श्रीमद्भगवद्गीता Shrimad Bhagvad GEETA

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22/02/2024

प्रथम अध्याय
ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः।
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दतुमुलोsभवत्।।१३।।
अनुवाद- तत्पश्चात् शंख, नगाड़े, बिगुल, तुरही और सिंगा सहसा एकसाथ बज उठे । वह समवेत स्वर अत्यन्त कोलाहलपुर्ण था । ।।१३।।

22/02/2024

प्रथम अध्याय
तस्य सञ्जनयन् हर्ष कुरुवृद्धः पितामहः।
सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान्।।१२।।
अनुवाद-तब कुरुवंश के वयोवृद्ध परम प्रतापी एवं वृद्ध पितामह ने सिंह-गर्जना की सी ध्वनि करने वाले अपने शंख को उच्च स्वर से बजाया, जिससे दुर्योधन को हर्ष हुआ। ।।१२।।

22/02/2024

प्रथम अध्याय
अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः।
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि।।११।।
अनुवाद-अतएव सैन्यव्युह में अपने-अपने मोर्चों पर खडे़ रहकर आप सभी भीष्म पितामह को पुरी-पुरी सहायता दें। ।।११।।

22/02/2024

प्रथम अध्याय
अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम्।
पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम्।।१०।।
अनुवाद-हमारी शक्ति अपिरमेय है और हम सब पितामह द्वारा भलीभाँति संरक्षित हैं, जबकि पाण्डवों की शक्ति भीम द्वारा भलीभाँति संरक्षित होकर भी सीमित है। ।।१०।।

22/02/2024

प्रथम अध्याय
अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः।
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदा।।९।।
अनुवाद-ऐसे अन्य वीर भी हैं जो मेरे लिए अपना जीवन त्याग करने के लिए उद्यत हैं । वे विविध प्रकार के हथियारों से सुसज्जित हैं और युद्धविद्या में निपुण हैं। ।।९।।

22/02/2024

प्रथम अध्याय
भवान् भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जय।
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिर्जयद्रथः।।८।।
अनुवाद-मेरी सेना में स्वयं आप, भीष्म, कर्ण, कृपाचार्य,अश्र्वत्थामा, विकर्ण तथा सोमदत्त का पुत्र भुरिश्रवा आदि हैं जो युद्ध में सदैव विजयी रहे हैं। ।।८।।

22/02/2024

प्रथम अध्याय
अस्माकन्तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम।
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान् ब्रवीमि ते।।७।।
अनुवाद- किन्तु हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! आपकी सूचना के लिए मैं अपनी सेना के उन नायकों के विषय में बताना चाहूंगा जो मेरी सेना को संचालित करने में विशेष रूप से निपुण हैं।।७।।

22/02/2024

प्रथम अध्याय
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च विर्यवान्।
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथा:।।६।।
अनुवाद- पराक्रमी युधामन्यु, अत्यन्त शक्तिशाली उत्तमौजा, सुभद्रा का पुत्र तथा द्रोपदी के पुत्र-यह सभी महारथी हैं। ।।६।।

22/02/2024

प्रथम अध्याय
धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्।
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः।।५।।
अनुवाद-इनके साथ ही धृष्टकेतु, चेकितान, काशिराज,
पुरुजित्, कुन्तिभोज तथा शैब्य जैसे महान शक्तिशाली योद्धा भी हैं। ।।५।।

20/02/2024

प्रथम अध्याय
अत्र शूरा महेष्वासा भिमार्जुनसमा युधि।
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः।।४।।
अनुवाद- इस सेना में भीम तथा अर्जुन के समान युद्द करने वाले अनेक वीर धनुर्धर हैं- यथा महारथी युयुधान, विराट तथा द्रुपद।।४।।

20/02/2024

प्रथम अध्याय
पश्येतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्।
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता।।३।।
अनवाद- हे आचार्य! पाण्डुपुत्रों की विशाल सेना को देखो, जिसे अपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपद के पुत्र ने इतने कौशल से व्यवस्थित किया है। ।।३।।

20/02/2024

प्रथम अध्याय
सञ्जय उवाच-
दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा।
आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत्।।२।।
अनुवाद-सञ्जय ने कहा -हे राजन!
पाण्डुपुत्रों द्वारा सेना की व्यूहरचना देखकर राजा
दुर्योधन अपने गुरु के पास गया और उनसे ये शब्द
कहे।।२।।

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