Deo surya

Call Directions Website Contact the place of worship

Deo surya DM for promotion
☀️ ॐ घृणिः सूर्याय नमः।
🙏 जय श्री सूर्य नारायण।

🌅 “अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम्।”— श्रीमद्भगवद्गीता 13.8अर्थ:विनम्रता, दिखावे से दूर रहना, अहिंसा, क्षमा और ...
06/10/2026

🌅 “अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम्।”
— श्रीमद्भगवद्गीता 13.8

अर्थ:
विनम्रता, दिखावे से दूर रहना, अहिंसा, क्षमा और सरलता—ये मनुष्य के सच्चे गुण हैं।

☀️ सूर्य सबसे ऊँचाई पर होकर भी किसी से अपना प्रकाश छीनता नहीं,
बल्कि सबको प्रकाश देता है।

यही सच्ची महानता है—
ऊँचाई मिले तो अहंकार न आए,
शक्ति मिले तो किसी को छोटा न समझें,
और सफलता मिले तो विनम्रता बनी रहे।

🌞 इंसान की असली पहचान उसकी ऊँची हैसियत से नहीं,
उसके अच्छे व्यवहार और साफ चरित्र से होती है।

✨ प्रकाश वही सुंदर है, जो खुद चमके और दूसरों का रास्ता भी रोशन करे।

🙏 जय श्री सूर्य नारायण देव।

🌅 “कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः।जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम्॥”— श्रीमद्भगवद्गीता 2.51अर्थ:ब...
05/10/2026

🌅 “कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः।
जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम्॥”
— श्रीमद्भगवद्गीता 2.51

अर्थ:
बुद्धिमान मनुष्य कर्म के फल का त्याग करके कर्म करता है और इस प्रकार बंधनों से मुक्त होकर शांति के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

☀️ सूर्य कभी अपने प्रकाश का हिसाब नहीं रखता—
किसने कितना लिया, किसने धन्यवाद दिया… वह बस अपना कर्म करता है।

🌞 जिंदगी में भी यही सीख है—
अपना काम ईमानदारी से करते रहो,
हर परिणाम को अपने मन की शांति से बड़ा मत बनाओ।

जो आपके हाथ में है, उस पर ध्यान दीजिए।
जो आपके हाथ में नहीं है, उसे ईश्वर पर छोड़ दीजिए।

✨ कर्म आपका है, समय उसका है और परिणाम ईश्वर की व्यवस्था।

🙏 जय श्री सूर्य नारायण देव।

🌅 “सर्वभूतहिते रताः।”— श्रीमद्भगवद्गीता 5.25अर्थ:जो मनुष्य सभी प्राणियों के हित और कल्याण में लगा रहता है, वह सच्ची शांत...
04/10/2026

🌅 “सर्वभूतहिते रताः।”
— श्रीमद्भगवद्गीता 5.25

अर्थ:
जो मनुष्य सभी प्राणियों के हित और कल्याण में लगा रहता है, वह सच्ची शांति को प्राप्त करता है।

☀️ सूर्य कभी यह नहीं पूछता कि उसकी रोशनी किसके घर जाएगी।
वह सबको समान रूप से प्रकाश देता है।

इंसान भी जब अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर
किसी के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करता है,
तभी उसके जीवन का प्रकाश दूसरों तक पहुँचता है।

🌞 धन-दौलत से बड़ा है किसी के काम आ जाना,
और पूजा से सुंदर है किसी के जीवन में उजाला कर देना।

ऐसा कर्म कीजिए कि आपके होने से
किसी की जिंदगी थोड़ी बेहतर हो जाए। 🙏

☀️ जय श्री सूर्य नारायण देव।

🌅 “क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति।कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्तः प्रणश्यति॥”— श्रीमद्भगवद्गीता 9.31अर्थ:...
03/10/2026

🌅 “क्षिप्रं भवति धर्मात्मा शश्वच्छान्तिं निगच्छति।
कौन्तेय प्रतिजानीहि न मे भक्तः प्रणश्यति॥”
— श्रीमद्भगवद्गीता 9.31

अर्थ:
भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं—मेरा भक्त कभी नष्ट नहीं होता; वह शीघ्र ही धर्मात्मा होकर स्थायी शांति को प्राप्त करता है।

☀️ सूर्य का रास्ता बादल रोक सकते हैं,
लेकिन उसकी रोशनी को हमेशा के लिए नहीं रोक सकते।

इसी तरह जीवन में मुश्किलें आएँगी,
लोग बदलेंगे, परिस्थितियाँ बदलेंगी…
लेकिन सही रास्ते पर चलने का संकल्प नहीं बदलना चाहिए।

🌞 समय कितना भी कठिन हो,
अपने कर्म और अपने विश्वास को मत छोड़िए।

क्योंकि हर अंधेरे के बाद
एक नया सूर्योदय आपका इंतज़ार करता है। 🙏

☀️ जय श्री सूर्य नारायण देव।

🌅 “श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः।”— श्रीमद्भगवद्गीता 4.39अर्थ:श्रद्धा रखने वाला, अपने लक्ष्य के प्रति समर...
02/10/2026

🌅 “श्रद्धावान् लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः।”
— श्रीमद्भगवद्गीता 4.39

अर्थ:
श्रद्धा रखने वाला, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित और इन्द्रियों को संयमित रखने वाला मनुष्य ज्ञान प्राप्त करता है और अंततः शांति को प्राप्त होता है।

☀️ सूर्योदय हमें हर दिन एक नई उम्मीद देता है—
कि बीती हुई रात चाहे कितनी भी कठिन रही हो, सुबह फिर आएगी।

जीवन में भी ऐसा ही है…
आज की परेशानी कल की सीख बन सकती है,
आज की मेहनत कल की सफलता बन सकती है।

बस विश्वास मत खोइए,
अपने कर्म से पीछे मत हटिए और समय पर भरोसा रखिए।

🌞 जिसके भीतर उम्मीद का सूरज जलता रहता है,
उसके लिए कोई अंधेरा हमेशा के लिए नहीं रहता।

🙏 जय श्री सूर्य नारायण देव।

🌅 “योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥”— श्रीमद्भगवद्गीता 2.48अर्...
01/10/2026

🌅 “योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥”
— श्रीमद्भगवद्गीता 2.48

अर्थ:
हे अर्जुन! आसक्ति छोड़कर योग में स्थित होकर कर्म करो। सफलता और असफलता में समान भाव रखना ही योग कहलाता है।

☀️ सूर्य हर दिन अपना प्रकाश देता है—
चाहे कोई उसकी ओर देखे या नहीं।

उसे परिणाम की चिंता नहीं,
उसका काम है प्रकाश देना।

🌞 वैसे ही हमारा काम है—
ईमानदारी से कर्म करना,
परिणाम आने पर घमंड न करना और असफलता आने पर टूटना नहीं।

क्योंकि सफलता और असफलता तो जीवन के पड़ाव हैं,
लेकिन स्थिर मन ही असली शक्ति है।

🙏 जय श्री सूर्य नारायण देव।

🌅 “उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥”— श्रीमद्भगवद्गीता 6.5अर्थ:मनुष्य को...
30/09/2026

🌅 “उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥”
— श्रीमद्भगवद्गीता 6.5

अर्थ:
मनुष्य को स्वयं अपने द्वारा अपना उत्थान करना चाहिए, स्वयं को नीचे नहीं गिराना चाहिए। क्योंकि मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र है और स्वयं ही अपना शत्रु।

☀️ सूर्य हर सुबह किसी के सहारे का इंतज़ार नहीं करता—
वह स्वयं प्रकाश बनकर अंधकार को दूर करता है।

वैसे ही जीवन में हर बार कोई दूसरा आपको संभाले, यह जरूरी नहीं।
कभी-कभी खुद को मजबूत करके खुद ही आगे बढ़ना पड़ता है।

🌞 हालात चाहे जैसे हों, अपने भीतर की उम्मीद को कमजोर मत होने दीजिए।

क्योंकि जिस दिन इंसान खुद पर विश्वास करना सीख जाता है,
उस दिन अंधेरा भी उसे रास्ता दिखाने लगता है।

🙏 जय श्री सूर्य नारायण देव।

29/09/2026

🎥 मूवी शूटिंग देव में।

🌅 “समदुःखसुखः स्वस्थः समलोष्टाश्मकाञ्चनः।”— श्रीमद्भगवद्गीता 14.24अर्थ:जो मनुष्य सुख-दुःख में समान रहता है, अपने भीतर स्...
29/09/2026

🌅 “समदुःखसुखः स्वस्थः समलोष्टाश्मकाञ्चनः।”
— श्रीमद्भगवद्गीता 14.24

अर्थ:
जो मनुष्य सुख-दुःख में समान रहता है, अपने भीतर स्थिर रहता है और मिट्टी, पत्थर तथा सोने को समान दृष्टि से देखता है, वह वास्तव में संतुलित जीवन जीता है।

☀️ सूर्य की रोशनी अमीर-गरीब, ऊँच-नीच या अपने-पराए में भेद नहीं करती।
वह सबको समान रूप से प्रकाश देती है।

🌞 इंसान की महानता भी इसी में है—
वह परिस्थितियों से नहीं, अपने स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाए।

सुख मिले तो अहंकार नहीं,
दुःख आए तो निराशा नहीं…
बस विश्वास, धैर्य और सही कर्म बना रहे।

🙏 जय श्री सूर्य नारायण देव।

🌞 श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 7, श्लोक 8 🙏रसोऽहमप्सु कौन्तेय प्रभास्मि शशिसूर्ययोः।प्रणवः सर्ववेदेषु शब्दः खे पौरुषं नृषु॥...
28/09/2026

🌞 श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 7, श्लोक 8 🙏

रसोऽहमप्सु कौन्तेय प्रभास्मि शशिसूर्ययोः।
प्रणवः सर्ववेदेषु शब्दः खे पौरुषं नृषु॥

✨ भावार्थ:
हे अर्जुन! जल में मैं रस हूँ और चंद्रमा तथा सूर्य में मैं प्रकाश हूँ।

🌅 सुविचार:
जिस मन में भगवान का विश्वास हो,
वहाँ अंधेरा चाहे कितना भी हो…
उम्मीद की एक किरण जरूर रहती है। ❤️🙏

☀️ जय सूर्यनारायण।
🚩 जय श्री भगवान स्वरूपनारायण।

Address

Deo Main Road
Deo
824202

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Deo surya posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Deo surya:

Shortcuts

Share