जय श्री राम हनुमान

जय श्री राम हनुमान Short stories in Hindi with youtube videos.

श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि
बरनउ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि

हे अतुलित बलधामा।
हे सुमेरू शरीर वाले।
हे सीताराम प्रिय।
हे अंजने।
हे पवनपुत्र।
हे सूर्यदेव शिष्य।
हे अष्टसिद्धी नव निधी के दाता।
कल्याण करे,
कल्याण करे,
कल्याण करे। यूं तो भगवान हनुमान जी को अनेक नामों से पुकारा जाता है, जिसमें से उनका एक नाम वायु पुत्र भी है। जिसका शास्त्रों में सबसे ज्यादा उल्लेख मिलता है। शास्त्र

ों में इन्हें वातात्मज कहा गया है अर्थात् वायु से उत्पन्न होने वाला।कैसे हुआ हनुमान जी का जन्म Collection of indian stories for kid to read and listen as mp3. Hindi story in Hindi with Spiritual & Religious teachings.

पुराणों की कथानुसार हनुमान की माता अंजना संतान सुख से वंचित थी। कई जतन करने के बाद भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। इस दुःख से पीड़ित अंजना मतंग ऋषि के पास गईं, तब मंतग ऋषि ने उनसे कहा-पप्पा सरोवर के पूर्व में एक नरसिंहा आश्रम है, उसकी दक्षिण दिशा में नारायण पर्वत पर स्वामी तीर्थ है वहां जाकर उसमें स्नान करके, बारह वर्ष तक तप एवं उपवास करना पड़ेगा तब जाकर तुम्हें पुत्र सुख की प्राप्ति होगी।

अंजना ने मतंग ऋषि एवं अपने पति केसरी से आज्ञा लेकर तप किया था बारह वर्ष तक केवल वायु का ही भक्षण किया तब वायु देवता ने अंजना की तपस्या से खुश होकर उसे वरदान दिया जिसके परिणामस्वरूप चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा को अंजना को पुत्र की प्राप्ति हुई। वायु के द्वारा उत्पन्न इस पुत्र को ऋषियों ने वायु पुत्र नाम दिया।

कैसे पड़ा हनुमान नाम।

वायु द्वारा उत्पन्न हनुमान के जन्म का नाम वायु पुत्र था परंतु उनका नाम हनुमान कैसे पड़ा इसके पीछे भी एक रोचक घटना है।
इसके पीछे भी एक रोचक घटना है।

एक बार की बात है। कपिराज केसरी कहीं बाहर गए हुए थे। माता अंजना भी बालक हनुमान को पालने में लिटाकर वन में फल-फूल लेने चली गई थीं। बालक हनुमान जी को भूख लगी, माता अंजना की अनुपस्थिति में ये क्रंदन करने लगे। सहसा इनकी दृष्टि उगते हुए सूर्य भगवान पर गई। हनुमान जी ने सूर्य को कोई लाल मीठा फल समझकर छलांग लगाई|

26/03/2025

हे अतुलित बलधामा।
हे सुमेरू शरीर वाले।
हे सीताराम प्रिय।
हे अंजने।
हे पवनपुत्र।
हे सूर्यदेव शिष्य।
हे अष्टसिद्धी नव निधी के दाता।
कल्याण करे,
कल्याण करे,
कल्याण करे।

तुम रक्षक काहू को डर ना बोलो सीताराम सीताराम 🙏🙏
07/01/2025

तुम रक्षक काहू को डर ना बोलो सीताराम सीताराम 🙏🙏

07/01/2025
04/01/2024

इन अनपढ़ को बताओ उन्होंने कन्द मूल (रामफल ) और सीताफल खाया था अब तो काली जी समझायेगी इसको

वाल्मीकी रामायण, रामचरितमानस सहित तमाम ग्रंथों में दिये विवरणों के अनुसार भगवान श्री रामचंद्र जी की AI (आर्टीफिसियल इंटे...
11/04/2023

वाल्मीकी रामायण, रामचरितमानस सहित तमाम ग्रंथों में दिये विवरणों के अनुसार भगवान श्री रामचंद्र जी की AI (आर्टीफिसियल इंटेलिजन्स) जनरेटेड फोटो ।
जब प्रभु राम 21 वर्ष के थे ।
भगवान श्री राम कुछ एसे दिखते होगे । ❤️❤️❤️

कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं ।
पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नोमि जनक सुतावरं ।।

|| जय श्री राम ॥

jai shree ram
08/09/2018

jai shree ram

24/04/2016

⭕बहुत ही सुन्दर प्रसंग ⭕

🍁🍁 एक दिन श्री राम जी ने हनुमान जी से कहा कि
हनुमान ! मैंने तुम्हें कोई पद नहीं दिया ।मैं चाहता हूँ कि तुम्हें कोई अच्छा सा पद दे दूँ ।क्योंकि सुग्रीव को तुम्हारे कारण किष्किन्धा का पद मिला, विभीषण को भी तुम्हारे कारण लंका का पद मिला और मुझे भी तो तुम्हारी सहायता के कारण ही अयोध्या का पद मिला ।परंतु तुम्हें कोई पद नहीं मिला ।

हनुमानजी ने कहा --- प्रभु ! सबसे ज्यादा लाभ में तो मैं हूँ।
भगवान राम ने पूछा --कैसे।

हनुमान जी ने कहा -सुग्रीव को किष्किन्धा का एक पद मिला, विभीषण को लंका का एक पद मिला और आप को भी अयोध्या एक ही पद मिला ।
हनुमानजी ने भगवान के चरणों में सिर रख कर कहा कि प्रभु ! जिसे आपके ये दो दो पद मिले हों, वह एक पद क्यों लेना चाहेगा ।
भगवान राम हनुमानजी की बात सुनकर बहुत प्रसन्न हुए ।

सब कै ममता ताग बटोरी।
मम पद मनहि बाँधि वर डोरी।।

🌱हरी बोल🌱

श्री राम हनुमान
11/08/2015

श्री राम हनुमान

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Delhi
110085

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