अनंत सनातन

अनंत सनातन Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from अनंत सनातन, Religious Center, Dhanbad.

तपस्या जब तप कर दिव्यमान होती है,
कलम से फिर जग को दिव्यज्ञान देती है।।
खोलते हैं शिव शंकर शम्भू भी त्रिनेत्र तब,
जब वाणी में साधना विराजमान होती है।

-श्री ऋषभ देव
हर हर महादेव 🔱

31/12/2025
 #जयश्रीरराम 🕉❣️🙏🏻💫
31/12/2025

#जयश्रीरराम 🕉❣️🙏🏻💫

🙏🏻
24/12/2025

🙏🏻

इस लड़की की तस्वीरें अपने आप में इतनी प्रभावशाली हैं कि दर्जनों मोटिवेशनल स्पीकर इनकी बराबरी नहीं कर सकते। ओलम्पिक में पद...
15/09/2024

इस लड़की की तस्वीरें अपने आप में इतनी प्रभावशाली हैं कि दर्जनों मोटिवेशनल स्पीकर इनकी बराबरी नहीं कर सकते। ओलम्पिक में पदक जीतना बाद की बात है, पर एक लड़की जिसके दोनों हाथ नहीं है, उसका तीरंदाजी के बारे में सोच लेना ही अद्भुत है।
मैंने दर्जनों बार देखा उसका वीडियो। उसका धैर्य, उसका आत्मविश्वास, उसकी एकाग्रता! यह अद्भुत ही है। मात्र सत्रह वर्ष की आयु में पैरों से तीर चला कर सटीक लक्ष्य भेदने वाली शीतल देवी आदर्श है अपनी पीढ़ी के लिए। इस लड़की का ओलंपिक ब्रॉन्ज मैडल बहुत बड़ा है, बहुत ही बड़ा।
हमारे देश में किसी भी व्यक्ति की शारीरिक अक्षमता मजाक बनती रही है, और यह मजाक इतना सामान्य हो जाता है कि लोग इसे बुरा तक नहीं मानते। हम देखते रहे हैं, किसी की आंखें छोटी बड़ी हो जाँय तो उसे अन्हरा, कनडेढ़ा, डेढ़-लाइट, चसमल्ली, और जाने क्या क्या कहने लगते हैं। इस तरह उस व्यक्ति का आत्मविश्वास इतना गिर जाता है कि वह कुछ बेहतर करने की सोच भी नहीं पाता। ऐसी दशा में 95% लोग जीवन को किसी तरह काट लेने की सोचते हैं।
यह सामाजिक भेदभाव इतना अधिक है कि वह अधिकांश दिव्यंगों को भिखमंगा बना देता है। आप देखते होंगे चौक-चौराहे पर, मेला-बाजार में, तीर्थों में, नदी के घाट पर दिव्यांगों को भीख मांगते। यह उनका दोष नहीं है, समाज उन्हें यह भरोसा दे ही नहीं पाता कि वे कुछ बेहतर भी कर सकते हैं।
ऐसे में एक लड़की जिसके दोनों हाथ नहीं है, उसने ओलंपिक के पदक मंच तक पहुँचने के लिए कितना संघर्ष किया होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उसका तीरंदाजी करने की सोच लेना और उस पथ पर आगे बढ़ जाना बहुत ही कठिन रहा होगा। न केवल उसके लिए, बल्कि उसके माता-पिता और पूरे परिवार के लिए। ऐसे खिलाड़ियों का परिवार भी नमन के योग्य है।
मेरे हिसाब से वह लड़की उसी दिन से विजेता है, जिस दिन उसने अपने पैरों से धनुष उठाना सीख लिया था। ओलंपिक का पदक तो उसकी बड़ी यात्रा का एक सुखद पड़ाव भर है।

सर्वेश तिवारी श्रीमुख
गोपालगंज, बिहार।

12/09/2024

I gained 118 followers, created 53 posts and received 405 reactions in the past 90 days! Thank you all for your continued support. I could not have done it without you. 🙏🤗🎉

क्या होती है महादशा और अन्तरदशा?महादशा और अन्तर्दशा भारतीय ज्योतिष (वेदिक एस्ट्रोलॉजी) के महत्वपूर्ण घटक हैं, जो किसी व्...
09/09/2024

क्या होती है महादशा और अन्तरदशा?

महादशा और अन्तर्दशा भारतीय ज्योतिष (वेदिक एस्ट्रोलॉजी) के महत्वपूर्ण घटक हैं, जो किसी व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं को निर्धारित करने और पूर्वानुमान करने में सहायक होते हैं। ये दशाएं किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के आधार पर तय होती हैं और उनके जीवन में विभिन्न समयों पर होने वाली घटनाओं और प्रभावों को दर्शाती हैं।

महादशा का परिचय

महादशा किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों के द्वारा दी जाने वाली एक विस्तृत अवधि होती है, जो व्यक्ति के जीवन पर गहरे प्रभाव डालती है। भारतीय ज्योतिष में नौ ग्रह माने गए हैं: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु। प्रत्येक ग्रह के प्रभाव के अनुसार एक महादशा होती है, जिसकी अवधि अलग-अलग होती है। महादशा का क्रम और अवधि, किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के अनुसार निर्धारित होती है।

महादशा का कार्य

महादशा यह निर्धारित करती है कि एक निश्चित समय अवधि में किस ग्रह का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर प्रमुख रहेगा। महादशा के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे कि स्वास्थ्य, धन, रिश्ते, करियर, शिक्षा आदि पर प्रभाव पड़ता है।

महादशा की अवधि

हर ग्रह की महादशा की अवधि अलग-अलग होती है, और ये निम्नलिखित हैं:

• सूर्य महादशा: 6 वर्ष

• चंद्र महादशा: 10 वर्ष

• मंगल महादशा: 7 वर्ष

• राहु महादशा: 18 वर्ष

• गुरु महादशा: 16 वर्ष

• शनि महादशा: 19 वर्ष

• बुध महादशा: 17 वर्ष

• केतु महादशा: 7 वर्ष

• शुक्र महादशा: 20 वर्ष

महादशा का प्रारंभ कैसे होता है?

महादशा का प्रारंभ व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्रमा के नक्षत्र पर निर्भर करता है। जिस नक्षत्र में चंद्रमा स्थित होता है, वह उस नक्षत्र के स्वामी ग्रह की महादशा से प्रारंभ होती है। उदाहरण के लिए, यदि व्यक्ति की जन्म के समय चंद्रमा कृतिका नक्षत्र में है, तो उसकी सूर्य महादशा से शुरुआत होगी, क्योंकि कृतिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य है।

अन्तर्दशा का परिचय

अन्तर्दशा महादशा के भीतर एक छोटी अवधि होती है, जो यह दर्शाती है कि महादशा के दौरान कौन से ग्रह का प्रभाव मुख्य रहेगा। किसी व्यक्ति के जीवन में घटने वाली सूक्ष्म घटनाओं को समझने के लिए अन्तर्दशा का अध्ययन किया जाता है।

अन्तर्दशा का कार्य

महादशा में जिस ग्रह की महादशा चल रही होती है, उस महादशा के भीतर अलग-अलग ग्रहों की अन्तर्दशाएं होती हैं। अन्तर्दशा यह निर्धारित करती है कि महादशा के किस हिस्से में कौन सा ग्रह सक्रिय रहेगा और उसका प्रभाव कैसा होगा। यह महादशा के ग्रह के साथ मिलकर व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार के प्रभाव डाल सकती है।

अन्तर्दशा की गणना

अन्तर्दशा की अवधि महादशा के स्वामी ग्रह की अवधि और शक्ति पर निर्भर करती है। सामान्यतः, प्रत्येक महादशा के ग्रह के अन्तर्गत उसी ग्रह के क्रम में अन्य ग्रहों की अन्तर्दशाएं होती हैं। उदाहरण के लिए, यदि सूर्य की महादशा चल रही है, तो उसके भीतर सूर्य की अन्तर्दशा पहले आएगी, उसके बाद चंद्रमा, मंगल, बुध आदि की अन्तर्दशाएं आएंगी।

प्रत्येक ग्रह की अन्तर्दशा का प्रभाव उस ग्रह के गुण, स्वभाव, और उसकी स्थिति पर निर्भर करता है।

महादशा-अन्तर्दशा का जीवन पर प्रभाव

स्वास्थ्य पर प्रभाव

महादशा और अन्तर्दशा व्यक्ति के स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती हैं। किसी व्यक्ति की महादशा और अन्तर्दशा यह निर्धारित करती हैं कि उसके स्वास्थ्य में सुधार होगा या उसमें गिरावट आएगी। उदाहरण के लिए, शनि की महादशा या मंगल की महादशा में स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जबकि गुरु या शुक्र की महादशा में स्वास्थ्य में सुधार होने की संभावना होती है।

धन और संपत्ति पर प्रभाव

व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर भी महादशा और अन्तर्दशा का गहरा प्रभाव होता है। उदाहरण के लिए, शुक्र की महादशा अक्सर आर्थिक समृद्धि और लग्जरी का संकेत देती है, जबकि शनि की महादशा में आर्थिक तंगी या संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। इसी प्रकार, यदि किसी व्यक्ति की महादशा में बुध और चंद्र की अन्तर्दशा चल रही है, तो व्यापार और शिक्षा में लाभ होने की संभावना रहती है।

रिश्तों पर प्रभाव

महादशा-अन्तर्दशा व्यक्ति के पारिवारिक और वैवाहिक जीवन पर भी गहरा प्रभाव डालती है। शुक्र की महादशा या अन्तर्दशा अक्सर विवाह, प्रेम और संबंधों में सफलता का संकेत देती है, जबकि राहु या केतु की महादशा/अन्तर्दशा व्यक्ति के जीवन में संबंधों में समस्याएं या अलगाव ला सकती है।

करियर पर प्रभाव

महादशा और अन्तर्दशा व्यक्ति के करियर और पेशेवर जीवन को भी प्रभावित करती हैं। जैसे कि सूर्य की महादशा अक्सर सत्ता, सम्मान, और सरकारी नौकरी में सफलता का संकेत देती है, जबकि मंगल की महादशा व्यक्ति को साहसिक कार्यों, सेना, पुलिस, या इंजीनियरिंग में करियर बनाने की दिशा में प्रेरित कर सकती है।

महादशा-अन्तर्दशा का विश्लेषण कैसे करें?

महादशा और अन्तर्दशा का सही विश्लेषण करने के लिए ज्योतिषी को व्यक्ति की जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति, उनकी दृष्टियां, और उनकी स्थिति को समझना आवश्यक होता है। इसके अलावा, व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की दशाएं कैसे बदलती हैं और वे किस भाव में स्थित हैं, इसका विश्लेषण भी महत्वपूर्ण होता है।

एक अच्छा ज्योतिषी महादशा और अन्तर्दशा का विश्लेषण करके यह बता सकता है कि किसी व्यक्ति के जीवन में कौन से समय पर कौन से महत्वपूर्ण घटनाएं घटित हो सकती हैं।

महादशा और अन्तर्दशा वेदिक ज्योतिष के मुख्य घटक हैं, जो व्यक्ति के जीवन में आने वाली परिस्थितियों और घटनाओं को समझने में सहायक होते हैं। इनके माध्यम से, व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे स्वास्थ्य, धन, करियर, और रिश्तों पर होने वाले प्रभावों का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। सही विश्लेषण और समुचित उपायों के द्वारा महादशा और अन्तर्दशा के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है और सकारात्मक प्रभावों को बढ़ाया जा सकता है।

हर हर महादेव 🔱

09/09/2024

📍 कवि कुम्भ,२०२४, लखनऊ
।।हर हर महादेव।।🔱

जब तक पुरुष के लिंग में तनाव है ,तब तक वो प्रेम नही दे सकता ।अगर किसी स्त्री के पास पुरुष जाता भी है और ये कहता है कि मै...
08/09/2024

जब तक पुरुष के लिंग में तनाव है ,तब तक वो प्रेम नही दे सकता ।

अगर किसी स्त्री के पास पुरुष जाता भी है और ये कहता है कि मैं तेरे करीब इस कारण हूं की मैं प्यार करता हूँ ,तो ये धोखा है । गलत है ।

सेक्स शरीर की जरूरत है ,तो ये गलत नही है ।पर सेक्स को प्यार कहने की भूल से बचें।

ईमानदार होकर रहे ।अगर सेक्स करना है तो सामने वाले को साफ शब्दों में कहे ।और साथी से पहले ,खुद को स्पष्ठ कर ले कि मैं प्यार में हु या वासना में !

ओरत फूल की तरह कोमल होती है ।और फूल को रगड़कर ,नोचकर ,उसके शरीर पर निशान बनाकर या बाहर भीतर घिसकर ,प्यार नही किया जाता । स्त्री का शरीर और उसकी योनि की नसें ,बेहद संवेदनशील होती है ।बहुत ज्यादा बारीक होती है ।

आज जो महिलाए ,अपनी डॉक्टर के पास जा रही है ,उसका एक कारण ये भी है कि उनके शारीरिक सम्बन्धो में हिंसा है ।वासना के वेग के चलते ,न तो पुरुष को होश रहता और न स्त्री इतनी हिम्मत कर पाती की पुरुष को( न) कह सके ।

और फिर बच्चादानी में हजारो बीमारी लग जाती है ।महावारी में भयानक दर्द ,ocd ,pocd और पता नही क्या क्या ,सहन करना पड़ता है ।

पुरुष एक्टिव है स्वभाव से और स्त्री पैसिव !

इसलिए यहां पुरुष को समझना चाहिए कि पल भर की वासना के लिए किसी स्त्री का शरीर खराब न करें ।वैसे भी अगर सेक्स को भी धर्य और तरीके से किया जाए ,और एक ठहराव हो भीतर तो उसके परिणाम दोनों व्यक्तियों के लिए सुखद होते है ।और सन्तुष्टि भी मिलती है ।

लेकिन जोश में आकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने वाले पुरुष ,कभी भी सन्तुष्टि को उपलब्ध नही होते ।

जो व्यक्ति विवाहित है ,उन्होंने अनुभव किया होगा कि सालो तक सेक्स करने पर भी उनके भीतर सेव इच्छा ज्यों की तँयो है ।

इसका कारण यही है कि उन्हें गहराई ही नही जानी कभी इस चीज की । 45 मिनेट से पहले तो स्त्री का शरीर खुलता ही नही की वो तुम्हे अपनी बाहों में भरे ,या तुम्हे अनुमति दे कि तुम उसके भीतर प्रवेश करो । इसलिए फोरप्ले का इतना महत्व है ।और ठीक उसी तरह आफ्टरप्ले भी अर्थ रखता है कि तुम्हारी वजह से मैं जीवन ऊर्जा का आनंद ले पाया।

केवल पेनिट्रेशन को सेक्स समझने वाले ,बलात्कारी है।अपने ही साथी का बल पूर्वक हरण करना ,बलात्कार ही होता है । आज जो 70 फीसदी महिला ऑर्गेज़्म से अनजान है ,उसका कारण सेक्स की अज्ञानता है ।इस बात को अहंकार पर चोट न समझे ,ब्लिक अपने आपको बेहतर बनाने का प्रयास करें ।अपनी महिला मित्र के पैर छुए ,उससे अनुमति ले ,उसके प्रति श्रद्धा भाव रखे ,और इस बात का ध्यान रखे कि उसे दर्द न दे ।आनंद दे ।
भले तुम दस मिनट ,आधे घण्टे का सेक्स कर लो ,पर ओरत अछूती ही रह जाती है तुम्हारे स्पर्श से ,और तुम भी अधूरे ही लौटकर आते है । बहुत धीरे धीरे शरीर तैयार होता है ,बहुत धीरे धीरे वो द्वार खुलते है ,जब तुम्हे अनुमति मिले।

और ये सब समझने के लिए भीतर स्थिरता चाहिए ।और बिना मैडिटेशन के ये सम्भव नही । बिना मैडिटेशन जीवन उथला ही रहता है ।अगर गहराई चाहिए जीवन मे ,तो ध्यान बहुत जरूरी है ।होश ,ठहराव ,स्थिरता ,धीरज ,प्रेम ,श्रद्धा

ये सारे शब्द केवल ध्यान करने से ही जीवन मे उतरेंगे ।
किताबे पढ़ने या ज्ञान सुनने से कुछ नही होगा ।

सबसे पहले ग्रहो को शांत करने के मंत्र।।सभी ग्रह शांत करने के बाद कमजोर हो जाते है अर्थात उन्की पावर कम हो जाती है और वे ...
08/09/2024

सबसे पहले ग्रहो को शांत करने के मंत्र।।

सभी ग्रह शांत करने के बाद कमजोर हो जाते है अर्थात उन्की पावर कम हो जाती है और वे पावर खतम या कम होने पर किसी भी प्रकार की हानी या लाभ करने मे असमर्थ हो जाते है

जब कोइ भी ग्रह शांत कर दिया जाता है तो वह ग्रह जिस भी स्थान पर अशुभ फल प्रदान कर रहा है वह अशुभ फल प्रदान करना बंद कर देता है और शांत होने के बाद ग्रह जिस स्थान पर शुभ फल प्रदान कर रहा था उस स्थान पर शुभ फल प्रदान करना भी बंद कर देता है कयोकी कमजोर ग्रह ना तो लाभ करते है और ना ही हानी करते है केवल पावर फुल ग्रह ही हानी और लाभ करते है

बहुत से लोग समझते है ग्रह केवल अपनी दशा मे ही फल देते है ,लेकिन यह बात झुठ है कयोकी सभी ग्रह चोबीस के चोबिस घंटे अपना फल प्रदान करते है

ये नीचे सभी ग्रहो के शांत करने के मंत्र है इन मंत्रो को जितना अधिक संखया मे जाप करोगे तो ग्रह उतना ही अधिक शांत (कमजोर) हो जाएगा

सुर्य: ओम घृणीह सुर्याय नमह

चंदरमा: ओम सोम सोमाय नमह

मंगल: ओम अंग अंगार काय नमह

बुध:ओम बुम बुधाय नमह

बृहस्पती: ओम बृम बृहस्पतये नमह

शुक्र: ओम शुम शुक्राय नमह

शनी:ओम शम शनैशचराय नमह

राहु:ओम राम राहवे नमह

केतु:ओम केम केतवे नमह

यह बात ध्यान मे रखे जब भी आप किसी भी ग्रह को शांत करेगे तो उस ग्रह के तिनो नक्षत्र भी एक साथ कमजोर हो जाएगे अगर उस शांत होने वाले ग्रह के नक्षत्र मे कोइ भी ग्रह बैठा है तो वह बैठा ग्रह अपने आप पावर फुल हो जाएगा और आपको अपने एसे फल प्रदान करेगा जैसे आपने उस ग्रह के कइ रत्न एक साथ पहन लिए हो

यह बात हमेशा ध्यान मे रखे जो पुरूष या औरत नौकरी कर रहे है अगर उन्के दसम भाव मे कोइ ग्रह बैठा है या कही से द्रष्टि डाल कर दसम भाव के शुभ फल प्रदान कर रहा है अगर आप उस ग्रह को शांत कर देगे तो आपकी नौकरी चलि जाएगी ,इस बात मे कोइ संदेह नही है ,इसलिए नौकरी करने वाले पुरूष या औरत किसी भी ग्रह को शांत करने से पहले अपनी कुडली को पुरा जांच ले या किसी उतम ज्योतिष से जांच करवा ले ,वर्ना आप कितना ही जोर लगा लेना आपकी नौकरी को जाने से कोइ भी माइ का लाल नही रोक पाएगा , नौकरी जाने का माध्यम कुछ भी हो सकता है

बहुत से सरकारी नौकरी वाले लोग ज्योतिष विधा को ढोग मानते है सभी सरकारी नौकरी वालो की लगन कुडली मे एक या दो या तिन ग्रह एसे बैठे होते है जो दसम भाव मे शुभ फल प्रदान कर रहे होते है जिनके कारण वे सरकारी नौकरी लगते है अगर सरकारी नौकरी वालो को जांचना हो ज्योतिष ढोग है या सतय है तो अपनी लगन कुडली के उन ग्रहो को शांत करके देख ले जो दसम भाव को पावर फुल कर रहे है

अगर आपकी नौकरी चली जाए तो ज्योतिष विधा सच है अगर नही जाए तो ज्योतिष विधा और मै दोनो ही ढोगी है

मै नीचे सभी ग्रहो को पावर फुल करने के मंत्र लिख रहा हूं....

ये नक्षत्र मंत्र है इन मंत्रो के जितने अधिक जाप करोगे ग्रह उतना अधिक पावर फुल हो जाएगा और अपना प्रभाव इस प्रकार से दिखाएगा जैसे आपने उस ग्रह के बहुत सारे रत्न एक साथ पहन लिए हो

सुर्य: १:ओम आग्नेय नमह

२:ओम अर्यमने नमह

३: ओम विशवेभयो देवे भयो नमह

चंदरमा

१:ओम ब्रहमणे नमह

२:ओम सवित्रे नमह

३:ओम विष्णवे नमह (विष्णु भगवान के किसी भी मंत्र का जाप करने से कम या अधिक चंदरमा अवशय पावर फुल होता है इसलिए केमद्रम योग खतम करने के लिए श्री विष्णु सहस्त्र नाम पढा जाता है )

मंगल:

१ ओम चंद्रमसे नमह

२ ओम चित्राय नमह

३ओम वसुभयो नमह

बुध:

१ओम सर्पेभयो नमह

२ओम इंद्राय नमह

३ओम पुष्णे नमह

गुरू:

१ ओम आदित्ये नमह

२ ओम इंद्रागनी भयाम नमह

३ ओम अजैकपदे नमह

शुक्र:

१ ओम यमाय नमह

२ओम भगाय नमह

३ ओम उदभयो नमह

शनी :

१ ओम बृहस्पतये नमह

२ओम मित्राय नमह

३ ओम अहिरबुधनयाय नमह

राहु:

१ओम रूद्राय नमह (भगवान शिव शंकर के सभी मंत्रो से ,और चालिसा और स्त्रोतर से हमारी लगन कुडली का राहु ग्रह और आद्रा नक्षत्र कम या अधिक अवशय पावर फुल होता है )

२ओम वायवे नमह

३ ओम वरूणाय नमह

केतु:

१ ओम अशवनी भयाम नमह

२ओम पितरभयाम नमह (हमारे घर के पितरो को पुजने से भी केतु ग्रह और मघा नक्षत्र पावर फुल होते है )

३ओम निरितये नमह

उपर सभी नक्षत्रो के मंत्र दिये गए है इन मंत्रो के जाप से नक्षत्र तो पावर फुल होते ही है साथ मे नक्षत्र के सवामी ग्रह भी पावर फुल होते है

अगर आपकी कुडली मे कोइ भी ग्रह कमजोर हो तो आप उपर दिये गए मंत्रो का जाप करके उस ग्रह को अती सुगमता से पावर फुल बना सकते है

यह बात हमेशा ध्यान मे रखे अगर आप किसी ग्रह को उसके नक्षत्र मंत्र दवारा पावर फुल करना चाह रहे है और जिस भी नक्षत्र का आप मंत्र जप करना चाह रहे है अगर उस नक्षत्र मे कोइ भी ग्रह बैठा है तो वह ग्रह आपके मंत्र जप करते करते अपने आप शांत हो जाएगा इसलिए जहां तक समभव हो सके केवल उन नक्षत्र मंत्रो का ही जाप करे जिन नक्षत्रो मे कोइ भी ग्रह नही बैठा हो

जो लोग नौकरी करते है वे अपनी लगन कुंडली को पहले सही से चैक कर ले की आपकी लगन कुंडली के दसम भाव मे कोइ भी ग्रह अशुभ फल तो नही प्रदान कर रहा है अगर आप उस अशुभ फल प्रदान करने वाले ग्रह को पावर फुल कर लेगे तो वह अशुभ फल प्रदान करने वाला ग्रह आपको नौकरी से हटवा देगा

मैने बहुत से लोगो की लगन कुंडली देखी है जिनकी लगन कुडली मे पंचम ,नवम और बारहवां और तीसरा भाव तो पावर फुल मिलता है लेकिन दसम भाव मे एक या दो या तिन ग्रह अशुभ फल प्रदान कर रहे होते है जिनके कारण वह मनुष्य बार बार नौकरी लगने के लिए प्रयतन करता रहता है लेकिन हर बार किसी ना किसी कारण से रह जाता है

क्योंकी वे अशुभ फल प्रदान करने वाले ग्रह उसे नौकरी नहीं लगने देते है।

जब कोइ मनुष्य दसवी तक की पढाइ मैरिट ले कर पढ़ लेता है तो समझ ले उस मनुष्य की कुडली का पंचम भाव पुरा पावर फुल है कुडली खोल कर भी अगर आप देखोगे तो उनका पंचम भाव पुरा पावर फुल ही मिलेगा

अगर कोइ मनुष्य दसवी के बाद की पढ़ाई हाई नम्बरों से कर लेता है तो समझ लो उसकी लगन कुडली का नवम भाव भी पावर फुल है

अगर दसवीं से नीचे और उपर तक की पढ़ाई मैरिट नम्बरों से पास कर लेता है लेकिन जब नौकरी के लिए प्रयत्न करता है तो उसे कभी एक नम्बर ,कभी पांच नम्बर ,कभी हाइट ,कभी पेपर या इंटरू आदि मे फेल हो जाता है तो समझ जाए इसकी लगन कुडली के दसम भाव मे कोइ एसा ग्रह बैठा है जो दसम भाव मे अशुभ फल प्रदान कर रहा है अगर उस ग्रह को शांत कर दिया जाए और फिर नौकरी के लिए ट्राइ किया जाए तो निसंदेह नौकरी लग जाती है चाहे आपकी लगन कुडली का सुर्य और शनी नीच राशी मे ही क्यों नही बैठे हो।

जो लोग बार बार नौकरी के लिए ट्राइ कर रहे है लेकिन सफलता नही मिल रही है उस मनुष्य को अपनी लगन कुडली का दसम भाव अवशय पावर फुल कर लेना चाहिए जो ग्रह दसम भाव मे शुभ फल प्रदान कर रहे है अगर आप उन ग्रहो को ही पावर फुल कर लोगे तो वे ग्रह आपके दसम भाव को अपने आप पावर फुल कर देगे और जो ग्रह दसम भाव मे अशुभ फल प्रदान कर रहे हो उनहे शांत अवशय कर लेना चाहिए ओर जो ग्रह दसम भाव मे शुभ फल प्रदान कर रहे है उन्हे अवशय पावर फुल कर लेना चाहिए कयोकी जो ग्रह दसम भाव मे शुभ फल प्रदान कर रहे होते है वे ही ग्रह नौकरी दिलाते है

जीवन मे जब भी वे दसम भाव मे शुभ फल प्रदान करने वाले ग्रह कमजोर हो जाते है तो हमारी नौकरी छुट जाती है इसलिए सदा नौकरी लगे रहना चाहते है तो दसम भाव मे शुभ फल प्रदान करने वाले ग्रहो को सदा पावर फुल बनाए रखे

मै नीचे ग्रहो को पावर फुल करने वाले पौराणीक मंत्र दे रहा हुं जिनहे जपने से केवल ग्रह ही पावर फुल होते है साथ मे उस ग्रह का कोइ नक्षत्र नही पावर फुल होता है आपको जो मन चाहे जिस मंत्र से अपने ग्रहो को पावर फुल कर सकते है

उपर ये फोटो मे पौराणिक टाइप स्त्रोतर मंत्र है मैने इनहे जप करके देख रखा है बहुत ही बढ़िया परिणाम मिलता है

इनमे जो १ नमबर लिखा हुआ है यह सुर्य का स्त्रोतर मंत्र है इस मंत्र की जितनी अधिक माला जाप करोगे ग्रह उतना ही ज्लदि और उतना ही अधिक पावर फुल हो जाएगा

किस ग्रह का कोनसा स्त्रोतर मंत्र है मै नीचे लिख रहा हुं आप फोटो मे से देख कर जप करके अपने ग्रहो को पावर फुल कर सकते है मै पहले यही मंत्र जाप करके ग्रहो को पावर फुल करता था लेकिन अब तो मै केवल नक्षत्र मंत्रो से ही ग्रहो को पावर फुल करता हुं कयोकी नक्षत्र मंत्र ग्रह को जल्दी पावर फुल करते है और इनहे जपना भी सुगम होता है और एक साथ ही दो लाभ मिल जाते है ग्रह के साथ साथ नक्षत्र भी और भाव भी पावर फुल हो जाता है

मुझे तो आज तक नक्षत्रो के मंत्र जप से अधिक सपिट से कोइ मंत्र नही मिला जो ग्रहो को पावर फुल कर सकता है ,मुझे तो नक्षत्रो के मंत्र के परिणाम बहुत ही बडिया मिले ,आपको पौराणीक मंत्र सही लगे तो पौराणीक मंत्र जप करके ग्रहो को पावर फुल कर ले या नक्षत्र मंत्र जप करके ग्रहो को पावर फुल कर ले

यह बात हमेशा ध्यान मे रखे जो ग्रह आपके जिवन को खुशियो से भर सकते है वही ग्रह आपके जिवन को दुखो से भी भर सकते है इसलिए किसी भी ग्रह को शांत या पावर फुल करने से पहले अपनी सही से कुडली चैक कर ले ,कयोकी कइ बार हम हमारी कुडली के एसे ग्रह को पावर फुल या शांत कर लेते है जिसके कारण हमे सारा जीवन पछताना पड़ता है

१ सुर्य

२ चंदरमा

३ मंगल

४बुध

५ गुरू

६शुक्र

७ शनी

८राहु

९ केतु

जिसे ज्योतिष ढोंग लगती हो तो मुझ से पुछ लेना अपनी बर्बादी के लिए किस ग्रह को शांत और किस ग्रह को पावर फुल करू ,एंकरो को भी ज्योतिष ढोंग ही लगता है वे भी अपनी लगन कुंडली के दुसरे और बारहवे भाव को पावर फुल करने वाले ग्रहो को शांत करके देख ले पता चल जाएगा ज्योतिष ढोंग है या सच्चाई ,सारी बकवास करना ही भुल जाएंगे ,एक ही दिन मे करोड पती से रोडपती हो जाएंगे।

ओम नमो भगवते वासुदेवाय🙏

कुंडली के 6ठे भाव से क्या देखा जाता है?जन्म कुंडली के 6वें भाव के गुणज्योतिष में 6वां भाव दैनिक जीवन, स्वास्थ्य, सेवा और...
08/09/2024

कुंडली के 6ठे भाव से क्या देखा जाता है?

जन्म कुंडली के 6वें भाव के गुण

ज्योतिष में 6वां भाव दैनिक जीवन, स्वास्थ्य, सेवा और कार्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं का महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह भाव कन्या राशि से जुड़ा होता है, जिसे बुध ग्रह संचालित करता है, और इसमें बुध की ऊर्जा अपने सबसे व्यावहारिक और धरातली रूप में प्रकट होती है।

1. 6वें भाव का स्वभाव: दिनचर्या, सेवा, और रखरखाव

6वां भाव आमतौर पर प्रतिकूल माना जाता है क्योंकि यह रोज़मर्रा के कार्यों, सेवा, और रखरखाव से जुड़ा होता है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें हम नीरस या बोझिल मान सकते हैं, लेकिन ये हमारे जीवन के सामान्य संचालन के लिए अत्यावश्यक होते हैं। यह भाव उन परिस्थितियों को नियंत्रित करता है जो नियमित ध्यान और देखभाल की मांग करते हैं, जैसे स्वास्थ्य का रखरखाव, दैनिक कर्तव्यों का पालन, और व्यक्तिगत एवं कार्यक्षेत्र का रखरखाव।

2. काम और रोजगार

6वां भाव कार्य से जुड़े मामलों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह आपके कार्यस्थल के वातावरण, कार्य की शर्तों और दिनचर्या, और आपके द्वारा निभाए जाने वाले कर्तव्यों को नियंत्रित करता है। इसमें सहकर्मियों, अधीनस्थों और कर्मचारियों के साथ आपके संबंध भी शामिल होते हैं। 6वां भाव न केवल आपके कार्य की प्रकृति को दर्शाता है, बल्कि इसमें अधिकार और अधीनता की गतिशीलता भी दिखाई देती है—चाहे आप दूसरों की सेवा कर रहे हों या आपसे सेवा करवाई जा रही हो।

3. स्वास्थ्य और कल्याण

6वें भाव का एक प्रमुख पहलू इसका स्वास्थ्य पर प्रभाव है। यह सभी प्रकार के शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों को कवर करता है, जिसमें बीमारियां, उपचार और समग्र कल्याण शामिल हैं। 6वां भाव बीमारियों की रोकथाम, उपचार और स्वस्थ जीवनशैली के रखरखाव को नियंत्रित करता है। अस्पताल, क्लिनिक, और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता भी इसके क्षेत्र में आते हैं, जो स्वास्थ्य को समर्थन देने वाली प्रक्रियाओं और वातावरण से जुड़े होते हैं।

4. पृथ्वी तत्व और भौतिक क्षेत्र

कन्या एक पृथ्वी तत्व राशि है, जो जीवन के व्यावहारिक पक्ष और भौतिक क्षेत्र से जुड़ी होती है। 6वां भाव, जो कि राशिचक्र के दूसरे, सामाजिक क्षेत्र में स्थित है, भौतिक संसाधनों के रूपांतरण और प्रसंस्करण से संबंधित है। जबकि 2nd भाव संसाधनों के संचय पर केंद्रित होता है, 6वां भाव उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग से संबंधित होता है—हम अपने जीवन को बनाए रखने और सुधारने के लिए कैसे काम करते हैं।

5. सेवा, कर्तव्य, और अधीनता

6वां भाव अक्सर बिना स्वतंत्रता वाले कार्यों से जुड़ा होता है—ऐसे कार्य जो आवश्यकता के कारण किए जाते हैं, पसंद के कारण नहीं। इसमें वे कार्य शामिल होते हैं जो एक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन को बनाए रखने के लिए करने पड़ते हैं। चाहे वह स्वच्छता बनाए रखना हो, व्यवस्था बनाए रखना हो, या पुनरावृत्त कार्यों को करना हो, ये सभी 6वें भाव के अंतर्गत आते हैं। यह भाव सेवा के विचार को भी उजागर करता है, जहाँ कोई सेवा करने या आदेश का पालन करने के लिए बाध्य होता है, चाहे वह एक कर्मचारी के रूप में हो या उन भूमिकाओं में हो जहाँ हम दूसरों को सेवा के लिए रखते हैं।
और डॉक्टरों के पास जाना, 6वें भाव के क्षेत्र में आते हैं।

6. व्यावहारिक कौशल और उनका अनुप्रयोग

3rd भाव के माध्यम से प्राप्त कौशल अक्सर 6वें भाव में उपयोग किए जाते हैं। यह भाव कार्यस्थल और दैनिक जीवन में ज्ञान के व्यावहारिक अनुप्रयोग का प्रतिनिधित्व करता है। यह न केवल व्यक्ति के कार्य के वातावरण और विशेषताओं को दर्शाता है, बल्कि उन दिनचर्याओं, कार्यक्रमों, और प्रणालियों को भी वर्णित करता है जो सब कुछ सुचारू रूप से चलाने में सहायक होती हैं।

7. 6वां भाव और पालतू जानवर

दिलचस्प बात यह है कि 6वां भाव पालतू जानवरों और छोटे पशुओं को भी नियंत्रित करता है। इसका कारण यह है कि पालतू जानवरों की देखभाल भी दैनिक दिनचर्या, जिम्मेदारी और सेवा से जुड़ी होती है। हालांकि हम उनसे बहुत प्रेम करते हैं, लेकिन वे पूरी तरह से हम पर निर्भर होते हैं, जिससे उनका संबंध 6वें भाव की सेवा और रखरखाव की थीम से होता है। यह भाव छोटे घरेलू पशुओं को नियंत्रित करता है, जबकि बड़े पशु 12वें भाव से जुड़े होते हैं।

8. स्वास्थ्य, रोग, और उपचार

6वां भाव शारीरिक स्वास्थ्य और इसके रखरखाव से गहरे तौर पर जुड़ा होता है। यह बीमारियों की रोकथाम, उपचार और उपचार की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। यह भाव स्वास्थ्य से जुड़े सभी गतिशील पहलुओं को शामिल करता है, जैसे कि दैनिक स्वास्थ्य दिनचर्या और चिकित्सा हस्तक्षेप। इसके साथ ही, यह भाव शारीरिक बीमारियों को दर्शाता है, जबकि 12वां भाव मानसिक और पुरानी बीमारियों से जुड़ा होता है। बाहरी चिकित्सा और नियमित चिकित्सा देखभाल, जैसे क्लीनिक और डॉक्टरों के पास जाना, 6वें भाव के क्षेत्र में आते हैं।

9. उचित कार्यप्रणाली और रखरखाव

6वें भाव का सार यह सुनिश्चित करने में है कि सब कुछ सुचारू रूप से चले, चाहे वह एक मशीन हो या शरीर। नियमित देखभाल और रखरखाव अत्यावश्यक है, क्योंकि इन क्षेत्रों में लापरवाही के कारण कार्यक्षमता या स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। यह भाव नियमित रखरखाव के महत्व को रेखांकित करता है, चाहे वह कार की सर्विसिंग हो या शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन करना हो।

10. पोषण और आहार

पोषण भी 6वें भाव का एक महत्वपूर्ण पहलू है, विशेष रूप से आहार और स्वस्थ खाने की आदतों के संदर्भ में। जबकि 2nd भाव भोजन की गुणवत्ता को दर्शाता है, जो किसी व्यक्ति की आय पर निर्भर करता है, 6वां भाव पोषण के स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं पर केंद्रित होता है। आहार संबंधी प्रथाएं और स्वास्थ्य कारणों से खाद्य पदार्थों का चयन, 6वें भाव के दायरे में आते हैं, जो स्वास्थ्य और कल्याण के रखरखाव की व्यापक थीम को दर्शाते हैं।

6वां भाव, जो अक्सर कम आंका जाता है, हमारे जीवन को सुचारू रूप से चलाने वाली दिनचर्या का केंद्र है। काम, स्वास्थ्य, सेवा, और रखरखाव से जुड़ी जिम्मेदारियों और दिनचर्याओं को यह भाव नियंत्रित करता है। इस भाव को समझना यह उजागर करता है कि एक व्यक्ति इन आवश्यक पहलुओं को कैसे प्रबंधित करता है, और यह उसके कार्य नैतिकता, स्वास्थ्य आदतों, और सेवा और कर्तव्य के प्रति दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है।

Address

Dhanbad
826001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when अनंत सनातन posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to अनंत सनातन:

Share