबा कीनाराम के बाद या यह कहें किसी ने हिम्मत नहीं की।पर आज क्रीं कुण्ड के पूर्ण जीर्णोद्धार को देख लगता है, यह काम बाबा कीनाराम अंश के हाथो ही संभव हो सकता था।अब कालू कीना एक भये राम कहे सो होय की परंपरा में अगर मुझे कीनाराम अवधूत राम गौतम राम एक भये प्रतीत होता है,तो मुझे तो यह आश्चर्यजनक नहीं लगता बल्कि अघोर परंपरा की वो प्राचीन विधा की पुनुरुक्ति प्रतीत होता है।भावावेश या भक्ति का अतिरेक कहें जो मेरे मन ने कहा मैंने वैसे का वैसा यहाँ उतार दिया।शेष सरकार जानें।

मेरा आपसे ऐसा कोई आग्रह नहीं है,कि आप भी वैसा माने जैसा मैं मानता हूँ।बल्कि मेरा आग्रह आपसे इतना ही होगा कि आप भी पूज्य गौतम बाबा को वैसा जानने का प्रयास करें जैसा उन्हें जानना चाहिए।

ॐ श्री शिवरामकिना नमः।
ॐ श्री अघोरेश्वराय नमः।
ॐ श्री पीठाधीश्वराय नमः।
ॐ श्री अघोर पीठाय नमः।

साभार कॉपी पेस्ट : #अघोरमित्रमंडल

प्रिय अघोर मित्रों सादर श्री अघोरेश्वर स्मरण ॐ माँ क्रीं।।।नारी नदी अथाह जल, डूब मरा संसार   ऐसा साधू न दिखा, जो उतरा उस...
03/08/2026

प्रिय अघोर मित्रों सादर श्री अघोरेश्वर स्मरण ॐ माँ क्रीं।

।।नारी नदी अथाह जल, डूब मरा संसार
ऐसा साधू न दिखा, जो उतरा उस पार।।

पूज्य माँ गुरु अघोरेश्वर भगवान रामजी की यह वाणी आज सामयिक प्रतीत होती है।इस वाणी में एक बहुत बड़े रहस्य की तरफ भी मालिक इशारा कर रहे हैं।हम माँ गुरु की वाणियों का मनन चिंतन और मंथन करें तो हमारे अभ्यन्तर में ही इसमें छुपे रहस्य का प्रस्फुटन होने लगेगा। चाहे श्रीमदभगवद्गीता हो अथवा श्री रामचरितमानस, रामायण इनमे लिखी वाणियों और चौपाइयों की टीका,अनुवाद और उनका विस्तार बहुतेरे संत, कथा वाचक ,विद्वान और सामान्यजन अपनी अपनी मेधानुसार करते हैं।आज भी हर पथ,पंथ और समाज के लोग इन चौपाइयों का आश्रय किसी बात को समझाने के लिए अवश्य उपयोग करते हैं।इसी आधार पर मनन चिंतन के फलस्वरूप जो मालिक से प्रेरणा मिलती है,उसको अपने शब्दों में ढाल कर आपके समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करता हूँ। यह मेरे निजी विचार होते हैं, इससे सहमत, असहमत और तटस्थ रहने का आपका अधिकार सुरक्षित है।

नारी को नदी कहा महाप्रभु ने,वैतरणी को भी नदी की संज्ञा दी गयी है।नदी इस पार से उस पार तक पहुंचने का साधन होती है।नारी को नदी की संज्ञा देने के पीछे मालिक का बड़ा गूढ़ रहस्य की तरफ इशारा है।नारी को माया भी कहा गया है।इस वाणी में मालिक ने जब कहा नारी नदी अथाह जल डूब मरा संसार तो उन्होंने भौतिक नारी स्वरूप की बात की है।आज भी आप सभी इस वाणी को समाज मे वास्तव में घटते देख पा रहे हैं। आज साधारण मनुष्य से लेकर साधु, बाबा, पुजारी, पुरोहित, मौलवी, पादरी जिन्हें हम समाज के सम्मान की दृष्टि से देखते हैं, जो माया के मोह से परे माने जाते हैं,यही आज इस माया के पाश में सर्वाधिक बंधे हुए प्रतीत होते हैं। भौतिक नारी का संग एक ब्रह्मचर्य धारण किये व्यक्ति के लिए घास का संग चिंगारी समान होता है। आज आप देखते होंगे कि साधुओं और साधकों की निज सेवा में नारियों को ज्यादा महत्व देने का महती कार्य होने लगा है। यह नारी को पुरुष से बराबरी का दर्जा अवश्य दे रहा हो परंतु यह आध्यात्मिक नियमों के सर्वथा विपरीत प्रतीत होता है।एक साधु और साधक के लिए नियमावली है, कि वो ऐसे किसी भवन में वास न करे जहाँ सिर्फ नारी हो, परंतु आज तो भवन छोड़िये एक कमरे के भीतर साधु नारी के साथ रहने में संकोच नही कर रहे।नारी से एकांत में मिलने पर पूर्ण पाबंदी होने के बावजूद आज साधु और साधक धर्म के नाम पर नारी से घंटो एकांत में वार्तालाप करते हैं।कोई उन्हें इसपर रोके टोके तो वो कहते हैं, हम माया से ऊपर उठ चुके हैं,हमें वासना छू भी नही सकती है। परंतु जब परिणाम आते हैं, तो आसाराम, रामरहीम नित्यानंद प्रगट होते हैं।

कल्पना करिए क्या बीती होगी उस लड़की के माता पिता पर जो आसाराम के अनुयायी शिष्य थे, और उन्हें अपना पिता मानते थे, उस पिता रूपी गुरु ने ही उनकी बेटी के साथ ऐसी अश्लीलता की और जब लड़की ने माँ बाप से शिकायत की तो उसे उल्टा डांट पड़ी कि बापूजी के बारे में ऐसा कहते शर्म नही आती।बाद में जब माता पिता को एहसास हुआ तो उन्हें उनके ही गुरु रूपी पिता आसाराम द्वारा धमकाया जाता रहा और ब्लैकमेल किया जाता रहा, अपनी इज्ज़त के धूमिल होने के भय से वो सालों चुप रहे। अंततः ईश्वरीय प्रेरणा हुई मातापिता ने आवाज उठाई और आज साधु भेष में छुपे अधर्मी का पर्दाफाश हुआ। यही कहानी नित्यानंद, राम रहीम इत्यादि की रही।आज भी न जाने कितने साधु और साधक वेश धारी लोग ऐसे घृणित कर्म में लिप्त होंगे ईश्वर ही जाने।मालिक की यह वाणी ऐसे लोगों पर पूर्णतः लागू होती है, क्योंकि जिन्हें पार उतरना था वह डूब गए।

मालिक ने इस वाणी के दूसरे भाग में कहा

"ऐसा साधु न दिखा जो उतरा उस पार"

इसी वाक्य में इस पूर्ण वाणी का रहस्य छुपा है।नारी नदी को पार करके उस पार उतरना हर साधु का मुख्य ध्येय है।पहले भौतिक स्त्री से मुक्त होना आवश्यक है।उसके बाद आपको माया से मुक्त होना आवश्यक है,जो नारी संज्ञा मानी गयी है।अब उस पार उतरने के लिए नाव की आवश्यकता पड़ेगी या फिर आपको तैरकर पार करना होगा।मालिक जिस नाव की तरफ इशारा कर रहे हैं, वो भी नारी ही है।वो भी माया का उच्चतम स्वरूप है,जिसे हम जगद्जननी महामाया कहते है।

माया से महामाया तक कि यात्रा भी मालिक ने अपनी एक वाणी में बताने का उपकार किया है।

"जो घर तजा, वो महाराज कहलाया
जो तजा नारी को,वो महारानी को पाया"

मालिक ने स्पष्ट कर दिया माया को तजोगे तो महामाया को पाओगे।नारी को तजोगे तो महारानी को पाओगे और यही वो नाव है,जो आपको इस माया रूपी नदी से पार उतारेगी।माया के संरक्षण और स्वामित्व में ही यह पंचभूत का संसार है, यह वैतरणी है, जिसे पार करने के लिए महामाया रूपी नाव की आवश्यकता पड़ती है।

एक मार्ग मालिक ने और बता दिया कि नदी को या तो नाव से पार करो या फिर तैरकर पार करो।तैरने के लिए नदी में उतरना पड़ता है।यह मार्ग वाम का मार्ग है।नारी नदी इसमें आध्यात्मिक सहचरी अथवा सहयोगी होती है।इसे भैरवी अथवा शक्ति की संज्ञा दी गयी है।महाराज श्री कीनाराम जी की ऐसी एक साधना का उल्लेख मिलता है।यह विषय उच्च अवस्था प्राप्त व्यक्तियों द्वारा ही बताया और समझाया जा सकता है।मालिक ने एक बात अवश्य इशारों में कही कि गृहस्थ को यह शक्ति सुलभ होती है।इससे आगे कहना नियम भंग का दोषी बनाएगा अतः यहीं अपनी लेखनी को विराम देता हूँ।

।।एक अखंड कीनाराम,माँ गुरु अघोरेश्वर भगवान राम।।
क्रीं कुंड पीठाधीश्वर अघोराचार्य मालिक सिद्धार्थ गौतम राम

सौजन्य से : #अघोरमित्रमंडल

मेरे तंत्र शिक्षा गुरु तन्त्राचार्य श्री शशि मोहन बहलजी के जन्मदिवस पर श्री चरणों में कोटि नमन।
03/08/2026

मेरे तंत्र शिक्षा गुरु तन्त्राचार्य श्री शशि मोहन बहलजी के जन्मदिवस पर श्री चरणों में कोटि नमन।

श्री पराम्बा वन देवी साधना पीठ में पूज्य गुरु तत्व का पूजन संपन्न कर गुरु पूर्णिमा संपन्न हुई। #पहांदा  #तंत्राघोर  #अघो...
29/07/2026

श्री पराम्बा वन देवी साधना पीठ में पूज्य गुरु तत्व का पूजन संपन्न कर गुरु पूर्णिमा संपन्न हुई।
#पहांदा #तंत्राघोर #अघोर #अघोरेश्वर #तंत्रमित्रमंडल #अघोरमित्रमंडल

मेरे आध्यात्मिक जीवन के प्रेरक एवं पथ प्रदर्शक योग ध्यान शिक्षागुरु पूज्य परमहंस सत्यानंद सरस्वती जी तंत्र शिक्षा गुरु त...
29/07/2026

मेरे आध्यात्मिक जीवन के प्रेरक एवं पथ प्रदर्शक
योग ध्यान शिक्षागुरु पूज्य परमहंस सत्यानंद सरस्वती जी
तंत्र शिक्षा गुरु तंत्राचार्य श्री शशि मोहन बहलजी,
अघोर दीक्षागुरु पूज्य अवधूत बाबा समूह रत्न रामजी
एवं अघोर पीठ क्रीं कुंड कीनाराम स्थल के पीठाधीश्वर
पूज्य अघोराचार्य महाराज श्री सिद्धार्थ गौतम रामजी
के श्री चरणों में गुरु पूर्णिमा पर कोटि कोटि नमन।

ॐ श्री योग गुरु मंडलाय नमः
ॐ श्री तंत्र गुरु मंडलाय नमः
ॐ श्री अघोर गुरु मंडलाय नमः

आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं।

नमः पार्वती पतये हर हर महादेव।
28/07/2026

नमः पार्वती पतये हर हर महादेव।

सुधर्मा । यहाँ के मानव-प्राणी अपनी-अपनी रूचि के अनुकूल मित्र,स्नेही,शुभचिन्तक आदि ढूँढ़ते हैं । मैं वैसा नहीं हो सकूँगा।...
27/07/2026

सुधर्मा । यहाँ के मानव-प्राणी अपनी-अपनी रूचि के अनुकूल मित्र,स्नेही,शुभचिन्तक आदि ढूँढ़ते हैं । मैं वैसा नहीं हो सकूँगा। मैं अकिंचन बना रहूँगा । इस अकिंचन के अपने ही हृदय में एक कोना सुरक्षित है जो उसके निवास के लिये पर्याप्त है । उसी में धूनी लगाऊँगा।

अघोर वचन शास्त्र

प्रिय अघोर मित्रों सादर सादर श्री माँ गुरु अघोरेश्वर स्मरण।

मालिक की यह वाणी को बारंबार पढ़िए लगातार पढ़िए और गुनिये फिर अपने अंतर की सुनिए। अपनी इच्छा अनुकूल अपनी रुचि अनुसार ही मित्र स्नेही शुभचिंतक ढूंढेंगे तो वो सिर्फ चापलूसी और स्वार्थ से भरे शत्रु होंगे। वह आपके प्रति मीठे उदगार व्यक्त करेंगे, समय समय पर आपकी वाह वाह करेंगे, आपकी अनर्गल, अर्थहीन बातों के समर्थन में खड़े रहेंगे। यह मिठास शनै शनै विष में परिवर्तित हो जाएगी जो आपके शरीर को नही आपके मन मस्तिष्क को खोखला कर देगी।

जो आपके गलत कार्यों का कटु वचनों से भी अगर प्रतिकार कर दे उसे अपना हितचिंतक मानो। जो आपको गर्त में जाते हुए न देख सके उसे अपना जानो, जो आपको अपने मन वचन कर्म से चेताये कि गलत कर रहे हो या गलत जा रहे हो उसे अपना मानो। भले वो और उसकी बातें उसके क्रियाकलाप आपको रुचि अनुकूल न पड़ते हो पर वही आपका सच्चा शुभचिंतक है।

अगर यह भी न कर सको तो अपने हृदय गुहा में धुनि रमाये बैठ जाओ आपका हितचिंतक आपका मित्र आपका गुरु आपका इष्ट वहां स्वयं विराजमान होकर आपके अनुरूप प्रकृति को उत्पन्न करेगा, आपकी बैखरी को खोल देगा आपके अन्तरचक्षु और अंतर्प्रज्ञा का जागरण कर देगा। वो आप मे विवेक , बल, धीरज और संकल्प शक्ति का उदय कर देगा और आप अपने वास्तविक हितचिन्तक को जान पाएंगे।

एक अखंड कीनाराम, माँ गुरु अघोरेश्वर भगवान राम।
क्रीं कुंड पीठाधीश्वर महाराजश्री सिद्धार्थ गौतम राम।।

यह मेरे निजी विचार हैं,इससे सहमत,असहमत अथवा तटस्थ रहने का आपका अधिकार सुरक्षित है।

श्री पराम्बा वन देवी साधना पीठ में गुप्त नवरात्र आषाढ़ शुक्ल अष्टमी का हवन पूजन संपन्न। #पहांदा  #तंत्राघोर  #अघोरमित्रम...
21/07/2026

श्री पराम्बा वन देवी साधना पीठ में गुप्त नवरात्र आषाढ़ शुक्ल अष्टमी का हवन पूजन संपन्न।
#पहांदा #तंत्राघोर #अघोरमित्रमंडल #तंत्रमित्रमंडल #तंत्र #मंत्र # # **ra #अघोर #कामाख्या

अघोर पथ की सर्वोच्च पीठ क्रीं कुंड बाबा कीनाराम स्थल काशी में गुरु पूर्णिमा महोत्सव परम पूज्य अघोराचार्य महाराजश्री सिद्...
17/07/2026

अघोर पथ की सर्वोच्च पीठ क्रीं कुंड बाबा कीनाराम स्थल काशी में गुरु पूर्णिमा महोत्सव परम पूज्य अघोराचार्य महाराजश्री सिद्धार्थ गौतम रामजी की पावन उपस्थिति में आरंभ होगा।

माँ गुरु त्वम् पाहिमाम शरणागतम।

मेरे तंत्र शिक्षा गुरु पूज्य तंत्राचार्य श्री शशि मोहन बहलजी द्वारा स्थापित तंत्र सबके लिए मिशन की गुरु पूर्णिमा का कार्...
17/07/2026

मेरे तंत्र शिक्षा गुरु पूज्य तंत्राचार्य श्री शशि मोहन बहलजी द्वारा स्थापित तंत्र सबके लिए मिशन की गुरु पूर्णिमा का कार्यक्रम पूज्य गुरुदेव की उपस्थिति में आश्रम मुख्यालय राधेपुरी दिल्ली में संपन्न होगा।

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