Satiesh saeni- Astrologer

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The Fortune is a well-known provider of highly efficient Astrology Consultancy Services. The range of services made available by the Institute includes Vaastu, Pyramid Vaastu, Astrology & Numerology Consultancy. The Institute makes available its services keeping in mind the various needs and information provided by clients. We make every possible effort to satisfy clients and make our services ben

eficial for them. Our services are rendered over by experienced and devoted professionals, hence, clients can be assured about the quality of the services that we provide. Satiesh Saeni is a leading vedic Astrologer, have a large chain of satisfied client in India and abroad. At present he is spreading the knowledge of Vedic Astrology, Pyra vaastu,Vedic Vaastu, and Numerology. For his precious contribution to the society he has been honored with many prestigious award by different organizations. The Delhi-based established has worked hard to make a reputation for itself. Since the inception of the Institute, it has always made sure that clients are maximally satisfied and progress & prosper from its services.

बढ़ती उम्र पर जॉर्ज कार्लिन की सलाह(अद्भुत संदेश - अंत तक जरूर पढ़ें नहीं तो आप अपने जीवन का एक दिन गवाँ देंगे।)कैसे बने र...
11/12/2017

बढ़ती उम्र पर जॉर्ज कार्लिन की सलाह

(अद्भुत संदेश - अंत तक जरूर पढ़ें नहीं तो आप अपने जीवन का एक दिन गवाँ देंगे।)

कैसे बने रहें - चिरयुवा

1. फालतू की संख्याओं को दूर फेंक आइए। जैसे- उम्र, वजन, और लंबाई। इसकी चिंता डॉक्टर को करने दीजिए। इस बात के लिए ही तो आप उन्हें पैसा देते हैं।

2. केवल हँसमुख लोगों से दोस्ती रखिए। खड़ूस और चिड़चिड़े लोग तो आपको नीचे गिरा देंगे।

3. हमेशा कुछ सीखते रहिए। इनके बारे में कुछ और जानने की कोशिश करिए - कम्प्यूटर, शिल्प, बागवानी, आदि कुछ भी। चाहे रेडियो ही। दिमाग को निष्क्रिय न रहने दें। खाली दिमाग शैतान का घर होता है और उस शैतान के परिवार का नाम है - अल्झाइमर मनोरोग।

4. सरल व साधारण चीजों का आनंद लीजिए।

5. खूब हँसा कीजिए - देर तक और ऊँची आवाज़ में।

6. आँसू तो आते ही हैं। उन्हें आने दीजिए, रो लीजिए, दुःख भी महसूस कर लीजिए और फिर आगे बढ़ जाइए। केवल एक व्यक्ति है जो पूरी जिंदगी हमारे साथ रहता है - वो हैं हम खुद। इसलिए जबतक जीवन है तबतक 'जिन्दा' रहिए।

7. अपने इर्द-गिर्द वो सब रखिए जो आपको प्यारा लगता हो - चाहे आपका परिवार, पालतू जानवर, स्मृतिचिह्न-उपहार, संगीत, पौधे, कोई शौक या कुछ भी। आपका घर ही आपका आश्रय है।

8. अपनी सेहत को संजोइए। यदि यह ठीक है तो बचाकर रखिए, अस्थिर है तो सुधार करिए, और यदि असाध्य है तो कोई मदद लीजिए।

9. अपराध-बोध की ओर मत जाइए। जाना ही है तो किसी मॉल में घूम लीजिए, पड़ोसी राज्यों की सैर कर लीजिए या विदेश घूम आइए। लेकिन वहाँ कतई नहीं जहाँ खुद के बारे में खराब लगने लगे।

10. जिन्हें आप प्यार करते हैं उनसे हर मौके पर बताइए कि आप उन्हें चाहते हैं; और हमेशा याद रखिए कि जीवन की माप उन साँसों की संख्या से नहीं होती जो हम लेते और छोड़ते हैं बल्कि उन लम्हों से होती है जो हमारी सांस लेकर चले जाते हैं

कोई फर्क नहीं पड़ता जो आप इस संदेश को कम से कम आठ लोगों तक न भेजें, लेकिन भेजिए जरूर। हमें प्रतिदिन का जीवन भरपूर तरीके से जीने की आवश्यकता है।

जीवन की यात्रा का अर्थ यह नहीं कि अच्छे से बचाकर रखा हुआ आपका शरीर सुरक्षित तरीके से श्मशान या कब्रगाह तक पहुँच जाय। बल्कि आड़े-तिरछे फिसलते हुए, पूरी तरह से इस्तेमाल होकर, सधकर, चूर-चूर होकर यह चिल्लाते हुए पहुँचो - वाह यार, क्या यात्रा थी!
😊

जानिए क्यों की जाती है विदाई के समय चावल पीछे फेंकने की रस्मभारतीय संस्कृति में शादी सिर्फ एक परंपरा ही नहीं उससे बढ़कर ...
06/12/2017

जानिए क्यों की जाती है विदाई के समय चावल पीछे फेंकने की रस्म

भारतीय संस्कृति में शादी सिर्फ एक परंपरा ही नहीं उससे बढ़कर एक जीवन के रुप में माना जाता है।

शादी को एक उत्सव के रुप में मनाया जाता है। इसमें अनेकों तरह की परंपराएं होती है जिसमें से एक होती है बेटी की विदाई।

विदाई के दौरान बेटी पीछे की तरफ चावल फेंकती है और माता-पिता या घर का कोई बड़ा उसे झोली में इकठ्ठा करता है।

इस रस्म को हर कोई निभाता है लेकिन इसे क्यों किया जाता है ये शायद ही कुछ लोग जानते होंगे।

स्थान के अनुसार इस रस्म को करने के तरीके बदल जाते हैं लेकिन इस रस्म को शादी में एक महत्वपूर्ण रस्म माना जाता हैं।

– दुल्हन की विदाई के समय वो अपने हाथों में चावल या चावल के साथ बताशे मिलाकर पीछे की तरफ फेंकती है और उसके विदा होने के बाद अन्न पूरे घर में डाला जाता है।

इस रस्म के लिए मान्यता है कि इससे घर की बेटी जिसे लक्ष्मी माना जाता है उसके जाने के बाद भी घर में अन्न-धन की कमी नहीं रहे।

– इसी के साथ शादी के बाद जब बहु अपने घर पहुंचती है तो दरवाजे पर पूजा के समय नवविवाहित जोड़े पर चावल डाले जाते हैं।

इसका अर्थ होता है कि जोड़े के जीवन में हमेशा खुशहाली और समृद्धि बनी रहे।

इसी के साथ माना जाता है कि चावल फेंकने से जोड़े को संतान सुख मिलता है। साथ ही भाग्य की बढ़ोतरी के लिए ये रस्म अदा की जाती है।

– कई लोग वधु की झोली में हल्दी और चावल डालते हैं, जिसका अर्थ होता है कि लक्ष्मी के आने से सुख-समृद्धि बनी रहे।

02/07/2017
संबंध में कमी या वैवाहिक सुख अतृप्ति का भी सीधा संबंध वास्‍तु दोष से हैअगर आपके जीवन में वैवाहिक-सुख जैसी मूलभूत आवश्‍यक...
24/06/2017

संबंध में कमी या वैवाहिक सुख अतृप्ति का भी सीधा संबंध वास्‍तु दोष से है

अगर आपके जीवन में वैवाहिक-सुख जैसी मूलभूत आवश्‍यकता पीछे छूटती जा रही है या आपका पार्टनर आपसे निगाहें चुराने लगा है. या फिर आपके संबंधों में मिठास खत्‍म हो चुकी है तो एक बार अपने घर, अपने बेडरूम और संबंध बनाने की दिशा के वास्‍तु की जांच जरूर करा लें. क्‍योंकि प्रसिद्ध वास्‍तुशास्‍त्र के अनुसार इसके पीछे कारण वास्‍तु दोष है.

वास्‍तुशास्‍त्र का कहना है कि काम से गहरा संबंध है. दांपत्‍य जीवन की बुनियाद ही वैवाहिक सुख पर टिकी है और आजकल तेजी से टूटते रिश्‍तों का मूल कारण भी पति-पत्‍नी के बीच वैवाहिक सुख संबंध की कमी ही है. काम संबंध में कमी या वैवाहिक सुख अतृप्ति का भी सीधा संबंध वास्‍तु दोष से है.

वास्‍तुशास्‍त्र के अनुसार वैवाहिक सुख और प्रेम संबंधों में ताजगी बनाए रखने में वास्‍तु महत्‍वपूर्ण होता है. अगर आपके घर का उत्तर-पश्चिम, दोषपूर्ण है तो आपकी काम के प्रति रूचि घट जाती है. यही नहीं अगर आपके घर और बेडरूम की दीवारों पर गलत रंग है, जिस प्‍लॉट में आपका मकान बना है उसका और आपके बेडरूम का सही आकार न होना आदि कई कारण हैं जो आपके जीवन में कड़वाहट पैदा करने और एक्‍सट्रा मेरिटल अफेयर्स का कारण बनते हैं.

वास्‍तुशास्‍त्र के अनुसार अगर आप अपने बेड के नीचे या उसके रैक में जूते-चप्‍पल रखते हैं तो वह पति-पत्नी के रिश्‍ते के लिए ठीक नहीं होता. इसके अलावा सुखी वैवाहिक जीवन के लिए अगर आपके पास डबल बेड है तो उसमें एक ही बड़ा वाला मैट्रेस बिछाएं अगर यह संभव न हो तो दोनों मैट्रेस के बीच में कोई मोटा मैट बिछाएं और उसके बाद उनके ऊपर चादर बिछाएं. ऐसा न होने पर पति-पत्‍नी के बीच झगड़े की संभावना हमेशा बनी रहती है. बेडरूम में तीन ऑब्‍जेक्‍ट न लगाएं, जैसे तीन फूल, तीन कैंडल आदि.

वास्‍तुशास्‍त्र के अनुसार पति-पत्‍नी को अपने सिर की तरफ पानी नहीं रखना चाहिए और उनके बेडरूम की दीवारों का रंग हल्‍का होना चाहिए न कि चटख. संबंधों का भरपूर लुत्‍फ उठाने के लिए पति-पत्नी को कमरे के दक्षिण-पश्चिम दिशा में संबंध बनाना चाहिए. इसके अलावा अगर आपके घर का उत्तर-पूर्व नहीं है या कटा हुआ है या गोलाकार में है या दोषपूर्ण है तो इससे संतान प्राप्ति में दिक्‍कत आती है और अगर संतान हो भी तो वह दोषपूर्ण हो सकती है.

04/06/2017
04/04/2017

रोज हनुमान चालीसा पाठ जरूर करें मिलेंगें ये 7 अनमोल फायदे

ऐसी मान्यता है कि, कलियुग में एक मात्र हनुमान जी ही जीवित देवता हैं। यह अपने भक्तों और आराधकों पर सदैव कृपालु रहते हैं और उनकी हर इच्छा पूरी करते हैं।

हनुमान जी की कृपा से ही तुलसीदास जी को भगवान राम के दर्शन हुए थे। शिवाजी महाराज के गुरू समर्थ रामदास के बारे में भी कहा जाता है कि उन्हें हनुमान जी ने दर्शन दिए थे।

हनुमान जी के बारे में यह भी कहा जाता है कि जहां कहीं भी रामकथा होती है हनुमान जी वहां किसी न किसी रूप में जरूर मौजूद रहते हैं।

हनुमान जी की महिमा और भक्तहितकारी स्वभाव को देखते हुए तुलसीदास जी ने हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा लिखा है। इस चालीसा का नियमित पाठ बहुत ही सरल और आसान है, लेकिन इसके लाभ हैं चमत्कारी।

1. आर्थिक परेशानी में करें हनुमान चालीसा का पाठ

हनुमान चालीसा में कहा गया है कि हनुमान जी अष्टसिद्घि और नवनिधि के दाता कहा गया। जो व्यक्ति नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करता है। उसकी हर मनोकामना हनुमान जी पूरी करते हैं चाहे वह धन संबंधी इच्छा ही क्यों न हो।

जब कभी भी आपको आर्थिक संकट का सामना करना पड़े मन में हनुमान जी का ध्यान करके हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर दीजिए।

कुछ ही हफ्तों में आपको समस्या का समाधान मिल जाएगा और आर्थिक चिंताएं दूर हो जाएगी। इस बात का ध्यान रखें कि पाठ किसी दिन छोड़ें नहीं। अगर यह क्रम मंगलवार से शुरू करें तो बेहतर रहेगा।

2. रात सोने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ इस मामले में भी लाभदायक

अगर आप सोने के लिए बिस्तर पर जाते हैं लेकिन मन बेचैन रहता है, ठीक से नींद नहीं आती है तो आप नियमित हनुमान चालीसा पाठ करना शुरू कर दीजिए।

नींद अच्छी तरह नहीं आने का एक बड़ा कारण मानसिक अशांति है। हनुमान चालीसा के पाठ से मानसिक शांति मिलती है और मन में चल रही उधेड़ बुन से मुक्ति मिलती है जिससे व्यक्ति को अच्छी नींद आती है और जीवन में उन्नति का मौका मिलता है।

3. बल वीर्य की वृद्घि के लिए पढ़ें हनुमान चालीसा

हनुमान जी परम पराक्रमी और महावीर हैं इस बात का उल्लेख रामचरित मानस से लेकर हनुमान चालीसा तक में किया गया है।

इनके ध्यान से पुरूष बलवान और वीर्यवान होता है। जो लोग अक्सर बीमार रहते हैं या काफी उपचार के बाद भी जिनका रोग दूर नहीं होता उन्हें नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।

हनुमान चालीसा में लिखा भी गया है” नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।”

4. जब अनजाना भय डराए

हनुमान चालीसा का एक दोहा है ‘भूत पिशाच निकट नहीं आए, महावीर जब नाम सुनावे। इस दोहे से बताया गया है कि जो व्यक्ति नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करता है उसके आस-पास भूत-पिशाच और दूसरी नकारात्मक शक्तियां नहीं आती हैं।

हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने वाले व्यक्ति का मनोबल बढ़ जाता है और उसे किसी भी तरह का भय नहीं रहता है।

अगर किसी को कोई अनजाना भय डरा रहा हो तो उसे हर रात सोने से पहले हाथ पैर धोकर पवित्र मन से हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर देना चाहिए।

5. छात्रों को इसलिए पढ़ना चाहिए हर दिन हनुमान चालीसा

आपने देखा होगा कि मंगलवार के दिन छात्र बड़ी संख्या में हनुमान जी के मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। इसका कारण यह है कि हनुमान जी की जिनपर कृपा होती है वह बुद्घिमान, गुणी और चातुर यानी अक्लमंद हो जाते हैं।

हनुमान जी की कृपा पाने के लिए छात्रों को नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। छात्र जीवन में चालीसा का पाठ करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है और शिक्षा के क्षेत्र में कामयाबी मिलती है।

इसका कारण यह है कि हनुमान जी स्वयं हैं ‘विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।’ जो इनकी भक्ति सहित हनुमान चालीसा का पाठ करता है उनमें भी हनुमान जी यह गुण भर देते हैं।

6. हनुमान चालीसा पाठ का सबसे बड़ा लाभ है यह

मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य माना गया है मुक्ति यानी शरीर त्याग के बाद परमधाम में स्थान। हनुमान चालीसा में बताया गया है ‘अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि–भक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरई। हनुमत् सेई सर्व सुख करई।।

7. जब आप शत्रुओं से परेशान हो जाएं

जब आप शत्रुओं से परेशान हो जाएं और कोई रास्ता दिखाई न दे तो हनुमान चालीसा का जप करें।

यदि एकाग्रता और भक्ति के साथ हनुमान चालीसा की सिर्फ इस पंक्ति का भी जप किया जाए तो शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है।

श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है। इस पंक्ति का अर्थ यह है कि श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध में हनुमानजी ने भीम रूप यानि विशाल रूप धारण करके असुरों-राक्षसों का संहार किया।

श्रीराम के काम पूर्ण करने में हनुमानजी ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। जिससे श्रीराम के सभी काम संवर गए।

“भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्रजी के काज संवारे।।”

यानी जो व्यक्ति हनुमान जी का ध्यान करता है उनकी पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ नियमित करता है उसके परम धाम जाने का मार्ग सरल हो जाता है।

11/03/2017

12 मार्च की रात को जरूर लगायें 1 दीपक, रोशन कर देगा आपका नाम और भाग्य

12 मार्च, रविवार को फाल्गुन मास की पूर्णिमा है। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार, होली व दीवाली ऐसे विशेष अवसर हैं जब हर प्रकार की साधनाएं, तांत्रिक क्रियाएं तथा छोटे-छोटे उपाय भी सार्थक हो जाते हैं।

यदि आपको लगता है कि किसी ने आपके ऊपर तांत्रिक अभिचार किया हुआ है जिसके कारण आपकी प्रगति ठप्प हो गई है तो देसी घी में भीगे दो लौंग, एक बताशा, एक पान का पत्ता होलिका दहन में अर्पित करें।

दूसरे दिन वहां की राख लाकर शरीर पर मलें और नहा लें। तांत्रिक अभिचार दूर हो जाएगा ।

आर्थिक पक्ष मजबूत करने के लिए होली की सुबह घर के मुख्य द्वार पर सुंगधयुक्त गुलाल की ढेरी बनाकर उस पर दोमुखी दीपक लगाएं।

रात होने तक वह जलता रहना चाहिए। होली की अग्नि में उसे डाल दें। धन वृद्धि के योग बनेंगे और उन्नति के अवसर खुलेंगे।

यदि व्यापार में लगातार घाटा या आर्थिक हानि हो रही है तो होलिका दहन की सायं दुकान या मकान के मुख्य द्वार की चौखट पर गुलाल छिड़कें, उस पर आटे का बना चौमुखी दीपक जलाएं। उस दीपक को जलती होलिका में डाल आएं।

जीवन से हर तरह की बाधा दूर करने के लिए और जग में अपना नाम रोशन करने के लिए होलिका दहन की रात घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक लगाएं। ये दीपक सुबह तक जलता रहना चाहिए।

दांपत्य जीवन में मिठास लाने के लिए-रुई की 108 बत्तियां देसी घी में भिगोकर होलिका में संबंध सुधार की अनुनय सहित डालें ।

यदि आपको लगता है कि बच्चे को किसी की नजर लग गई है तो-देसी घी में भीगे पांच लौंग, एक बताशा, एक पान का पत्ता होलिका दहन में अर्पित करें। दूसरे दिन वहां की राख लाकर ताबीज में भर कर बच्चे को पहनाएं।

यदि आपके घर को बुरी नजर लग गई है तो उसे उतारने का यह स्वर्णिम अवसर है। देसी घी में भीगे दो लौंग, एक बताशा, मिश्री, एक पान का पत्ता होलिका दहन में अर्पित करें। दूसरे दिन वहां की राख लाकर लाल कपड़े में बांध कर घर में रखें ।

08/03/2017

होली पर किए जाने वाले कुछ साधारण उपाय

होली की रात तो ये करने से जिनका अपना काम काज है उसमें बरकत निश्चित रूप से होती है|

होली का दिन चंद्रमा का प्रागट्य दिन है|

जो लोग सदा किसी न किसी दुःख से पीड़ित रहते हो, दुःख और शोक दूर करने के लिए विष्णु-धर्मोत्तर ग्रंथ में बताया है कि होली के दिन भगवान के भूधर स्वरुप अर्थात पृथ्वी को धारण करनेवाले भगवान का ध्यान और जप करना चाहिये|

और होली के रात को चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिये|

जिनके घर मे पैसों की तंगी रहती है, आर्थिक कष्ट सहना पड़ता है|

तो होली के रात दूध और चावल की खीर बनाकर चंद्रमा को भोग लगाये|

पानी, दूध, शक्कर, चावल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दे , दिया जलाकर दिखायें और थोड़ी देर चंद्रमा की चाँदनी में बैठकर जप करें|

और प्रार्थना करें हमारे घर का जो आर्थिक संकट है वो टल जायें, कर्जा है तो उतर जाये|

होली की रात बैठकर जप करें बहुत फायदा होगा

चंद्रमा उदय होने पर चंद्रमा में भगवान विष्णु, लक्ष्मी और सूर्य की भावना करके अर्घ्य देना चाहिये, कि सामने भगवान विष्णु ही बैठे है|

भगवान ने गीता में कहा ही है कि नक्षत्रों का अधिपति चन्द्रमा मैं ही हूँ|

ये

श्रीर्निषा चन्द्र रुपस्त्वं वासुदेव जगत्पते |
मनोविलसितं देव पूर्यस्व नमो नमः ||

ॐ सोमाय नम:

ॐ नारायणाय नम:

ॐ श्रीं नम:

लक्ष्मीजी का मंत्र – ॐ श्रीं नम:

होली की रात घर मे आर्थिक परेशानी को दूर भगाने वाला ये सरल प्रयोग है|

होली के दिन पूजा विशेष:

होली के दिन शास्त्रों में लक्ष्मी माता की पूजा का विधान बताया गया है वह कपूर का दिया जलाकर करें|

होली का पर्व दरिद्रता का नाश करनेवाला पर्व है|

अच्युतानन्तगोविन्द नामोच्चारणभेषजात|
नश्यन्ति सकला रोगा: सत्यं सत्यं वदाम्यहम||

होली की रात को दूध और चावल की खीर बनवा ले एक कटोरी|

होली की रात को चन्द्रमा को अर्घ्य दें दीपक जलाकर दिखा दें और कटोरी में खीर जो है वो थाली में रख दें मन ही मन प्रार्थना कर लें
ऐसा करके थोड़ी देर प्रार्थना करके शांत हो कर बैठें|

होली की रात ये करने से जिनका अपना काम काज है उसमें बरकत निश्चित रूप से होती है |

सफलता की उड़ान भरने के लिए हाथ आए अवसर की करें पहचानएक बार एक ग्राहक चित्रों की दुकान पर गया। उसने वहां पर अजीब से चित्र...
07/03/2017

सफलता की उड़ान भरने के लिए हाथ आए अवसर की करें पहचान

एक बार एक ग्राहक चित्रों की दुकान पर गया। उसने वहां पर अजीब से चित्र देखे। पहले चित्र में चेहरा पूरी तरह बालों से ढका हुआ था और पैरों में पंख थे। एक अन्य चित्र में सिर पीछे से गंजा था।

ग्राहक ने पूछा, ‘‘यह चित्र किसका है?’’

दुकानदार ने कहा, ‘‘अवसर का।’’

ग्राहक ने पूछा, ‘‘इसका चेहरा बालों से ढका क्यों है?’’

दुकानदार ने कहा, ‘‘क्योंकि अक्सर जब अवसर आता है तो मनुष्य उसे पहचानता नहीं है।’’

ग्राहक ने पूछा, ‘‘और इसके पैरों में पंख क्यों हैं?’’

दुकानदार ने कहा, ‘‘वह इसलिए कि यह तुरंत वापस भाग जाता है, यदि इसका उपयोग न हो तो यह तुरंत उड़ जाता है।’’

ग्राहक ने पूछा, ‘‘और यह दूसरे चित्र में पीछे से गंजा सिर किसका है?’’

दुकानदार ने कहा, ‘‘यह भी अवसर का है। यदि अवसर को सामने से ही बालों से पकड़ लेंगे तो वह आपका है। अगर आपने उसे थोड़ी देरी से पकडऩे की कोशिश की तो पीछे का गंजा सिर हाथ आएगा और वह फिसलकर निकल जाएगा।’’

06/03/2017

जानिए क्यों माना जाता है अशुभ होलाष्टक को

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक की अवधि को शास्त्रों में होलाष्टक कहा गया है।

होलाष्टक शब्द दो शब्दों का संगम है। होली तथा आठ अर्थात 8 दिनों का पर्व।

यह अवधि इस साल 5 मार्च से लेकर 12 मार्च तक अर्थात होलिका दहन तक है।

इन दिनों गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, विवाह संबंधी वार्तालाप, सगाई, विवाह, किसी नए कार्य, नींव आदि रखने, नया व्यवसाय आरंभ करने या किसी भी मांगलिक कार्य आदि का आरंभ शुभ नहीं माना जाता।

इसके पीछे ज्योतिषीय एवं पौराणिक दोनों ही कारण माने जाते हैं। एक मान्यता के अनुसार कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग कर दी थी।

इससे रुष्ट होकर उन्होंने प्रेम के देवता को फाल्गुन की अष्टमी तिथि के दिन ही भस्म कर दिया था।

कामदेव की पत्नी रति ने भगवान शिव की आराधना की और कामदेव को पुनर्जीवित करने की याचना की जो उन्होंने स्वीकार कर ली।

महादेव के इस निर्णय के बाद जन साधारण ने हर्षोल्लास मनाया और होलाष्टक का अंत दुलहंडी को हो गया।

इसी परंपरा के कारण यह 8 दिन शुभ कार्यों के लिए वर्जित माने गए।

होलाष्टक के आठ दिन शुभ कार्य न करने के पीछे ज्योतिषीय कारण से अधिक वैज्ञानिक तर्क सम्मत तथा ग्राह्य है।

ज्योतिष के अनुसार, अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल, तथा पूर्णिमा को राहू उग्र स्वभाव के हो जाते हैं।

इन ग्रहों के निर्बल होने से मानव मस्तिष्क की निर्णय क्षमता क्षीण हो जाती है और इस दौरान गलत फैसले लिए जाने के कारण हानि होने की संभावना रहती है।

विज्ञान के अनुसार भी पूर्णिमा के दिन ज्वारभाटा, सुनामी जैसी आपदाएं आती रहती हैं या मनोरोगी व्यक्ति और उग्र हो जाता है।

ऐसे में सही निर्णय नहीं हो पाता। जिनकी कुंडली में नीच राशि के चंद्रमा, व वृृश्चिक राशि के जातक या चंद्र छठे या आठवें भाव में हैं उन्हें इन दिनों अधिक सतर्क रहना चाहिए।

मानव मस्तिष्क पूर्णिमा से 8 दिन पहले कहीं न कहीं क्षीण, दुखद, अवसाद पूर्ण, आशंकित तथा निर्बल हो जाता है।

ये अष्ट ग्रह, दैनिक कार्यकलापों पर विपरीत प्रभाव डालते हैं।

01/03/2017

5 जड़ी बूटियां जो आपके दिमाग को कंप्यूटर से भी तेज चला सकती है: जरूर घर में रखें
आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय और टोनिक बताने जा रहे है जिनका इस्तेमाल कर आप अपने मस्तिष्क को कंप्यूटर से भी तेज बना सकते हो।

1. हल्दी

भारत के हर घर में प्रयोग होने वाली हल्दी न केवल कैंसर के इलाज में अचूक औषधि है बल्कि यह दिमाग को भी स्वस्थ रखने में मदद करती है।

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के अनुसार, हल्दी में कुरकुमीन नामक एक रसायन पाया जाता है जो की दिमाग की मृत या निष्क्रिय कोशिकाओं को सक्रीय करने में सहायक होता है।

2. दालचीनी

कहने को दालचीनी एक सिर्फ एक मसाला है लेकिन ये एक बहुत बढ़िया जड़ी बूटी भी है।

यदि रात को सोने से पहले नियमित रूप से एक चुटकी दालचीनी का पाउडर शहद के साथ मिलाकर ले तो इससे मानसिक तनाव में राहत मिलती है और दिमाग भी तेज होता है।

3. शंख पुष्पी

दिमाग की शक्ति को बढ़ाने के लिए शंखपुष्पी के बहुत ही बढ़िया औषधि है।

दिमाग को तेज करने के लिए रोज आधा चम्मच शंख पुष्पी को एक कप गरम पानी में मिला कर लें।

यह दिमाग में रक्त का सही संचार करती है जिससे याद करने की क्षमता और सीखने की क्षमता को भी बढ़ाती है।

4. ब्राह्मी

बाह्मी दिमाग तेज करने वाली सबसे उत्तम औषधियों में एक है।

इसके नियमित प्रयोग से स्मरण शक्ति याद्दास्त बढती है।

एक चम्मच शहद और आधा ब्राह्मी गर्म पानी में मिलाकर पीने से दिमाग तेज होता है।

5. तुलसी

तुलसी एक जानी-मानी एंटीबायोटिक जड़ी बूटी है।

इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट तत्व मष्तिष्क और हृदय में रक्त के प्रवाह को बेहतर करते है।

इसलिए तुलसी को एक उत्तम औषधि के रूप में जाना जाता है।

27/02/2017

ध्वनि, मंत्र और संगीत में क्या अंतर है
ध्वनियाँ मन्त्रों और संगीत का मूल हैं। फिर किन नियमों के आधार पर ध्वनियों से मन्त्र और संगीत बनते हैं। आइये जानते हैं।

प्रश्न : मैं संगीत का विद्यार्थी हूं। हम विश्वविद्यालयों में संगीत बनाने के नुस्खे और तरीके सीखते हैं। मगर कोई व्यक्ति अंदर से संगीत कैसे सीख सकता है?

सद्‌गुरु : संगीत ध्वनियों की एक सुखद व्यवस्था है। हम संगीत में शब्द जोड़ सकते हैं। इन शब्दों का अर्थ होता है मगर अर्थ अस्तित्व परक नहीं होते।

अर्थों को हम बनाते हैं। उनका बस मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व होता है।

ध्वनि पैटर्न को ठीक से इस्तेमाल करने पर उसका जबर्दस्त असर हो सकता है क्योंकि भौतिक अस्तित्व मुख्य रूप से स्पंदनों या ध्वनियों का एक जटिल मिश्रण है।

उनकी अस्तित्व संबंधी कोई सच्चाई नहीं है। मगर ध्वनि अस्तित्व संबंधी हकीकत हैं।

वह ऐसा स्पंदन है, जो मौजूद होता है।

इन स्पंदनों की हर तरह की व्यवस्था का इंसानी प्रणाली और हमारे माहौल पर अलग-अलग तरह का प्रभाव पड़ता है।

यह दिखाने के लिए कुछ प्रयोग किए गए कि किस तरह एक खास तरह का संगीत बजाने पर गायें ज्यादा दूध देती हैं।

यह सिर्फ उसका एक बेवकूफाना प्रयोग है मगर वास्तव में यह एक सच्चाई है।

ध्वनि पैटर्न को ठीक से इस्तेमाल करने पर उसका जबर्दस्त असर हो सकता है क्योंकि भौतिक अस्तित्व मुख्य रूप से स्पंदनों या ध्वनियों का एक जटिल मिश्रण है।

संगीत मन्त्रों का संशोधन है
अगर आप ध्वनियों को एक खास पैटर्न में व्यवस्थित करें, तो उसका एक खास असर होता है।

इस संस्कृति में हमने बहुत से अलग-अलग पैटर्न खोजे और मंत्रों को बनाया।

मंत्र ध्वनियों की तकनीकी रूप से सटीक व्यवस्था है मगर जरूरी नहीं है कि वह सुरुचि की दृष्टि से सुखद हो।

मंत्र में सौंदर्य के लिहाज से आनंद के बनिस्पत तकनीकी शुद्धता का महत्व अधिक होता है।

भारतीय शास्त्रीय संगीत मंत्रों का एक संशोधन है, जहां सौंदर्यबोध और सुरुचि भी ध्वनियों की तकनीकी व्यवस्था जितने ही अहम होते हैं।

भारतीय शास्त्रीय संगीत, संगीत का एकमात्र ऐसा रूप है, जो एक फार्मूले पर आधारित होता है, जिसका कई अलग-अलग क्रमों और मिश्रणों में प्रयोग किया जा सकता है। संगीत के बाकी सभी रूप सिर्फ सुनने में अच्छा लगने के लिए बजाए जाते हैं।

संगीत एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें सीखना शुरू करने पर शुरुआत में वह संख्याओं की तरह महसूस होता है।

कुछ समय बाद, वह ज्यामितिय पैटर्न की तरह लगता है। उनमें तकनीकी शुद्धता नहीं होती।

मगर भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ – खास तौर पर दक्षिणी भारत में – बहुत गणित जुड़ा होता है।

संगीतकार हमेशा गिनती करता रहता है, और आखिरकार गिनती किए बिना गिनना सीख जाता है क्योंकि संगीत का पूरा ढांचा एक गणितीय फार्मूले पर बना है।

जब मैं गणितीय फार्मूला कहता हूं, तो हमें समझना चाहिए कि पूरे भौतिक ब्रह्मांड को गणितीय फार्मूले में समेटा जा सकता है।

आधुनिक विज्ञान यही करने की कोशिश कर रहा है। गणित हमारी बनाई हुई कोई चीज नहीं है। गणित सृष्टि का आधार है।

यह भौतिक सृष्टि की व्याख्या करने का एक तरीका है।

तभी सामने आने वाले किसी नए सिद्धांत के लिए गणितीय आधार की उम्मीद की जाती है।

वरना उसे वास्तविक नहीं माना जाता क्योंकि ब्रह्मांड में एक बुनियादी ज्यामिति है।

संगीत एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें सीखना शुरू करने पर शुरुआत में वह संख्याओं की तरह महसूस होता है।

कुछ समय बाद, वह ज्यामितिय पैटर्न की तरह लगता है। उसके बाद वह किसी नदी की तरह बहता है, जो इस पर निर्भर करता है कि आपका उस पर कितना अधिकार है।

जीवन का संगीत
इसे आप अपने अंदर से कैसे पा सकते हैं?

जिसने भी सबसे पहले इस पूरी संगीतमय प्रक्रिया को शुरू किया, उसके पास कोई टेपरिकार्डर या सिखाने वाला नहीं था।

किसी ने उसे अपने भीतर घटित होने दिया। घटित होने दिया का मतलब है कि अगर आप मौन हो जाएं– मौन से मेरा मतलब सिर्फ आपका मुंह बंद करने से नहीं है।

अगर आपके दिमाग में कोई हलचल नहीं होगी, तो आप जीवन का संगीत सुन सकते हैं।

इसकी वजह यह है कि इंसानी तंत्र की एक खास बनावट और पैटर्न है।

उसमें एक खास ज्यामिति होती है और उससे एक वाइब्रेशन जुड़ा होता है।

इसी तरह अगर आप किसी पेड़ को देखें, तो उससे एक खास वाइब्रेशन जुड़ा होता है। अगर आप उस स्पंदन को महसूस कर सकें, तो हम इसे ‘ऋतंभरा प्रज्ञा’ कहते हैं।

ऋतंभरा प्रज्ञा का मतलब है कि आप आकार और ध्वनि के संबंध के प्रति जागरूक हो जाते हैं।

अगर आप पेंट करना चाहते हैं, तो आपको एक खाली कैनवास की जरूरत होती है।

इसी तरह, मौन होने पर ही ध्वनि की संभावना होती है।अगर आप किसी आकार से ध्वनि का बोध कर सकते हैं, तो इस आकार का वर्णन करने के लिए अलग-अलग तरीकों से इस ध्वनि का प्रयोग करना सीख जाते हैं और सिर्फ एक ध्वनि का उच्चारण करते हुए इस आकार को छू और महसूस कर सकते हैं।

इस ध्वनि की तकनीकी अभिव्यक्ति को मंत्र कहा जाता है। जब यही सौंदर्य के साथ अभिव्यक्त होता है तो उसे संगीत कहा जाता है। मगर सबसे महत्वपूर्ण चीज यह है कि अगर आप अंदर से सीखना चाहते हैं, तो आपको मौन होना होगा।

अगर आप संगीत को जानना चाहते हैं, तो संगीत की ओर मत देखिए। आपको मौन को जानना चाहिए।

अगर मौन नहीं होगा, तो ध्वनि बस निरर्थक चीजों का एक घालमेल है। अगर आप पेंट करना चाहते हैं, तो आपको एक खाली कैनवास की जरूरत होती है। इसी तरह, मौन होने पर ही ध्वनि की संभावना होती है।
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