27/05/2026
भारत प्रारंभ से एक राष्ट्र रहा है। भले ही राज्य अलग होंगे, राज्य के अपने नीति नियम होंगे। लेकिन हमारी समान भूमि, समान इतिहास, समान मान्यता, समान परंपरा, समान संस्कृति रही है और इसीलिये हम अपने ध्येय में हिन्दू राष्ट्र का पुनर्निर्माण, ऐसा कहते हैं।
इसका अर्थ यही है कि पहले ही यह एक तेजस्वी हिन्दू राष्ट्र था। कालान्तर में परिस्थिति बदली, मूल्यों का पतन हुआ, अब अपने राष्ट्र को पुनः तेजस्वी बनाना है, विकसित बनाना है, परम वैभव संपन्न बनाना है, विश्वगुरु भारत बनाना है।
#संघ_शतकम्