20/11/2019
धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था की स्थिति में निरंतर सुधार: जी किशन रेड्डी
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने 19 नवम्बर 2019 को लोकसभा में बताया कि सरकार द्वारा अपनाए गए बहुआयामी नीतियों के कारण जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी नियंत्रित हुई है और कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है। 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन एक्ट पारित किया गया और जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करते हुए इसे दो राज्यों में विभाजित किया गया था तब से प्रदेश में कानून व्यवस्था की दृष्टि से व्यापक कदम उठाए गए हैं, जिसका लाभ प्रदेश को हुआ है। भाजपा सांसद कनकलाल कटारा ने पूछा कि क्या पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है तो मंत्री ने हाँ कहते हुए उत्तर दिया और बताया कि कानून व्यवस्था की दृष्टि से 5 अगस्त 2019 से 15 नवम्बर 2019 तक प्रदेश में 190 पंजीकृत मामलों में 765 गिरफ्तारियाँ हुई हैं। इसमें स्टोन पेल्टिंग के आंकड़े भी सम्मिलित हैं।
मीडिया ने 1 जनवरी 2019 से 4 अगस्त 2019 के बीच कानून व्यवस्था की दृष्टि से हुई मात्र 361 गिरफ्तारियों का हवाला देते हुए कहना आरम्भ किया है कि 5 अगस्त से 15 नवम्बर के बीच दोगुना से अधिक गिरफ्तारियों के आंकड़े से पता चलता है कि प्रदेश में उपद्रव बढ़ा है। जबकि मीडिया में लिखने वाले पत्रकारों ने यह बात उल्लिखित नहीं किया कि उपद्रवी तत्वों की गिरफ्तारी पहले प्रदेश में विशेष दर्जे के कारण कठिन था, जो अब आसान है। दूसरा, उपद्रवियों की गिरफ्तारी से ही कानून व्यवस्था सुधरती है। असामाजिक तत्वों को खुला छोड़ देने से ही अपराध बढ़ता है। अतः ये आँकड़े प्रदेश में अपराध नियंत्रण की कहानी कहते हैं न कि उपद्रव बढ़ने के। पत्रकारों को न्यूज एनालिसिस करते समय आँखों पर बंधी हुई भाजपा विरोध की प्रायोजित पट्टी उतार कर सोचना चाहिए। पूर्वाग्रहों के आधार पर आधुनिक पत्रकारिता देशहित पर ही आघात करने को प्रयत्नशील रहती है, यह बहुत खतरनाक बुद्धिजीविता है।
जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था की स्थिति को समझने के लिए पर्यटन विभाग के आंकड़ों पर ध्यान देना चाहिए। पहले की तुलना में कश्मीर में पर्यटन के लिए आने वाले यात्रियों की संख्या में बहुत बड़ी बृद्धि हुई है। जम्मू-कश्मीर में विगत छः माह में 34, 10, 219 पर्यटक आए हैं जिनमें 12,934 विदेशी सम्मिलित हैं। इस समय में पर्यटन से 25.12 करोड़ रुपए की आय हुई है। 2012 में 13 लाख पर्यटक आए थे प्रदेश में। 2013 में 11.71 लाख पर्यटकों की संख्या थी। 2014 में खतरनाक बाढ़ से प्रदेश तबाह हुआ था तब भी 11.67 लाख पर्यटक जम्मू-कश्मीर आए थे। 2015 में 9.27 लाख जबकि 2016 में 12.12 लाख पर्यटक आए थे। 2017 में बुरहान बाणी के इनकाउंटर के बाद घाटी लगभग चार महीने बंद रहा था तब भी देशी विदेशी सब मिलाकर 11 लाख पर्यटक आए थे, जबकि 2018 में मात्र 8.5 लाख पर्यटक ही आए थे। 2019 के केवल छः महीनों में 34 लाख से अधिक पर्यटक आए हैं प्रदेश में। यह जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था में सुधार का परिचायक है। विगत सात आठ वर्षों में कभी भी पर्यटक संख्या इस स्तर पर नहीं आई जितना धारा 370 हटने के बाद दिख रहा है।
धारा 370 हटाए जाने के समय अमरनाथ यात्रियों को वापस जाने की सलाह देते हुए केंद्र सरकार ने अमरनाथ यात्रा निलंबित कर दिया था। अब अमरनाथ एवं वैष्णो देवी की यात्रा के संदर्भ में जारी किया गया तब की एडवाइजरी वापस ले लिया गया है। ज्ञात हो देशी नागरिकों का बहुत बड़ा समुदाय इन दो तीर्थों की यात्रा के लिए प्रदेश में बहुत बड़ी संख्या में आता है।
धारा 370 हटने के बाद स्कूलों में उपस्थिति बहुत कम रहती थी, किन्तु अब यह उपस्थिति का प्रतिशत इन परीक्षाओं के समय 99.7% के सामान्य स्तर पर आ गया है।
पैलेट गन के उपयोग पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में रेड्डी ने कहा कि कानून व्यवस्था की अतिशय गंभीर स्थिति आने पर ही पैलेट गन का उपयोग हो रहा है किंतु नियंत्रण हो सकने योग्य अन्य परिस्थितियों में इसके उपयोग में परहेज किया जाता है, जिससे नागरिकों में कैज्युलिटी न बढ़े।
रेड्डी ने कहा कि सरकार ने प्रदेश में पत्थरबाजी को नियंत्रित करने के लिए बहुआयामी कदम उठाया है और इसे नियंत्रित करने में सफलता भी प्राप्त हुई है। जम्मू-कश्मीर में कठिनाई खड़ा करने वाले, उकसाने वाले और भीड़ जुटाने वाले तत्वों की बड़ी संख्या में पहचान की गई है। और उनको नियंत्रित करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं, जिसमें पब्लीक सेफ्टी एक्ट (PSA) के अंतर्गत उनकी गिरफ्तारियाँ भी हुई हैं। मंत्री ने हुर्रियत को इन सब उपद्रवों के लिए ब्लेम किया और कहा कि जाँच से पता चला है कि अनेक संगठन जो पत्थरबाजी की घटनाओं में संलिप्त थे उनका संबंध सीधा हुर्रियत से था। एनआईए ने अबतक टेरर फंडिंग के मामले में प्रदेश के 18 बड़े लोगों के विरुद्ध चार्जशीट दायर किया है। जीससे जम्मू-कश्मीर में स्थिति में निरंतर सुधार सुनिश्चित हुआ है।
~मुरारी शरण शुक्ल।