Pinakpani Maha Rudra

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SHIV is so kind to us.

02/08/2026
15/02/2026

Happy Maha ShivRatri to all of Mahakal Devotee
🕉 Namah Shivai

Jai Shree Kal Bhairav.......Happy Kal Bhairav Jayanti.....
12/11/2025

Jai Shree Kal Bhairav.......
Happy Kal Bhairav Jayanti.....

ऋषि कश्यप के कुल पर चर्चाऋषि कश्यप महर्षि मरीचि के पुत्र थे।उनकी माता का नाम देवी कल्पना था। ऋषि कश्यप एक असाधारण तपस्वी...
21/08/2025

ऋषि कश्यप के कुल पर चर्चा
ऋषि कश्यप महर्षि मरीचि के पुत्र थे।
उनकी माता का नाम देवी कल्पना था। ऋषि कश्यप एक असाधारण तपस्वी और योगी थे। देवता, दानव, मनुष्य, पशु, पक्षी - सभी की उत्पत्ति उन्हीं से हुई। इसीलिए उन्हें महाप्रजापति कहा जाता है। उन्होंने अनेक पत्नियाँ धारण कीं।
प्रत्येक पत्नी एक जीव की उत्पत्ति का कारण है।
ये पत्नियाँ प्रजापति दक्ष की पुत्रियाँ थीं। अर्थात् दक्षप्रजापति की पुत्रियों ने कश्यप से विवाह किया।
🌸 अदिति
अदिति प्रजापति दक्ष की पुत्री थीं। अदिति देवताओं की माता थीं। उनकी संतानें आदित्य हैं।
आदित्यों में प्रमुख देवता इंद्र हैं। इसके अतिरिक्त सूर्य, वरुण, मित्र आदि भी हैं। अदिति असीम दया की प्रतीक हैं। उनके गर्भ से उत्पन्न देवता सदैव धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहते हैं। अदिति भगवान विष्णु की भक्त भी थीं। उन्हें देवताओं की माता के रूप में पूजा जाता है।
🌸दिति
दिति दैत्यों की माता थीं। वे अदिति की बहन हैं। उनकी संतानें दैत्य हैं। हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु उनके दो महान पुत्र हैं। हिरण्यकशिपु प्रह्लाद के पिता थे। अतः प्रह्लाद कश्यप के पौत्र भी हैं।
दिति के गर्भ से अनेक दैत्यों का जन्म हुआ। एक बार दिति ने कश्यप की तपस्या भंग कर उनसे संतान प्राप्ति का आशीर्वाद माँगा, लेकिन शाम हो चुकी थी, इसलिए उन्होंने कहा कि यदि आप मुझे अभी आशीर्वाद देंगे, तो आपको एक दैत्य पुत्र की प्राप्ति होगी। दिति ने ऐसा ही कहा। यद्यपि कश्यप मान गए, किन्तु तपस्या भंग होने के कारण उनके आशीर्वाद से एक दैत्य पुत्र का जन्म हुआ।
🌸दनु
दनु दक्ष की पुत्री थीं। उनकी संतानें दैत्य थीं।
भृष्पर्ण, एकचक्र, शम्भरा आदि दैत्य दनु की संतानें थीं।
दनु वंश के दैत्य देवताओं के सनातन शत्रु थे। वे प्रायः स्वर्ग पर आक्रमण करते थे। पुराणों में दैत्यों को शक्तिशाली किन्तु अधर्मी बताया गया है। "राक्षस" शब्द दनु से बना है। दनु की संतानें विशाल आकार और महान बलवान कही जाती हैं। महाभारत में दनु वंश के योद्धाओं का उल्लेख मिलता है। अतः दनु अंध शक्ति का स्रोत है।
🌸कद्रू
कद्रू सर्पों की माता थीं। उन्होंने असंख्य सर्पों को जन्म दिया।
वासुकि, तक्षक आदि उनकी संतानें थीं। कद्रू ने एक बार बिनता से घोड़े की पूँछ के रंग को लेकर शर्त लगाई थी।
वह छल से जीत गई। इसमें बिनता दासी बन गई। कद्रू की संतानों ने सर्पों का राज्य स्थापित किया।
नागों का निवास पाताल है। कद्रू नाग जाति की माता थीं।
🌸विनता
विनता गरुड़ और अरुण की माता थीं।
वह कद्रू की बहन हैं। एक बार गलती से उन्होंने समय से पहले ही अंडा फोड़ दिया।
फिर अरुण का जन्म हुआ। बाद में, उन्होंने गरुड़ को जन्म दिया। गरुड़ देवपक्षी और विष्णु के वाहन हैं।
गरुड़ नागों के शत्रु हैं। इसलिए कद्रू की संतानों से शत्रुता शुरू हुई। कद्रू के छल से विनता दास बन गई।
बाद में, गरुड़ ने अपनी माता को मुक्त कर दिया।
🌸ताम्रा
ताम्रा पक्षियों की माता थीं। उनकी संतान विभिन्न प्रकार के पक्षी थे। गिद्ध, बाज, मोर आदि। उन्होंने दिव्य प्राणियों को जन्म दिया।
ताम्रा की संतानें प्रकृति के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
पुराणों में उनके वंशजों में अनेक पक्षियों का उल्लेख मिलता है। ताम्रा से विभिन्न प्रकार के पक्षियों का प्रसार हुआ।
उनके वंशजों में गिद्धों को प्रायः अशुभ माना जाता है। इसलिए, ताम्रा आकाशवासियों की माता हैं।
🌸सुरवी
सुरवी धेनुमाता की माता थीं। वे गायों और ग्वालों की माता हैं। गायों को "कामधेनु" कहा जाता है।
कामधेनु असीमित दूध और धन देने में सक्षम है।
सुरवी से ही चरवाहे संसार में आते हैं।
हिंदू धर्म में गायों को पवित्र माना जाता है। सुरवी की पूजा स्वर्ग में भी की जाती है। कहा जाता है कि उसके दूध से अमृत उत्पन्न होता है।
वह समृद्धि की प्रतीक है। इसलिए, उसकी पूजा सर्वत्र की जाती है।
🌸 इला
इला पेड़-पौधों की माता है। उसके गर्भ से पौधे जन्म लेते हैं। इला से ही अन्न उत्पन्न होता है। वह पृथ्वी पर जीवन का मुख्य स्रोत है।
वह कृषि की प्रतीक है। यदि वनस्पति नष्ट हो जाए, तो मानव सभ्यता जीवित नहीं रह सकती। इसलिए, इला जीवन की रक्षक है।
पौराणिक कथाओं में, उसे वन की देवी कहा जाता है। वह प्रकृति की प्रमुख प्रतीक है।
🌸 मुनि
मुनि से अप्सराएँ उत्पन्न होती हैं। अप्सराएँ देवताओं की नर्तकियाँ होती हैं। वे देवताओं को प्रसन्न करती थीं।
मुनि सौंदर्य के प्रतीक थे। अप्सराएँ अक्सर ऋषियों की तपस्या भंग करती थीं। जैसे मेनका, उर्वशी, रंभा। ये सभी मुनि की पुत्रियाँ हैं। मुनि से उत्पन्न अप्सराएँ देवताओं का श्रृंगार हैं। उनका सौंदर्य अद्वितीय है। इसलिए, मुनि स्वर्गीय सौंदर्य की जननी हैं।
🌸 अरिष्टा
अरिष्टा गंधर्वों की माता हैं। गंधर्व देवताओं के गायक हैं।
वे संगीत और काव्य के देवता हैं। अरिष्टा की संतानें स्वर्ग के संगीतकार हैं। वे गाकर देवताओं को प्रसन्न करते हैं।
गंधर्व स्वर्गीय अनुष्ठानों का हिस्सा हैं। वे सौंदर्य और संगीत के प्रतीक हैं। अरिष्टा संगीत शक्ति का स्रोत है।
🌸 क्रोधवशा
क्रोधवशा राक्षसों और भूतों की माता थी।
उसकी संतानें भयानक स्वभाव की हैं। राक्षस अंधकार में विचरण करते हैं। राक्षस मनुष्यों के शत्रु हैं। क्रोधी की संतानें विनाशकारी होती हैं। वे भय के प्रतीक हैं। राक्षस शवों को खाते हैं। राक्षस देवताओं और मनुष्यों के विरोधी हैं।
क्रोधी दुष्ट शक्ति का प्रतीक है। उसके नाम में क्रोध व्यक्त किया जाता है।
🌸 खस
खस यक्षों और राक्षसों की माता थीं।
यक्ष धन और रत्नों के रक्षक होते हैं। वे कुबेर के अनुयायी हैं।
खस की संतानें दो समूहों में विभाजित हैं। एक समूह अच्छा (यक्ष) है।
दूसरा समूह बुरा (राक्षस) है। यक्ष कल्प वृक्ष और धन की रक्षा करते हैं। राक्षस मानव-विरोधी होते हैं। खस दो विपरीत शक्तियों का स्रोत है।
ऋषि कश्यप की कई पत्नियाँ थीं।
प्रत्येक पत्नी ने एक अलग जाति को जन्म दिया।
देवता, दानव, गंधर्व, अप्सराएँ, यक्ष, राक्षस।
फिर, पशु, पक्षी, गाय, पौधे।
सब कुछ उनके वंश से उत्पन्न होता है।
इसीलिए उन्हें सभी जीवों का पिता कहा जाता है।
पुराणों में कश्यप का महत्व अपार है।
देवताओं और दानवों के बीच युद्ध की मूल उत्पत्ति उनके परिवार से है।
अदिति और दिति का संघर्ष देवताओं और दानवों का संघर्ष है।
कद्रू और बिनता का संघर्ष नाग और गरुड़ का संघर्ष है।
इसलिए, कश्यप का परिवार ब्रह्मांड का प्रतिबिंब है।
प्रत्येक पत्नी एक शक्ति का प्रतीक है।
अदिति - धर्म और प्रकाश।
दिति - अधर्म और अंधकार।
दनु - राक्षसी शक्ति।
कद्रू - सर्प शक्ति।
बिनता - गरुड़ शक्ति।
ताम्रा - पक्षी शक्ति।
सुरवि - धेनु शक्ति।
इला - वृक्ष शक्ति।
मुनि - सौंदर्य शक्ति।
अरिष्ट - संगीत शक्ति।
क्रोधवशा - दुष्ट शक्ति।
खस - द्वैत शक्ति।
इसलिए, कश्यप को ब्रह्मांड के रचयिता के रूप में पूजा जाता है। ऋग्वेद में भी कश्यप का उल्लेख है। वे तपस्या की शक्ति से संपन्न थे।
देवता भी उनके आश्रम में आते थे। वे महादेव और विष्णु के भक्त थे।

हनुमान के नौ अवतारों की जानकारी1) 🪷ग्यारहमुखी हनुमानहनुमान को शिव का ग्यारहवाँ रुद्र अवतार कहा जाता है। हनुमान ने युगों-...
09/08/2025

हनुमान के नौ अवतारों की जानकारी
1) 🪷ग्यारहमुखी हनुमान
हनुमान को शिव का ग्यारहवाँ रुद्र अवतार कहा जाता है। हनुमान ने युगों-युगों से बुरी शक्तियों और आसुरी शक्तियों का नाश करने में विशेष भूमिका निभाई है। हनुमान अपने भक्तों के लिए निर्भयता, शक्ति और ज्ञान के प्रतीक हैं।
🪷दैत्य कालका और उसका वरदान
त्रेता युग में कालका नाम का एक राक्षस था जिसके ग्यारह मुख थे। उसने घोर तपस्या की और ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया। जब कालका अमरता चाहता था, तो ब्रह्मा ने उसे वरदान देने से इनकार कर दिया, लेकिन एक शर्त पर वरदान दिया कि कालका का वध केवल उसके जन्मदिन (चैत्र पूर्णिमा) पर ही कोई ऐसा व्यक्ति कर सकता है जिसका ग्यारहवाँ मुख (11 मुख) हो। इस वरदान को प्राप्त करने के बाद, कालका ने स्वर्ग और पृथ्वी पर आतंक मचाना शुरू कर दिया, देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया और लोगों पर भयंकर अत्याचार किए।
🪷देवताओं द्वारा राम का स्मरण और राम के निर्देश
कालकर के अत्याचारों से तंग आकर देवताओं ने श्री विष्णु का स्मरण किया। उस समय श्री विष्णु राम के रूप में थे। देवताओं की प्रार्थना सुनकर श्री राम ने कहा कि इस राक्षस का वध करने की शक्ति हनुमान में ही सबसे अधिक है। श्री राम के निर्देश पर हनुमान ने यह दायित्व स्वीकार कर लिया।
🪷हाथी मुख
कालकर का वध करने के लिए हनुमान ने चैत्र पूर्णिमा के दिन अपना ग्यारहवाँ मुख धारण किया। यह ग्यारहवाँ मुख विशेष शक्ति का प्रतीक है।
1. वराह मुख - स्वास्थ्य और शक्ति।
2. नरसिंह मुख - मानसिक शक्ति और अदम्य साहस।
3. हयग्रीव मुख - ज्ञान और अच्छे कर्मों का आरंभ।
4. नाग मुख - सर्पों के भय और विष से मुक्ति।
5. रुद्र/शिव मुख - शिव शक्ति और संहार की शक्ति।
6. वानर (हनुमान) मुख - शत्रुओं पर विजय।
7. श्रीराम मुख - भक्ति, करुणा और विजय।
8. अग्नि मुख - रोग, शोक और बुरी शक्तियों से रक्षा।
9. गज/गणेश मुख - ज्ञान और बुद्धि।
10. गरुड़ मुख - नागदोष और बंधन से मुक्ति।
11. भैरव मुख - बुरी शक्तियों का विनाश।
🪷कालकर का वध
युद्धभूमि में, कालकर ने अपने ग्यारह मुखों की शक्ति का उपयोग करके एक भयानक आक्रमण किया। हनुमान ने भी अपने ग्यारह मुखों की शक्ति से युद्ध आरंभ किया। प्रत्येक मुख से अलग-अलग शक्तियाँ प्रकट हुईं, जिसके कारण हनुमान कालकर को शीघ्र ही पराजित करने में सक्षम हुए। अंततः हनुमान ने उसकी गर्दन पर वार करके उसका वध कर दिया। परिणामस्वरूप, देवताओं और लोगों को शांति प्राप्त हुई।
🪷एकादशमुखी हनुमान की पूजा के फल
एकादशमुखी हनुमान को शक्ति, साहस, यश, भय से मुक्ति और रोग-शोक से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। इनकी पूजा करने से शत्रुओं पर विजय, संकट से सुरक्षा और बुरी शक्तियों का नाश होता है। जीवन की चिंताओं को दूर करने और मानसिक शांति पाने के लिए हनुमान चरित या हनुमान कवच का पाठ विशेष रूप से प्रभावी है।
🪷एकादशमुखी हनुमान मंदिर
गुजरात के पोरबंदर में श्री पंचमुखी महादेव मंदिर में एक दुर्लभ ग्यारहमुखी हनुमान की मूर्ति है। यहां हनुमान के 22 हाथ और 11 मुख हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर में प्रार्थना करने से विशेष रूप से शत्रु भय, बुरी शक्तियों और विभिन्न बाधाओं से छुटकारा मिलता है।
मंत्र
ॐ ॐ एकादशवदनाय महाबलाय
वराह्नृसिंहायगुरुद्रघवाग्गनिगजगुरुभैरवरूपाय
सर्वशत्रुसंहारकाय ॥
🌸बंगाली उच्चारण
ॐ एकादशवदना महाबलाय
वराह-नृसिंह-हयग्रीव-नाग-रुद्र-हनुमान-राघव-अग्नि-गज-गरुड़-भैरवरूपय
सर्वशत्रु संघारकाय स्वाहा॥

🪷अर्थ
"मैं उन महान, शक्तिशाली ग्यारह मुख वाले हनुमान को प्रणाम करता हूं - जो वराह, नृसिंह, हयग्रीव, नाग, रुद्र, हनुमान, राघव, अग्नि, गज, गरुड़ और भैरव के रूप में हैं; जो सभी शत्रुओं का नाश करने वाले हैं। उनकी शक्ति और कृपा से, सभी भय, बुरी ताकतों और खतरों को दूर किया जा सकता है।"
2) पंचमुखी हनुमान (अहिरावण वध) की कहानी
🌸रावण की गुप्त रणनीति
रामायण के लंका कांड में जब रावण धीरे-धीरे श्री रामचन्द्र से पराजित होने लगा तो उसने मदद के लिए अहिरावण को बुलाया। अहिरावण पाताल लोक का स्वामी था, राक्षसों में एक शक्तिशाली जादूगर। वह अपने तंत्र-मंत्र और जादू के लिए प्रसिद्ध था।
🌸अहिरावण ने रावण से वादा किया था:
"मैं तुम्हारे शत्रुओं—राम और लक्ष्मण—का युद्धभूमि से अपहरण करके उन्हें ऐसी जगह ले जाऊँगा जहाँ से वे वापस नहीं आ पाएँगे।"
🌸अहिरावण का जादू
रात्रि में, जब पूरी वानर सेना थककर सो रही थी, अहिरावण राक्षस का रूप धारण करके लक्ष्मण और राम की शय्या पर गया।
राम के भक्त वानर उसे पहचान नहीं पाए। एक विचित्र जादू का प्रयोग करके, अहिरावण ने राम और लक्ष्मण को गहरी नींद में सुला दिया और उन्हें तुरन्त उठाकर पाताल लोक में गायब हो गया।
अहिरावण उन्हें पकड़कर अपने पूजा स्थल पर ले गया। यहाँ उसने देवी चंडी की पूजा की। उसका संकल्प था—
"इन राम और लक्ष्मण को देवी चंडी को भेंट स्वरूप अर्पित करके, मैं अमरता प्राप्त करूँगा।"

लेकिन अहिरावण की जान बचाने का एक राज़ था।
उसका जीवन पाँच दीपों से बंधा था।
ये पाँच दीप पाँच अलग-अलग दिशाओं में रखे गए थे: पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और ऊपर की ओर।
नियम था—इन पाँचों दीपों को एक साथ बुझाना होगा, अन्यथा अहिरावण नहीं मरेगा।
🌸हनुमान का प्रवेश
इस बीच, राम और लक्ष्मण को गायब देखकर पूरी वानर सेना भयभीत और भ्रमित हो गई।
श्री हनुमान तब ध्यान में बैठ गए और राम की दिशा देखने लगे। दिव्य दृष्टि से उन्होंने समझ लिया कि भगवान पाताल लोक में कैद हैं।
बिना एक क्षण भी विलंब किए, वे पाताल लोक के द्वार को तोड़कर नीचे प्रवेश कर गए।
🌸पंचमुखों का जन्म
हनुमान अहिरावण के किले में पहुँचे और अदृश्य शक्तियों से घिरा एक अजेय किला देखा।
तब उन्हें अहिरावण की जीवन रक्षक शक्ति—पाँच दीपों—का रहस्य पता चला।
लेकिन पाँच दीपों को एक साथ कैसे बुझाया जाए?
एक मुख से यह संभव नहीं है। तब हनुमान ने अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत किया और एक नया रूप धारण किया—
पंचमुखी हनुमान:
पूर्वी मुख - हनुमान: साहस और शक्ति का प्रतीक।
दक्षिणी मुख - नरसिंह: बुरी शक्तियों और मृत्यु का नाश करने वाला।
पश्चिमी मुख - गरुड़: विष और तंत्र-मंत्र का नाश करने वाला।
उत्तरी मुख - वराह: स्थिरता और पुनर्स्थापना की शक्ति।
ऊर्ध्वमुख - हयग्रीव: ज्ञान और बुद्धि का स्रोत।
ये पाँच मुख

ॐ नमः शिवाय
हर हर महादेव
जय भोलेनाथ

Happy Hanuman Jayanti To all of My Mahakal DevoteeJai Bajrangbali Jai Shree MahakalJai Shree Ram
12/04/2025

Happy Hanuman Jayanti

To all of My Mahakal Devotee

Jai Bajrangbali

Jai Shree Mahakal

Jai Shree Ram

Ten things to Do....And not to Do.. # 01.Please stop using the term "God fearing" - Hindus never ever fear God. For us, ...
22/01/2025

Ten things to Do....And not to Do..
# 01.
Please stop using the term "God fearing" - Hindus never ever fear God. For us, God is everywhere and we are also part of God. God is not a separate entity to fear.
It is integral.
# 02.
Please do not use the meaningless term "RIP" when someone dies. Use "Om Shanti", "Sadhgati" or "I wish this atma attains moksha/sadhgati /Uthama lokas". Hinduism neither has the concept of "soul" nor its "resting". The terms "Atma" and "Jeeva" are, in a way, antonyms for the word "soul".(to be understood in detail)

# 03.
Please don't use the word "Mythology" for our historic epics (Ithihaas) Ramayana and Mahabharata. Rama and Krishna are historical heroes, not just mythical characters.

# 04.
Please don't be apologetic about idol worship and say “Oh, that's just symbolic". All religions have idolatry in kinds or forms - cross, words, letters (calligraphy) or direction.
Also let's stop using the words the words 'idols', 'statues' or 'images' when we refer to the sculptures of our Gods.
Use the terms 'Moorthi' or 'Vigraha'. If words like Karma, Yoga, Guru and Mantra can be in the mainstream, why not Moorthi or Vigraha?

# 04.
Please don't refer to Ganesh and Hanuman as "Elephant god" and "Monkey god" respectively. You can simply write Shree Ganesh and Shree Hanuman.

# 05.
Please don't refer to our temples as prayer halls. Temples are "devalaya" (abode of god) and not "prarthanalaya" (Prayer halls).

# 06.
Please don't wish your children "black birthday" by allowing them to blow off the candles that are kept on top of the birthday cake. Don't throw spit on the divine fire (Agni Deva). Instead, ask them to pray: "Oh divine fire, lead me from darkness to light" (Thamasoma Jyotirgamaya) by lighting a lamp. These are all strong images that go deep into the psyche.

# 07.
Please avoid using the words "spirituality" and "materialistic". For a Hindu, everything is divine. The words spirituality and materialism came to India through evangelists and Europeans who had a concept of Church vs State. Or Science vs Religion. On the contrary, in India, Sages were scientists and the foundation stone of Sanatan Dharma was Science.

# 09.
Please don't use the word "Sin" instead of "Paapa". We only have Dharma (duty, righteousness, responsibility and privilege) and Adharma (when dharma is not followed). Dharma has nothing to do with social or religious morality. 'Paapa' derives from Adharma.

# 10.
Please don't use loose translation like meditation for "dhyana" and 'breathing exercise' for "Pranayama". It conveys wrong meanings. Use the original words.

Remember, the world respects only those who respect themselves!
🙏🙏🙏

Hanumanji ‘s Mother's name was  Anjani and Father's name was Kesari..🚩 This is the reason why hanuman ji is also known a...
11/11/2024

Hanumanji ‘s Mother's name was
Anjani and Father's name
was Kesari..🚩

This is the reason why hanuman ji is also known as “Kesari nandan”
and “Anjani sut”.

According to a version of the legend, Anjana was an apsara named Punjikastala, who was born on earth as a vanara princess due to the curse of a sage...

Anjana was married to Kesari, a vanara chief, and the son of Brihaspati..

Anjana was the mother of Hanuman. Being Anjana's son, Hanuman is also called Anjaneya or Anjanayar in the Tamil tradition...

There are several legends about the birth of Hanuman. Eknath's Bhavartha Ramayana (16th century CE) states that when Anjana was worshipping Vayu, King Dasharatha of Ayodhya was performing the ritual of Putrakameshti yagna in order to bear children. As a result, he received some sacred pudding (payasam) to be shared by his three wives, leading to the births of Rama, Lakshmana, Bharata, and Shatrughna. By divine ordinance, a kite snatched a fragment of that pudding and dropped it while flying over the forest where Anjana was engaged in her worship.

Vayu, the Hindu deity of the wind, delivered the falling pudding to the outstretched hands of Anjana, who ate it. Hanuman was born to her as a result..

Anjana and Kesari performed an intense prayer to Vayu to beget him as their child. Pleased with their devotion, Vayu granted the boon they sought.. Shaivites often consider Hanuman to be the eleventh incarnation of Shiva..🚩🔱

अंजनीपुत्र हनुमान 🚩🔱💪

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