वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग, देवघर
यह ज्योतिर्लिङ्ग झारखण्ड राज्य के देवघर नाम स्�थान पर विराजमान हैं। कुछ लोग इन्हें बैद्यनाथ भी कहते हैं। देवघर अर्थात देवताओं का घर। वैद्यनाथ ज्�योतिर्लिंग के साथ हृदयापीठ शक्तिपीठ और हरिहर मिलन स्थल यहाँ स्थित होने के कारण इस स्�थान को देवघर नाम मिला है। बाबा बैद्यनाथ को आत्मलिङ्ग, मधेश्वरलिङ्ग, कामनालिङ्ग, रावणेश्वर महादेव, मर्ग तत्पुरुष, हरिहर नाथ और बैजनाथ के आठ ना
मों से जाना जाता है।
यह ज्योतिर्लिङ्ग एक सिद्धपीठ है। पुराणों में देवघर को हृदयापीठ शक्तिपीठ और चिताभूमि भी कहा गया है क्योंकि माना जाता है कि इसी स्थान पर माता पार्वती का ह्रदय गिरा था और भगवान शिव ने उनका अंतिम संस्कार किया था।
कहा जाता है कि यहाँ पर आने वालों की सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। इस ज्योतिर्लिङ्ग को 'कामना-लिङ्ग भी कहा जाता हैं।
जब रावण बाबा वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग ले कर यहाँ पहुँचे थे और उन्हें तीव्र लघुशंका लगी तो जिस ग्वाले को उन्होंने ज्योतिर्लिंग पकड़ने को दिया था वे स्वयं श्री हरि नारायण थे। और उस दिन से यह धाम हरिहर मिलन स्थल के रूप में भी जाना जाता है। वह पावन दिन होली / हरिहर मिलन महोत्सव पर्व के रूप में यहाँ मनाया जाता है।
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जय वैद्यनाथ तीर्थपुरोहित का इतिहास
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जय वैद्यनाथ तीर्थपुरोहित का नाम जय कुमार / जय चरण द्वारी है। ये बाबा वैद्यनाथ के द्वारपाल "द्वारी" परिवार से हैं। सरदार पण्डा के छोटे भाई को बाबा वैद्यनाथ मन्दिर सहित प्रांगण में स्थित सभी 22 मन्दिरों की चाभी पारिवारिक व्यवस्था में मिली थी और तभी से ओझा के साथ द्वारी टाइटल नाम जुड़ गया, जिसका शाब्दिक अर्थ द्वारपाल होता है।
कालांतर में देवघर के तीर्थपुरोहितों के इतिहास में सबसे प्रतापी तीर्थपुरोहित स्व० बाबू गौरी चरण द्वारी के ज्येष्ठ पुत्र बाबू स्व० चण्डी चरण द्वारी के द्वितीय पुत्र स्व० बाबू शारदा चरण द्वारी के ज्येष्ठ पुत्र स्व० जवाहर चरण द्वारी के ज्येष्ठ पुत्र हैं।
साथ ही जय वैद्यनाथ पण्डा जी अपने दादी के मायके से मिली पुरोहिताई भी सम्हाल रहे हैं। इनकी दादी स्व० श्रीमती अन्नपूर्णा देवी जो देवघर की प्रथम साईकल चलाने वाली महिला के रूप में महिला सशक्तिकरण और महिला शिक्षा की मानक के रूप में जानी जाती हैं। जिनके बाबू जी आजादी के बाद इन क्षेत्र (हजारीबाग कम संथाल परगना सांसदीय क्षेत्र के प्रथम संसद रहे। उनको पुत्र नहीं था अतः जेजमानका (यजमानी) अपने जीवित रहते ही अपने ज्येष्ठ नवासे अर्थात स्व० जवाहर चरण द्वारी को सौंप दिया था। अब जय वैद्यनाथ तीर्थपुरोहित जी अपने बाबूजी के बाद उनके बताये रास्ते ओर चलते हुए पुरोहिताई सम्हाल रहे हैं।
Late Ram Raj Panda
Jai kumar "Dwary" Panda
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1) स्व० राम राज पण्डा
वर्तमान मे नाती
2) श्री जवाहर चरण द्वारी पण्डा
के पुत्र
3) श्री जय कुमार (द्वारी पण्डा जी)
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