13/08/2026
🌞 "कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः।
जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम्॥"
— श्रीमद्भगवद्गीता 2.51
अर्थ: बुद्धिमान व्यक्ति कर्म के फल की आसक्ति छोड़कर कर्म करता है और अंततः बंधनों से मुक्त होकर शांति प्राप्त करता है।
सूर्य रोज़ अपना कर्म करता है,
उसे परिणाम की चिंता नहीं होती कि उसकी रोशनी की कितनी प्रशंसा होगी।
आप भी अपना कर्म ईमानदारी से करते रहिए।
फल की चिंता छोड़ दीजिए—समय आने पर आपकी मेहनत खुद बोल उठेगी।
☀️ कर्म करते रहो, प्रकाश फैलाते रहो।
🙏 जय श्री सूर्य नारायण देव।