Official page of Shree Baba Ramdev Mandir, Berwa, Didwana, Rajasthan
Most Popular and Old Temple of Folk Deity Shri Baba Ramdev ji Situated in Berwa Village of Didwana District in Rajasthan. !!श्री रामदेव जी का संक्षिप्त जीवन परिचय...!!
समय-समय पर भारत की पवित्र धरती पर अनेक महात्माओं, वीरों, सत्पुरुषों व लोक देवताओं ने जन्म लिया । समय की आवश्यकतानुसार उन्होंने व्यक्तित्व, कार्यों व श
ौर्य के बल से समाज में व्याप्त विभिन्न कुरीतियों और बुराईयों से त्रस्त प्राणियों को इनसे मुक्ति दिलाकर जीने की सही राह दिखलाई । जब १५ वीं शताब्दी में भारत आपसी भेद- भाव, अत्याचार, वैर- द्वेष, सांप्रदायिक झगड़े,ऊँच-नीच और अनेक सामाजिक कुरीतियों से बुरी तरह त्रस्त हो गया था, तब भगवान द्वारकाधीश ने पश्चिमी राजस्थान के उन्डू-काशीर (पोकरण) के राजा अजमल जी के घर विक्रमी संवत १४०९ मिति भाद्रपद शुक्ला २(बीज) के दिन रामदेव जी के रूप में अवतार लेकर इनका न केवल विरोध किया बल्कि इन्हें समाप्त करने का सफल प्रयास भी किया । बाबा रामदेव जी ने अपना संपूर्ण जीवन दीन-दुखियों, लाचार गरीबों व असहायों की सेवा में लगा दिया । श्री रामदेव जी ने पश्चिमी राजस्थान को भैरव राक्षस के आतंक से मुक्ति दिलाकर लोगों में व्याप्त भय और डर को समाप्त किया । बाबा रामदेव जी का विवाह अमरकोट के राजा दलजी सोढा की पुत्री नेतल के साथ हुआ । श्री रामदेव जी ने जैसलमेर के पास रुनिचा नगर बसाया और वहां के राजा बनकर लोगों की सेवा में जुट गये । इसप्रकार बाबा रामदेवजी ने अपने जीवन-काल में अनेक परचे ( चमत्कार ) देते हुए ( जिनका वर्णन लोक- कथाओं और इतिहास में है ) समाधी लेने का निश्चय किया । विक्रमी संवत १४४२, भाद्रपद शुक्ला ग्यारस के दिन रूणिचा में बाबा रामदेव जी ने लोगो को आपसी सदभाव और भाईचारे से रहने और अच्छे कार्य करने का सन्देश देते हुए जीवित समाधी ले ली । श्री बाबा रामदेव जी की समाधी स्थल पर भव्य मंदिर है जिसका निर्माण बीकानेर के शासक गंगासिंह जी ने करवाया था । रुणिचा में हर साल लगने वाले मेले में लाखों की तादात में जुटी उनके भक्तों की भीड़ से उनकी महता व उनके प्रति जन- समुदाय की श्रध्दा का आंकलन आसानी से किया जा सकता है । बाबा रामदेवजी जहाँ हिन्दुओं के देव है तो मुसलमान भाई इन्हें रामसा पीर के नाम से पुकारते है।
|| जय बाबा की ॥ ॥ बाबो भली करे ॥