05/06/2023
दैवी माहात्म्य
वो बिना गर्भ में आए, सीधे पालने में जन्म लेती है।
वो कुंकुम के पगल्ये पधारती है।
वो चील बनकर कैद से छुड़ा पंजों में उड़ाकर ले आती है - शेखों भाटी को।
वो क्रोधित हो तो एक हथेली में समन्दर को पी जाती है हाकड़ा दरिया को
वो रूष्ट हो तो दुष्टों के क्षण में प्राण सौंख लेती है -अदन सूमरा
वो प्रसन्न हो तो पीढ़ियों को राज दे देती है राठौड़ भाटी कुल
वो पशु का रूदन सुन, पेड़ के तने से ऊंट का पांव जोड़ देती है
वो मर्यादा रेखा के उल्लंघन पर विधि का विधान बदल कर कान्हा राजा के शरीर से आत्मा निकाल देती है
वो करुण पुकार सुन दूध दुहती हुई, समन्दर में तूफान में फंसे जहाज को एक हाथ से निकाल देती है
वो रौद्र रुप में आए तो तेंबड़े राक्षस को पल में मार देती है।
वो शिव शिष्या बन आईनाथ कहलाती है, शिव (बाड़मेर) से तेंबड़े राय मन्दिर तक गुफा में चलकर आए, वो है मां मामडसूता।
वो प्राण बचाने आए, तो कुएं में गिरते को बचाने के लिए साँप की रस्सी बन जाती है।
वो चालक (चालकनेची)और घंठिया (घंठियालीराय) राक्षस को प्राणविहीन कर दे, वो है मां
वो सौम्यता से परे हो तो नानणगढ़ की सेना भस्म कर देती है
वो कणती (जैन कन्या) की रक्षार्थ तुरन्त चल पड़ती है और मुनि कुशलसागर सूरी के साथ उसे भेज देती है
वो वचनबद्ध मान्यता से च्युत व्यक्ति के आराध्य पार्श्वनाथ मन्दिर के पत्थरों में आग लगा देती है - विमल शाह
वो अटल रहे तो सूर्य के रथ को रोक दे, सिर्फ उनकी लोवड़ी / ओढ़नी की ओट से सोलह प्रहर तक सूर्य की किरणे पृथ्वी पर नहीं पड़ने दी।
(गुजरात मे द्वारका से 20 किलोमीटर दूर नागेस्वर स्स्थान की हैं, पेणा डसने के बाद माँ आवड़ ने सबसे छोटी बहन देवी माँ लौंगबाईसा को अमृत कुंभ लाने भेजा था लेकिन वापस देरी से पहुची थी और सूर्योदय होने वाला था, तब माँ आवड़ जी ने प्रकोप मे आकर सम्पूर्ण जगत को अन्धकारमय करके नागरुप धारण करके बेठ गई थी ! तब नारद मुनि सहीत सभी देवताओं की प्रार्थना पर देवी आदिशाक्ति आवड़ माँ को मनाने हेतू खुद महादेव वहा पर आये, जो आज भी नागेश्वर महादेव के रूप मे वहा विराजमान हैं, ओर देवी ने नाग रूप धारण किया था ईसलिये नागणेची माता कहलाई! जब अमृत का कुम्भ लेकर माँ लौंगबाईसा आई तो माँ आवड़ ने गुस्से मे पुछा की आने मे इतनी देर क्यो लगा दी ? खोड़ी हो गई क्या ? ईधर तत्काल लौंग बाईसा खोड़ी हो गई, तब माँ आवड़ को अपने गुसे का अहसास हुआ, तब अपनी छोटी बहन माँ लकवीबाई को आशीर्वाद दिया की कोई बात नही आज से खोड़ल (खोड़ियार) नाम से जानी जाओगी, और मे मुझसे भी जायदा खोड़ल को पूजा जायेगा)
वो लाखनजी के प्राण यमराज से लाकर यम के नियम और विधि के विधान को बदल स्वर्ग नरक से परे नई दुनिया रच देती है, वो है मां करणी
वो सप्तमी तिथि को उपस्थित जन समुदाय के सामने हिंगलाज पर्वत दिशा में मुख कर पुनः करणी अवतार का वचन दे, अदृश्य हो जाती है।
आज भी किसी दैवी देवता, मानव दानव तो छोड़िए किसी पशु में भी इतना साहस नहीं कि वो इन देवियों की ओरण में घुंघरू बांध कर 5 कदम चल पाए।
वो शिला को उठाकर रखे तो तारंग शिला बना दे, जिसका कोई आधार ही नहीं है, अर्थात बिना किसी भी आधार के खड़ा पत्थर (तेंबड़े मन्दिर)।
वो गुफा बनाए तो तेंबड़े राय मन्दिर से हिंगलाज पर्वत तक सीधा मार्ग बना दे।
इंग्लैंड में शेर के पिंजरे में डाले गए बीकानेर महाराज गंगा सिंघजी की पुकार सुन शेर के दो टुकड़े कर दे, पीठ में खड़ी है दैवी चारणी (करणीजी)
जो बीकानेर महाराज गंगासिंघजी को हाथ पर ज्योत करने की शक्ति दे, वो है मां।
बीकानेर महाराज गंगासिंघजी पैदल देशनाेक से तेंबड़ेराय मन्दिर पधारते थे, एक बार उन्होने मां से कहा कि काबा चूहे तो मेरे देशनोक मन्दिर में भी बहुत है, तब मां तेंबड़े राय की गुफा से अनेकों नागिन निकलने लगी और उपस्थित जन समुदाय स्तब्ध रह गया, वो सदभाव, ईष्ट और दैवी अनुराग का अदभुत प्रसंग है।
जो शरण आए, राव बीकाजी को विजय आशीष वर दे, राजा बना नदे वो है मां।
जो पुंगल राजा शेखों भाटी की बाईसा रंगभंवरी की शादी राव बीकाजी से तय कर, राज का आशीष दे, वो है मां।
श्रीराम को लंकाकांड के लिए 18 पदम् सैन्य बल और श्रीकृष्ण को सम्पूर्ण अक्षोहिणी सेना के साथ से ही महाभारत की रचना की गई जबकि जगत के आरम्भ से हर बार जब भी किसी राक्षस वध करना था, यह जगदम्बा अकेले ही चल पड़ती है, कई शुंभ-निशुंभ, मधु-कैटभ, रक्तबीज, चण्ड-मुंड को मां ने अकेले ही वध किया।
..............और जो उस जगद जननी को बिना किसी शास्त्र ज्ञान, विज्ञान के सिर्फ अपने भाव से पुत्री रूप में जन्म लेने को अनेकों बार विवश कर दे वो है देवीपुत्र..... सृष्टि का एकमात्र अटल सत्य।
देवीपुत्रों आप अतिविशिष्ठ हो, आपको इस लोक में किसी पद, पैसा, प्रतिष्ठा के लिए भेजा ही नहीं गया है। आप एक दैवीय विधान से अवतरित होते है, उसे पवित्रता से स्मृति में रखिए।
ये सारी सत्ताएं तो सृष्टि के आदि और अनन्त से मां के चरणों में नतमस्तक है और रहेंगी आपश्री मां जगदम्बा के प्रथम प्रिय पुत्र हैं और रहेंगे।
विनीत
ऋषिराज सिंह राठौड़
RishiRaj Singh Rathore