01/05/2026
"घमंड से परमेश्वर घृणा करता है।"
"सब मन के घमण्डियों से यहोवा घृणा करता है; मैं दृढ़ता से कहता हूं, ऐसे लोग निर्दोष न ठहरेंगे।"
- नीतिवचन 16:5
ऊपर आयात में लिखा है "सब मन के घमंडी" घमंड भी कई प्रकार के होते है। किसी को अपनी सुन्दरता का, किसी को शिक्षा का, किसी को दौलत का,किसी को खानदान या संस्कृति का, किसी को बड़े लोगो के साथ कनेक्शन का, इत्यादि.... यह सब शारीरिक या सांसारिक घमंड़ की श्रेणी में आते है...
फिर आत्मिक घमंड हैं जो परमेश्वर को और बुरा लगता है जैसे मै तुझ से ज्यादा अभिषिक्त, मुझे तुझ से ज्यादा प्रकाशन और वचन का ज्ञान, मेरे पास ज्यादा आत्मिक वरदान, मेरी सेवकाई तुझ से ज्यादा सफल पॉपुलर, और तो और अब अपने को बहुत आत्मिक कहने वाले लोग भी सोशल मीडिया पर ज्यादा व्यूज, ज्यादा लाइक्स और शेयर्स और तुझ से ज्यादा सब्सक्राइबर्स के ऊपर घमड़ की तुरही बजाते नही थकते काश हम परमेश्वर के आत्मा के द्वारा अपने अंदर के इस फरीसीपन के खमीर से नजात पा सके। मन में किसी भी तरह के घमंड को रखने वाले परमेश्वर को कभी पसंद नहीं होते ।
"घमंड से चढ़ी हुई आंखों से यहोवा को घृणा होती है। मन के घमंड ने ही सबसे सुंदर स्वर्गदूत को शैतान बना दिया।
घमंड के स्थान पर स्तुति और धन्यवाद ही सोहता है।
"मनन् योग्य बातें"
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि हम भी उन बातों से घृणा रखें, जिनसे यहोवा घृणा करता है। यकीनन प्रेम करता है पर उसके चरित्र में उन बातों के लिए घृणा भी है जो उसके चरित्र की विपरीत है, हमे समझना होगा, खुदा से ज्यादा पवित्र या प्रेमी में और आप नही हो सकते, हमे भी ऐसी बातों से घृणा रखनी है जो हमारे परमेश्वर को पसंद नही है।
तब हम अपने मन में यहोवा की निकटता को महसूस कर सकेंगे। घमंडी को हम कभी अच्छे, और कभी बुरा करके ट्रीट नही करना चाहिये।
घृणास्पद बातों से हमें मन से घृणा करना चाहिये। यह परमेश्वर के द्वारा हमारे मनों में डाला जानेवाला भाव होता है।
इसलिए वही दृढ़ता दर्शाएं, जो परमेश्वर में पाई जाती है।
हम अनर्थ बातों के प्रति लचीले हो कर दोषी न ठहरें। परमेश्वर हम पर दया करे ,कि हम हर मन के घमंड से सदा दूर रहें, और नम्रता से परमेश्वर के भाव को अपना कर, उस की सेवा करते रहें।
आमीन!!
Rev. Raj Babu Jha
मोक्ष-धाम आराधना सभा
Moksha-Dham Aradhana Sabha -TCSI