Maa Dukhharni Dham

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एक ऐसा धाम जहां देवी शक्ति का पूर्ण अनुभव प्राप्त होता है । यहां से आज तक कोई खाली हाथ नहीं लौटा है। जो जैसी भावना ले कर आता है, जगदम्बा उसकी हर इच्छा पूर्ण करती है। भक्तो के दुःख को हरने वाली मां दुःख हरणी। यहां मां देवी काली के रूप में पुजी जाती है।

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दुःख हरणी मंदिर में भागवत कथा का आयोजन होने जा रहा है ।📖 भागवत कथा का महत्व और इससे मिलने वाले पुण्य 📿1. भागवत कथा का पर...
13/10/2025

दुःख हरणी मंदिर में भागवत कथा का आयोजन होने जा रहा है ।
📖 भागवत कथा का महत्व और इससे मिलने वाले पुण्य 📿
1. भागवत कथा का परिचय:
श्रीमद्भागवत महापुराण हिंदू धर्म के 18 पुराणों में सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल से लेकर उनके दिव्य लीला रूप तक का वर्णन है। यह ग्रंथ भक्ति, ज्ञान और वैराग्य — तीनों का संगम है।
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🌺 भागवत कथा का महत्व
1. भक्ति का सर्वोच्च मार्ग:
भागवत कथा सुनने और करवाने से मन में भगवान के प्रति अटूट प्रेम जागृत होता है।
2. पापों का नाश:
कहा गया है —
“श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम्”
अर्थात श्रीहरि के नाम, रूप और लीला का श्रवण करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।
3. शांति और आनंद की प्राप्ति:
जो व्यक्ति कथा श्रवण करता है, उसके मन से तनाव, दुःख और भय मिट जाते हैं।
4. परिवार में सुख-समृद्धि:
जहां भागवत कथा होती है, वहां सद्भाव, प्रेम, और समृद्धि स्वतः आती है।
5. मोक्ष का मार्ग:
कथा सुनने से जीव जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति पाता है और भगवान के धाम को प्राप्त होता है।
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🌼 भागवत कथा से प्राप्त होने वाला पुण्य
1. सात पीढ़ियों का उद्धार:
शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति भागवत कथा करवाता या सुनता है, उसकी सात पीढ़ियाँ स्वर्ग प्राप्त करती हैं।
2. गंगा स्नान के बराबर फल:
कथा का प्रत्येक दिवस गंगा स्नान और यज्ञ के समान पुण्य देता है।
3. कष्टों से मुक्ति:
शारीरिक, मानसिक या पारिवारिक सभी प्रकार के कष्ट भागवत श्रवण से दूर होते हैं।
4. जीवन में दिव्यता का संचार:
कथा के प्रभाव से मनुष्य के जीवन में सद्गुण, दया, प्रेम और विनम्रता का विकास होता है।
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🌺 भागवत कथा के नगर भ्रमण में कलश धारण करने का महत्व और पुण्य 🌺
भागवत कथा आरंभ से पहले कलश यात्रा या नगर भ्रमण एक अत्यंत शुभ परंपरा मानी जाती है। इसमें माता-बहनें सिर पर कलश लेकर पूरे गाँव या नगर में कथा स्थल तक जाती हैं। यह यात्रा केवल एक शोभायात्रा नहीं, बल्कि भक्ति, श्रद्धा और आस्था की प्रतीक है।
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🌸 कलश धारण करने का धार्मिक अर्थ
1. कलश में देवताओं का वास होता है:
शास्त्रों में कहा गया है —
“कलशो वै विष्णु: स्थाणुः”
अर्थात कलश में स्वयं भगवान विष्णु और अन्य सभी देवी-देवता निवास करते हैं।
2. कलश धारण करने वाली माता-बहनें देवताओं की वाहक बनती हैं:
जब वे कलश सिर पर रखती हैं, तो वे स्वयं देवी स्वरूपा बन जाती हैं।
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🌺 कलश यात्रा से मिलने वाले पुण्य
1. सात जन्मों के पापों से मुक्ति:
कलश धारण कर कथा स्थल तक जाने से व्यक्ति के अनेक जन्मों के पाप नष्ट होते हैं।
2. घर में सुख-समृद्धि का वास:
ऐसी स्त्रियों के घर में श्रीलक्ष्मी का स्थायी निवास होता है।
3. संतान सुख और कुल कल्याण:
जो माता कलश यात्रा में सम्मिलित होती हैं, उन्हें संतान सुख, आरोग्य और कुल की उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
4. भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा:
भगवान स्वयं ऐसी भक्तिनों के सिर पर अदृश्य रूप से हाथ रखकर उन्हें आशीर्वाद और संरक्षण देते हैं।
5. मोक्ष और पुण्य का अर्जन:
कलश यात्रा में भाग लेने से यज्ञ, तीर्थ और दान के समान पुण्य प्राप्त होता है।
इसलिए दुःख हरणी धाम में होने वाले भागवत सप्ताह के अंतर्गत प्रथम दिन कलश यात्रा मे माता बहन भाग ले और पुण्य के भागी बने।
कलश लेने के लिए मंदिर में संपर्क करें ।
📿 “नाम में है शक्ति, कथा में है भक्ति”



























25/09/2025

Maa

25/09/2025

Address

East Bhagatdih, Jharia
Dhanbad
828111

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