31/10/2016
दीप पर्व की शुभकामना व संदेश
प्राचीन काल में एक गुरुजी थे। उनको अपने उत्तराधिकारी का चयन करना था। उन्होंने अपने दो शिष्य चुने। उनकी योग्यता को परखने के लिए उन्होंने दोनों से कहा कि संध्या तक दोनों अपने अपने कमरों को किसी भी चीज़ से पूरी तरह भर दे एक भी कोना खाली न रहने दे। दोनों शिष्यों के पास पैसै तो थे नहीं इसलिए एक शिष्य ने अपने पूरे कमरे को पूरे शहर की गंदगी और कचरे से भर दिया और दूसरा शिष्य सुबह से अपने कमरे में ही ध्यानमग्न था। शाम को गुरुजी आए और दोनों को अपने अपने कमरे दिखाने को कहा। पहले शिष्य के कमरे में तो बदबू के कारण गुरुजी सांस भी नहीं ले सके। वहीं दूसरे शिष्य के कमरे के बीचोंबीच एक दीपक प्रज्जवलित था जिससे पूरा कमरा प्रकाश से भरा हुआ था। गुरुजी के पूछने पर उस शिष्य ने बताया कि जब उन्होंने उनको यह कार्य दिया उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था तो उसने ध्यान में उन्हीं से मार्गदर्शन देने की प्रार्थना की जिसके फलस्वरूप उसे चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश दिखाई दिया इसलिए उसने कमरे में दीपक जला दिया। इस कहानी के माध्यम से मैं यही संदेश देना चाहता हूं कि आप सब भी अपने मन की पूरी गंदगी निकाल कर माता लक्ष्मी के प्रकाश से अपने जीवन को भर दें और सदैव स्वस्थ सुखी व समॄद्ध रहें।
Raju Maharaj