05/10/2026
मेरे राजनीतिक गुरु की स्मृति और हिंदुत्व सेवा का मेरा संकल्प
मेरे राजनीतिक गुरु, हिंदू रतन श्री कमलेश तिवारी जी, मेरे जीवन के उन महान व्यक्तित्वों में से एक थे, जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा। उनका सान्निध्य मेरे लिए केवल राजनीतिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके विचारों और संघर्षों ने मेरे जीवन की दिशा को भी प्रभावित किया।
जब वे इस संसार से विदा हुए, तो मेरे जीवन में एक ऐसा खालीपन आया जिसे शब्दों में व्यक्त करना मेरे लिए कठिन है। गुरु के जाने का दुःख भीतर तक महसूस हुआ। उस समय मैंने स्वयं को सार्वजनिक गतिविधियों से कुछ समय के लिए दूर कर लिया और मौन साधना का मार्ग अपनाया। यह मौन मेरे लिए केवल चुप रहना नहीं था, बल्कि आत्मचिंतन, स्मरण और अपने कर्तव्य को समझने का समय था।
समय बीतता गया, लेकिन गुरु की स्मृतियाँ कभी दूर नहीं हुईं। उनके द्वारा दिए गए संस्कार, उनका मार्गदर्शन और समाज के प्रति समर्पण मेरे मन में हमेशा जीवित रहा। धीरे-धीरे मुझे यह एहसास हुआ कि यदि मैंने उनसे कुछ सीखा है, तो उस सीख को अपने जीवन और समाजसेवा के माध्यम से आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
आज मैं, राधे श्याम कोली, एक बार फिर सामाजिक और सांस्कृतिक सेवा के क्षेत्र में अपना योगदान देने के लिए तत्पर हूँ। मेरा उद्देश्य समाज में सेवा, जागरूकता, सद्भाव और अपने सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करना है।
मेरे लिए हिंदुत्व केवल एक शब्द नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार, सत्य, करुणा और समाज के प्रति अपने दायित्व को समझने की प्रेरणा है। मैं चाहता हूँ कि अपने गुरु की स्मृतियों को अपने कार्यों में जीवित रखूँ और समाजहित में सकारात्मक योगदान देता रहूँ।
मेरे गुरु आज हमारे बीच भौतिक रूप से नहीं हैं, लेकिन उनके दिए हुए संस्कार और उनकी यादें मेरे साथ हैं। मैं जब भी समाज के लिए कोई कार्य करूँगा, तो उनके मार्गदर्शन को स्मरण करूँगा।
मैं राधे श्याम कोली, आज पुनः संकल्प लेता हूँ कि अपने गुरु की स्मृति को हृदय में रखते हुए समाजसेवा और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाता रहूँगा। मेरा मौन अब आत्मचिंतन की शक्ति बन चुका है और यही शक्ति मुझे सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।
गुरु की स्मृति मेरे लिए प्रेरणा है,
सेवा मेरा संकल्प है,
और समाज के प्रति समर्पण मेरी जिम्मेदारी है।