Shri Jeenmata Bhidasari

Shri Jeenmata Bhidasari जय श्री जीण जयन्ति माता दी

चैत्र नवरात्रि 2026 में घटस्थापना (कलश स्थापना) 19 मार्च 2026 (गुरुवार) को की जाएगी। सबसे शुभ समय सुबह 6:52 से 7:43 बजे ...
18/03/2026

चैत्र नवरात्रि 2026 में घटस्थापना (कलश स्थापना) 19 मार्च 2026 (गुरुवार) को की जाएगी। सबसे शुभ समय सुबह 6:52 से 7:43 बजे तक है, और यदि यह छूट जाए, तो अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:05 से 12:53 बजे के बीच कलश स्थापित किया जा सकता है। इस वर्ष नवरात्रि प्रतिपदा तिथि पर सुबह 6:57 बजे के बाद से कलश स्थापना करना शुभ माना गया है।

https://youtu.be/J0_ea1B_neQ?si=mTY64LxBUkZcoXuj

चैत्र नवरात्रि 2026 घटस्थापना मुहूर्त (19 मार्च 2026):
शुभ मुहूर्त (सुबह): सुबह 06:52 से 07:43 तक
अभिजीत मुहूर्त (दोपहर): दोपहर 12:05 से 12:53 तक
प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ: 18 मार्च 2026 को (अमावस्या के बाद)

घटस्थापना विधि और सामग्री:
स्थान की सफाई: पूजा स्थान को साफ कर चौकी पर माता दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें।
कलश स्थापना: एक मिट्टी के पात्र में मिट्टी (मिट्टी के कलश), जल, मौली, सुपारी, आम के पत्ते और जटा वाले नारियल का प्रयोग करें।
पूजा: सुबह के शुभ समय में कलश स्थापित करने के बाद माता को भोग लगाएं और दीप जलाएं।

विशेष ध्यान दें: इस बार नवरात्रि में प्रतिपदा तिथि के पहले कुछ समय अमावस्या का साया रहेगा, इसलिए पूजा सुबह 6:52 (प्रतिपदा लगने) के बाद ही करना उत्तम है।

#श्री_जीणमाता_मंदिर_भीडासरी

🌼⚜️ गायत्री मन्त्र ⚜️चौबीस अक्षर ⚜️🌼          सबसे ज्यादा प्रभावी मंत्रों में से एक मंत्र है गायत्री मंत्र। इसके जप से ब...
12/12/2025

🌼⚜️ गायत्री मन्त्र ⚜️चौबीस अक्षर ⚜️🌼

सबसे ज्यादा प्रभावी मंत्रों में से एक मंत्र है गायत्री मंत्र। इसके जप से बहुत जल्दी शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं।

गायत्री वेदजननी गायत्री पापनाशिनी।
गायत्र्या: परमं नास्ति दिवि चेह च पावनम्।। (शंखस्मृति)

अर्थात्–‘गायत्री वेदों की जननी है। गायत्री पापों का नाश करने वाली है। गायत्री से अन्य कोई पवित्र करने वाला मन्त्र स्वर्ग और पृथिवी पर नहीं है।’

सृष्टिकर्ता ब्रह्मा से लेकर आधुनिक काल तक ऋषि-मुनियों, साधु-महात्माओं और अपना कल्याण चाहने वाले मनुष्यों ने गायत्री मन्त्र का आश्रय लिया है। यह मन्त्र यजुर्वेद व सामवेद में आया है लेकिन सभी वेदों में किसी-न-किसी संदर्भ में इसका बार-बार उल्लेख है। स्वामी करपात्रीजी के शब्दों में गायत्री मन्त्र का जो अभिप्राय है वही वेदों का अर्थ है।

गायत्री का शाब्दिक अर्थ है–’गायत् त्रायते’ अर्थात् गाने वाले का त्राण करने वाली। गायत्री मन्त्र गायत्री छन्द में रचा गया अत्यन्त प्रसिद्ध मन्त्र है। इसके देवता सविता हैं और ऋषि विश्वामित्र हैं। मन्त्र है–

ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।

ॐ व भू: भुव: स्व: का अर्थ,गायत्री मन्त्र से पहले ॐ लगाने का विधान है। इसे प्रणव कहा जाता है। प्रणव परब्रह्म परमात्मा का नाम है। ‘ओम’ के अ+उ+म् इन तीन अक्षरों को ब्रह्मा, विष्णु और शिव का रूप माना गया है। गायत्री मन्त्र से पहले ॐ के बाद भू: भुव: स्व: लगाकर ही मन्त्र का जप करना चाहिए। ये गायत्री मन्त्र के बीज हैं। बीजमन्त्र का जप करने से ही साधना सफल होती है। अत: ॐ और बीजमन्त्रों सहित गायत्री मन्त्र इस प्रकार है–

ॐ भू: भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।

अर्थ–‘पृथ्वीलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक में व्याप्त उस श्रेष्ठ परमात्मा (सूर्यदेव) का हम ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को श्रेष्ठ कर्मों की ओर प्रेरित करे।’

प्रात:काल गायत्री मन्त्र का जप खड़े होकर तब तक करें जब तक सूर्य भगवान के दर्शन न हो जाएं। संध्याकाल में गायत्री का जप बैठकर तब तक करें जब तक तारे न दीख जाएं। गायत्री मन्त्र का एक हजार बार जाप सबसे उत्तम माना गया है।

गायत्री मन्त्र में चौबीस अक्षर हैं। ऋषियों ने इन अक्षरों में बीजरूप में विद्यमान उन शक्तियों को पहचाना जिन्हें चौबीस अवतार, चौबीस ऋषि, चौबीस शक्तियां तथा चौबीस सिद्धियां कहा जाता है। गायन्त्री मन्त्र के चौबीस अक्षरों के चौबीस देवता हैं। उनकी चौबीस चैतन्य शक्तियां हैं। गायत्री मन्त्र के चौबीस अक्षर २४ शक्ति बीज हैं। गायत्री मन्त्र की उपासना करने से उन २४ शक्तियों का लाभ और सिद्धियां मिलती हैं। उन शक्तियों के द्वारा क्या-क्या लाभ मिल सकते हैं, उनका वर्णन इस प्रकार हैं–

१. तत्–देवता–गणेश, सफलता शक्ति। फल–कठिन कामों में सफलता, विघ्नों का नाश, बुद्धि की वृद्धि।

२. स–देवता–नरसिंह, पराक्रम शक्ति। फल–पुरुषार्थ, पराक्रम, वीरता, शत्रुनाश, आतंक-आक्रमण से रक्षा।

३. वि–देवता–विष्णु, पालन शक्ति। फल–प्राणियों का पालन, आश्रितों की रक्षा, योग्यताओं की वृद्धि।

४. तु:–देवता–शिव, कल्याण शक्ति। फल–अनिष्ट का विनाश, कल्याण की वृद्धि, निश्चयता, आत्मपरायणता।

५. व–देवता–श्रीकृष्ण, योग शक्ति। फल–क्रियाशीलता, कर्मयोग, सौन्दर्य, सरसता, अनासक्ति, आत्मनिष्ठा।

६. रे–देवता–राधा, प्रेम शक्ति। फल–प्रेम-दृष्टि, द्वेषभाव की समाप्ति।

७. णि–देवता–लक्ष्मी, धन शक्ति। फल–धन, पद, यश और भोग्य पदार्थों की प्राप्ति।

८. यं–देवता–अग्नि, तेज शक्ति। फल–उष्णता, प्रकाश, शक्ति और सामर्थ्य की वृद्धि, प्रतिभाशाली और तेजस्वी होना।

९. भ–देवता–इन्द्र, रक्षा शक्ति। फल–रोग, हिंसक चोर, शत्रु, भूत-प्रेतादि के आक्रमणों से रक्षा।

१०. र्गो–देवता–सरस्वती, बुद्धि शक्ति। फल–मेधा की वृद्धि, बुद्धि में पवित्रता, दूरदर्शिता, चतुराई, विवेकशीलता।

११. दे–देवता–दुर्गा, दमन शक्ति। फल–विघ्नों पर विजय, दुष्टों का दमन, शत्रुओं का संहार।

१२. व–देवता–हनुमान, निष्ठा शक्ति। फल–कर्तव्यपरायणता, निष्ठावान, विश्वासी, निर्भयता एवं ब्रह्मचर्य-निष्ठा।

१३. स्य–देवता–पृथिवी, धारण शक्ति। फल–गम्भीरता, क्षमाशीलता, भार वहन करने की क्षमता, सहिष्णुता, दृढ़ता, धैर्य।

१४. धी–देवता–सूर्य, प्राण शक्ति। फल–आरोग्य-वृद्धि, दीर्घ जीवन, विकास, वृद्धि, उष्णता, विचारों का शोधन।

१५. म–देवता–श्रीराम, मर्यादा शक्ति। फल–तितिक्षा, कष्ट में विचलित न होना, मर्यादापालन, मैत्री, सौम्यता, संयम।

१६. हि–देवता–श्रीसीता, तप शक्ति। फल–निर्विकारता, पवित्रता, शील, मधुरता, नम्रता, सात्विकता।

१७. धि–देवता–चन्द्र, शान्ति शक्ति। फल–उद्विग्नता का नाश, काम, क्रोध, लोभ, मोह, चिन्ता का निवारण, निराशा के स्थान पर आशा का संचार।

१८. यो–देवता–यम, काल शक्ति। फल–मृत्यु से निर्भयता, समय का सदुपयोग, स्फूर्ति, जागरुकता।

१९. यो–देवता–ब्रह्मा, उत्पादक शक्ति। फल–संतानवृद्धि, उत्पादन शक्ति की वृद्धि।

२०. न:–देवता–वरुण, रस शक्ति। फल–भावुकता, सरलता, कला से प्रेम, दूसरों के लिए दयाभावना, कोमलता, प्रसन्नता, आर्द्रता, माधुर्य, सौन्दर्य।

२१. प्र–देवता–नारायण, आदर्श शक्ति। फल–महत्वकांक्षा-वृद्धि, दिव्य गुण-स्वभाव, उज्जवल चरित्र, पथ-प्रदर्शक कार्यशैली।

२२. चो–देवता–हयग्रीव, साहस शक्ति। फल–उत्साह, वीरता, निर्भयता, शूरता, विपदाओं से जूझने की शक्ति, पुरुषार्थ।

२३. द–देवता–हंस, विवेक शक्ति। फल–उज्जवल कीर्ति, आत्म-सन्तोष, दूरदर्शिता, सत्संगति, सत्-असत् का निर्णय लेने की क्षमता, उत्तम आहार-विहार।

२४. यात्–देवता–तुलसी, सेवा शक्ति। फल–लोकसेवा में रुचि, सत्यनिष्ठा, पातिव्रत्यनिष्ठा, आत्म-शान्ति, परदु:ख-निवारण।

गायत्री मन्त्र छोटा सा है, पर इतने थोड़े से अक्षरों में ही अनन्त ज्ञान का समुद्र भरा पड़ा है। महर्षि व्यास कहते है–जिस प्रकार पुष्पों का सार शहद, दूध का सार घृत है, उसी प्रकार समस्त वेदों का सार गायत्री मन्त्र है।

अथर्ववेद में वेदमाता गायत्री की स्तुति की गयी है, जिसमें उसे आयु, प्राण, शक्ति, पशु, कीर्ति, धन और ब्रह्मतेज प्रदान करने वाली कहा गया है।

गांधीजी के शब्दों में–‘गायत्री मन्त्र का निरन्तर जप रोगियों को अच्छा करने और आत्मा की उन्नति करने के लिए उपयोगी है। गायत्री मन्त्र का स्थिर चित्त और शान्त हृदय से किया हुआ जप आपत्तिकाल के संकटों को दूर करने का प्रभाव रखता है।’

रवीन्द्रनाथ टैगोर के शब्दों में–‘भारतवर्ष को जगाने वाला जो मन्त्र है, वह इतना सरल है कि एक श्वांस में उसका उच्चारण किया जा सकता है। वह है–गायत्री मन्त्र। उस पुनीत मन्त्र का अभ्यास करने में किसी प्रकार के तार्किक ऊहापोह, किसी प्रकार के मतभेद अथवा किसी प्रकार के बखेड़े की गुंजायश नहीं है।’

स्वामी रामकृष्ण परमहंस कहते हैं–‘इस छोटी-सी गायत्री की साधना करके देखो। गायत्री का जप करने से बड़ी-बड़ी सिद्धियां मिल जाती हैं। यह मन्त्र छोटा है पर इसकी शक्ति बड़ी भारी है।’

स्वामी विवेकानन्द का कथन है–‘परमात्मा से मांगने योग्य वस्तु सद्बुद्धि (अच्छी बुद्धि) है। गायत्री सद्बुद्धि का मन्त्र है। इसलिए इसे मन्त्रों का मुकुटमणि कहा है।’

स्वामी शिवानन्दजी कहते हैं–‘ब्रह्ममुहुर्त में गायत्री मन्त्र का जप करने से चित्त शुद्ध होता है और हृदय में निर्मलता आती है। शरीर निरोग रहता है, स्वभाव में नम्रता आती है, बुद्धि सूक्ष्म होने से दूरदर्शिता बढ़ती है और स्मरणशक्ति का विकास होता है। कठिन स्थितियों में गायत्री मन्त्र द्वारा दैवी सहायता मिलती है।’

गायत्री मन्त्र का दूसरा नाम ‘तारक मन्त्र’ भी है। तारक अर्थात् तैराकर पार निकाल देने वाला।

चाहते यदि अपना कल्याण,करो मां गायत्री का ध्यान।
करेंगी दूर सभी दु:ख व्याधि,हरण कर कठिन पाप अभिशाप।।
मुदित हो देंगी ज्ञान सुबुद्धि,कीर्ति वैभव सुख अडिग प्रताप।।
वेद मां की है शक्ति महान,सहज ही हर लेती है।

भारत एक आस्था प्रधान देश है. भारत में अनेकों ऐसे देवी-देवता के मंदिर हैं, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपने ईष्ट का दर्शन क...
07/09/2025

भारत एक आस्था प्रधान देश है. भारत में अनेकों ऐसे देवी-देवता के मंदिर हैं, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपने ईष्ट का दर्शन करने पहुंचते हैं. राजस्थान में भी ऐसे अनेकों मंदिर हैं, जहां भारत के कोने-कोने से श्रद्धालु आते हैं.

राजस्थान में खाटूश्याम जी(सीकर), गोविंद देव जी(जयपुर), शक्ति पीठ जीण माता (सीकर), सालासर बालाजी (चूरू) सहित अनेकों ऐसे मंदिर हैं, जिनकी ख्याति भारत में ही नहीं, बल्कि विदेश में भी है. आज हम आपको राजस्थान के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जिसके दरबार में भारत के हर कोने से श्रद्धालु आते हैं. यह राजस्थान का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसके कपाट चंद्र ग्रहण के दौरान भी बंद नहीं होते हैं.

मां जीण भवानी के कपाट रहते हैं हमेशा खुले
राजस्थान के हर प्रसिद्ध मंदिर के कपाट चंद्र ग्रहण के दौरान बंद रहते हैं. इसका कारण यह है कि चंद्र ग्रहण के दौरान नकारात्मक शक्तियां बढ़ जाती हैं और सकारात्मक शक्तियों का नाश हो जाता है. इसलिए मान्यता है कि अगर मंदिर के कपाट खुले रखेंगे, तो मंदिर में बुरी शक्तियों का वास होगा. लेकिन राजस्थान के सीकर जिले के शक्तिपीठ जीण माता मंदिर के कपाट हमेशा खुले रहते हैं. दावा किया जाता है कि इस मंदिर के कपाट कभी भी बंद नहीं हुए हैं. राजस्थान का यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां 24 घंटे भक्त मां जीण भवानी के दर्शन करते हैं.

हमारी संस्कृति कितनी अद्भुत और विशाल है ये पर्व -त्योहारों को गहनता से समझने पर पता चलता है। आज बासेड़ा (बसोड़ा ) है। इसे ...
15/03/2023

हमारी संस्कृति कितनी अद्भुत और विशाल है ये पर्व -त्योहारों को गहनता से समझने पर पता चलता है। आज बासेड़ा (बसोड़ा ) है। इसे मानने वालों के घर में आज चूल्हा नहीं जलेगा । आज खाये जाने वाला भोजन कल ही तैयार कर लिया गया है।
बासेड़ा असल में बासी से बना है। आज बासी भोजन अर्थात कल का बना ठंढा भोजन खाया जाएगा और शीतलता प्रदान करने वाली माता शीतला की पूजा होगी। ऐसी मान्यता है की माँ शीतला चेचक (महामारी ) की देवी हैं। चेचक होने पर शरीर में दाने निकलते हैं और पुरे बदन पर तेज़ खुजली होती है। चेचक की उस जलन और खुजली को शीतलता प्रदान करती हैं माता शीतला। मान्यता के अनुसार शीतला माता की पूजा से घर के सदस्य चेचक ,चर्मरोग जैसी जलनशील बीमारियों और महामारी से मुक्त रहते हैं। माता शीतला की पूजा के पश्चात पूजा का जल पुरे घर में छींटा जाता है। अमूमन पूजा में रोली का टीका लगाया जाता है जबकि माता शीतला की पूजा में मक्खन में मिली हल्दी का टीका लगाया जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखे तो हल्दी एक ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो हमारे शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ा कर हमें तमाम तरह के संक्रामक रोगों से बचाती है। इसके अलावा शीतला माता की पूजा में नीम के पत्तों को रखा जाता है। औषधीय रूप में नीम के गुणों को कौन नहीं जानता। औषधीय गुणों से भरी ये पूजा पद्यति माता शीतला के चिकित्सकीय औचित्य को स्थापित करती है।

पहले दिन बनाना और दूसरे दिन बासी भोजन खाना , तो घर की स्त्रियों के लिये ये एक चैलेंज सा होता है की आख़िर ऐसा क्या बनाया जाए की घर के सारे सदस्य दूसरे दिन उसे खा लें। मेरी दादी बासेड़ा में इतना स्वादिष्ट भोजन बनाया करती थी की हम पाँचो भाई -बहनों के जे़हन में बासेड़ा एक लज़ीज भोजन वाले उत्सव के रूप में अंकित है। दाल का शिरा (हलुवा ), केर -सांगरी की सब्जी , छमकी हुई मिर्च ,दही बड़े , बाजरे की रोटी , मिस्सी रोटी,गुलगुले के साथ ही हमें इंतजार रहता ख़ास तौर पर इस दिन बनायी जाने वाली बाजरे की राबड़ी का। बासी भोजन ख़ाने और ऊपर से राबड़ी के कई बाटके (बड़ा कटोरा ) गटकने के बाद ऐसी नींद आती है मानो दिमाग पर कोई नशा तारी हो गया हो।

अभी -अभी हम सब कोरोना जैसी महामारी से उबरे हैं। माँ शीतला सबको ऐसी महामारियों से बचा आरोग्य प्रदान करें।

माँ भगवती की आराधना के पावन पर्व 'शारदीय  #नवरात्रि' के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं।शक्ति की देवी मां दुर्गा सबके जीव...
26/09/2022

माँ भगवती की आराधना के पावन पर्व 'शारदीय #नवरात्रि' के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं।
शक्ति की देवी मां दुर्गा सबके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आएं
जय मां जगदम्बा!
जय मां भवानी
🙏🙏💐
#शारदीय_नवरात्रि #शुभ_नवरात्री #शैलपुत्री

जीवन में अनेक परिचित अपरिचित मनीषियों ने किसी न किसी रूप में हमारी अन्तर्निहित शक्तियों को जाग्रत कर हमें मानव बनने की य...
13/07/2022

जीवन में अनेक परिचित अपरिचित मनीषियों ने किसी न किसी रूप में हमारी अन्तर्निहित शक्तियों को जाग्रत कर हमें मानव बनने की यात्रा में हमारा कल्याण किया है। आज व्यास पूर्णिमा पर उन सभी गुरुजनों का चरण वंदन।
आप सभी को सपरिवार गुरु पूर्णिमा पर हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏

शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा की आराधना के महापर्व चैत्र नवरात्रि स्थापना व हिन्दू नववर्ष के शुभ अवसर पर समस्त देश एवं प्रदेश...
02/04/2022

शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा की आराधना के महापर्व चैत्र नवरात्रि स्थापना व हिन्दू नववर्ष के शुभ अवसर पर समस्त देश एवं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
इस पावन अवसर पर मैं माँ जीण भवानी दुर्गा से देश एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि, प्रगति एवं खुशहाली की कामना करता हूँ।

या  देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण  संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
09/05/2021

या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

https://youtu.be/x2RD1eCA1K4गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर भजन संध्या में मां दुर्गा की वंदना श्री जीण माता मंदिर भीडासर...
16/02/2021

https://youtu.be/x2RD1eCA1K4

गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर भजन संध्या में मां दुर्गा की वंदना श्री जीण माता मंदिर भीडासरी में

श्री जीण माता मंदिर भीडासरी

🌼🌻🌼🌻🌼🌻🌼🌻🌼🌻🌼🌻🌼॥ श्रीशारदाप्रार्थना श्रीशङ्कराचार्यविरचिता ॥नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुरवासिनि ।त्वामहं प्रार्थये नित्यं व...
16/02/2021

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॥ श्रीशारदाप्रार्थना श्रीशङ्कराचार्यविरचिता ॥

नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुरवासिनि ।
त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्यादानं च देहि मे ॥ १॥

या श्रद्धा धारणा मेधा वग्देवी विधिवल्लभा ।
भक्तजिह्वाग्रसदना शमादिगुणदायिनी ॥ २॥

नमामि यामिनीं नाथलेखालङ्कृतकुन्तलाम् ।
भवानीं भवसन्तापनिर्वापणसुधानदीम् ॥ ३॥

भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः ।
वेदवेदाङ्गवेदान्तविद्यास्थानेभ्य एव च ॥ ४॥

ब्रह्मस्वरूपा परमा ज्योतिरूपा सनातनी ।
सर्वविद्याधिदेवी या तस्यै वाण्यै नमो नमः ॥ ५॥

यया विना जगत्सर्वं शश्वज्जीवन्मृतं भवेत् ।
ज्ञानाधिदेवी या तस्यै सरस्वत्यै नमो नमः ॥ ६॥

यया विना जगत्सर्वं मूकमुन्मत्तवत्सदा ।
या देवी वागधिष्ठात्री तस्यै वाण्यै नमो नमः ॥ ७॥

॥ इति श्रीशारदाप्रार्थना श्रीशङ्कराचार्यविरचिता ॥

🌼🌻🌼🌻🌼🌻🌼🌻🌼🌻🌼🌻🌼
हार्दिक धन्यवाद मित्रों

*"सलाह" के सौ शब्दो से ज्यादा*          *"अनुभव" की एक "ठोकर",*       *इंसान को "मजबूत" बनाती है..*         *कुछ बातें "...
26/09/2020

*"सलाह" के सौ शब्दो से ज्यादा*
*"अनुभव" की एक "ठोकर",*
*इंसान को "मजबूत" बनाती है..*

*कुछ बातें "समझाने" पर नहीं, बल्की "खुद" पर "बीत" जाने पर ही "समझ" में आती है।

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