Arya Samaj India

Arya Samaj India Arya Samaj is a Society of Noble People, who follow the Veda and try to behave in accordance with the teachings of the Veda

आर्य समाज संपूर्ण रूप से वैदिक ज्ञान पर आधारित है और वेदानुकूल वैदिक साहित्य और सत्य सनातन वैदिक धर्म को ही सर्वोपरि मानता है | हमारे पूर्वज समस्त ऋषि मुनि,योगी,तपस्वी, विदुषी, मनीषी,महापुरुष राम ,कृष्ण ,आदि ये सभी भी आर्य आर्य थे और यहाँ तक की हमारे सम्पूर्ण इस देश का नाम भी आर्यावर्त था |
तो फिर आर्य और आर्य समाज के नाम से घ्रणा क्यों ??
आर्य आर्य समाज तो आपका हितैषी और रक्षक है |

आर्य समाज बि

ना किसी जात पात लिंग भेदभाव के समान रूप से सभी आर्य समाज में प्रविष्ट के लिय सदर आमंत्रित करता है |
तो आइये सहर्ष आइये और आर्यत्व के गौरव को प्राप्त करके संगठन के रूप में मिलकर अपने प्रयासों से धरातल को स्वर्ग बनाईये और वसुधैव कुटुंबकम की परिभाषा को साकार करे |Unites

The world of Arya Samaj
आइये ,सभी आर्य समाज को जोड़ने में और रक्षा में हमारी सहायता करे
महर्षि स्वामी दयानंद ने यह प्रतिज्ञा ली थी की आजीवन ब्रह्मचर्य रह कर वेदों का प्रचार जन्म से जाती प्रथा का विरोध, भूतप्रेत, मूर्ति पूजा, पशुबलि, नरबली, सतीप्रथा, गौ हत्या, बालविवाह, दासीप्रथा, आडम्बरो का जीवन पर्यंत विरोध करूँगा तथा जन मानस को अज्ञान अन्धकार से निकल ,सृष्टी का संविधान पवित्र वेद वाणी का व्याकरण के अनुसार शुद्ध अर्थ जन जन के सामने रखूंगा !!!

अब आप से निवेदन है की इस सन्देश को सभी आर्य समाज ,आर्यों तक पहूँचाने में हमारी सहायता करे और अब आर्य समाज की रक्षा करना हम सभी आर्यों का परम धर्मं है !!!!
आर्य रक्षा!!! राष्ट्र रक्षा!!!
जय आर्य ! जय आर्यवर्त!
कृण्वन्तो विश्वमार्यम्


......हम बदलेंगे युग बदलेगा ...........वेदों की ज्योति जलती रहेगी ......
.... आर्य समाज अमर रहेगा ....




आर्यसमाज के दस नियम

१. सब सत्यिध्या और जो पदार्थ विध्या से जाने जाते हैं, उन सबका आदिमूल परमेश्वर है ।

२. ईश्वर सच्चिदानंदस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनन्त, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्वव्यापक, चर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सृष्टिकर्ता है, उसी की उपासना करनी योग्य है ।

३. वेद सब सत्यविध्याओं का पुस्तक है । वेद का पढ़ाना - पढ़ाना और सुनना - सुनाना सब आर्यो का परम धर्म है ।

४. सत्य के ग्रहण करने और उसत्य के छोड़ने में सर्वदा उद्यत् रहना चाहिएँ ।

५. सब काम धर्मानुसार, अर्थात् सत्य और असत्य को विचार करके करने चाहिएँ ।

६. सँसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्धेश्य है, अर्थात् शारीरिक्, आत्मिक और सामाजिक् उन्नति करना ।

७. सबसे प्रीतिपूर्वक, धर्मानुसार यथायोग्य वर्तना चाहिए ।

८. अविध्या का नाश विध्या कि दृध्दि करनि चाहिए ।

९. प्रत्येक को अपनी ही उन्नति से सन्तुष्ट न रहना चाहिए, किन्तु सब की उन्नती सें अपनी उन्नति समझनी चाहिए ।

१०. सब मनुष्यों को सामाजिक, सर्वाहितकारी, नियम पालने में परतन्त्र रहना चाहिए आर प्रत्येक हितकारी नियम पालने सब स्वतंत्र रहें

महर्षि दयानंद सरस्वती जी की २०२वीं जयंती पर उनको शत-शत नमन! जय स्वामी दयानंद! — भारत को हिन्दी और नमस्ते शब्द भेंट करने ...
12/02/2026

महर्षि दयानंद सरस्वती जी की २०२वीं जयंती पर उनको शत-शत नमन!
जय स्वामी दयानंद! — भारत को हिन्दी और नमस्ते शब्द भेंट करने स्वतंत्रता सैनानी और समाज सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती के त्याग और विचारो को नमन करते हुए उनकी 202वी जयंती पर उनको श्रद्धांजलि देता यह भजन “देखो स्वामी दयानन्द क्या कर गया “ । स्वामी दयानंद सरस्वती जी द्वारा दी गई शिक्षाएँ हमेशा हमारा और आने पीढ़ियो का मार्गदर्शन करती रहेगी ।

On the 202nd Jayanti of Maharshi Dayanand Saraswati —
His great call " Go Back to the Vedas" remains relevant today. The Vedas are the true source of knowledge, science, and religion. Let us abandon superstitions, adopt a Vedic way of life, and make India the vishwa guru once again.

"वेदों की ओर लौटो" का उनका महान आह्वान आज भी प्रासंगिक है। वेद ही सच्चा ज्ञान, विज्ञान और धर्म का स्रोत हैं। आइए, हम अंधविश्वास छोड़कर वैदिक जीवन अपनाएँ, और भारत को विश्व गुरु बनाएँ।

Infinite salutations! Jai Swami Dayanand!
उनको शत-शत नमन! जय स्वामी दयानंद!

Watch here: Dekho Swami Dayanand Kya Kar Gaya Bhajan -
https://www.youtube.com/watch?v=fmdavO49QLo

शूद भी वेद पढ़ें ! क्या परमेश्वर शूद्रों का भला करना नहीं चाहता? क्या ईश्वर पक्षपाती है कि वेदों को पढ़ने सुनने का शूद्र...
25/01/2026

शूद भी वेद पढ़ें !

क्या परमेश्वर शूद्रों का भला करना नहीं चाहता? क्या ईश्वर पक्षपाती है कि वेदों को पढ़ने सुनने का शूद्रों के लिए निषेध और द्विजों के लिए विधि करे ?जो परमेश्वर का अभिप्राय शूद्र आदि के पढ़ाने सुनाने का न होता तो इनके शरीर में वाक् आदि श्रोत्र इन्द्रिय क्यों रचता ? जैसे परमात्मा ने पथ्वी, जल, अग्नि, वायु, चन्द्र, सूर्य, अन्नादि पदार्थ सबके लिए बनाए हैं वैसे वेद भी सबके लिए प्रकाशित किए हैं।

और जहां कहीं इस का निषेध किया है उसका अभिप्राय यह है कि जिसको पढ़ने-पढ़ाने से कुछ भी न आवे वह निर्बुद्धि और मूर्ख होने से शूद्र कहाता है, उसका पढ़ना-पढ़ाना व्यर्थ है।

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