Khanqah E Ismailiya

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خانقاہ اسماعیلیہ، دھنباد، جھارکھنڈ۔
روحانیت، امن اور انسانیت کی خدمت کا مرکز۔
Hindi:
खानकाह ए इस्मालिया, धनबाद, झारखंड।
रुहानी सुकून और सूफी तालीम का केंद्र।

13/09/2026

हज़रत मुजद्दिद अल्फ़-ए-सानी रहमतुल्लाहि अलैहि ने यह शेर अपने मकतूब नम्बर 170 में बतौर-ए-इस्तिशहाद नक़्ल फ़रमाया है____________________ 👇

ہر کہ عاشق شد اگرچہ نازنینِ عالم است
ناز کی راست آید بار می باید کشید

"हर कि आशिक़ शुद अगरचे नाज़नीन-ए-आलम अस्त
नाज़ की रास्त आयद, बार मी बायद कशीद,,

यानी,

जो शख़्स आशिक़ हो गया, अगरचे वह दुनिया का नाज़नीन और नाज़-ओ-नेमत में पला हुआ ही क्यों न हो, इश्क़ की राह में नाज़ और आराम कहाँ चल सकता है; उसे इश्क़ का बोझ उठाना और उसकी मशक़्क़त बर्दाश्त करनी पड़ेगी_____




13/09/2026
13/09/2026

सूरत-ए-इंसान में जलवा-ए-रहमान

​महबूब वह राज़ है जो बशर (इंसान) बनकर आया है,

ताकि मोहीब (प्रेमी) समझ सके कि ख़ुदा कैसा होता है।

​जब ईश्वर की असीम दया, करुणा और बेमिसाल सुंदरता किसी इंसानी रूप में ढलकर सामने आती है, तभी एक सच्चे प्रेमी को उस परवरदिगार की अज़मत और मोहब्बत का सही अहसास होता है। महबूब दरअसल उस मालिक के नूर का एक आईना है।

​मिनजानिब:
फ़क़ीर मोहम्मद इरशाद क़ादरी नूरांनी रूहानी
ख़ानक़ाह-ए-इस्माइलिया
धनबाद, झारखंड

​

तस्वीर में दिखाई दे रही टोपी हज़रत शाह कमाल कादरी कैथली (रहमतुल्लाह अलैह) का कुलाह मुबारक (सूफी संतों द्वारा पहनी जाने व...
11/09/2026

तस्वीर में दिखाई दे रही टोपी हज़रत शाह कमाल कादरी कैथली (रहमतुल्लाह अलैह) का कुलाह मुबारक (सूफी संतों द्वारा पहनी जाने वाली विशेष टोपी या साफा) है।
तस्वीर के निचले हिस्से में उर्दू में लिखा है:
"क़ुलाह मुबारक हज़रत शाह कमाल क़ादरी कैथली (र०)"

मुख्य बातें:
कुलाह मुबारक: यह सूफी परंपरा में एक पवित्र टोपी होती है, जिसे तबर्रुक (बरकत की चीज़) माना जाता है। इस पर अरबी और फ़ारसी भाषा में अल्लाह के नाम, दुआएं और पवित्र आयात (कैलिग्राफी) लिखी हुई हैं।

हज़रत शाह कमाल कादरी कैथली: ये कादरिया सिलसिले के एक बहुत ही प्रसिद्ध और महान सूफी संत थे।

स्थान: इनका मज़ार/दरगाह हरियाणा के कैथल (Kaithal) शहर में स्थित है, जहाँ हर साल इनका उर्स (वार्षिक उत्सव) बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
यह टोपी उनके रूहानी और आध्यात्मिक प्रतीक के रूप में बहुत सम्मानित मानी जाती है।

या अली मदद | या गौस-उल-आज़म

आस्ताना-ए-आलिया खानकाह-ए-इस्माइलिया की ओर से आप सभी अकीदतमंदों को दिली मुबारकबाद और रूहानी दुआएं।
अल्लाह तआला अपने प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और औलिया-ए-किराम के सदके में हम सबकी जायज़ तमन्नाओं को पूरा फरमाए, बीमारों को शिफा-ए-कामेला अता करे, और हमारे घरों में बरकत व अमन-ओ-अमान कायम रखे।
अपनी दुआओं में ख़ास तौर पर याद रखें।

मिनजानिब:
फ़कीर मोहम्मद इरशाद कादरी नूरानी रूहानी
खानकाह-ए-इस्माइलिया
📍 धनबाद, झारखंड

Peer E Tarikat Haqeeqat Wa Marifat Hazrat Shah Abdul Jabbar Noorani Roohani Rehmatullah Aleih, Dhanbad, Jharkhand
11/09/2026

Peer E Tarikat Haqeeqat Wa Marifat Hazrat Shah Abdul Jabbar Noorani Roohani Rehmatullah Aleih, Dhanbad, Jharkhand

08/09/2026

✨ सिलसिला-ए-इस्माइलिया रहमानिया ✨
खानक़ाह-ए-इस्माइलिया, धनबाद, झारखंड

🌺 तज़किरा-ए-औलिया: हज़रत सय्यद शरफुद्दीन क़त्ताल क़ादरी (रहमतुल्लाह अलैह) 🌺
सुब्हानअल्लाह! आइए आज सिलसिला-ए-आलिया के अज़ीम बुज़ुर्ग और क़ादरी चमन के महके हुए फूल के बारे में जानते हैं:

📌 नाम ओ नसब:

हज़रत सय्यद शरफुद्दीन क़त्ताल क़ादरी (रहमतुल्लाह अलैह)

🌙 विलादत-ए-बा-साअदत:

21 रमज़ान-उल-मुबारक 620 हिजरी को बुख़ारा शरीफ़ की पाक ज़मीन पर आपकी विलादत हुई।

📜 ख़िलाफ़त ओ बैअत:

आप हज़रत सय्यद अब्दुल रज़्ज़ाक़ क़ादरी (रहमतुल्लाह अलैह) के ख़लीफ़ा हैं—जो हुज़ूर ग़ौस-उल-आज़म शेख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी (रज़िअल्लाहु अन्हु) के फ़रज़ंद-ए-अरजमंद (साहिबज़ादे) हैं।

👑 पीर ओ मुर्शिद:
आप हज़रत सय्यद अब्दुल वहाब क़ादरी असफ़ानी (रहमतुल्लाह अलैह) के पीर ओ मुर्शिद हैं।

🥀 विसाल-ए-बा-कमाल:

16 शाबान-उल-मुअज़्‍ज़म 711 हिजरी को आप इस दार-ए-फ़ानी से पर्दा फ़र्मा गए।

🕌 मज़ार शरीफ़:
आपका मज़ार-ए-अक़दस बग़दाद शरीफ़ (इराक़) में ज़ियारतगाह-ए-ख़ास ओ आम है।

👑 सिलसिला-ए-इस्माइलिया रहमानिया के मशहूर ओ मारूफ़ बुज़ुर्गान-ए-दीन:

• हुज़ूर ग़ौस-उल-आज़म शेख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी (र.अ.) — सिलसिला-ए-क़ादरिया के बानी व सरचश्मा

• हज़रत सय्यद अब्दुल रज़्ज़ाक़ क़ादरी (र.अ.) — फ़रज़ंद-ए-ग़ौस-उल-आज़म

• हज़रत सय्यद शरफुद्दीन क़त्ताल क़ादरी (र.अ.) — अज़ीम क़ादरी बुज़ुर्ग

• बुज़ुर्गान-ए-खानक़ाह-ए-इस्माइलिया रहमानिया — जिनसे यह फ़ैज़ ओ बरकत आस्ताना-ए-इस्माइलिया धनबाद, झारखंड तक पहुँच रहा है।
🤲 दुआ:
अल्लाह तआला इन बुज़ुर्गों के फ़ैज़ से हम सब को मालामाल फर्माए और उनके नक़्श-ए-क़दम पर चलने की तौफ़ीक़ अता फर्माए।
आमीन या रब्बुल आलमीन 🤲

06/09/2026

135wa Urs Mubarak, 4th/5th September 2026
Qutub ul Waqt Hazrat Shah Fazle Rahma Rahmatullah Aleih, Gunj Muradabadi, UP.

Markad E Noorani, Owais E Dauran, Gaus E Zama, Hazrat Maulana Fazle Rehma Ganj Muradabadi (rda).
04/09/2026

Markad E Noorani, Owais E Dauran, Gaus E Zama, Hazrat Maulana Fazle Rehma Ganj Muradabadi (rda).

हज़रत मख़दूम शाह फुजैल कादरी (रह.) — सिन्ध के महान सूफी संत सिन्ध (पाकिस्तान) की सरज़मीन हमेशा से औलिया-ए-किराम और सूफिय...
03/09/2026

हज़रत मख़दूम शाह फुजैल कादरी (रह.) — सिन्ध के महान सूफी संत
सिन्ध (पाकिस्तान) की सरज़मीन हमेशा से औलिया-ए-किराम और सूफियों का मस्कन रही है। 16वीं शताब्दी के महान सूफी संत हज़रत मख़दूम शाह फुजैल कादरी (रह.) का नाम सिन्ध में इस्लाम और रूहानियत के चिराग को रोशन करने वालों में बड़े अदब के साथ लिया जाता है।
अल्लाह के इस वली का ताल्लुक सिलसिला इस्माइलिया रहमानिया से भी रहा है, और आप इस सिलसिले के एक मशहूर-वो-मारूफ़ बुजुर्ग गुज़रे हैं।

📌 प्रमुख आध्यात्मिक जानकारी:

🔹 रूहानी सिलसिला: आप कादिरिया संप्रदाय (Qaudriya Order) से ताल्लुक रखते थे और हज़रत शाह गदा रहमान सानी कादरी (रह.) के मुरीद व ख़लीफ़ा (उत्तराधिकारी) थे।

🔹 विसाल (निधन): ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक, आपका इंतकाल 17 मुहर्रम, 979 हिजरी (लगभग जून 1571 ईस्वी) को हुआ था।

🔹 अहमियत: सिन्ध और आसपास के इलाकों में कादिरिया सिलसिले की तालीमात और पैग़ाम-ए-अम्न को फैलाने में आपका योगदान बेमिसाल माना जाता है।

🔹 मशहूर मुरीद: भारत के हरियाणा स्थित कैथल शरीफ के महान कादरी सूफी संत हज़रत शाह कमाल कादरी कैथली (रह.) भी आपके प्रमुख मुरीदों और आध्यात्मिक संतानों में शामिल हैं।

🕌 पवित्र मज़ार (दरगाह):
आपका आस्ताना-ए-आलिया ठट्ठा (Thatta), सिन्ध (पाकिस्तान) में स्थित है। यह मक़ाम ऐतिहासिक 'मकली कब्रिस्तान' (Makli Necropolis) का हिस्सा है, जो दुनिया के सबसे बड़े कब्रिस्तानों में से एक है और UNESCO (यूनेस्को) की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
वहीं आपके मुरीद हज़रत शाह कमाल कादरी (रह.) की मुबारक दरगाह कैथल, हरियाणा (भारत) में स्थित है, जो कौमी एकता और रूहानियत का केंद्र है।

🤲 अल्लाह पाक से दुआ है कि हमें इन बुज़ुर्गान-ए-दीन के बताए हुए सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। (आमीन)

01/09/2026

आपको लाखों करोड़ों दरूद सलाम

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