Shiv Jyotish Kendra

Shiv Jyotish Kendra Astrology, daily predictions

12/08/2026

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नशापान या किसी भी प्रकार की लत के लिए मुख्य रूप से राहु ग्रह को जिम्मेदार माना जाता है। राहु भ्रम, माया और अस्थिरता का कारक है और यह व्यक्ति को भटकाव और गलत आदतों की ओर ले जा सकता है।
अन्य ग्रह और युति जो नशापान को प्रभावित कर सकते हैं :
1. राहु और चंद्रमा का सम्बन्ध : यदि राहु चन्द्रमा के साथ युति में हो, या चन्द्रमा पर राहु की दृष्टि हो, तो यह व्यक्ति के मन को भ्रमित कर सकता है और उसे नशे जैसी आदतों की ओर खींच सकता है।
2. चन्द्रमा और शुक्र का प्रभाव : चन्द्रमा मन का कारक है, और यदि यह कमजोर हो या राहु और केतु से प्रभावित हो, तो व्यक्ति भावनात्मक अस्थिरता से गुजरता है।
शुक्र भी भोग-विलास और तामसिक प्रवृत्तियों का प्रतिनिधित्व करता है यदि यह राहु के साथ जुड़ा हो, तो व्यक्ति नशे के सुख में लिप्त हो सकता है।
3. सप्तम और अष्टम भाव : सप्तम भाव (सम्बन्धों और वासनाओं का भाव) और अष्टम भाव (गुप्त इच्छाओं और बदलावों का भाव) में राहु या अन्य पाप ग्रह (जैसे शनि या मंगल) का प्रभाव नशापान की प्रवृत्ति को बढ़ा सकता है।
4. द्वादश भाव (12वां भाव) : यह व्यसनों और भागने की प्रवृत्ति से जुड़ा है। यदि द्वादश भाव में राहु, शुक्र या अन्य पाप ग्रह हो, तो व्यक्ति व्यसनों में डूब सकता है।
5. शनि का प्रभाव : शनि यदि कमजोर हो या राहु के साथ संयोजन करे, तो व्यक्ति अपनी वास्तविकता से भागने के लिए नशे का सहारा ले सकता है।
समाधान:
• नियमित रूप से हनुमान चालीसा या राहु के मंत्रों का जाप करें।
• राहु की शांति के लिए नारियल का दान या काले तिल का दान करें।
• मानसिक स्थिरता के लिए ध्यान और योग का अभ्यास करें।
• नशे की आदत से बचने के लिए सकारात्मक संगति और आत्म-अनुशासन पर काम करें।
शिव ज्योतिष केन्द्र

11/08/2026
11/08/2026

प्रदोष का व्रत :~
प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा, सुख-समृद्धि, पापों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है। यह हर महीने के दोनों पक्षों कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को शाम के समय को प्रदोषकाल कहते हैं।

मान्यता है कि प्रदोष के समय महादेव कैलाश पर्वत के रजत भवन में इस समय नृत्य करते हैं और देवता उनके गुणों का स्तवन करते हैं।

प्रदोष व्रत को करने से सब प्रकार के दोष मिट जाता है।

एक अन्य मान्यतानुसार एक बार चन्द्रदेव (चंद्रमा)को अपनी सुन्दरता पर बहुत अहंकार हो गया। उनके इस व्यवहार से क्रोधित होकर राजा दक्ष ने उन्हें क्षय (टीबी) रोग से पीड़ित होने का श्राप दे दिया। इस श्राप के कारण चन्द्रमा का तेज धीरे-धीरे घटने लगा और वे मृत्यु तुल्य कष्ट में आ गए।
अपनी पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए, चन्द्रदेव ने कठोर तपस्या की और त्रयोदशी तिथि के दिन भगवान शिव की सच्चे मन से अराधना की। भगवान शिव चन्द्रदेव की भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें श्राप मुक्त कर दिया एवं उन्हें हमेशा घटते-बढ़ते रहने (अमृतत्व) का वरदान भी दिया।
चूंकि त्रयोदशी के दिन ही भगवान शिव ने चंद्रमा के प्राण बचाए थे, इसलिए इस तिथि को शिवजी का व्रत और पूजन करने की परम्परा शुरू हुई।

रविवार के दिन प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति सदा नीरोगी रहेंगा।
सोमवार के दिन व्रत करने से आपकी इच्छा पूर्ण होती है।
मंगलवार को प्रदोष व्रत रखने से बडे रोग से मुक्ति मिलती है।
बुधवार के दिन व्रत करने से सभी कामना सिद्ध होती है।
बृहस्पतिवार के प्रदोष व्रत से शत्रु का नाश होता है।
शुक्र प्रदोष व्रत से सौभाग्य की वृद्धि होती है।
शनि प्रदोष व्रत से पुत्र की प्राप्ति होती है।
शिव ज्योतिष केन्द्र

09/08/2026

#कुंभ_राशि पर शनि की साढ़े साती
23-01-2020 / 02-06-2027 तक
साढ़ेसाती समाप्त 23 फरवरी 2028
■ पहला चरण
23 जनवरी 2020 / 27 अप्रैल 2022
(शनि मकर राशि में थे)
■ दूसरा चरण
28 अप्रैल 2022 / 29 मार्च 2025
(शनि कुम्भ राशि में थे)
■ तीसरा एवं अंतिम चरण
29 मार्च 2025 / 02 जून 2027
(शनि मीन राशि में रहेंगे)

#मीन_राशि पर शनि की साढ़े साती
28-04-2022 / 07-08-2029 तक
■ पहला चरण
28 अप्रैल 2022 / 29 मार्च 2025
(शनि कुम्भ राशि में थे)
■ दूसरा चरण
29 मार्च 2025 / 02 जून 2027
(मीन राशि में रहेंगे )
■ तीसरा एवं अंतिम चरण
03 जून 2027 / 07 अगस्त 2029
(शनि मेष राशि में होंगे)

#मेष_राशि पर शनि की साढ़ेसाती
29-03-2025 / 30-10-2032
■ पहला चरण
29 मार्च 2025 / 1 जुन 2027 तक
(शनि मीन राशि में)
■ दूसरा चरण
2 जून 2027 / 7 अगस्त 2029 तक
(शनि मेष राशि में)
■ तीसरा चरण
8 अगस्त 2029 से 30 अक्टूबर 2032 तक
(शनि वृषभ राशि में)

#वृषभ_राशि पर शनि की साढ़ेसाती
03-06-2027 / 13-07-2034
■ पहला चरण (मानसिक तनाव)
3 जून 2027 / 7 अगस्त 2029
(शनि मेष राशिगत)
■ दूसरा चरण
8 अगस्त 2029 / 29 मई 2032
(शनि वृषभ राशि में)
■ तीसरा चरण
30 मई 2032 / 13 जुलाई 2034
(शनि मिथुन राशि में)

#मिथुन_राशि पर साढ़ेसाती
08-08-2029 / 27-08-2036
■ पहला चरण
08 अगस्त 2029 / 30 मई 2032
(शनि वृषभ राशि में)
■ दूसरा चरण
30 मई 2032 / 13 जुलाई 2034
(शनि मिथुन राशि में)
■ तीसरा चरण
13 जुलाई 2034 / 27 अगस्त 2036
(शनि कर्क राशि में)

#कर्क_राशि पर शनि की साढ़ेसाती
31-05-2032 / 22-10-2038
■ प्रथम चरण
31 मई 2032 / 12 जुलाई 2034
(शनि मिथुन राशि में)
■ द्वितीय चरण
13 जुलाई 2034 / 27 अगस्त 2036 तक
■ तृतीय चरण
28 अगस्त 2036 / 22 अक्टूबर 2038 तक

#सिंह_राशि और #धनु_राशि वाले 29 मार्च 2025 से शुरू हुई शनि की ढैय्या के प्रभाव में हैं, जो 3 जून 2027 तक रहेगी।
शनि ढैय्या अर्थात जन्म के चन्द्रमा से शनि चतुर्थ या अष्टम भाव मे
यह समय घरेलू तनाव या मानसिक अशांति (कंटक शनि) ला सकता है।
शिव ज्योतिष केन्द्र

09/08/2026

कुल 27 नक्षत्रों में से 6 नक्षत्रों को गण्ड-मूल या मूल नक्षत्र माना जाता है।
अश्विनी (मेष राशि)
मघा (सिंह राशि)
मूल (धनु राशि)
बुध के स्वामित्व वाले
आश्लेषा (कर्क राशि)
ज्येष्ठा (वृश्चिक राशि)
रेवती (मीन राशि)
यह नक्षत्र तब बनते हैं जब कोई राशि और नक्षत्र दोनों एक साथ समाप्त हो रहे हों और नई राशि व नक्षत्र की शुरुआत हो रही हो। इस संधि स्थल (जॉइंट) को ज्योतिष में 'गण्डात' कहा जाता है। मान्यता है कि इन नक्षत्रों में जन्म लेने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और माता-पिता के जीवन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए जन्म के ठीक 27वें दिन इसकी शांति पूजा करवाई जाती है।
शिव ज्योतिष केन्द्र

08/08/2026

27 है नक्षत्र का फल, स्वामी एवं देवता
1 नक्षत्र - अश्विनी (चु, चे, चो, ला)
डिग्री - 0°00′ -13°20′
स्वामी - केतु
देवता - अश्विनी कुमार
फल - तेजस्वी, शीथ कार्य करने वाले, चिकित्सा में रुचि।

2 नक्षत्र- भरणी (ली, लू, ले, लो)
डिग्री - 13°20′- 26°40'
स्वामी - शुक्र
फल - धैर्यवान, जिम्मेदार, जीवन की गंभीरता से लेने वाले।

3 नक्षत्र - कृत्तिका ( अ, ई, उ, ए )
डिग्री - 26°40'-10°00′
स्वामी - सूर्य
देवता - अग्नि
फल - ऊर्जावान, नेतृत्व क्षमता, साफ-सुथरे व स्पष्ट विचारों वाले।

4 नक्षत्र - रोहिणी ( ओ, वा, वी, वू )
डिग्री - 10°00′ - 23°20′
स्वामी - चंद्र
देवता - ब्रह्मा
फल - आकर्षक व्यक्तित्व, सृजनशील, सुख-सुविधा प्रिय।

5 नक्षत्र मृगशीर्ष ( वे, वो, का, की )
डिग्री - 23°20′- 06°40′
स्वामी - मंगल
देवता - सोम (चंद्र)
फल - जिज्ञासु, खोजी स्वभाव, यात्रा प्रिय, कोमल हृदय।

6 आद्रा ( कु, घ, ङ, छ )
डिग्री - 06°40′ -20°00′
स्वामी - राहु
देवता - रुद्र
फल - भावुक, रहस्यमयी, गहन सोच वाले, परिवर्तन प्रिय।

7 नक्षत्र- पुनर्वसु ( के, को, हा, ही )
डिग्री - 20°00′-03°20′
स्वामी - गुरु
देवता - अदिति
फल - दयालु, उदार, भाग्यशाली, सत्यप्रिय व सहनशील।

8 नक्षत्र- पुष्य ( हू, हे, हो, डा )
डिग्री - 03°20′ -16°40′
स्वामी - शनि
देवता - बृहस्पति
फल - धार्मिक, ज्ञान-प्रेमी, गुरुजनों का सम्मान करने वाले।

9 नक्षत्र आश्लेषा ( डी, डू, डे, डो )
डिग्री - 16°40′-30°00′
स्वमी - बुध
देवता - नाग
फल - चतुर, गूढ़ विद्या में रुचि, प्रभावशाली व रहस्यमयी।

10 नक्षत्र मधा ( मा, मी, में, मे )
डिग्री - 00°00′ -13°20′
स्वामी - केतु
देवता - पितृगण
फल - गरिमामय, स्वाभिमानी, वंश-मान करने वाले।

11 नक्षत्र पूर्वाफाल्गुनी ( मो, टा, टी, टू )
डिग्री - 13°20′- 26°40′
स्वामी - शुक्र
देवता - भग
फल - आनंदप्रिय, आकर्षक, कलात्मक व उदार स्वभाव।

12 नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी ( टे, टो, पा, पी )
डिग्री - 26°40′ -10°00′
स्वामी - सूर्य
देवता - आर्यमन
फल - जिम्मेदार, मित्रवत, सहयोगी व सम्मानित।

13 नक्षत्र हस्त ( पू, ष, ण, ठ )
डिग्री - 10°00′ - 23°20′
स्वामी - चंद्र
देवता - सविता
फल - कुशल, हस्तकला में निपुण, बुद्धिमान व विनम्र।

14 नक्षत्र चित्रा ( पें, पो, रा, री )
डिग्री - 23°20′ - 06°40′
स्वामी - मंगल
देवता - त्वक्षता (विश्वकर्मा)
फल - रचनात्मक, सुंदरता प्रेमी, तकनीकी व कला में निपुण।

15 नक्षत्र स्वाति ( रु, रे, रो, ता )
डिग्री - 6°40′ -20°00′
स्वामी - राहु
देवता - वायु
फल - स्वतंत्र, लचीले विचारों वाले, व्यापार में सफल।

16 नक्षत्र विशाखा ( ती, तू, ते, तो )
डिग्री - 20°00′- 03°20′
स्वामी - गुरु
देवता - इंद्र-अग्नि
फल - महत्वाकांक्षी, लक्ष्य प्राप्ति में सफल, धार्मिक प्रवृत्ति ।

17 नक्षत्र अनुराधा ( ना, नी, नू, ने )
डिग्री - 3°20′ -16°40′
स्वामी - शनि
देवता - मित्र
फल - वफादार, मित्रप्रिय, अनुशासित, आध्यात्मिक रुचि।

18 नक्षत्र ज्येष्ठा ( नो, या, यी, यू )
डिग्री - 16°40′-30°00′
स्वामी - बुध
देवता - इंद्र
फल - नेतृत्व क्षमता, प्रभावशाली, सुरक्षा की भावना प्रबल।

19 नक्षत्र मूल ( ये, यो, भा, भी )
डिग्री - 00°00′ -13°20′
स्वामी - केतु
देवता - निर्माति
फल - गूढ़ ज्ञान, शोधप्रिय, स्वतंत्र व गहन सोच वाले।

20 नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा ( भू, धा, फा, ढा )
डिग्री - 13°20′ - 26°40′
स्वामी - शुक्र
देवता - अप (जल)
फल - आत्मविश्वासी, रचनात्मक, जल से जुड़ाव व प्रसिद्धि।

21 नक्षत्र उत्तराषाढ़ा ( भे, भो, जा, जी )
डिग्री - 26°40′ -10°00′
स्वामी - सूर्य
देवता - विश्वदेव
फल - सत्यनिष्ठ, धैर्यवान, स्थायी सफलता देने वाले।

22 नक्षत्र श्रवण ( खी, खु, खे, खो )
डिग्री - 10°00′- 23°20′
स्वामी - चंद्र
देवता - विष्णु
फल - सीखने वाले, ज्ञानी, यात्रा प्रिय, अच्छे श्रोता।

23 नक्षत्र धनिष्ठा ( गा, गी, गु, गे )
डिग्री - 23°20′ - 06°40′
स्वामी - मंगल
देवता - वसु
फल - धनवान, संगीत प्रेमी, परिश्रमी व सामाजिक।

24 शतभिषा ( गो, सा, सी, सू )
डिग्री - 6°40′ - 20°00′
स्वामी - राहु
देवता - वरुण
फल - रहस्यमयी, उपचारक, वैज्ञानिक सोच, एकाकी प्रिया

25 नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद ( से सो, दा, दी )
डिग्री - 20°00′- 03°20′
स्वामी - गुरु
देवता - अज एकपाद
फल - आध्यात्मिक, गूढ़ ज्ञान में रुचि, आदर्शवादी।

26 नक्षत्र - उत्तराभाद्रपद ( थ, झ, ज थ झ )
डिग्री - 03°20′ -16°40′
स्वामी - शनि
देवता - अहिर्बुधन्य
फल - गंभीर, स्थिर, धैर्यवान, गहराई से सोचने वाले।

27 नक्षत्र - रेवती ( दे, दो ,चि, ची )
डिग्री - 16°40′- 30°00′
स्वामी - बुध
देवता - पुषण
फल - दयालु, सहायक, सुरक्षित यात्रा, भाग्यशाली।

07/08/2026

बृहस्पति
यदि आपकी कुण्डली में देवगुरु बृहस्पति केन्द्रस्थ 1,4,7,10 भाव में हो या गुरु+शनि की युति हो तो आप लोगों को आसानी से माफ कर देते हो और सबसे बड़़ा दुःख भी आप स्वयं ही झेल लेते हो।

1,4.7,10 भाव में बैठे हुए गुरु के क्रोध से भगवान भी डर जाते थे क्योंकि कोई खामोश व्यक्ति जब तबाही करता है तो बचने के सारे रास्ते बन्द हो जाते हैं।

दुनिया आपको 'ज्ञान का भंडार' मानेगी 'समाज में मान-सम्मान और आदर मिलेगा, मगर घर...बस
वहीं आप अनसुने रह जाते हैं....
आपका ज्ञान सबके लिए अमृत है मगर अपनों के लिए...

यही कड़वा सच है ऐसे गुरु अक्सर खुद को वैरागी समझने लगते है.. दिल करता है सब छोड़ छाड कर, बस शान्ति ढूंढ लें कही....।
शिव ज्योतिष केन्द्र

Address

Delhi

Telephone

+918595659014

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shiv Jyotish Kendra posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share