HARI OM JAI DURGE

HARI OM JAI DURGE SATYAMEV JAYATE. LOVE IS GOD AND GOD IS WORSHIPED BY ALL.

08/04/2025

*गुन तुम्हार समुझइ निज दोसा! जेहि सब भाँति तुम्हार भरोसा!!*
*राम भगत प्रिय लागहिं जेही! तेहि उर बसहु सहित बैदेही!!*
जो गुणों को आपका और दोषों को अपना समझता है जिसे सब प्रकार से आपका ही भरोसा है और राम भक्त जिसे प्यारे लगते हैं उसके हृदय में आप सीता सहित निवास कीजिए!
*यानी निज दोष दर्शन!*
मनुष्य जब दूसरे मे दोष देखना शुरू करता है तब वह कर्म बँधन मे बंध जाता है!
जब स्वयं का दोष देखना शुरू कर देता है तब कर्म बंधन से मुक्त हो जाता है!
*यही कर्म फल का सिद्धांत है जो अटल सत्य है!*
स्वयं को न जानना ही की मै कौन हूँ यही सबसे बड़ा कारण है बंधन मे पड़ने का!
इस जगत मे दो बात है जो अटल सत्य है!
*मै और हूँ!*
यह मै जो है वह ईश्वर का स्वरूप दिव्य चेतन निर्मल आत्मा है जो अविनाशी है!
*ईश्वर अंश जीव अविनाशी!चेतन अमल सहज सुखरासी!!*
आत्मा परमात्मा का स्वरूप है जो चेतन है यानी जब तक साधन धाम के द्वारा मुक्त न हो अपने मूल स्वरूप को न प्राप्त करे तब तक यात्रा पर रहता है!
इसमें मलिनता नही है और सहज ही सुख की राशि है!
और अब बात हूँ की
*राम ब्रह्म परमारथ रूपा! अबिगत अलख अनादि अनूपा!!*
*सकल बिकार रहित गतभेदा! कहि नित नेति निरूपहिं बेदा!!*
यही हूँ रामजी हैं जो सदा एकरस हैं जिनका स्वरूप सत् चित आनंद है!
ईश्वर और जीव के बीच माया है जिसका भी दो स्वरूप है विद्या और अविद्या!!
विद्या माया के द्वारा मुक्त और अविद्या के द्वारा संसार की प्राप्ति!
अस्तु जपो निरंतर जय सियाराम🙏🏻🙏🏻🌷🌷

14/10/2024

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
हरि ॐ जय दुर्गे

*विधि का विधान*भगवान श्री राम जी का विवाह और राज्याभिषेक दोनों शुभ मुहूर्त देख कर ही किया गया था, फिर भी ना वैवाहिक जीवन...
27/09/2022

*विधि का विधान*

भगवान श्री राम जी का विवाह और राज्याभिषेक दोनों शुभ मुहूर्त देख कर ही किया गया था, फिर भी ना वैवाहिक जीवन सफल हुआ और ना ही राज्याभिषेक।

और मुनि वशिष्ठ जी ने तो साफ कह दिया-
*सुनहु भरत भावी प्रबल*
*बिलखि कहेहूं मुनिनाथ*
*हानि लाभ जीवन-मरण*
*यश-अपयश विधि हाथ*
अर्थात, जो विधि ने निर्धारित किया है वही होकर रहेगा।

*ना भगवान श्री राम जी के जीवन को बदला जा सका और ना ही भगवान श्री कृष्ण जी के। ना ही भगवान शिव, सती की मृत्यु को टाल सके,* जबकि महामृत्युंजय मंत्र उन्हीं का आह्वान करता है।

*ना श्री गुरु अर्जुन देव जी, ना श्री गुरु तेग बहादुर जी और ना ही दशमेश पिता श्री गुरू गोबिन्द सिंह जी अपने साथ होने वाले विधि के विधान को टाल सके, जबकि आप सब समर्थ थे।*

रामकृष्ण परमहंस जी भी अपने कैंसर को ना टाल सके।
ना रावण अपने जीवन को बदल पाया और ना ही कंस, जबकि दोनों के पास समस्त शक्तियां थीं।

*मानव अपने जन्म के साथ ही जीवन, मरण, यश, अपयश, लाभ, हानि, स्वास्थ्य, बीमारी, देह, रंग, परिवार, समाज, देश और स्थान सब पहले से ही निर्धारित करके आता है।*

*इसलिए सरल रहें, सहज रहें, मन कर्म और वचन से सद्कर्म में लीन रहें।*

हरी ओम जय दुर्गे।ॐ आंजनेय विद्महे महावलाय धीमहि तन्नो हनुमान प्रचोदयात्।ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।ॐ नमःशिवायकर्पू...
30/08/2022

हरी ओम जय दुर्गे।

ॐ आंजनेय विद्महे महावलाय धीमहि तन्नो हनुमान प्रचोदयात्।

ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।

ॐ नमःशिवाय
कर्पूर गौरं करुणावतारं,
संसार सारं भुजगेन्द्र हारं।
सदावसंतं हृदयारविंदं,
भवं भवानी सहितं नमामि।।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय नमः।।
ॐ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।

अतुलित बलधामं हेमशैलाभिदेहं,
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनांअग्रगण्यं।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं,
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
मनोजवं मारुति तुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं,
श्री राम दूतं शरणं प्रपद्ये।।

जय श्री राम जय जय हनुमान।
समग्र परिवार आरोग्यमस्तु।

हरी ॐ जय दुर्गे।ॐ  प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।ठशरण्ये त्र्यंबिके गौरी ना...
09/07/2022

हरी ॐ जय दुर्गे।
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।ठ
शरण्ये त्र्यंबिके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
श्रीराम जय राम जय जय राम।
जय हनुमान जय जय हनुमान।।

ॐ नमःशिवाय
कर्पूर गौरं करुणावतारं,
संसार सारं भुजगेन्द्र हारं।
सदावसंतं हृदयारविंदं,
भवं भवानी सहितं नमामि।।
ॐ हं हनुमते नमः।
ॐ शं शनैश्चराय नमः।

नीलांजन समाभाषं, रविपुत्रं यमाग्रजं।
छाया मार्तण्ड संभूतं, नमामि तम् शनैश्चरम् ।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं दुर्गायै नमः।।

27/06/2022

ॐ आंजनेय विद्महे महावलाय धीमहि तन्नो हनुमान प्रचोदयात्।

ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।

ॐ नमःशिवाय
कर्पूर गौरं करुणावतारं,
संसार सारं भुजगेन्द्र हारं।
सदावसंतं हृदयारविंदं,
भवं भवानी सहितं नमामि।।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय नमः।।
ॐ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।

अतुलित बलधामं हेमशैलाभिदेहं,
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनांअग्रगण्यं।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं,
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
मनोजवं मारुति तुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं,
श्री राम दूतं शरणं प्रपद्ये।।

जय श्री राम जय जय हनुमान।
समग्र परिवार आरोग्यमस्तु।

*'राम' शब्द में दो अर्थ व्यंजित हैं। सुखद होना और ठहर जाना। अपने मार्ग से भटका हुआ कोई क्लांत पथिक किसी सुरम्य स्थान को ...
20/06/2022

*'राम' शब्द में दो अर्थ व्यंजित हैं। सुखद होना और ठहर जाना। अपने मार्ग से भटका हुआ कोई क्लांत पथिक किसी सुरम्य स्थान को देखकर ठहर जाता है। हमने सुखद ठहराव का अर्थ देने वाले जितने भी शब्द गढ़े सभी में 'राम' अंतर्निहित है- आराम, विराम,* *विश्राम, अभिराम, उपराम, ग्राम*

*जो रमने के लिए विवश कर दे, वह है राम*

*जीवन की आपाधापी में पड़ा अशांत मन जिस आनंददायक गंतव्य की सतत तलाश में है, वह गंतव्य है राम*

*भारतीय मन हर स्थिति में राम को साक्षी बनाने का आदी है।दुःख में 'हे राम', पीड़ा में 'ऐ राम, 'लज्जा में 'हाय राम', अशुभ में 'अरे राम राम', स्वागत में 'राम राम', शपथ में 'रामदुहाई', अज्ञानता में 'राम जाने', अनिश्चितता में 'राम भरोसे', अचूकता के लिए 'रामबाण', मृत्यु के लिए 'रामनाम सत्य', सुशासन के लिए 'रामराज्य' जैसी अभिव्यक्तियां पग-पग पर 'राम' को साथ खड़ा करती हैं। 'राम' भी इतने सरल हैं कि हर जगह खड़े हो जाते हैं। हर भारतीय उन पर अपना अधिकार मानता है। जिसका कोई नहीं उसके लिए राम हैं। निर्बल के बल राम। असंख्य बार देखी सुनी पढ़ी जा चुकी रामकथा का आकर्षण कभी नहीं खोता। राम पुनर्नवा हैं। हमारे भीतर जो कुछ भी अच्छा है, वह राम है। जो शाश्वत है, वह राम है। सब-कुछ लुट जाने के बाद जो बचा रह जाता है, वही तो राम है। घोर निराशा के बीच जो उठ खड़ा होता है, वह भी राम ही है।*

*सीमाओं के बीच छुपे असीम को देखना हो तो राम को देखिए*

🌹राम राम जी🌹

श्रीराम जय राम जय जय राम।जय हनुमान जय जय हनुमान।।
15/06/2022

श्रीराम जय राम जय जय राम।
जय हनुमान जय जय हनुमान।।

ॐ ह्रींं घृणि सू्र्यः आदित्यः ह्रीं ॐ।ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य ...
15/05/2022

ॐ ह्रींं घृणि सू्र्यः आदित्यः ह्रीं ॐ।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्।
जय श्री राम जय जय हनुमान।

देवि प्रपन्नार्ति हरे प्रसीद,
प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वम्,
त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य।।

ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं
दुर्गायै नमः।।

श्री गणेशाय नमः।सत्यं परम धीमहि।सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।शरण्ये त्र्यंबिके गौरी, नारायणी नमोस्तुते।।ॐ आंज...
12/04/2022

श्री गणेशाय नमः।
सत्यं परम धीमहि।
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबिके गौरी, नारायणी नमोस्तुते।।

ॐ आंजनेय विद्महे महावलाय धीमहि तन्नो हनुमान प्रचोदयात्।

ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।

ॐ नमःशिवाय
कर्पूर गौरं करुणावतारं,
संसार सारं भुजगेन्द्र हारं।
सदावसंतं हृदयारविंदं,
भवं भवानी सहितं नमामि।।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय नमः।।
ॐ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।

अतुलित बलधामं हेमशैलाभिदेहं,
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनांअग्रगण्यं।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं,
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।।
मनोजवं मारुति तुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।
वातात्मजं वानरयूथमुख्ययं,
श्री राम दूतं शरणं प्रपद्ये।।

जय श्री राम जय जय हनुमान।
समग्र परिवार आरोग्यमस्तु।

ॐ गं गणपतये नमः।सत्यं परम धीमहि।ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।शरण्ये त्र्...
02/04/2022

ॐ गं गणपतये नमः।
सत्यं परम धीमहि।

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबिके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
श्रीराम जय राम जय जय राम।
जय हनुमान जय जय हनुमान।।

ॐ नमःशिवाय
कर्पूर गौरं करुणावतारं,
संसार सारं भुजगेन्द्र हारं।
सदावसंतं हृदयारविंदं,
भवं भवानी सहितं नमामि।।
ॐ हं हनुमते नमः।
ॐ शं शनैश्चराय नमः।

नीलांजन समाभाषं, रविपुत्रं यमाग्रजं।
छाया मार्तण्ड संभूतं, नमामि तम् शनैश्चरम् ।।

ॐ ऐं ह्लीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं दुर्गायै नमः।।

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