09/09/2025
छठ पूजा: सूर्य उपासना का महापर्व
छठ पूजा, जिसे सूर्य षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, एक हिंदू त्योहार है जो मुख्य रूप से भारत के बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया (षष्ठी देवी) की आराधना का प्रतीक है। इस व्रत को संतान के सुख, सौभाग्य और समृद्धि के लिए किया जाता है।
छठ पूजा का महत्व
पौराणिक कथाएं: छठ पूजा से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं। माना जाता है कि भगवान राम और माता सीता ने वनवास के बाद अयोध्या लौटने पर रावण वध के पाप से मुक्ति के लिए सूर्यदेव की पूजा की थी। महाभारत काल में द्रौपदी ने पांडवों को उनका राजपाट वापस दिलाने के लिए यह व्रत रखा था। इसके अलावा, कर्ण, जो सूर्य पुत्र थे, भी सूर्य की उपासना करते थे।
वैज्ञानिक महत्व: वैज्ञानिक दृष्टि से भी छठ पूजा का महत्व है। यह माना जाता है कि सूर्य की किरणें कई रोगों को दूर करने में सहायक होती हैं। इस दौरान पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देने से विटामिन-डी की प्राप्ति होती है और त्वचा से संबंधित बीमारियां भी ठीक होती हैं।
पारिवारिक सुख: इस पर्व को पारिवारिक सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और संतान की रक्षा के लिए मनाया जाता है। यह पर्व सामाजिक एकता और पारिवारिक बंधनों को भी मजबूत करता है।
छठ पूजा कब मनाई जाती है?
यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है:
कार्तिक छठ: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से सप्तमी तिथि तक। यह सबसे लोकप्रिय छठ पूजा है।
चैती छठ: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से सप्तमी तिथि तक।
छठ पूजा के चार दिन
यह चार दिवसीय महापर्व है, जिसमें हर दिन का एक विशेष महत्व होता है:
नहाय-खाय (पहला दिन): इस दिन व्रत करने वाले (व्रती) पवित्र नदी या तालाब में स्नान करते हैं और शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन कद्दू की सब्जी और चावल का विशेष महत्व होता है।
खरना (दूसरा दिन): इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हैं और शाम को सूर्य की पूजा करने के बाद गुड़ और चावल की खीर का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।
संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): इस दिन व्रती नदी या तालाब के किनारे जाकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस दौरान बांस के सूप या पीतल की टोकरी में फल, ठेकुआ और अन्य पकवान रखकर सूर्य देव को अर्पित किया जाता है।
उषा अर्घ्य (चौथा दिन): यह छठ पूजा का अंतिम दिन होता है। इस दिन व्रती उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं और छठी मैया से अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करते हैं। इसके बाद वे प्रसाद खाकर व्रत का पारण करते हैं।
पूजा सामग्री
बांस का सूप
बांस की टोकरी (दउरा)
गन्ने
ठेकुआ (गेहूं के आटे और गुड़ से बना विशेष पकवान)
चावल के लड्डू (कोस)
केले, सेब और अन्य मौसमी फल
दीपक
सिंदूर
हल्दी, अदरक और मूली
दूध और जल (अर्घ्य के लिए)
छठ पूजा एक अत्यंत पवित्र और कठिन व्रत है, जिसमें शुद्धता, संयम और आस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दौरान व्रती प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करते हैं और साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखते हैं।