Kshatriya Vikas Sangthan

Kshatriya Vikas Sangthan Kshatriya Vikas Sangthan, Nangloi New Delhi

क्षत्रिय विकास संगठन, नांगलोई, नई दिल्ली क्षत्रिय समाज एवं सम्पूर्ण भारतीय समाज के विकास हेतु एक समाजिक संस्था के रुप मे अपना एक सम्मान प्राप्त कर निरन्तर अग्रसर हो रहा है और साथ ही हमारे समाज को और अधिक सुरक्षित और स्वस्थ बनाने के लिए भी काम कर रहा है।


संगठन अपने प्रगति रथ को निरन्तर विकास के पथ पर गतिमान बनाए हुए है। जिससे समाज के प्रत्येक सदस्य लाभान्वित हो रहे है। साथ ही समाज के हर वर्ग में

क्षत्रिय बन्धुओं की पहचान बनी है। जबकि संगठन से पहले, क्षेत्र मे रहने वाले क्षत्रिय बन्धु एक दूसरे से परिचित भी नही थे। जिसके कारण अन्य प्रदेशों से आकर दिल्ली में रहते हुए सुख-दुख के समय अकेलापन महसूस करते थे, किन्तु संगठन के निरन्तर अथक प्रयास से आज नांगलोई क्षेत्र मे एक हजार से ज्यादा क्षत्रिय परिवार एक दूसरे से परिचात्मक रुप से जुड़ चुके है।

”संघे शक्ति कलयुगे“ को चरितार्थ करता यह संगठन अब दिल्ली, एन.सी.आर. में निवासित क्षत्रिय परिवार तक इस स्मारिका के माध्यम से जुड़ने और जोड़ने की तैयारी कर रहा है। हमारा महान उद्देश्य ही हमारे प्रयास को साकार करने की ओर अग्रसर है। हमारा लक्ष्य है कि हमारा क्षत्रिय विकास संगठन अपने नाम के अनुसार समस्त क्षत्रिय परिवार को एक विकास के पथ पर सामुहिक सहयोग भावना से प्रेरित कर आगे बढ़े और बढ़ाये। संगठन सफलता – असफलता का विचार किए बिना हमेशा कोशिश करती रही है कि क्षत्रिय समाज को एक परिवार के रुप मे एकजुट किया जाये।
हमारे प्रयासो को समाज के लोगो ने भी सराहा है, तथा आप सभी ने संगठन के आजीवन सदस्य बनकर संगठन की संख्या मे निरन्तर वृद्धि की है। संगठन अपने सामाजिक दायित्यों का भली-भाँति निर्वाह कर रहा है। समाज मे वरिष्ठ नागरिको का सम्मान, शिक्षा के क्षेत्र मे गरीब परिवार के बच्चों को सहयोग, निर्धन कन्याओ का विवाह भी, साथ ही बेरोजगार परिवार युवको को आर्थिक सहायता प्रदान कर विकासोन्मुखी, मार्ग पर अग्रसर करना हमारा प्रयास रहता है।

संगठन मेधावी छात्र@ छात्राओं को पुरुष्कृत एवं प्रोत्साहित भी करके उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है। नशामुक्ति, भ्रूण हत्या जैसे विषयो पर चर्चा के माध्यम से प्रचार-प्रसार कर जागरुकता का कार्य भी सम्पादित किया जा रहा है। संगठन की प्रगति मे सहयोग करने वाले जो हमसे विछुड़ गये उन्हें श्रद्धांज्जलि अर्पित करते है।
ईश्वर हमारे आराध्य देवी – देवता, क्षत्रिय विकास संगठन को जब तक सूरज, चाँद रहे, निरन्तर विकास के पथ पर अग्रसर करें।

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत(एक राजपूत प्रेरक कथा)मेवाड़ की अरावली पहाड़ियों के बीच बसा था एक छोटा-सा दुर्ग। वहाँ क...
29/01/2026

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत
(एक राजपूत प्रेरक कथा)

मेवाड़ की अरावली पहाड़ियों के बीच बसा था एक छोटा-सा दुर्ग। वहाँ के किले की दीवारें ऊँची थीं, पर उससे भी ऊँचा था वहाँ के राजपूतों का आत्मसम्मान।

इस दुर्ग का युवा सेनापति था वीर सिंह राठौड़। बचपन से उसने तलवार चलाना सीखा, पर उससे भी अधिक उसने सीखा था — हार न मानना।
एक दिन शत्रु सेना ने किले को चारों ओर से घेर लिया। सेना संख्या में कई गुना अधिक थी। दरबार में कुछ सरदारों ने कहा—

“सेनापति, शत्रु बहुत शक्तिशाली है। शायद आज युद्ध से बचना ही बुद्धिमानी होगी।”

वीर सिंह शांत खड़ा रहा। उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि ज्वाला थी।
उसने धीरे से कहा—

“राजपूत का युद्ध तलवार से नहीं, पहले मन से जीता जाता है।
मन के हारे हार है… और मन के जीते जीत।”

रात को उसने अपनी छोटी-सी सेना को इकट्ठा किया। कोई झूठा उत्साह नहीं, कोई खोखला भाषण नहीं। बस सच—

“हम कम हैं, यह सत्य है।
शत्रु बलवान है, यह भी सत्य है।
पर हमारे मन में यदि भय नहीं, तो हमें कोई हरा नहीं सकता।”

सुबह युद्ध आरंभ हुआ।
शत्रु को लगा था कि यह आसान जीत होगी।
पर उन्हें नहीं पता था कि वे राजपूतों से लड़ रहे हैं —
जिनके लिए हार शरीर की नहीं, मन की होती है।

घोड़े टकराए, तलवारें चमकीं।
राजपूत एक-एक कर गिरते रहे, पर पीछे नहीं हटे।
हर वार के साथ उनकी गर्जना थी—

“जय भवानी!”

शत्रु सेना, जो संख्या में अधिक थी, धीरे-धीरे टूटने लगी।
क्योंकि उनके मन में जीत का विश्वास नहीं था —
और राजपूतों के मन में हार का विचार ही नहीं था।

अंततः शत्रु पीछे हट गया।
किला बच गया, पर उससे बड़ा बचा — राजपूताना गौरव।

युद्ध के बाद एक सैनिक ने पूछा—

“सेनापति, हम कैसे जीत गए?”

वीर सिंह ने मुस्कुरा कर उत्तर दिया—

“क्योंकि हमने युद्ध शुरू होने से पहले ही अपने मन को जीत लिया था।”

सीख (राजपूतों के लिए विशेष संदेश)

राजपूत की असली शक्ति तलवार नहीं, आत्मबल है

परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत हों,
यदि मन अडिग है तो विजय निश्चित है

इतिहास गवाह है —
राजपूत हारे नहीं, उन्होंने बस बलिदान दिया

🔥 मन के हारे हार है, मन के जीते जीत —
और राजपूत कभी मन से नहीं हारता। 🔥

06/10/2024

सनातन बोर्ड

06/10/2024

श्री राम धर्मशाला- क्षत्रिय विकास संगठन दिल्ली- शस्त्र पूजन कार्यक्रम एवं दशहरा पारिवारिक मिलन समारोह ।

क्षत्रिय विकास संगठन की श्री राम धर्मशाला में शस्त्र पूजन एवं दशहरा पारिवारिक मिलन समारोह में सम्मिलित हुए ।
06/10/2024

क्षत्रिय विकास संगठन की श्री राम धर्मशाला में शस्त्र पूजन एवं दशहरा पारिवारिक मिलन समारोह में सम्मिलित हुए ।

24/09/2024

गुजरात के अहमदाबाद में वंदे भारत ट्रैन में एक लैपटॉप चोरी होता है

जब रेलवे पुलिस जांच करती है तब CCTV में उन्हें एक व्यक्ति लैपटॉप का बैग ले जाता हुआ दिखता है

पुलिस ने जिस मोबाइल नंबर से सीट बुक हुई थी उस नंबर को सर्विलेंस पर डाल दिया

इसके बाद चोर की लोकेशन दिल्ली की आती है, फौरन पुलिस की एक टीम दिल्ली के लिए निकलती है और जब ये टीम वहां की लोकल पुलिस के साथ उस होटल में पहुंचती है तब हर्षित चौधरी बना हुआ ये व्यक्ति शराब पी रहा था

पुलिस जैसे ही इसे पकड़ती है तो यह कहता है कि मैं सेना में मेजर हूँ और यह बैग गलती से मेरे पास आ गया था

सेना का नाम सुनकर पुलिस थोड़ा झिझकती है पर CCTV में यह व्यक्ति साफ साफ चोरी करता दिख रहा था तो पुलिस इसकी पूछताछ करना शुरू करती है तब यह सेना का एक फर्जी ID कार्ड पुलिस को देता है और बार बार अपना नाम हर्षित चौधरी बताता है

इसके बाद पुलिस इसकी ड्यूटी की जगह पूछती है और इसके बताये पोस्टिंग की जगह पर जब सेना से पता करती है तब असली खुलासा होता है

वास्तव मे इस व्यक्ति का असली नाम मोहम्मद शाहबाज खान था जो फर्जी तौर पर सेना का मेजर हर्षित चौधरी बना हुआ था, इसकी पहचान नकली होने के साथ साथ काफी डॉक्युमेंट भी नकली थे

मोहम्मद शाहबाज खान अलीगढ़ का रहने वाला एक शादी शुदा व्यक्ति है जिसके 2 बच्चे भी थे, यह 2015 में सेना का सिपाही था मगर अनुशासन हीनता के चलते इसे फौज से निकाल दिया गया था और फिर ये चोरी चकारी करने लगा

अभी यह सब जांच चल ही रही थी कि पुलिस के पास इसके जब्त मोबाइल में एक महिला का फ़ोन आता है और उसके बाद एक हैरान करने वाला कांड और सामने आता है

इस आदमी ने अपनी इस हिन्दू पहचान और मेजर की फर्जी पहचान के सहारे 100 से अधिक हिन्दू महिलाओं के साथ शादी डॉट कॉम के जरिये संपर्क किया जिसमें से 40 से 50 को ये आमने सामने मिल चुका था इसी नकली पहचान के साथ और उनमें से कई के लाखो रुपये लूट चुका था

पुलिस ने खुलासा किया है कि बड़े घरों की नौकरीपेशा अब तक कम से कम 24 लड़कियों के साथ यह शारीरिक संबंध बना चुका है जबकि एक लड़की के साथ LJ करके इसने मंदिर में शादी कर ली और उसे अलीगढ़ के ही एक मकान में किराए पर रखा हुआ था

ये उसी लड़कीं का फ़ोन था जो खुद को इसकी पत्नी बता रही थी

अब ये अहमदाबाद जेल में है और इससे कड़ी पूछताछ की जा रही है साथ मे यह भी जांच की जा रही है कि इसने और क्या क्या किया है

इसने जिस लड़की से पहचान छुपा कर शादी की उसने भी इसके खिलाफ अलीगढ़ के ही एक थाने में FIR करवा दी है, उसने अपनी FIR में मारपीट और LJ सहित धर्मांतरण के दबाव का मामला दर्ज करवाया है

इसके अलावा जो नकली पहचान इसने बनाई थी वह भरतपुर, राजस्थान के किसी हर्षित जादौन नाम के व्यक्ति की थी जिससे पुलिस ने संपर्क किया जिसके बाद अब उसने भी मोहम्मद शाहबाज खान पर FIR दर्ज करवा दी है

इसके द्वारा कितनी महिलाओं का शोषण और किया गया है इसकी जांच अभी जारी है और यह संख्या बढ़ भी सकती है

न जाने कितनी लड़कियों की जिंदगी इसने बर्बाद कर दी

बहुत ज्यादा सावधान रहें।
सतर्क रहें। धन्यवाद 🙏

01/01/2024
सनातन बोर्डअध्यक्षडा गोविन्द शाही कौशिक
01/01/2024

सनातन बोर्ड
अध्यक्ष
डा गोविन्द शाही कौशिक

17/11/2023

सनातन बोर्ड
सभी का स्वागत करता है

Address

111, Shiv Vihar, Nilothi Mor, Shivram Park, Nangloi
Delhi
110041

Telephone

+919350998782

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