17/03/2026
सफ़र में चलते-चलते जब मन ठहर जाता है, तब रास्ते भी बोलने लगते हैं।
रास्ते बताते हैं कि मंज़िल बाहर नहीं, भीतर कहीं छुपी होती है।
जो उस भीतर की शांति को छू ले, वही यात्रा का आनंद पा लेता है।
और तब समझ आता है — असली सफ़र अपने भीतर तक का है।