Bhartiya Hindu Shuddhi Sabha - भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा

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Bhartiya Hindu Shuddhi Sabha - भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा Bhartiya Hindu Shuddhi Sabha was founded by Swami Shraddhanand Ji on 13th Feb, 1923.

Conversion of Mizoram to ChristianityThe Battle of Plassey in 1757 established the British firmly in India and they beca...
23/05/2026

Conversion of Mizoram to Christianity

The Battle of Plassey in 1757 established the British firmly in India and they became undisputed rulers of the Bengal, one of the largest province in India. It was comprised of present Bihar, Orissa, Bengal, Bangladesh and Assam. They also got Chittagong, the south-eastern port of the province which did wonders to the British trade. This also brought them to the immediate vicinity of North-Eastern hill tribals like Lushai, Chakma and Kumi, to name a few. These tribes inhabited the area of present Tripura, Mizoram and Manipur.

These were aborigine tribes and occasionally raided the neighbouring tribes and collected the taxes and even heads of the people. In the process, they also used to loot the items which they could not afford. After the arrival of the British, people started paying taxes to the British, instead of them. This dried their revenues and brought on a collision course with the British. The latter named them headhunters but adopted the policy of leaving the tribes on their own. One day, however, everything changed.

During those times, the British also occupied the Cachar hills in southern Assam where the city of Silchar is located. With time, they established the tea gardens in the area which proved to be highly profitable. Soon a mania swept the region where tea planters begin to expand their gardens and encroach on the Lushai territory. One such tea garden was in Alexandrapur near Silchar which was owned by one George Seller. One day, he invited one of his close friends James Wi******er and his 6 years old daughter Mary Wi******er in 1870 as she was going to Britain for further studies. Mary was the illegitimate child of James and his Meitei (Manipuri) worker. Lushais got the wind of such celebration and swooped down on the tea garden in a pre-dawn raid. They killed a few people including James during confrontation. Seller, however, managed to escape while Mary was kidnapped and taken to Lushai headquarters. This created a media furore in London, a few days later. Mary was, however, treated like a queen by the tribal women. In one year of captivity, she became used to the Mizo lifestyle and forgot English completely.

On 8th October 1871, after more than a year passed, the British attacked the Lushai hamlet and killed everyone. Mary had to be dragged against her will by the British soldiers. She was then sent to Scotland to her grandparents.

However, the story has not finished for hapless Lushais and other tribes in North-East. The missionaries saw their chance and dubbed the kidnapping barbaric. It did not matter to them that they killed every unyielding tribal in retaliation. It also did not matter that they carried out much more barbarity during the crusades and during the first war of independence in 1857. Turks were even in the habit of making towers of heads. By 1898, the British captured the whole Lushai territory and missionaries started to have a field day. Arthington Mission and Welsh Presbyterian missionaries were the foremost in converting and within a decade they converted more than 1 lakh tribals.

A story was deliberately spread that tribals had fallen into a trance after converting and they saw remarkable visions, namely that two great lights would shine in the land, one in the north and the other in the south. This further propelled the conversion as they were made to be ashamed of their ancestors, however, it is another matter that they were now converted from head hunters to soul hunters and church planters. A plaque of James were made in the tea garden and they were taken to Alexanderpur on an annual yatra to remind them of their savage past and how they were now the civilized people. Mizoram is consequently now 87% Christian. Mary was deified as a Christian messiah and her photos with Jesus are in most households. Everyone was told that it was prophesied in the Christian texts like Isaiah 60:22 which elaborated ‘A little one shall become a thousand and a small one a strong nation.’
Mary was projected as a little one.

Written by Amit Agarwal, author of the bestseller on Indian history titled “Swift horses Sharp Swords”. You may buy the book at Amazon

Source: Lewin TH, A Fly on the Wheel: Or, How I Helped to Govern India, 1912, p 256-290
Hattaway, Paul, 2006. From Headhunters to Church Planters, p 4-8
Gait, Edward, 1977. A History of Assam, p 318
Sajal Nag, Re-searching Transitions in Indian History, p 202-214

Table showing Christian (Protestant) Missionary Societies in India— the year work began, stations, missionaries, local p...
21/05/2026

Table showing Christian (Protestant) Missionary Societies in India— the year work began, stations, missionaries, local preachers, schools, pupils, Indian Christians, and communicants.
Source: Indian Missionary Directory, London & New York, 1886

बाइबिल पर सप्रमाण ३१ प्रश्न       - डॉ श्रीराम आर्यपहला प्रश्न जो खुदा अपनी गलतियों पर पछताता हो वह आगे गलती नहीं करेगा ...
18/05/2026

बाइबिल पर सप्रमाण ३१ प्रश्न - डॉ श्रीराम आर्य
पहला प्रश्न
जो खुदा अपनी गलतियों पर पछताता हो वह आगे गलती नहीं करेगा इसकी क्या गारंटी है और उसके न्याय पर भी कैसे भरोसा किया जा सकता है?(उत्पत्ति६-६)
६. और यहोवा पृथ्वी पर मनुष्य को बनाने से पछताया, और वह मन में अति खेदित हुआ।
प्रश्न-२
जो खुदा अपनी बात पर भी कायम ना रहने वाला हो, उसके आश्वासन व कानूनों पर भरोसा करने वाले धोखा नहीं खाएंगे इसकी क्या गारंटी है?( शैमुएल-2/30,31

प्रश्न-३
जब बाईबिल के अनुसार ईश्वर बहुत से है तो इसाई उनमें से कौन से ईश्वर को मानते हैं? और उसकी पहचान व उसका हुलिया क्या है?( भजन संहिता ८२ /1एवं उत्पत्ति 3/22)

प्रश्न-४
ईशा कौन से ईश्वर का इकलौता बेटा था? ईशा ईश्वर का इकलौता बेटा था, इसका क्या सबूत है? क्योंकि मरियम ने कभी नहीं बताया कि ईश्वर से उसे गर्भ रहा था और बाइबिल में ईश्वर ने भी अपने से मरियम को गर्भ रहने की बातें नहीं कहीं है। (युहन्ना ३/16)

प्रश्न-५
ईसाई संप्रदाय में बाप बेटी आपस में शादी कर सकते हैं क्या यह बात बाइबल के खिलाफ है?(१कुरैन्थियो ७ /37)

प्रश्न-६
विज्ञान ने तारों को पृथ्वी से भी दोगुनी बड़े लोक के बराबर सिद्ध किया है तो बाइबिल में तारों का पृथ्वी पर अंजीर के फलों की तरह गिर पड़ना क्या यह सिद्ध नहीं करता है कि बाईबिल का लेखक बे-पढ़ा लिखा व्यक्ति था?(प्रकाशित वाक्य ६/13)

प्रश्न-७
एक कुंड की शराब की लहरें गजो उची सौ कोस तक बहना गप्प क्यों ना माना जाए क्या यह बात किसी तर्क या प्रमाण से साबित की जा सकती है?(प्रकाशित वाक्य पैरा १४/20)

प्रश्न-८
गर्भवती मां के पेट में 2 बच्चों की कुश्ती का करना क्या इसे बाइबिल की गप्प ना मानी जाए?(उत्पत्ति २५/21-22)

प्रश्न-९
किस प्रकार यह संभव हो सकता है कि गर्भ के अंदर बैठा हुआ बालक गर्भाशय में से हाथ बाहर निकालकर डोरा बन्धवाकर, फिर अंदर गर्भाशय में स्वयं हाथ भीतर खींच ले? यह भी बाइबिल की गप्प क्यों ना मानी जाए क्योंकि गर्भस्थ बालक मे इतनी चेतना वह शक्ति संभव नहीं है।( बाईबल उत्पत्ति ३८/28-29)

प्रश्न-१०
जब ईसाई खुदा मनुष्य की फौजी मदद साथ में रहते हुए भी विपक्ष की फौजियों से हार गया वह उन्हें पराजित नहीं कर सका तो ऐसे खुदा को सर्वशक्तिमान कैसे साबित किया जा सकता है?(न्यायियो 1/19)

प्रश्न- ११
इसाईं खुदा के पास 20 करोड़ घुड़सवार फौज किससे लड़ने को व अपनी किससे रक्षा करने के लिए रहती है ?( प्रकाशित वाक्य पैरा १०/16-17)

प्रश्न- १२
खुदा की 12 से भी ज्यादा फौजी पलटन ऊनपर कितना वार्षिक व्यय होता है इन फौजियों का कमांडर कौन है यह कभी लड़ने भी गई है या निकम्मी पड़ी-पड़ी एक ही जगह पर खाती रहती है उसका बायबिल से विवरण पेश करें?(मत्ती २६/५३)

प्रश्न- १३
जब खुदा याकूब से कुश्ती में रात भर जोर करने पर भी ना जीत सका तो ऐसे कमजोर खुदा से उसके अनुयाई बड़े-बड़े युद्ध में मदद कि आशा क्यों रखते हैं-?
उत्पत्ति प्रकरण ३२/24से 32तक))

प्रश्न-१४
पैगंबर लूट के द्वारा अपनी पुत्रियों से व्यभिचार को सारी बाइबिल में कहीं भी पाप क्यों नहीं माना गया है और उसे कहीं भी धिक्कारा कर्मों नहीं गया है? -(उत्पत्ति-१९/30से 38))

प्रश्न-१५
जब खुदा भी मेहनत करने से थक जाता है और आराम करके अपना जी ठंडा करता है तो उसे सर्वशक्तिमान कैसे माना जा सकता है? -(निर्गमन ३१/17)

प्रश्न-१६
जो खुदा याददाश्त के लिए डायरी वा रजिस्टर लिख कर रखता हो वह सर्वज्ञ खुदा कैसे माना जा सकता है?
(निर्गमन ३२/31,32,33)

प्रश्न-१७
जिस व्यक्ति को इतनी भी पदार्थ विद्या ना आती हो कि पीतल पत्थर से बनती है या तांबा जस्ता मिलाने से बनती है उसके द्वारा लिखी गई पुस्तक धर्म पुस्तक कैसे मानी जा सकते हैं?-(बाइबिल अय्यूब प्रकरण२८/2)

प्रश्न-१८
जिस धर्म पुस्तक लिखने वाले को इतना भी भूगोल ना आता हो कि विश्व पृथ्वी के खंभों पर धरा है या परस्पर आकर्षणानुकर्षरण के आधार पर परमात्मा उसे धारण करता है उसकी लिखी पुस्तक प्रमाणित कैसे मानी जा सकती है
जिस पुस्तक में ऐसी बे सर पैर की बातें हो उसे गप्प पुस्तक यदि माना जाए तो क्या गलत होगा/?
बाईबल १शैमुएल २/8)

प्रश्न 19
क्या साउल को राजा बना कर बाद में पछताना इसाई खुदा की अनुभवहीनता वा सरवज्ञता का खुला उपहास नहीं है?
(बाइबल १ सैमुएल१५/३५)

प्रश्न 20
क्या इसाई खुदा को खुले मैदान में पृथ्वी पर रहने में चोर डाकुओं का भय लगता था जो वह बेचारा बिना मकान के इधर-उधर मारा मारा फिरता रहता था?, ( १ इतिहास १७/4,5)

प्रश्न 21
जब इसाई खुदा के बहुत से बेटे थे तो उसकी बीवियां कितनी थी वे सभी बेटे सदा कुवारे ही रहे थे या उनके कभी विवाह भी हुए थे बतावें कि खुदा का परिवार कितना बड़ा था ?(अय्यूब-१/6)

प्रश्न 22
जब चर्बी खाते-खाते खुदा का पेट भर गया तो उसके बाद भी जो लोग उसे चर्बी खिलाते रहते थे उसको पचाने के लिए खुदा ने में कोई चूर्ण या दवा खाई थी या कोई आसन
लगाकर हाजमा ठीक किया था?( याशायह1/11)

प्रश्न 23
जो खुदा अपने शत्रुओं से परेशान रहता हो उन्हीं से लड़कर बदले झुकाता हो वह भी क्या खुदा माना जा सकता है ईर्ष्या द्वेष रखना क्या खुदा का गुण है या उसमें दोष है? (याशायाह 1/24)

प्रश्न नं 24
जब खुदा युद्ध करने को स्वर्ग से उतरता है युद्ध के बाद फिर स्वर्ग चला जाता है तो वह सर्व व्यापक नहीं रह सकता क्या खुदा में इतनी भी ताकत नहीं कि स्वर्ग में बैठे-बैठे अपनी फौज से जमीन के अपने दुश्मनों पर विजय प्राप्त कर सके वह भी क्या खुदा है जिसे स्वयं पैदा किए लोगों से युद्ध करने को आना पड़ता है और उनसे भी हार जाता है ?
(याशायाह ३१/4)

प्रश्न 25
खुदा चर्बी बाकून जैसी चीजें क्यों खाता है फल मेवा घी दूध आदि उसे क्यों पसंद नहीं है क्या इनको खाने से वह बीमार पड़ जाता है?(यहेजकेल ४४ /15)

प्रश्न 26
खुदा ने इसराइलीओं को पखाने से रोटी पका कर खाने की गंदी आज्ञा क्यों दी थी(यहेजकेल ४ / १२,१३)

प्रश्न 27
खुदा फाटक बंद मकान अर्थात बहिस्त में क्यों रहता है क्या डर लगा रहता है कि जमीन के लोग वहां जाकर खुदा को खत्म ना कर दें?(यहेजकेल ११/1)

प्रश्न 28
खुदा मुकदमा लोगों के खिलाफ लड़ता था तो फैसला करने वाला जज तथा खुदा का वकील पैरवी करने के लिए कौन होता था?(यहेजकेल 17/20)

प्रश्न 29
खुदा का गुस्से बाज हो ना उसे दिमाग की कमजोरी का बीमार साबित करता है क्या कोई ऐसा तरीका भी है जिससे खुदा की इस बीमारी के दोष को दूर किया जा सके?(याशायह 54/7,8)

प्रश्न 30
जब शराब (दाख मधु) पीने से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है तो खुदा और मसीही लोगों को शराब पिलाकर उनको बर्बाद क्यों करते थे तथा मसीह स्वयं शराब क्यों छ् था क्या लोगों को नुकसान पहुंचाने से भी गुनहगार नहीं थे?(याशायह 25/6, युहन्ना 2/7,8,9 होशे 4/11)

प्रश्न 31
संसार में दूसरों को गाली देना पाप माना जाता है तो ईशा ने अपने से पहले पैदा हुए महापुरुषों को चोर डाकू बताकर गाली क्यों दी क्या इससे मसीह का गुनहगार होना प्रमाणित सिद्ध नहीं है?(युहन्ना 10/7,8)

चावल की बोरी के बदले बदली हुई प्रजाति 😑बड़ी ईसाईनुमा होती हैं 😎
16/05/2026

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ईसाई धर्मान्तरण का एक कुत्सित तरीका- प्रार्थना से चंगाई #डॉ_विवेक_आर्य (कुछ वर्ष पूर्व प्रकाशित लेख)विश्व इतिहास इस बात ...
14/05/2026

ईसाई धर्मान्तरण का एक कुत्सित तरीका- प्रार्थना से चंगाई

#डॉ_विवेक_आर्य

(कुछ वर्ष पूर्व प्रकाशित लेख)

विश्व इतिहास इस बात का प्रबल प्रमाण हैं की हिन्दू समाज सदा से शांतिप्रिय समाज रहा हैं। एक ओर मुस्लिम समाज ने पहले तलवार के बल पर हिन्दुओं को मुसलमान बनाने की कोशिश करी थी, अब सूफियों की कब्रों पर हिन्दूओ के सर झुकवाकर, लव जिहाद या ज्यादा बच्चे बनाकर भारत की सम्पन्नता और अखंडता को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं दूसरी ओर ईसाई समाज हिन्दुओं को ईसा मसीह की भेड़ बनाने के लिए रुपये, नौकरी, शिक्षा अथवा प्रार्थना से चंगाई के पाखंड का तरीका अपना रहे हैं।

समाचार पत्र में छपी खबर की चर्च द्वारा दिवंगत पोप जॉन पॉल द्वितीय को संत घोषित किया गया है ने सेमेटिक मतों की धर्मांतरण की उसी कुटिल मानसिकता की ओर हमारा ध्यान दिलाया है। पहले तो हम यह जाने की यह संत बनाने की प्रक्रिया क्या है?

सबसे पहले ईसाई समाज अपने किसी व्यक्ति को संत घोषित करके उसमें चमत्कार की शक्ति होने का दावा करते है। विदेशों में ईसाई चर्च बंद होकर बिकने लगे हैं और भोगवाद की लहर में ईसाई मत मृत प्रायः हो गया है। इसलिए अपनी संख्या और प्रभाव को बनाये रखने के लिए एशिया में वो भी विशेष रूप से भारत के हिन्दुओं से ईसाई धर्म की रक्षा का एक सुनहरा सपना वेटिकन के संचालकों द्वारा देखा गया है। इसी श्रृंखला में सोची समझी रणनीति के अंतर्गत पहले भारत से दो हस्तियों को नन से संत का दर्जा दिया गया था ।पहले मदर टेरेसा और बाद में सिस्टर अलफोंसो को संत बनाया गया था और अब जॉन पॉल को घोषित किया गया है।
यह संत बनाने की प्रक्रिया अत्यंत सुनियोजित होती है। पहले किसी गरीब व्यक्ति का चयन किया जाता है। जिसके पास इलाज करवाने के लिए पैसे नहीं होते, जो बेसहारा होता है, फिर यह प्रचलित कर दिया जाता है कि बिना किसी ईलाज के केवल मात्र प्रार्थना से उसकी बीमारी ठीक हो गई और यह कृपा एक संत के चमत्कार से हुई। गरीब और बीमारी से पीड़ित जनता को यह सन्देश दिया जाता है कि सभी को ईसा मसीह को धन्यवाद देना चाहिए और ईसाइयत को स्वीकार करना चाहिए। क्योंकि पगान पूजा अर्थात हिन्दुओं के देवता जैसे श्री राम और श्री कृष्ण में चंगाई अर्थात बीमारी को ठीक करने की शक्ति नहीं हैं। अन्यथा उनको मानने वाले कभी के ठीक हो गए होते।

अब जरा ईसाई समाज के दावों को परीक्षा की कसौटी पर भी परख लेते है।
मदर टेरेसा जिन्हें दया की मूर्ति, कोलकाता के सभी गरीबो को भोजन देने वाली, अनाथ एवं बेसहारा बच्चों को आश्रय देने वाली, जिसने अपने जन्म देश को छोड़ कर भारत के गटरों से अतिनिर्धनों को सहारा दिया, जो की नोबेल शांति पुरस्कार की विजेता थी, एक नन से संत बना दी गयी की उनकी वास्तविकता से कम ही लोग परिचित है। जब मोरारजी देसाई की सरकार में धर्मांतरण के विरुद्ध बिल पेश हुआ, तो इन्हीं मदर टेरेसा ने प्रधान मंत्री को पत्र लिख कर कहाँ था की ईसाई समाज सभी समाज सेवा की गतिविधियाँ जैसे की शिक्षा, रोजगार, अनाथालय आदि को बंद कर देगा। अगर उन्हें अपने ईसाई मत का प्रचार करने से रोका जायेगा। तब प्रधान मंत्री देसाई ने कहाँ था इसका अर्थ क्या यह समझा जाये की ईसाइयों द्वारा की जा रही समाज सेवा एक दिखावा मात्र हैं और उनका असली प्रयोजन तो ईसाई धर्मान्तरण है।

यही मदर टेरेसा दिल्ली में दलित ईसाइयों के लिए आरक्षण की हिमायत करने के लिए धरने पर बैठी थी। महाराष्ट्र में 1947 में एक चर्च के बंद होने पर उसकी संपत्ति को आर्यसमाज ने खरीद लिया। कुछ दशकों के पश्चात ईसाइयों ने उस संपत्ति को दोबारा से आर्यसमाज से ख़रीदने का दबाव बनाया। आर्यसमाज के अधिकारियों द्वारा मना करने पर मदर टेरेसा द्वारा आर्यसमाज को देख लेने की धमकी दी गई थी।

प्रार्थना से चंगाई में विश्वास रखने वाली मदर टेरेसा खुद विदेश जाकर तीन बार आँखों एवं दिल की शल्य चिकित्सा करवा चुकी थी। यह जानने की सभी को उत्सुकता होगी की हिन्दुओं को प्रार्थना से चंगाई का सन्देश देने वाली मदर टेरेसा को क्या उनको प्रभु ईसा मसीह अथवा अन्य ईसाई संतों की प्रार्थना द्वारा चंगा होने का विश्वास नहीं था जो वे शल्य चिकित्सा करवाने विदेश जाती थी?

अब सिस्टर अलफोंसो का उदाहरण लेते हैं। वह केरल की रहने वाली थी। अपनी करीब तीन दशकों के जीवन में वे करीब २० वर्ष तक अनेक रोगों से स्वयं ग्रस्त रही थी। केरल एवं दक्षिण भारत में निर्धन हिन्दुओं को ईसाई बनाने की प्रक्रिया को गति देने के लिए संभवतः उन्हें भी संत का दर्जा दे दिया गया और यह प्रचारित कर दिया गया की उनकी प्रार्थना से भी चंगाई हो जाती हैं।
अभी हाल ही में सुर्खियों में आये दिवंगत पोप जॉन पॉल स्वयं पार्किन्सन रोग से पीड़ित थे और चलने फिरने से भी असमर्थ थे। यहाँ तक की उन्होंने अपना पद अपनी बीमारी के चलते छोड़ा था।
पोप जॉन पॉल को संत घोषित करने के पीछे कोस्टा रिका की एक महिला का उदाहरण दिया जा रहा हैं जिसके मस्तिष्क की व्याधि का ईलाज करने से चिकित्सकों ने मना कर दिया था। उस महिला द्वारा यह दावा किया गया हैं की उसकी बीमारी पोप जॉन पॉल द्वितीय की प्रार्थना करने से ठीक हो गई है। पोप जॉन पॉल चंगाई करने की शक्ति से संपन्न है एवं इस करिश्मे अर्थात चमत्कार को करने के कारण उन्हें संत का दर्ज दिया जाये।
इस लेख का मुख्य उद्देश्य आपस में वैमनस्य फैलाना नहीं हैं अपितु पाखंड खंडन हैं। ईसाई समाज से जब यह पूछा जाता है कि आप यह बताये की जो व्यक्ति अपनी खुद की बीमारी को ठीक नहीं कर सकता, जो व्यक्ति बीमारी से लाचार होकर अपना पद त्याग देता हैं उस व्यक्ति में चमत्कार की शक्ति होना पाखंड और ढोंग के अतिरिक्त कुछ नहीं है। अपने आपको चंगा करने से उन्हें कौन रोक रहा था?

यह तो वही बात हो गई की खुद निःसंतान मर गए और को औलाद बख्शते हैं। ईसाई समाज को जो अपने आपको पढ़ा लिखा समाज समझता है। इस प्रकार के पाखंड में विश्वास रखता है यह बड़ी विडम्बना है। मदर टेरेसा, सिस्टर अल्फोंसो, पोप जॉन पॉल सभी अपने जीवन में गंभीर रूप से बीमार रहे। उन्हें चमत्कारी एवं संत घोषित करना केवल मात्र एक छलावा है, ढोंग है, पाखंड है, निर्धन हिन्दुओं को ईसाई बनाने का एक सुनियोजित षड्यन्त्र हैं। अगर प्रार्थना से सभी चंगे हो जाते तब तो किसी भी ईसाई देश में कोई भी अस्पताल नहीं होने चाहिए, कोई भी बीमारी हो जाओ चर्च में जाकर प्रार्थना कर लीजिये। आप चंगे हो जायेंगे। खेद हैं की गैर ईसाइयों को ऐसा बताने वाले ईसाई स्वयं अपना ईलाज अस्पतालों में करवाते है।

मेरा सभी हिन्दू भाइयों से अनुरोध है कि ईसाई समाज के इस कुत्सित तरीके की पोल खोल कर हिन्दू समाज की रक्षा करे और सबसे आवश्यक अगर किसी गरीब हिन्दू को ईलाज के लिए मदद की जरूरत हो तो उसकी धन आदि से अवश्य सहयोग करे जिससे वह ईसाइयों के कुचक्र से बचा रहे।

पॉल दिनाकरन के नामक ईसाई प्रचारक का चित्र जो वर्षों से रोग से पीड़ित महिला के रोग को चुटकियों में ठीक करने का दावा करता है। पाठकों को जानकार आश्चर्य होगा इनके पिताजी लंबी बीमारी के बाद मरे थे। इसे दाल में काला नहीं अपितु पूरी दाल ही काली कहे तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

*39 ने ईसाई मत छोड़ा* *आज याने 12 मई 2026 को दिंडोशी भाग के आरे कॉलनी के युनिट नंबर 32 मे रहने वाले कुरमी पासी समाज के 1...
13/05/2026

*39 ने ईसाई मत छोड़ा
*
*आज याने 12 मई 2026 को दिंडोशी भाग के आरे कॉलनी के युनिट नंबर 32 मे रहने वाले कुरमी पासी समाज के 14 पुरूष 14 महिला और 11 बाल ऐसे कुल 39 लोगो ने ईसाई धर्म छोड पुनः हिंदू धर्म मे प्रवेश किया |*
**कार्यक्रम गोरेगाव पूर्व स्थित मसुराश्रम मे संपन्न हुआ | कार्यक्रम के पश्चात सभी को प्रमाणपत्र वितरित किये गये |*

*(वर्तमान में शुद्धि ही आपकी आने वाली पुश्तों की रक्षा करने में सक्षम हैं। याद रखें आपके धार्मिक अधिकार तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक आप बहुसंख्यक हैं। इसलिए अपने भविष्य की रक्षा के लिए शुद्धि कार्य को तन, मन, धन से सहयोग कीजिए। )
*

Pastor Choutupalli from Andhra got a Hindu family converted, then started using their house for his “prayer meetings” ak...
10/05/2026

Pastor Choutupalli from Andhra got a Hindu family converted, then started using their house for his “prayer meetings” aka house church to convert more

He then preyed upon their 14-year-old daughter. Got her pregnant. Forced her to take multiple abortion pills

When she complained of pain, he blamed it on satan

Finally, truth came out when the girl revealed it to her family. Pastor is arrested under POCSO

Via Swati Goel Sharma

वाराणसी में 3 मुस्लिम परिवारों की ‘घर वापसी’, 11 लोगों ने हवन-पूजन के साथ अपनाया सनातन धर्मउत्तर प्रदेश के वाराणसी के से...
06/05/2026

वाराणसी में 3 मुस्लिम परिवारों की ‘घर वापसी’, 11 लोगों ने हवन-पूजन के साथ अपनाया सनातन धर्म

उत्तर प्रदेश के वाराणसी के सेवापुरी स्थित बाराडीह भूसौला गाँव में 11 लोगों ने सनातन धर्म अपना लिया है। इसमें तीन परिवारों के सदस्य शामिल हैं। भूसौला पेट्रोल पंप के पास आयोजित कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन हुआ।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, आचार्यों ने सभी का शुद्धिकरण कराया। इसके बाद उन्हें तिलक लगाकर और कलावा बाँधकर हिंदू धर्म में शामिल किया गया। धर्मांतरण करने वाले नट बिरादरी के इन परिवारों ने बताया कि वे चार पीढ़ी पहले भटक गए थे।

(वर्तमान में शुद्धि ही आपकी आने वाली पुश्तों की रक्षा करने में सक्षम हैं। याद रखें आपके धार्मिक अधिकार तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक आप बहुसंख्यक हैं। इसलिए अपने भविष्य की रक्षा के लिए शुद्धि कार्य को तन, मन, धन से सहयोग कीजिए। )

Christianity= Mental illness
03/05/2026

Christianity= Mental illness

02/05/2026

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