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तीन नए आयुर्वेदिक एम्स खोले जाएंगे।
01/02/2026

तीन नए आयुर्वेदिक एम्स खोले जाएंगे।

27/01/2026

यदि आपके लग्न में सूर्य या मंगल स्थित है, तो आप अत्यंत क्रोधी स्वभाव के हैं, इससे कई समस्याएँ समक्ष आएंगी, क्रोध नियंत्रण का प्रयत्न करें। अन्यथा आपका विकास सीमित हो जाएगा।

~मुरारी शरण शुक्ल।

24/01/2026

ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से आपके जीवन की हर प्रकार की समस्याओं का समाधान आसानी से हो सकता है। आपकी समस्या कितनी भी जटिल हो,
कैसी भी हो कठिन से कठिनतम हो,
हर एक का समाधान किया जा सकता है।
आपके जीवन की लाचारियाँ हों,
कठिनाइयाँ हों,
रुकावटें हों,
विघ्न-वाधाएँ हों, सबको ठीक किया जा सकता है।
सब प्रकार के व्यवधानों से पार कर आगे बढ़ा जा सकता है। इसमें सब विद्याओं से अधिक ज्योतिष शास्त्र सहायक होता है।

आप अपने जन्म की तिथि, समय और जन्म स्थान जूटाकर अपनी जन्मपत्री बनवाएँ और उसका अन्वेषण किसी कुशल ज्योतिषी से कराएँ,
ऐसे ज्योतिषी से जो केवल प्रेडिक्शन ना जानता हो,
ग्रहों के सटीक उपचार और समाधान को भी ठीक से जानता हो,
आपको निश्चित रूप से आगे बढ़ने का मार्ग मिल जाएगा।
आप सभी प्रकार के विघ्न बाधाओं को पार करके यशस्वी हो जाएंगे। धन्यवाद।

~मुरारी शरण शुक्ल
ज्योतिषाचार्य।

20/11/2019

धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था की स्थिति में निरंतर सुधार: जी किशन रेड्डी

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने 19 नवम्बर 2019 को लोकसभा में बताया कि सरकार द्वारा अपनाए गए बहुआयामी नीतियों के कारण जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी नियंत्रित हुई है और कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है। 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन एक्ट पारित किया गया और जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करते हुए इसे दो राज्यों में विभाजित किया गया था तब से प्रदेश में कानून व्यवस्था की दृष्टि से व्यापक कदम उठाए गए हैं, जिसका लाभ प्रदेश को हुआ है। भाजपा सांसद कनकलाल कटारा ने पूछा कि क्या पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है तो मंत्री ने हाँ कहते हुए उत्तर दिया और बताया कि कानून व्यवस्था की दृष्टि से 5 अगस्त 2019 से 15 नवम्बर 2019 तक प्रदेश में 190 पंजीकृत मामलों में 765 गिरफ्तारियाँ हुई हैं। इसमें स्टोन पेल्टिंग के आंकड़े भी सम्मिलित हैं।

मीडिया ने 1 जनवरी 2019 से 4 अगस्त 2019 के बीच कानून व्यवस्था की दृष्टि से हुई मात्र 361 गिरफ्तारियों का हवाला देते हुए कहना आरम्भ किया है कि 5 अगस्त से 15 नवम्बर के बीच दोगुना से अधिक गिरफ्तारियों के आंकड़े से पता चलता है कि प्रदेश में उपद्रव बढ़ा है। जबकि मीडिया में लिखने वाले पत्रकारों ने यह बात उल्लिखित नहीं किया कि उपद्रवी तत्वों की गिरफ्तारी पहले प्रदेश में विशेष दर्जे के कारण कठिन था, जो अब आसान है। दूसरा, उपद्रवियों की गिरफ्तारी से ही कानून व्यवस्था सुधरती है। असामाजिक तत्वों को खुला छोड़ देने से ही अपराध बढ़ता है। अतः ये आँकड़े प्रदेश में अपराध नियंत्रण की कहानी कहते हैं न कि उपद्रव बढ़ने के। पत्रकारों को न्यूज एनालिसिस करते समय आँखों पर बंधी हुई भाजपा विरोध की प्रायोजित पट्टी उतार कर सोचना चाहिए। पूर्वाग्रहों के आधार पर आधुनिक पत्रकारिता देशहित पर ही आघात करने को प्रयत्नशील रहती है, यह बहुत खतरनाक बुद्धिजीविता है।

जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था की स्थिति को समझने के लिए पर्यटन विभाग के आंकड़ों पर ध्यान देना चाहिए। पहले की तुलना में कश्मीर में पर्यटन के लिए आने वाले यात्रियों की संख्या में बहुत बड़ी बृद्धि हुई है। जम्मू-कश्मीर में विगत छः माह में 34, 10, 219 पर्यटक आए हैं जिनमें 12,934 विदेशी सम्मिलित हैं। इस समय में पर्यटन से 25.12 करोड़ रुपए की आय हुई है। 2012 में 13 लाख पर्यटक आए थे प्रदेश में। 2013 में 11.71 लाख पर्यटकों की संख्या थी। 2014 में खतरनाक बाढ़ से प्रदेश तबाह हुआ था तब भी 11.67 लाख पर्यटक जम्मू-कश्मीर आए थे। 2015 में 9.27 लाख जबकि 2016 में 12.12 लाख पर्यटक आए थे। 2017 में बुरहान बाणी के इनकाउंटर के बाद घाटी लगभग चार महीने बंद रहा था तब भी देशी विदेशी सब मिलाकर 11 लाख पर्यटक आए थे, जबकि 2018 में मात्र 8.5 लाख पर्यटक ही आए थे। 2019 के केवल छः महीनों में 34 लाख से अधिक पर्यटक आए हैं प्रदेश में। यह जम्मू-कश्मीर में कानून व्यवस्था में सुधार का परिचायक है। विगत सात आठ वर्षों में कभी भी पर्यटक संख्या इस स्तर पर नहीं आई जितना धारा 370 हटने के बाद दिख रहा है।

धारा 370 हटाए जाने के समय अमरनाथ यात्रियों को वापस जाने की सलाह देते हुए केंद्र सरकार ने अमरनाथ यात्रा निलंबित कर दिया था। अब अमरनाथ एवं वैष्णो देवी की यात्रा के संदर्भ में जारी किया गया तब की एडवाइजरी वापस ले लिया गया है। ज्ञात हो देशी नागरिकों का बहुत बड़ा समुदाय इन दो तीर्थों की यात्रा के लिए प्रदेश में बहुत बड़ी संख्या में आता है।

धारा 370 हटने के बाद स्कूलों में उपस्थिति बहुत कम रहती थी, किन्तु अब यह उपस्थिति का प्रतिशत इन परीक्षाओं के समय 99.7% के सामान्य स्तर पर आ गया है।

पैलेट गन के उपयोग पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में रेड्डी ने कहा कि कानून व्यवस्था की अतिशय गंभीर स्थिति आने पर ही पैलेट गन का उपयोग हो रहा है किंतु नियंत्रण हो सकने योग्य अन्य परिस्थितियों में इसके उपयोग में परहेज किया जाता है, जिससे नागरिकों में कैज्युलिटी न बढ़े।

रेड्डी ने कहा कि सरकार ने प्रदेश में पत्थरबाजी को नियंत्रित करने के लिए बहुआयामी कदम उठाया है और इसे नियंत्रित करने में सफलता भी प्राप्त हुई है। जम्मू-कश्मीर में कठिनाई खड़ा करने वाले, उकसाने वाले और भीड़ जुटाने वाले तत्वों की बड़ी संख्या में पहचान की गई है। और उनको नियंत्रित करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं, जिसमें पब्लीक सेफ्टी एक्ट (PSA) के अंतर्गत उनकी गिरफ्तारियाँ भी हुई हैं। मंत्री ने हुर्रियत को इन सब उपद्रवों के लिए ब्लेम किया और कहा कि जाँच से पता चला है कि अनेक संगठन जो पत्थरबाजी की घटनाओं में संलिप्त थे उनका संबंध सीधा हुर्रियत से था। एनआईए ने अबतक टेरर फंडिंग के मामले में प्रदेश के 18 बड़े लोगों के विरुद्ध चार्जशीट दायर किया है। जीससे जम्मू-कश्मीर में स्थिति में निरंतर सुधार सुनिश्चित हुआ है।

~मुरारी शरण शुक्ल।

19/11/2019

अभी की परिस्थिति में देश के हिन्दू समाज को और सशक्त बनाने का क्या क्या मार्ग सहज करणीय व व्यवहारोचित है? आप सभी का अभिमत आवश्यक है। सुझाव में उपदेश न हो। आप जो कर सकते हैं वह सोचकर ही सुझाव दें। सरकार को क्या करना चाहिए, मुझे क्या करना चाहिए और दूसरों को क्या करना चाहिए, यह न बताएँ। आप क्या कर सकते हैं यह बताएँ।

~मुरारी शरण शुक्ल।

19/11/2019

आप श्रीरामजन्मभूमि अयोध्या के मामले में क्या क्या जानते हैं? अभी हम हिन्दू विश्व का 1 दिसम्बर 2019 का अंक श्रीरामजन्मभूमि विशेषांक निकाल रहे हैं। आज हमारे सारे लेख कम्प्लीट हो गए। आज पत्रिका डिजाइन में जा चुका। इस अंक हेतु मैंने इस विषय पर बहुत अध्ययन किया। इस मामले से जुड़े एक एक पहलू पर विस्तृत अध्ययन किया। सभी वकीलों द्वारा दिये गए एक एक दलील और तर्क पढ़ा। पूरे 1045 पृष्ठों का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पढ़ा। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट पढ़ा। और भी बहुत कुछ पढ़ा। विगत 1989 से इस मामले को गहराई से जाना है।

किन्तु मेरे मन में एक बात आई कि आपसे एक बार पूछूँ कि क्या आप भी इस मामले के बारे में कुछ जानते हैं? यदि आपकी जानकारी मुझसे अधिक हुई तो कुछ मुझे भी सीखने का अवसर मिलेगा। और यदि जानकारी कम हुई या, न हुई तो सबके कमेंट पढ़कर आपकी भी जानकारी पढ़ेगी। इसीलिये इस मुद्दे पर आपसे आपकी जानकारी साँझा करने का आग्रह करता हूँ जिस को पढ़कर इन सामग्रियों से व्यापक समाज लाभान्वित हो सके। समाज में अध्ययन की प्रेरणा जागृत हो सके। कॉपी पेस्ट कम से कम प्रस्तुत करें। आप स्वयं थोड़ा लिखेंगे तो देश इससे अधिक लाभान्वित होगा। आशा है आपलोग मेरे आग्रह पर अवश्य ध्यान देंगे। आपके टीप्पणियों की समाज प्रतीक्षा कर रहा है। अग्रिम धन्यवाद के साथ।

~मुरारी शरण शुक्ल।

17/11/2019

मुफतखोरी कुछ दिन हम भी कर लें क्या जेनएयू में जाकर?

मैं 46 साल का होने वाला हूँ जल्दी ही, क्या मैं भी जेनएयू का एंट्रेंस फॉर्म भर दूँ? क्या मेरे लिए सूटेबल होगा जेनएयू? क्या मैं वहाँ की आजादी के माहौल में फिट हो पाउँगा? आप सभी लोग अपनी राय अवश्य दें। मेरे लिए कौन सा स्टूडेंट यूनियन सूटेबल होगा? वैसे मुझे ताली बजाने और नाचने नहीं आता, चिल्लाने में तो उनके बाप दादाओं को भी फेल कर दूँगा यदि अपने आपे पर आ गया तो। वैसे आपको बता दूँ कि मैंने अपने ऐस्ट्रॉलजी की प्रैक्टिस जेनएयू के झेलम होस्टल से आरम्भ किया था 2004 में। और मेरी पहली पीढ़ी के सारे जजमान एसएफआई और आइसा के बायोटेक्नॉलॉजी के पीएचडी के स्टूडेंट्स थे। किसी से भी दो-ढाई-तीन घंटे से कम बहस नहीं होती थी। किन्तु प्योर नेचुरल साइंस का स्टूडेंट होने के कारण और कवर टू कवर एक एक पुस्तक पढ़ने की मुझे आदत होने के कारण आजतक एक भी डिबेट में पराजित नहीं हुआ। वो सभी मेरे ज्योतिषीय ज्ञान से इतने प्रभावित हुए कि मैं उनके आग्रह पर उनके मित्रों और मित्रों के मित्रों की भी जन्मपत्रिका देखता चला गया। ज्योतिषशास्त्र को मेरी आजीविका का अंग उनलोगों ने ही बनवा दिया। किन्तु सबलोग मेरे कहने से होस्टल की छत पर सूरज को जल देने जाने लगे थे और मेरे बताए पूजा पाठ भी श्रद्धापूर्वक करते थे। जिन्होंने बात मानी उन सबका कैरियर सेट हो गया। मैं बहुत गहराई से जानता हूँ इन जेनएयू वालों को।

आजकल किसी को छोड़ने जाओ रेलवे प्लेटफॉर्म पर तो 10 रुपए का प्लेटफॉर्म टिकट मिलता है मात्र दो घंटे की वैलिडिटी के साथ। अगर आपको सुलभ शौचालय जाने की आवश्यकता हो गई तो कम से कम पाँच रुपये लग जाते हैं मात्र 5-7 मिनट के। यूरिनरी के भी दो रुपए खर्च हो ही जाते हैं। गाड़ी लेकर गए तो पार्किंग का चार्ज, 10 रु. से कई गुणा अधिक उसका चार्ज होता है। मेट्रो में एक घंटे अधिक रुक गए तो 10-20 रुपए का फाइन लग जाता है तुरंत। सुट्टाबाजों को कोई भी सिगरेट 10 रु. से कम का नहीं मिलता। आजकल मीठा पान भी दस रु. से कम में नहीं मिलता। प्यास लग गई तो पानी की बोतल कम से कम 15 रुपए की मिलती है। अच्छा ब्रांड हुआ तो बीस रुपये। और माओवादियों की पसंद का ब्रांड हुआ तो 200 रुपए भी चुकाने पड़ सकते हैं। चाय का कप आज दस रु. से कम का नहीं मिलता। समोसा का मूल्य भी दस रु. के मार्क को पार कर गया है। दारू की बोतल कितने की आती है इसका मुझे कोई आईडिया नहीं। एक चिल्लम गांजे का क्या रेट है यह भी मुझे मालूम नहीं। यह सब कुछ खरीदने के लिए पैसे हैं इन माओवादियों के पास किन्तु रूम का किराया महंगा लगने लगा है। इन सब को छात्रवृत्ति मिलती है। इनको हॉस्टल का किराया अपने बाप के घर से नहीं चुकाना है फिर भी इनके तेवर महाराजाओं वाले हैं। इनके तेवर से यह अहसास हो रहा है कि जैसे ये ही देश को चलाते हों। देश पर सदा से भार हैं ये शहरी माओवादी।

जेनएयू में एक कमरे का महीने भर का किराया है 10 रुपए। दिल्ली में कुछ भी करना हो तो जेएनयु के हॉस्टल से बढ़िया जगह कहाँ मिलेगा? माओवादी आतंक भी फैलाना हो तो जेनएयू से सेफ जगह आपको कहीं और नहीं मिल सकता। यह जेएनयू यथार्थ में माओवादी मदरसा ही है। मदरसे में खैरात की चीजों की आदत पड़ जाती है लोगों को, वही आदतें जेनएयू के बूढ़े होते छात्रों को भी पड़ गई है। महिसासुर की संतानों को खैरात तो चाहिए किन्तु नमकहरामी की लत लग जाने के कारण इनको अब मलाई हाथ से जाने का भय सता रहा है। इन भारतद्रोही मार्क्सवादियों को अब साहस नहीं कि अलग अलग स्वतंत्र रूप से पहले की भाँति चुनाव लड़ लें जेनएयू में। अब सारे स्टूडेंट यूनियन मिलकर चुनाव लड़ते हैं एबीवीपी के डर से। अब इनको इंसेक्युरिटी की फिलिंग आने लगी है जेनएयू में। ऐसे ही ये थोड़े न इंटोलेरेंट हो रहे हैं। किन्तु अब इनकी दुकानदारी के अंतिम दिन हैं ये। अब थोड़े दिन और ऐश कर लो। आगे तो तुम्हारी खैर नहीं। भारत में मार्क्सवाद के दिन अब गिनती के बचे हुए हैं। इन सबके लिए अब साउथ चायनीज सी में डूब मरने का समय आ रहा है निकट।

~मुरारी शरण शुक्ल।

15/11/2019

विचारणीय हरिद्वार यात्रा: निष्कर्ष: भारत सुरक्षित है।

11 नवम्बर 2019, सोमवार की रात्री 1 बजे हम छः लोग दिल्ली से निकले। मुझे लगभग 7 बजे मेरे मित्र राजकुमार राणा जी ने फोन किया और पूछा कि हरिद्वार चलोगे क्या? कल पूर्णिमा है और गंगा स्नान करके सत्यनारायण भगवान की कथा गंगातट पर सुनने की इच्छा है। इसीलिए राणा जी, उनकी श्रीमती जी, उनके बड़ी पुत्री कोमल तथा हुकुम सिंह जी और उनकी श्रीमती जी पाँच लोगों की सहमति के उपरांत उनकी गाड़ी में एक सीट खाली रह रहा था सो मैं सवार हो गया और पहुँच गया हरिद्वार। कार्तिक पूर्णिमा के कारण हरिद्वार में बहुत भीड़ थी। जैसे तैसे गंगा तट पर पहुँचे। स्नान किया। गंगाजल खूब पिया। सूर्यदेव को अर्ध्य दिया। उसके उपरांत गंगातट पर ही एक शिवजी का चबूतरा दिख गया। वहाँ एक चादर बिछाकर हम बैठ गए शिवजी के स्थान पर सत्यनारायण भगवान की कथा के लिए।

उन छः लोगों में मैं ब्राह्मण था तो मैंने विचार किया कि मैं इनको कथा सुना देता हूँ। यद्यपि मैं प्रायः कर्मकांड नहीं कराता। ज्योतिषशास्त्र का काम तो मैं करता हूँ किन्तु सोच विचारकर कर्मकांड से दूरी रखता हूँ। किन्तु जानकारी तो सबकी है ही। मैंने उनको विधिवत कथा सुनाना आरम्भ किया। हुकुम सिंह जी की श्रीमती जी ने एक अध्याय के पश्चात् कहा कि पंडित जी केवल हिंदी वाला ही सुना दो। संस्कृत हमें समझ में आती नहीं और समय भी अधिक लगता है तो संस्कृत छोड़ दो। मैंने उनको कहा कि यदि आप संस्कृत सुनोगे तो आपका भला होगा। हिंदी तो हमारे आपके जैसे लोगों ने भावरूप में लिखा है। ये संस्कृत के शब्द ऋषियों की वाणी है। इनका अक्षर संयोजन वैज्ञानिक रीति से हुआ है। इनका श्रवण करने से बहुत प्रकार की व्याधियों, कष्टों, दुखों का निवारण होता है। इसीलिए मैं संस्कृत अवश्य सुनाऊँगा। क्योंकि आपकी इच्छा हो या न हो। आपका भला हो यह मेरी इच्छा है। मेरी जिद्द के आगे वो झुक गई। मैं संस्कृत का पाठ करता। फिर हिंदी के भाव समझाता। हिंदी समझने के लिये पाठ करना आवश्यक था। क्योंकि कथा को जानना और कथा के पीछे के निहितार्थ को समझना आवश्यक होता है। इसीलिए सम्पूर्ण कथा सुनाकर, आरती और उत्तर पूजा के उपरांत कथा व सत्यनारायण पूजन पूर्ण हुआ।

कथा चल ही रहा थी कि बीच में एक बुजुर्ग महिला आई। उन्होंने बिना पूछे पोथी पर 51 रुपए रख दिया। उन्होंने मुझे प्रणाम किया। मैंने भी उनकी आयु को प्रणाम किया। उनको मैंने कहा कि माताजी आप तो मुझे जानती भी नहीं। तो माताजी ने कहा गंगातट पर कोई उत्तम ब्राह्मण मिल जाए तो उसका परिचय क्या पूछना। आप कथा बहुत अच्छी सुना रहे हो। आपके संस्कृत का आग्रह मैंने सुन लिया। अब कुछ पूछना शेष नहीं रहा। वह थोड़ी देर में पुनः वापस आई और एक साड़ी मुझे आदरपूर्वक दे गई। मैं चकित था। मैं तो अपने मित्रों को कथा सुना रहा था। उनका पुण्यकार्य पूर्ण हो इस हेतू से सुना रहा था। मेरी मनसा कोई दान-दक्षिणा लेने की थी नहीं। मैं भी पुण्य अर्जित करने ही बैठा था गंगातट पर। किन्तु यह अप्रत्याशित हुआ। चूँकि इसमें श्रद्धा का समावेश था तो कुछ भी रोकना मुझे अच्छा नहीं लगा। श्रद्धा को अवरुद्ध करना उचित नहीं। श्रद्धा भारत की पूंजी है। किंतु आजकल इसका दुरुपयोग भी होता है ज्ञानियों के द्वारा। आज के ज्ञानी श्रद्धा का दोहन करने लग गए हैं। यह भारत की रीति और परम्परा के विरुद्ध है।

कथा जब पूर्ण हो गई। और हमलोग एक दूसरे को प्रसाद दे रहे थे तभी आठ दस बुजुर्ग महिलाओं का एक समूह उस चबूतरे पर आया। एक बुजुर्ग महिला ने बिना कुछ पूछे मुझे एक सॉल ओढा दिया। एक ने धोती और साड़ी दे दिया। धोती साड़ी कईयों ने लाकर दे दिया। हमारे मित्र उठ गए थे। उसी चादर पर वो बुजुर्ग महिलाओं का समूह बैठ गया था। उन्होंने मुझसे कहा कि आप यदि हमलोगों को भी सत्यनारायण कथा सुना देते तो बड़ा अच्छा होता। मैं उनके आदर और श्रद्धा को रोक नहीं पाया। मैंने कथा पुनः आरम्भ किया। कथा पूर्ण किया। आरती आरम्भ हुई। आरती पूरी होते होते उन सबने मुझे बहुत पैसे दे दिए। कोई 11 रुपये, कोई 21, कोई 51, कोई 111 रुपए दिए। आरती पूरी हुई। उनका बहुत आदर था। उनके चेहरे पर आदर-श्रद्धा के भाव थे। मैं भी भाव विभोर था। दान-दक्षिणा पाकर नहीं। उनकी श्रद्धा पाकर मैं अभिभूत था।

मैं लगातार सोच रहा था कि भारत की मिट्टी में कितनी श्रद्धा सनी हुई है। कितना प्रेम, कितना आदर है? वहाँ अर्बन नक्सल्स द्वारा प्रचारित प्रसारित ब्राह्मण विरोध नहीं था। कोई रति मात्र भी किन्तु-परंतु नहीं था। कोई विद्वेष नहीं था। कोई शंका-संदेह नहीं था। न मेरी कर्मकांड की वृत्ति थी वहाँ। न ही उनसे दान-दक्षिणा लेने का कोई मानस था। न ही कोई मन में लालच था। मैं तो दान-दक्षिणा लेने से प्रायः परहेज करता हूँ यह सोचकर कि लोगों का पाप बटोरकर क्या करना। जितना पुण्यार्जन हो जाये जीवन में उतना ही अच्छा। वहाँ नकारात्मक कुछ भी नहीं था। गंगा का तट था। तीरथ का भाव था। आदर और श्रद्धा का प्रवाह था। शिव के चबूतरे पर केवल सत्य, शिव और सब कुछ सुंदर ही सुंदर था। कुछ भी आस्वीकार्य न था। मैं तो बस काल के बशीभूत एक सामान्य प्राणी मात्र था जो काल के प्रवाह को रोकने का साहस न कर सका। महाकाल के रचे बिधान का एक उपकरण मात्र था। मैंने उसकी लीला को पूर्ण रूपेण सम्पन्न हो जाने दिया। मैं बहुत कुछ सोच रहा था। उसमें एक भाव भारत के सुरक्षित होने की आश्वस्ति का भी था। जबतक यह धार्मिक श्रद्धा जीवित है तबतक भारत पूर्णतः सुरक्षित है।

~मुरारी शरण शुक्ल।

09/11/2019

श्रीरामजन्मभूमि देवस्थान की पूरी भूमि रामलला विराजमान को। सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ भूमि अयोध्या में कहीं भी दे सरकार। :सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम निर्णय। न्यायालय को धन्यवाद।

~मुरारी शरण शुक्ल।

09/11/2019

रामलला हम आएँगे।
मंदिर वहीं बनाएँगे।
अब डेट भी बताएँगे।।
जय श्री राम।

~मुरारी शरण शुक्ल।

08/11/2019

शंका न रखें। संदेह से बाहर निकलें। न्यायालय पर भरोसा रखें। संसद पर भरोसा रखें। सरकार पर भरोसा रखें। सबसे अधिक श्रीराम लला विराजमान पर विश्वास रखें। सब कुछ आपके पक्ष में होगा। आपके दोनों हाथ में लड्डू है। न मेरी न तेरी केवल देश की जय होगी। राष्ट्र के पर्याय प्रभु श्रीराम की जय होगी। जय श्री राम।

~मुरारी शरण शुक्ल।

08/11/2019

श्रीरामजन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय का चिर प्रतीक्षित निर्णय कल आने वाला है। आप सभी को अग्रीम बधाई।

~मुरारी शरण शुक्ल।

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