Khanqah E Ismailiya

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خانقاہ اسماعیلیہ، دھنباد، جھارکھنڈ۔
روحانیت، امن اور انسانیت کی خدمت کا مرکز۔
Hindi:
खानकाह ए इस्मालिया, धनबाद, झारखंड।
रुहानी सुकून और सूफी तालीम का केंद्र।

18/08/2026
14/08/2026
Silsila Ismailiya Rahmaniya Madariya
10/08/2026

Silsila Ismailiya Rahmaniya Madariya

06/08/2026

دل کو بیدار کرنے والی ایک رُوحانی تحریر... ⚖️✨(ख़ानक़ाह-ए-इस्माइलिया नूरानी रूहानी, धनबाद, झारखंड)
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

मशहूर सूफ़ी बुज़ुर्ग फ़रमाते हैं: "क़ब्रस्तान में सोए हुए तमाम लोग कल सुबह एक बहुत ही ज़रूरी काम करने वाले थे... लेकिन मौत ने उन्हें मोहलत नहीं दी।"

🥀आज हम अपनी ज़िन्दगी की मसरूफ़ियात (व्यस्तताओं) में इस क़दर खो गए हैं कि ऐसा लगता है जैसे हमें कभी इस मिट्टी के नीचे जाना ही नहीं। हम आलीशान मकान बना रहे हैं, धन-दौलत जोड़ रहे हैं, लेकिन उस 'आख़िरी सफ़र' की कोई तैयारी नहीं, जहाँ हमारे साथ सिर्फ़ हमारा अमाल (कर्म) जाएगा।

💡 ज़रा ठहरिए, हमारे सलासिल (सिलसिलों) की पावन शिक्षाओं से इबरत हासिल कीजिए:हमारी ख़ानक़ाह जिन पवित्र सिलसिलों का गुलदस्ता है, उनकी हर एक कड़ी हमें इस नश्वर दुनिया की हक़ीक़त और रूहानियत का पाठ पढ़ाती है:

1️⃣ सिलसिला-ए-नक़्शबंदिया मुजद्दिदी (ग़फ़लत से बेदारी): नक़्शबंदी सिलसिले का पहला नियम है कि दुनिया के शोर में भी आपका दिल अल्लाह की याद में रहे। जो नमाज़ आज हम दुनिया के कामों के लिए छोड़ रहे हैं, कल वही हमारी रूहानी बर्बादी का कारण बनेगी। बिना जुबान हिलाए अपने दिल की हर धड़कन को 'ज़िक्र-ए-ख़फ़ी' से ज़िंदा कीजिए, इससे पहले कि धड़कनें हमेशा के लिए थम जाएं।

2️⃣ सिलसिला-ए-आलिया क़ादिरिया (लुक़्मा-ए-हलाल): हुज़ूर ग़ौस-ए-आज़म की सबसे बड़ी तालीम लुक़्मा-ए-हलाल (हलाल कमाई) है। आज हम पैसे की अंधी दौड़ में यह भूल गए हैं कि पेट में हराम का एक निवाला भी चला जाए, तो इबादतों का नूर छिन जाता है और दुआएँ बेअसर हो जाती हैं। आज ही अपनी कमाई को पाक कीजिए।

3️⃣ सिलसिला-ए-आलिया चिश्तिया (दिलों की नफ़रत का ख़ात्मा): चिश्ती रंग सिखाता है—"ख़ल्क़ से मोहब्बत और ख़ालिक़ की इबादत"। हम हफ़्तों-महीनों अपने भाइयों से बात नहीं करते, दिलों में नफ़रत और हसद (जलन) पाले बैठे हैं। जिस दिल में किसी इंसान के लिए मैल हो, वहाँ अल्लाह का नूर कभी दाख़िल नहीं हो सकता।

4️⃣ सिलसिला-ए-सुहरवर्दिया (नफ़्स का अनुशासन): सुहरवर्दी तरीक़ा हमें अपने नफ़्स (अहंकार, घमंड) को मारना सिखाता है। पद, प्रतिष्ठा और हुस्न का घमंड मिट्टी में मिल जाना है। सादगी अपनाएं और अपने भीतर आज़ी (विनम्रता) पैदा करें।

5️⃣ सिलसिला-ए-मदारिया व क़लंदरिया (दुनिया से बे-नियाज़ी): शाह मदार और बू अली शाह क़लंदर का फ़ैज़ इंसान को दुनियावी ख़ौफ़ और लालच से आज़ाद (बे-नियाज़) कर देता है। जब मौत सिर पर खड़ी है, तो फिर इस फानी (नष्ट होने वाली) दुनिया की चीज़ों से इतना मोह क्यों?

⏳ वक़्त बहुत कम है... आज ही सच्ची तौबा कीजिए!

हज़रत मुजद्दिद अलिफ़ थानी, हज़रत शाह फ़ज़ल-ए-रहमान گنج مرادآبادی से होते हुए हमारे पीर-ओ-मुर्शिद आरिफ़-ए-हक़ हज़रत शाह अब्दुल जब्बार नूरानी रूहानी (रहमतुल्लाह अलैह) तक आए इस पाक शजरे का सच्चा मुरीद वही है जो अपनी आख़िरत की फ़िक्र करे।अगर आज आपकी आँखें खुली हैं और साँसें चल रही हैं, तो अपने पिछले गुनाहों पर रोकर सच्ची तौबा कीजिए और शरीयत-ए-मुस्तफ़ा ﷺ पर सख़्ती से अमल शुरू कीजिए।अल्लाह तआला हमें दुनिया के धोखे से बचाए, इबरत हासिल करने की तौफ़ीक़ दे और हमारे ईमान की हिफ़ाज़त फ़रमाए। आमीन! 🤲

📍 ख़ानक़ाह-ए-इस्माइलिया नूरानी रूहानी, धनबाद (झारखंड)✨ रूहानी तरबियत और आत्म-शुद्धि का केंद्र ✨

✨ 786 / 92 ✨📜 SHAJRAH-E-TAIYYABA 📜                                                 أَصْلُهَا ثَابِتٌ وَفَرْعُهَا فِي الس...
05/08/2026

✨ 786 / 92 ✨
📜 SHAJRAH-E-TAIYYABA 📜

أَصْلُهَا ثَابِتٌ وَفَرْعُهَا فِي السَّمَاءِ

“Asluha saabitun wa far’uha fis-samaa”
(Aisi paak zaat jiski jadein mazboot hain aur shakahein aasmaan tak)

🌟 SILSILA-TUZ-ZAHAB 🌟

🌹 Shajrah Aaliya:
• Quadriya
• Soharwardiya
• Naqshbandiya
• Chishtiya

🤲 Durood-e-Pak:
ALLAHUMMA SALLE ALA SAYYEDINA MOHAMMADIN WA AALEHI WA SAHBEHI WASALLAM ❤️

26/07/2026

✨ जन्नत की चार नहरें ✨

​क़ुरआन मजीद (सूरह मुहम्मद, आयत 15) में अल्लाह ताआला ने जन्नत की चार ऐसी नहरों का ज़िक्र फ़रमाया है, जो कभी ख़त्म नहीं होंगी और न ही उनका ज़ायक़ा कभी ख़राब होगा:

​1️⃣ पाक और साफ़ पानी की नहर: ऐसा पानी जिसमें कभी बदबू नहीं आएगी और न ही उसका स्वाद बदलेगा।

2️⃣ दूध की नहर: ऐसा दूध जो कभी फटेगा नहीं और जिसका ज़ायक़ा हमेशा तरोताज़ा रहेगा।

3️⃣ शराबे तहूर की नहर: जन्नत की वह पाकीज़ा शराब जो पीने वालों के लिए बेहद लज़ीज़ होगी।

4️⃣ ख़ालिस और साफ़ शहद की नहर: बिल्कुल साफ़ और बेहतरीन शहद।

​अल्लाह ताआला हम सभी को जन्नत की इन अज़ीम नेमतों से नवाज़े और सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे।

​🤲 आमीन या रब्बुल आलमीन!

​मिनजानिब:

फ़क़ीर मोहम्मद इरशाद नूरानी रूहानी

ख़ानक़ाह-ए-इस्माईलिया, धनबाद, झारखंड

26/07/2026

दिल-ए-बेक़रार रा क़रारे नीस्त
जुज़ दर हरीम-ए ला इलाहा इल्लल्लाह

जलालुद्दीन रूमी फ़रमाते हैं:
"हर कसी को दूर मांद अज़ अस्ल-ए-ख़्वीश
बाज़ जूयद रोज़गार-ए-वस्ल-ए-ख़्वीश"
दिल की बे-क़रारी इसलिए है कि वो अपने अस्ल यानी हक़ से जुदा है।
जब तक "ला इलाहा इल्लल्लाह" में दाख़िल न हो,
वो बेचैन ही रहता है।

बे-क़रारी = फ़िराक़ (जुदाई)
ला इलाहा इल्लल्लाह = विसाल (मिलाप)

"अल-क़ल्बु ला यसअ ग़ैरुल्लाह"
जब दिल से ग़ैर निकलता है, तभी क़रार आता है।
"दिल अगर बे-ख़बर अज़ इश्क़ बूद, मुर्दा बूद"
أَلَا بِذِكْرِ اللَّهِ تَطْمَئِنُّ الْقُلُوبُ
"सुनो! अल्लाह के ज़िक्र ही से दिलों को सुकून मिलता है।"
"ये ज़िक्र-ए-नीम शबी, ये मुराक़बे, ये सुजूद
तेरी ख़ुदी के निगहबां नहीं तो कुछ भी नहीं"
"ला इलाहा इल्लल्लाह" अगर दिल में उतर जाए:
तो इंसान की ख़ुदी भी मज़बूत, और दिल भी मुतमइन।
तमाम सूफ़ियों की आवाज़ एक है:
दिल को क़रार कहीं नहीं मिलता
सिवाए "ला इलाहा इल्लल्लाह" के दायरे में।
न काबा न बुतख़ाना, न दैर-ओ-हरम में है
जो चैन है दिल को, वो बस ला इलाहा इल्लल्लाह में है 🤍

मिंजानिब:
फ़क़ीर मोहम्मद इरशाद नूरानी रूहानी
ख़ानक़ाह-ए-इस्माईलीया,
धनबाद, झारखंड

Address

Khanqah E Ismailiya, Rahmatgunj
Dhanbad
828130

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