ब्रह्म विद्यालय एवम् आश्रम "जानकी कुटी"

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मुख्य कुट?

गुरु सर्वशक्तिमान हैश्री सदगुरु महाराज जी की जय हो
21/07/2022

गुरु सर्वशक्तिमान है

श्री सदगुरु महाराज जी की जय हो

⚘बलिहारी गुरु आपनो गोविन्द दियो लखाय⚘
12/07/2022

⚘बलिहारी गुरु आपनो गोविन्द दियो लखाय⚘

 #देवशयनी_एकादशी की बधाई।हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का खास महत्व है। यह हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि ...
10/07/2022

#देवशयनी_एकादशी की बधाई।

हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का खास महत्व है। यह हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है, कि इस दिन श्री नारायण 4 माह के लिए पाताल लोक में राजा बलि के यहां योगनिद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को फिर से स्वर्ग लोक को प्रस्थान करते हैं। ऐसी मान्यता है, कि 4 महीने में भगवान क्षीर सागर में शेषनाग की शैया पर रहते हैं। इन 4 महीनों में विवाह आदि जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।

इन चार महीनों में सृष्टि का कार्य भार महादेव सम्भालते हैं।
भक्तों में बोल बम की धूम रहेगी।
प्रतिलिपी

गुरु भक्ति मार्ग के सहज स्वरूप प्रवर्तक प्रभु दयाल ब्रह्मलीन स्वामी श्री अद्वैत आनंद जी महाराज वेदान्त (अद्वैत) का शुद्ध...
09/07/2022

गुरु भक्ति मार्ग के सहज स्वरूप प्रवर्तक प्रभु दयाल ब्रह्मलीन स्वामी श्री अद्वैत आनंद जी महाराज

वेदान्त (अद्वैत) का शुद्ध और अद्भुत वर्णन, परंमहंस दयाल प्रभु जी के श्री मुख से-

हमको द्वैत दृष्टि नहीं भाती।
जहं देखो तहं यही आत्मा, पिता पुत्र और नाती।
ब्रह्मण वैश्य शूद्र सब एही, नाभ मात्र बिलगाती।।
यही देवता यही देवालय, पुष्प धूप यही बाती।
पूजन वाली यही आत्मा, यह ही आप पुजाती।।
अण्डज पिण्डज स्वेदज उद्भज, सकलो एही जाती।
यही कारण, कारज भी एही, यही दूसरी अख्याती।।
रामयाद विचार निर्भय हो, कासे करूं संघाती।
सच्चिदानंद प्रकाश हुए जब तब है भरम नसाती।
"परमहंस" दयाल प्रभु

08/07/2022

मै अक्सर हार जाता हूँ,
जब प्रतिद्वंदी कोई अपना होता है।

छोड़ जाता हूँ अपना सपना भी,
जब अपनो के खुशी का ठिकाना होता है।

रोक लेता हूँ पीड़ा, आंसू, और कदम भी,
जो अपना ठुकरा कर भी खुश हो जाता है।

जिसे अपना समझते हैं, अपनाते हैं,
वही बेगाना बनाकर मुझे, सुरखुरू हो जाता है।

ठोकरें, मृत्यु तुल्य जलालत से भी खुश हुॅ अब,
यही अपनी नियती है, इसे अपना लेता हूँ।

जीवन रहा न अपने लिए, यह भाग रहा मुझसे,
थका और लाचार हुॅ, मौत को अपना लेता हूँ।

मैं अक्सर हार जाता हूँ,
जब प्रतिद्वंदी कोई अपना होता है।


महात्मा अभेद पुरी

तुम आए हम घाट उतारेहम आएँगे घाट तुम्हारेतब तुम पार लगईयो राम।केवटजयसीताराम ❤️
08/07/2022

तुम आए हम घाट उतारे
हम आएँगे घाट तुम्हारे
तब तुम पार लगईयो राम।
केवट
जयसीताराम ❤️

28/06/2022

स्वामी जी सरकार

शिन्यालास  कार्यक्रम #जानकी_कुटी_सीतामढ़ी
28/06/2022

शिन्यालास कार्यक्रम

#जानकी_कुटी_सीतामढ़ी

उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहरिणीम्।सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं राभवल्लभाभ्।।भावार्थ: 'सीता'(प्रेम) नाम सेवन से 'राम'(...
02/05/2020

उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहरिणीम्।
सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं राभवल्लभाभ्।।

भावार्थ: 'सीता'(प्रेम) नाम सेवन से 'राम'(तत्वज्ञानी के हृदय में रमने वाला) से युक्त हो, सृष्टि (जन्म जीवन और मरन) की सिद्धि करते हुए सर्वश्रेष्ठ "सीताराम" हुई।

23/04/2020

बंदउॅ संत असज्जन चढरना। दुख प्रद उभय बीच कछु बरना।।

बिछुरत एक प्राण हरि लेहीं।
मिलत एक दुख दारुन देहीं।।

उपजहिं एक संग जग माहीं।
जलन जोंक जिमि गुन बिलगाहीं।

सुधा सुरा सम साधु असाधू। जनक एक जग जलधि अगाधू।।

भल अनभल निज निज करतूती।
लहत सुजस अपलोक बिभूती।।

सुधा सुधाकर सुरसरि साधु। गरल अनल कलिमल सरि ब्याधू।।

गुण अवगुण जानत सब कोई ।
जो जेहि भाव नीक तेही सोई।।

भालो भलाइहि पै लहइ निचाइहि नीचु।।
सुधा सराहिअ अमरताॅ गरल सराहिअ मीचु।।

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