Kabir saheb Ji

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कबीर, कागद केरी नाव री, पानी केरी गंग।कहे कबीर कैसे तिरे, पांच कुसंगी संग।।भावार्थ: यह शरीर कागज की तरह नाशवान है जो संस...
15/10/2025

कबीर, कागद केरी नाव री, पानी केरी गंग।
कहे कबीर कैसे तिरे, पांच कुसंगी संग।।

भावार्थ: यह शरीर कागज की तरह नाशवान है जो संसार रुपी नदी की इच्छाओं-वासनाओं में डूबा हुआ है। जब तक पांच विकार (काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार) पर नियंत्रण नहीं कर लिया जाता है तब तक संसार से मुक्ति नहीं मिल सकती।

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29/09/2023

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12/11/2022
01/04/2022

वाणी :- कबीर, बलिहारी गुरु आपना, घरी घरी सौ-सौ बार l।मानुष तें देवता किया, करत न लागी बार ।।सरलार्थ :- ऐसे सतगुरु पर सौ-...
15/01/2022

वाणी :- कबीर, बलिहारी गुरु आपना, घरी घरी सौ-सौ बार l।
मानुष तें देवता किया, करत न लागी बार ।।

सरलार्थ :- ऐसे सतगुरु पर सौ-सौ बार कुर्बान जाऊँ जिसने सर्व बुराई और आदतें छुड़वाकर मनुष्य से देवता बना दिया।
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ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये ।औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए ।भावार्थ: कबीर साहेब जी कहते हैं कि इंसान को ऐसी भाषा बोलन...
04/12/2021

ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये ।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए ।
भावार्थ: कबीर साहेब जी कहते हैं कि इंसान को ऐसी भाषा बोलनी चाहिए जो सुनने वाले के मन को बहुत अच्छी लगे। ऐसी भाषा दूसरे लोगों को तो सुख पहुँचाती ही है, इसके साथ खुद को भी बड़े आनंद का अनुभव होता है।
#कबीरजी_के_रहस्यमयीदोहे

काज़ी बैठा कुरान बांचे, ज़मीन बो रहो करकट की।हर दम साहेब नहीं पहचाना, पकड़ा मुर्गी ले पटकी ||भावार्थ: कबीर साहब कहते हैं...
02/11/2021

काज़ी बैठा कुरान बांचे, ज़मीन बो रहो करकट की।
हर दम साहेब नहीं पहचाना, पकड़ा मुर्गी ले पटकी ||

भावार्थ: कबीर साहब कहते हैं कि मौलवी और काजी कुरान पढ़ते हैं, लेकिन उस पर पूरी तरह से अमल नहीं करते हैं, या यों कह लीजिये कि उसके अनुसार कर्म नहीं करते हैं। वो हर जीव में परमात्मा को नहीं देख पाते हैं, यही वजह है कि वो मुर्गी-मुर्गा, बकरा-बकरी सहित अन्य कई जीवों को पकड़ते हैं और उन्हें मार के खा जाते हैं। कबीर साहब हर जीव पर दया का भाव रखते हैं और हर जीव के अंदर परमात्मा का निवास मानते हैं, इसलिए उन्होंने जीव हत्या का पुरजोर विरोध किया।

हिंदू-मुस्लिम, सिक्ख-ईसाई, आपस में सब भाई-भाई। आर्य-जैनी और बिश्नोई, एक प्रभू के बच्चे सोई।।भावार्थ: कबीर परमेश्वर ने कह...
01/11/2021

हिंदू-मुस्लिम, सिक्ख-ईसाई, आपस में सब भाई-भाई।
आर्य-जैनी और बिश्नोई, एक प्रभू के बच्चे सोई।।

भावार्थ: कबीर परमेश्वर ने कहा है कि, आप हिंदू-मुस्लिम, सिख-ईसाई, आर्य- बिश्नोई, जैनी आदि आदि धर्मों में बंटे हुए हो। लेकिन सच तो यह है कि आप सब एक ही परमात्मा के बच्चे हो।
्ति_संदेश

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