05/09/2025
teacher day to all
एक चिकनी मिट्टी का टुकड़ा "
एक चिकनी मिट्टी का टुकड़ा, छोटा सा, सड़क पे पड़ा।
कब से पड़ा नहीं मालूम, कहा पड़ा नहीं मालूम।
कभी किसी पहिए के नीचे आ जाता, कभी कोई बच्चा ठोकर मार जाता।
कभी बारिश होती तो नर्म हो जाता और धूप में फिर से कठोर हो जाता।
उसे अपने आप से कोई शिकायत नहीं थी, क्योंकि उसके पास कोई उम्मीद नहीं थी।
बस यूँ समझ लो के ना उसको कोई बड़ा दुःख था, और ना ही कोई ख़ास सुख था।
पर एक बात उसकी बहुत खास थी, की उसको अपनी औकात अच्छे से याद थी।
फिर एक दिन उसके जीवन में एक मोड़ आया, भाग्य से वो एक कुम्हार के पैर के नीचे आया।
कुम्हार ने उसे कुछ गौर से देखा, और फिर उठाकर सीधे अपने बोरे में फेंका।
घर ले जा पहले मारा पानी का छींटा, फिर मसला, गूंथा और खूब पीटा।
चक्के पे फिर उसे घुमाया, डाल भट्टी में खूब पकाया।
रोता रहा, सुबकता रहा, जलता रहा, सुलगता रहा।
पर अब उसका एक 'दाम' था, और 'दीपक' उसका नाम था।
अब एक मंदिर में वो रहता है, अपनी बाती के संग जलता है।
बस प्रभु के दर्शन करता है और दूर अँधेरा करता है।
क्या था वो और क्या बन गया उसकी समझ नहीं आये,
बस अपने हृदय में कुम्हार को यही बोलता जाये।
कि "गुरु गोबिंद दोउ खड़े, का के लागू पाय,
बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दियो मिलाये।"
🌼🍃 शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं🍃🌼