10/04/2026
💦💦सूखे तालाब का पुनर्जन्म💦💦
एक समय की बात है, एक गाँव में बहुत पुराना और विशाल तालाब हुआ करता था। लेकिन सालों तक देखभाल न होने के कारण वह पूरी तरह से सूख गया था और उसमें मिट्टी और मलबा भर गया था। गाँव वालों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा था। जब गाँव की चौपाल पर चर्चा हुई, तो सबने कहा कि इस मलबे को हटाकर तालाब को फिर से जीवित करना एक बहुत बड़ा और लगभग असंभव काम है। लोगों ने मान लिया कि इसके लिए बड़ी-बड़ी मशीनें और लाखों रुपये चाहिए, जो उनके पास नहीं थे।
सब निराश होकर बैठ गए, लेकिन उसी गाँव के एक दृढ़ निश्चयी व्यक्ति ने हार नहीं मानी। अगले दिन सुबह-सुबह वह सिर्फ एक फावड़ा और टोकरी लेकर उस सूखे तालाब के पास पहुँच गया और किनारे से मिट्टी खोदकर बाहर निकालने लगा।
रास्ते से गुजरने वाले लोग उस पर हंसने लगे। एक व्यक्ति ने ताना मारा, "क्या तुम पागल हो गए हो? अकेले इस पूरे तालाब को खोदोगे? तुम्हारी पूरी जिंदगी बीत जाएगी, फिर भी यह साफ नहीं होगा!"
उस व्यक्ति ने अपना पसीना पोंछा और मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "मुझे पूरा तालाब एक दिन में साफ नहीं करना है, मुझे बस आज अपने हिस्से की मिट्टी निकालनी है।"
वह हर दिन सुबह दो घंटे तालाब की मिट्टी निकालता और फिर अपने काम पर चला जाता। धूप हो या बारिश, वह कभी नहीं रुका। उसकी यह निरंतरता देखकर गाँव के कुछ युवा भीतर ही भीतर प्रेरित हुए और एक दिन वे भी अपना फावड़ा लेकर उसके साथ जुड़ गए।
जब गाँव के बाकी लोगों ने देखा कि कुछ लोग बिना रुके और बिना थके इतनी मेहनत कर रहे हैं, तो उनकी सोच बदलने लगी। एक-एक करके पूरा गाँव उस श्रमदान का हिस्सा बन गया। जो काम एक इंसान के लिए पहाड़ जैसा लग रहा था, वह गाँव वालों की रोज़ाना की छोटी-छोटी मेहनत से कुछ ही महीनों में पूरा हो गया। जब मानसून की पहली बारिश हुई, तो वह तालाब फिर से लबालब भर गया और गाँव का जल संकट खत्म हो गया।
सीख:
वह अकेला इंसान एक ही दिन में चमत्कार नहीं कर सकता था, लेकिन उसके निरंतर प्रयास और अटूट संकल्प ने पूरे गाँव को जगा दिया।
बड़ा लक्ष्य प्राप्त करने के लिए बस एक ही तरीका है छोटे-छोटे कदम उठाना और कभी न रुकना।
— पॉजिटिव सुविचार AKR
#जयश्रीराम