28/04/2026
मलमास/अधिक मास/अधिमास/पुरुषोत्तम मास :~
सम्वत् 2083 सन 2026/27 में वर्ष में 12 नही 13 महीने होंगे जिसमें ज्येष्ठ का माह 30 दिन की जगह 59-60 दिन का होगा।
जब चंद्र वर्ष में कोई महीना दो बार आता है, तो एक महीना #निज (शुद्ध) और दूसरा #अधि (अधिक/मल) कहलाता है।
शुद्ध ज्येष्ठ
02-05-2026 से 16-05-2026
मलमास/पुरुषोत्तममास
17-05-2026 से 15-06-2026
शुद्ध ज्येष्ठ मास
16-06-2026 से 29-06-2026
हिन्दू कैलेण्डर में हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह आता है,जिसे अधिकमास,मल मास या पुरुषोत्तम मास कहते है। जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अन्तर होता है,जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है।
इस अन्तर को पाटने के लिए तीन साल में एक चन्द्र मास अस्तित्व में आता है,जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिक मास का नाम दिया गया और इसीलिए हर 3 वर्षों पर हिन्दू कैलेंडर में मास की संख्या 12 से बढ़कर 13 हो जाती है।
चूँकि इस महीने में सूर्य संक्रांति नहीं होती यानी सूर्य किसी राशि में प्रवेश नहीं करते, इसलिए इसे 'मल' (अशुद्ध) मास मान लिया गया और इसमें शुभ कार्यो को वर्जित माना गया।
शास्त्रानुसार ज्येष्ठ/अधिक मास का फल -
ज्येष्ठद्वये नृपध्वंसो-धान्यानिक्षितिसत्तमे ।
अर्थात् जिस वर्ष दो ज्येष्ठ आवें, उस वर्ष राष्ट्राध्यक्षों में परस्पर टकराव होते हैं। किसी विशिष्ट गणमान्य राजनेता के निधन एवं अपदस्थ होने के योग बनते हैं,और साथ ही कहीं शासन-परिवर्तन के। उपद्रव एवं हिंसक घटनाएं घटित हों। प्रजा में रोगों से कष्ट, परन्तु यज्ञ और दानादि अधिक होंगे।
ॐ विष्णुरूपी सहस्रांशुः सर्वपापप्रणाशनः ।
अपूपान्न प्रदानेन मम पापं व्यपोहतु ।।
इसके बाद आगे लिखे मन्त्र से भगवान् विष्णु को प्रार्थना करें-
यस्य हस्ते गदाचक्रे गरुडोयस्य वाहनम् ।
शङ्खः करतले यस्य स मे विष्णुः प्रसीदतु ।।
इसके अतिरिक्त ज्येष्ठ अधिक मास में #श्रीपुरुषोत्तम_माहात्म्य का पाठ, #श्रीविष्णु_स्तोत्र, #श्रीविष्णु_सहस्रनाम और #श्रीसूक्त आदि का पाठ उत्तम है।
भारतीय मनीषियों ने अपनी गणना से हर चन्द्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किए चूंकि अधिकमास सूर्य और चन्द्र मास के बीच सन्तुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ था , तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार नहीं हुए तब ऋषि मुनियों ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वे ही इस मास का भार उठाएं भगवान विष्णु ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया और इस तरह मलमास के साथ यह पुरुषोत्तम मास भी बन गया।
अन्य कथानुसार हिरण्यकश्यप ने अपने घोर तप से ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया तथा उनसे अमरता का वरदान माँगा। ब्रह्मा जी ने जब यह वरदान नहीं दिया तो उसने अपनी बुद्धि अनुसार बड़ी चतुराई से अपनी मृत्यु को असंभव बनाने वर मांगा कि उसे संसार का कोई नर-नारी,पशु,देवता या असुर ना मार सके ना ही वर्ष के 12 महीनों में मृत्यु प्राप्त हो। जब वह मरे, तो ना दिन हो ना रात हो , ना किसी अस्त्र से मरे ना शस्त्र से उसे ना घर में मारा जा सके, ना ही घर से बाहर। इस वरदान के मिलते ही हिरण्यकश्यप स्वयं को अमर मानने लगा और उसने स्वयं को भगवान घोषित कर दिया।
तब प्रह्लाद को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अधिक मास में नरसिंह अवतार (आधा पुरुष आधे शेर) में प्रकट होकर, गोधुली बेला में, उसके महल की देहरी पर अपनी जंघा पर रखकर अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का सीना चीर दिया।
इसलिए भी इस मास में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
कुछ मान्यताओं के अनुसार 13 दिन के पक्ष को अशुभ मानते है तथा किसी कि मृत्यु का शोक भी तेरहवी तक मनाया जाता है। इसलिए स्वयं को दुःख और मृत्यु से दूर रखने के लिए मलमास, जो कि तेरहवां महीना होता है, में भगवान शिव की भी आराधना की जाती है।
मलमास में शुभ कार्य न कर ईश्वर कि प्रार्थना करने को प्राथमिकता दी गयी है।
वैसे वैज्ञानिक या व्यावहारिक दृष्टि से मलमास में कोई भी शुभ कार्य करने में कोई समस्या नहीं है यदि 13 अंक का आपके मस्तिष्क में किसी प्रकार का कोई दुष्प्रभाव नहीं है, क्योंकि मस्तिष्क से ही सब कुछ नियन्त्रित होता है ,यदि मस्तिष्क में कोई बात रह जाए तो वह हमारे क्रिया-कलाप को प्रभावित कर सकती है अन्यथा कोई समस्या नहीं है।
शिव ज्योतिष केन्द्र