लीलण जाट

लीलण जाट सत्यवादी वीर तेजाजी महाराज

"हनुमान बेनीवाल जी को लोकसभा के डिप्टी स्पीकर बनाने के लिए कल एक मोशन लाएंगे":– AIMIM सुप्रीमो ओवेसी साहबमानना पड़ेगा, ब...
12/03/2026

"हनुमान बेनीवाल जी को लोकसभा के डिप्टी स्पीकर बनाने के लिए कल एक मोशन लाएंगे":– AIMIM सुप्रीमो ओवेसी साहब

मानना पड़ेगा, बंदे में दम है!
राजस्थान की धरती से उठी आवाज अब दिल्ली की राजनीति में भी दमदार तरीके से गूंज रही है।
दबंग शेर की दहाड़ संसद में सुनाई दे रही है।
Hanuman Beniwal Narayan Beniwal"हनुमान बेनीवाल जी को लोकसभा के डिप्टी स्पीकर बनाने के लिए कल एक मोशन लाएंगे":– AIMIM सुप्रीमो ओवेसी साहब

मानना पड़ेगा, बंदे में दम है!
राजस्थान की धरती से उठी आवाज अब दिल्ली की राजनीति में भी दमदार तरीके से गूंज रही है।
दबंग शेर की दहाड़ संसद में सुनाई दे रही है।
Hanuman Beniwal Narayan Beniwal

नागौर सांसद हनुमान जी बेनीवाल के भतीजे , खींवसर के पूर्व विधायक नारायण जी बेनीवाल व RAS सुमेश बेनीवाल के बेटे प्रतीक का ...
08/03/2026

नागौर सांसद हनुमान जी बेनीवाल के भतीजे , खींवसर के पूर्व विधायक नारायण जी बेनीवाल व RAS सुमेश बेनीवाल के बेटे प्रतीक का भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन होना पूरे परिवार सहित नागौर क्षेत्र व राजस्थान के लिए गर्व का विषय है।
प्रतीक को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। देश सेवा के इस पथ पर वे सदैव सफल हों।
जय हिन्द जय भारत 🇮🇳
Hanuman Beniwal Narayan Beniwal Rashtriya Loktantrik Party

नेताजी की यही खासियत उन्हें सबसे अलग और खास बनाती हैइस फोटो को गौर से देखिए अपने घर पर आयेआगंतुकों के साथ चाय  पी रहे है...
27/02/2026

नेताजी की यही खासियत उन्हें सबसे अलग और खास बनाती है

इस फोटो को गौर से देखिए अपने घर पर आये
आगंतुकों के साथ चाय पी रहे हैं ऊनके साथ चाय पीना खास नहीं नहीं खास तो यह है कि जैसे कप में अपने समर्थक चाय पी रहे वैसे ही कप में नेताजी भी चाय पी रहे हैं 🥰

Hanuman Beniwal

प्रीपेड मृत्यु...पुणे के एक बड़े श्मशान घाट में दोपहर के 3 बजे थे।‘रोहन’ (उम्र 35 वर्ष),जो अमेरिका की एक बड़ी सॉफ्टवेयर ...
24/02/2026

प्रीपेड मृत्यु...

पुणे के एक बड़े श्मशान घाट में दोपहर के 3 बजे थे।
‘रोहन’ (उम्र 35 वर्ष),
जो अमेरिका की एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट था,
अभी-अभी फ्लाइट से उतरकर सीधे श्मशान घाट पहुँचा था।
उसके पिता,
‘सदाशिवराव’ (उम्र 75 वर्ष),
कल रात गुजर गए थे।
रोहन के हाथ में महंगा लैपटॉप बैग था और आँखों पर रेबैन का चश्मा।
उसे पसीना आ रहा था और वह बार-बार घड़ी देख रहा था।
वहाँ ‘मोक्ष इवेंट मैनेजमेंट’ (अंतिम संस्कार करने वाली एजेंसी) का कर्मचारी
‘सुमित’ खड़ा था।
सुमित ने सारी तैयारी कर रखी थी।
लकड़ियाँ सजा दी थीं,
पंडित बुला लिया था, और सदाशिवराव के पार्थिव शरीर को स्नान कराकर तैयार रखा था।
रोहन आया।
उसने पिता के चेहरे की ओर एक नजर डाली।
आँखों से एक-दो आँसू निकल आए।
उसने सुमित से पूछा:
“मिस्टर सुमित,
सब तैयार है ना?
मुझे 6 बजे की रिटर्न फ्लाइट पकड़नी है।
कल मेरी बहुत जरूरी मीटिंग है।
प्लीज़ जल्दी कराइए।”
सुमित को आश्चर्य हुआ।
जिस पिता ने इस बेटे को पाल-पोशकर बड़ा किया,
उस पिता की चिता के पास रुकने के लिए इस बेटे के पास तीन घंटे भी नहीं थे।
सुमित ने शांत होकर सिर हिलाया।
विधि पूरी हुई।
रोहन ने मुखाग्नि दी।
धुएँ के गुबार आसमान में उठ गए।
रोहन ने सुमित को अलग ले जाकर चेकबुक निकाली।
“सुमित, धन्यवाद।
आपने अच्छी व्यवस्था की।
आपका बिल कितना हुआ? 50 हजार? 1 लाख?
राशि बताइए,
मैं अभी चेक दे देता हूँ।
मैं दोबारा नहीं आ पाऊँगा,
अस्थि विसर्जन भी आप ही करवा दीजिए।”
सुमित ने रोहन की ओर देखा।
उसके चेहरे पर एक अजीब-सी मुस्कान थी।
उसने जेब से एक पुरानी फाइल निकाली और रोहन के हाथ में दी।
“साहब, बिल देने की जरूरत नहीं है।
आपका बिल ‘पेड’ है।”
रोहन चौंक गया।
“पेड?
किसने भरा पैसा?
क्या मेरे चाचा ने?”
सुमित बोला:
“नहीं साहब।
पाँच साल पहले सदाशिवराव जी (आपके पिता) हमारे ऑफिस आए थे।
वे बहुत बीमार थे, ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे।
उन्होंने मुझसे पूछा था —
‘आपका पैकेज क्या है?
मेरे बेटे को तकलीफ न हो, सब इंतज़ाम कर देंगे ना?’
हमने उन्हें पैकेज बताया।
उन्होंने उसी दिन 50,000 रुपये एडवांस जमा कर दिए थे।
और यह ‘चिट्ठी’ मुझे देकर कहा था —
‘मेरा बेटा आए तो उसे यह दे देना।
और अगर वह न आ सके,
तो आप ही मेरा अंतिम संस्कार कर देना।’”
सुमित ने वह चिट्ठी रोहन को दी।
रोहन ने काँपते हाथों से चिट्ठी खोली।
उसमें सदाशिवराव के काँपते अक्षरों में लिखा था:
“प्रिय रोहन,
बेटा,
मुझे पता है तुम बहुत व्यस्त हो।
अमेरिका में तुम्हें साँस लेने की भी फुर्सत नहीं होती।
मुझे मालूम है कि
मेरी मृत्यु की खबर सुनकर तुम्हें चिंता होगी।
‘छुट्टी मिलेगी या नहीं?
टिकट मिलेगा या नहीं?
मीटिंग का क्या होगा?’
ये सवाल तुम्हारे मन में आएँगे।
बेटा, तुम्हारा समय और तुम्हारा करियर बहुत महत्वपूर्ण है।
मैंने तुम्हें इसलिए पाला है कि तुम दुनिया जीत सको।
एक बूढ़े की लाश के लिए तुम अपना नुकसान मत करना।
इसलिए मैंने अपनी मृत्यु की व्यवस्था पहले ही कर दी है।
एजेंसी को पैसे दे दिए हैं।
वे सब कर देंगे।
तुम आ सको तो अच्छा है,
न आ सको तो भी मुझे कोई शिकायत नहीं।
बस एक विनती है —
जब मैं तुम्हें बचपन में स्कूल छोड़ने जाता था,
तो तुम्हारा हाथ कभी नहीं छोड़ा था।
आज जब तुम मुझे अग्नि दो,
तो तुम्हारा हाथ काँपना नहीं चाहिए।
जल्दी वापस चले जाना।
तुम्हारी पत्नी इंतज़ार कर रही होगी।
तुम्हारा,
पापा।”
चिट्ठी पढ़ते ही रोहन के हाथ से चेकबुक कीचड़ में गिर गई।
उस श्मशान में,
जहाँ लकड़ियों के जलने की आवाज आ रही थी…
वहाँ अब रोहन का अहंकार और करियर का घमंड जलकर राख हो चुका था।
वह घुटनों के बल बैठ गया।
चिल्लाया —
“पापा…!! मुझे माफ कर दीजिए!”
उसने सुमित के पैर पकड़ लिए।
“सुमित,
मुझे अमेरिका नहीं जाना।
मुझे अपने पापा के साथ रहना है!
मैंने करोड़ों रुपये कमाए,
पर मैं तो असली भिखारी निकला!
मेरे पापा ने मरते समय भी मेरी मीटिंग की चिंता की…
और मैं उनके अंतिम दर्शन का भी हिसाब लगा रहा था?”
उस दिन रोहन फ्लाइट नहीं पकड़ सका।
वह वहीं,
जलती चिता के सामने रात भर बैठा रहा।
क्योंकि उसे समझ आ गया था —
‘प्री-पेड’ सिर्फ सिम कार्ड हो सकता है,
पिता का प्रेम नहीं।
पिता का प्रेम ‘अनलिमिटेड’ होता है,
और उसकी कीमत दुनिया की कोई भी करंसी नहीं चुका सकती।
आप दुनिया में कितने भी बड़े बन जाएँ,
कितना भी पैसा कमा लें…
लेकिन जिन माता-पिता ने आपका बचपन सँवारा,
उनके अंतिम सफर में साथ देने से कभी पीछे मत हटिए।
एजेंसी अंतिम संस्कार कर सकती है,
लेकिन आँसू एजेंसी के नहीं होते —
वे अपने खून के रिश्तों के ही होते हैं।
😭😭😭
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यह सिर्फ एक चेहरा नहीं, पूरे राजस्थान की उम्मीदों का नक्शा है। रेत के टीलों से लेकर खेत की मिट्टी तक, किलों की शान से ले...
22/02/2026

यह सिर्फ एक चेहरा नहीं, पूरे राजस्थान की उम्मीदों का नक्शा है। रेत के टीलों से लेकर खेत की मिट्टी तक, किलों की शान से लेकर किसान की थकी हथेली तक — हर कहानी में एक ही आवाज़ गूंजती है कि कोई है जो हमारी लड़ाई को अपना मानकर खड़ा है। जब जनता अपने सपनों को किसी इंसान में देखने लगे, तब वह नेता नहीं रह जाता, विश्वास बन जाता है… और विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत होता है। Hanuman Beniwal

साध्वी प्रेम बाईसा का आश्रम में अंतिम दर्शन व समाधि  दिनांक 30 जनवरी 2026  को सुबह 10 बजे शिव शक्ति धाम जगराम की ढाणी गा...
29/01/2026

साध्वी प्रेम बाईसा का आश्रम में अंतिम दर्शन व समाधि दिनांक 30 जनवरी 2026 को सुबह 10 बजे शिव शक्ति धाम जगराम की ढाणी गांव -परेऊ (गिड़ा) बालोतरा में रखा गया | सत सत नमन श्रद्धांजलि ।

जोधपुर से बड़ी दु:खद खबर 🥹🥹कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा का आज जोधपुर के निजी अस्पताल में निधन हो गया है।साध्वी प्रेम बाईसा...
28/01/2026

जोधपुर से बड़ी दु:खद खबर 🥹🥹

कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा का आज जोधपुर के निजी अस्पताल में निधन हो गया है।
साध्वी प्रेम बाईसा ने शाम करीब पाँच बजे जोधपुर में ली अंतिम साँस ......

खेती से बड़ा कोई योग नहीं और किसान से बड़ा कोई योगी नहीं!🥰🥰🥰🥰
06/01/2026

खेती से बड़ा कोई योग नहीं
और किसान से बड़ा कोई योगी नहीं!
🥰🥰🥰🥰

05/01/2026

हर्ष छिकारा हो चाहे दलजीत सिहाग आप पैटर्न देखिए हर्ष भी पहले अपने आप को गोभक्त बताता रहा है और दलजीत तो हिंदू संगठनों का पदाधिकारी भी रहा है, हालांकि दोनों के साथ हद से ज़्यादा ग़लत हुआ है और हो ही रहा है लेकिन ग़लत करने वाले भी वही लोग है जिनकी विचारधारा की ये दोनों पैरवी किया करते थे! हम दोनों के साथ खड़े है अन्याय के विरूद्ध हम लड़ेंगे। लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्टेट और नागरिकों के बीच एक 'सोशल कॉन्ट्रैक्ट' होता है, जिसमें राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी जनता के हितों की रक्षा करना है। जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो इतिहास गवाह है कि बदलाव की आवाजें अक्सर युवाओं की तरफ से ही उठती हैं और बदलाव होता है। सरकार को बदले की भावना से ये सब नहीं करना चाहिए आख़िर एक युवा के साथ इस तरह अनैतिक बर्ताव से क्या हासिल होगा?

लीलण जाट

पूर्व कैबिनेट मंत्री हेमाराम चौधरी न्याय के लिए धरना स्थल पर रात को  जननायक 🙏🙏
05/01/2026

पूर्व कैबिनेट मंत्री हेमाराम चौधरी न्याय के लिए धरना स्थल पर रात को जननायक 🙏🙏

मदेरणा के वीडियो वायरल हुए तो जाट समाज को बदनाम करने कि कोशिशडाँगा का वीडियो वायरल हुए तो जाट समाज को बदनाम करने की कोशि...
15/12/2025

मदेरणा के वीडियो वायरल हुए तो जाट समाज को बदनाम करने कि कोशिश
डाँगा का वीडियो वायरल हुए तो जाट समाज को बदनाम करने की कोशिश

हनुमान को हराने के लिए दूसरे समाज अपनी मुँछे दाँव पर लगा दी
जो आज जाट समाज की बदनामी से दुखी है वही लोग हनुमान के हारने पर गढ़ के सामने घाघरा पहन के नाचे थे नागौर बेनीवाल के घर के सामने DJ बजाया गया
बेनीवाल की बीवी को गालिया दी गई बेनीवाल के बच्चों का मजाक उड़ाया गया

क्यों बेनीवाल की गलती क्या थी ?
बेनीवाल की गलती यह है की समाज के एक फ़ोन पर बेनीवाल अपनी जान दांव पर लगा देता है
बेनीवाल की गलती यह थी की बेनीवाल की वजह से आजतक कोई समाज पर उँगली नहीं उठा पाया
बेनीवाल की गलती यह थी की बेनीवाल सामंती ताकतों से लड़ा जिसके लिये उस पर जानलेवा हमले भी हुए पर इस तेजल के वंशज ने जान की परवाह ना करते हुए समाज को झुकने नहीं दिया
Hanuman Beniwal

15/12/2025

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