25/07/2022
गजकेसरी योग क्या होता है? क्या आप ऐसे कुछ लोगों का नाम बता सकते हैं जिनके जीवन में गजकेसरी योग हुआ है।
गजकेसरी योग क्या होता है?
चंद्रमा से 1,4,7,10 भावों में गुरु की स्थिति गजकेसरी योग का मूल आधार है।
अर्थात अगर चंद्रमा के साथ या चंद्रमा से चतुर्थ भाव मे या चंद्रमा के ठीक सामने सप्तम भाव मे या चंद्रमा से दशम भाव मे देवगुरु बृहस्पति हो तो ये गजकेसरी योग है।
किन्तु मित्रो अगर ये एक लाइन में समझ आने वाली बात होती तो क्या बात थी!
आइए सर्वसाधारण को समझ मे आने वाली सरल भाषा मे समझते है हम।
हमारे ज्योतिष शास्त्र में सर्वाधिक शुभ ग्रह है देवगुरु बृहस्पति, जिन्हें हम आम भाषा मे गुरु कहते है।
और हमारे ज्योतिष शास्त्र में व्यक्ति के मन के कारक है चंद्रमा।
जब हमारे मन जो है चंद्रमा, उसको जब साथ मिलता है देवगुरु बृहस्पति की सर्वाधिक शुभता का, तब व्यक्ति एक हाथी जैसा आत्मविश्वासी और एक केसरी (सिंह) जैसे साहसी हो जाता है।
आपलोग स्वयं विचार करे की हाथी की ज़बरदस्त ताकत और सिंह की गजब की आक्रामकता किसी व्यक्ति में प्रवेश कर जाए तो कितना डेडली कॉम्बिनेशन बनेगा ये!
ये हो जाएगा "मन बलवान लागे चट्टान रहे मैदान में आगे…दबंग दबंग दबंग"
ऐसा व्यक्ति तो झोंपड़ी में जन्म लेकर भी अपने उत्ताल प्रयत्नों और साहस के द्वारा राजा बन जायेगा जिसके राजभवन के आगे सहस्त्रों सफेद गज (हाथी) और रथों के साथ कई सारे अश्व (घोड़े) बंधे रहेंगे।
गजकेसरी योग का यह फल है!
ये मैं नही कह रहा, ये सारावली, जातक पारिजात, फलदीपिका जैसे प्राचीन ज्योतिष ग्रंथ डिंडिम घोष करके कह रहे है।.
इस गजकेसरी योग की सिम्पल सी लॉजिकल व्याख्या भी आप सुन लीजिए।
आपने आपके जीवन मे ऐसे सैंकड़ो व्यक्ति देखे होंगे जिनके पास हुनर है, कला है, बुद्धि है, धन-संपदा है, शक्ति भी है पर उनका जो मन है ना वो इतना दुर्बल है इतना कमजोर है की कभी भी जीवन मे वो सफलता वो आकाशीय ऊँचाई नही छू पाते जितनी उनमें क्षमता है काबिलियत है।
और जिसका मन मज़बूत है वो तो सामान्य कद काठी का व्यक्ति भी बलिष्ठ पहलवान की आँखों मे आँखे डालकर बात करेगा और अपने मन की शक्ति से बलवान से बलवान रुकावट को भी ध्वंसत कर देगा।
कितनी बार सुना है ना हमने: "मन के हारे हार है और मन के जीते जीत!"
किन्तु मित्रो! अगर शास्त्र के इस नियम को प्रमाण माने तो आज भारत के 130 करोड़ लोगों में से कम से कम 30 करोड़ लोग अपनी जन्मपत्रिका में इतना महान गजकेसरी योग लिए घूम रहे है और यदा कदा कहते मिल जाएंगे..
"कुछ नही होता ये योग वोग! सब ढकोसला है! काहे का गजकेसरी भैया! हम आज साईकल से आना जाना कर रहे है!"
ठीक है बिल्कुल सही बात है! तार्किकों के लिए सबसे अच्छा पॉइंट है ज्योतिष शास्त्र पर कीचड़ उछालने का।
पर रुकिए बंधुवर…
जैसे आधा किलो घी का प्रतिदिन सेवन एक कसरती पहलवान के लिए तो अमृत है उसके शरीर के लिए स्वर्ग है पर वही आधा किलो घी जनसामान्य एक भी दिन पी ले तो चार दिन उल्टी-दस्त से बेहाल तो पक्का रहेगा।
वैसे ही देवगुरु बृहस्पति सबसे शुभ ग्रह है माना किन्तु क्या सभी के सभी प्राणियों के लिए एक जैसे ही शुभ ही शुभ है?
नही है!
पौराणिक आख्यानों में आपने देवगुरु बृहस्पति और दैत्यगुरु शुक्राचार्य के वैर विरोधों के बारे में कई बार पढ़ा होगा ना। ये वही गुरु और शुक्र है जो सौरमण्डल में भी आपस मे परम शत्रु है।
इसका क्या मतलब गजकेसरी योग के संदर्भ में?
इसका ये मतलब की शुक्र के आधिपत्य वाले दोनों लग्न: वृषभ एवं तुला के लिए गुरु सबसे अधिक कष्टकारी है पीड़ा देने वाले ग्रह है।
वृषभ लग्न में तो गुरु मृत्यु भाव के स्वामी है जो जेल,पराजय, बंधन, भयानक कष्ट को द्योतित करते है और तुला लग्न में रोग भाव के स्वामी है जो शत्रुपीडा, षड्यंत्र, चोट-घाव,ऋण को द्योतित करते है।
अब आप ही बताइए कि इन दोनों लग्नो में बना गजकेसरी योग फिर कैसे किसी को राजा बना सकता है!
गजकेसरी योग अपने साथ मे एक गूढ़ नियम लेकर आता है और वो नियम है कि गुरु अगर संबंधित लग्न के लिए परम शुभफलदायक हो तभी गजकेसरी योग वास्तव में चरितार्थ है।
इस नियम के हिसाब से दो लग्नों के लिए गजकेसरी योग निर्बाध प्रचंड राजयोगकारक है।
वृश्चिक लग्न जहाँ गुरु परम शुभ धन भाव के स्वामी है एवं मान-सम्मान-पदप्राप्ति के पंचम भाव के भी स्वामी है, चंद्रमा भी यहाँ सबसे शुभ नवम भाग्य भाव के स्वामी होकर सोने पर सुहागा है।
मीन लग्न जहाँ गुरु लग्नेश ही है और राज्य भाव के स्वामी होकर बड़ी अधिकार प्राप्ति देने में सक्षम है, चंद्रमा यहाँ परम शुभ पंचम भाव के स्वामी है जो धन एवं पद दोनों दिलवाने में सक्षम है, यहाँ भी सोने पर सुहागा।
इसके अलावा कर्क लग्न एवं मेष लग्न के लिए बहुत शुभ प्रभाव, सिंह लग्न, मिथुन लग्न, कन्या लग्न एवं मकर लग्न के लिए सामान्य शुभ प्रभाव, धनु लग्न एवं कुम्भ लग्न के लिए कुछ शुभ प्रभाव तथा तुला-वृषभ के लिए गजकेसरी योग वास्तव में प्रभावहीन ही है।
अब देखिए हम सीधे सीधे एक ऐसे जगप्रसिद्ध व्यक्ति की जन्मपत्रिका देखते है जिसमे गजकेसरी योग के फलीभूत होने की समस्त शर्ते 100/100 पूरी हो रही है।
वृश्चिक लग्न है एवं चंद्रमा नवम भाव भाग्य भाव मे अपनी ही कर्क राशि मे स्थित है।
चंद्रमा से ठीक सामने सप्तम भाव से गुरु अपनी अमृत दृष्टि द्वारा एक प्रचंड गजकेसरी योग बना रहे है।
गजकेसरी योग के साथ ही साथ ये दो सबसे शुभ भावों के स्वामियों का योग है: भाग्य भाव के स्वामी नवमेश चंद्रमा एवं बुद्धि भाव के स्वामी पंचमेश गुरु का। यह एक असाधारण पाराशरीय राजयोग भी है।