12/11/2025
दो चोर थे दोनों पक्के दोस्त जहाँ भी जाते साथ साथ और जो भी काम करते वो भी साथ में मिलकर. एक दिन उन्होंने एक नए गाँव में जाकर चोरी करने की ठानी.
उन्होंने उस नए गाँव में रात को एक बड़े घर में ताला तोड़कर घुस गए. वहां उन्हें बहुत सा पैसा मिला. बहुत नोटों की गड्डियां पाकर वे बहुत खुश हो गए
और उन्होंने उन्हें बोरो में भर लिया फिर उन्होंने देखा वहां बहुत सी शराब की बोतलें भी थीं क्योंकि वह एक शराब का ठेका था.
उन्होंने खुश होकर कुछ शराब पी ली और फिर पीते ही चले गए. बहुत शराब पीने से अब वे ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे
इसलिए उनसे कुछ शराब को खाली बोतलें टकरा कर गिर गईं जिसके कारण आवाज सुनकर वहां के कुछ लोग जाग गए और
सबने चिल्लाना शुरू किया चोर चोर पकड़ो पकड़ो. ये दोनों चोरों ने जो कुछ भी हाथ में पैसा आया उठाकर भागना शुरू किया.
उन्होंने देखा लोगों की एक बड़ी भीड़ उनका पीछा कर रही थी. भागते भागते वे एक नदी के किनारे पहुंचे उन्हें वहां एक नांव दिखाई दी
वे दोनों नांव में सवार हो गए और नांव में रखी हुई चप्पू से नांव को खेने लगे. वे एक दूसरे से जोर जोर से बोल रहे थे और तेज और तेज और तेजी से नावं को खे रहे थे.
अँधेरी रात में वे पूरी रात नांव को खेते रहे और बुरी तरह से थक गए. जब वे थक गए तो तड़के सुबह वहां के लोगों ने उन्हें आकर पकड़ लिया.
तब वे सोचने लगे अरे हम पूरी रात नांव को खेते रहे और इतनी दूर तक आ गए फिर भी इन लोगों ने हमें आसानी से पकड़ लिया.
तब वहां के लोगों ने बताया यह नांव तो नदी के किनारे के एक पेड़ से बंधी हुई है. वे पूरी रात एक बंधी हुई नांव को खे रहे थे….चप्पू चला रहे थे.
कहानी का मोरल : दोस्तों इस कहानी से हम यह सबक सीखते हैं कई बार हमारे जीवन में भी हम बहुत से काम करते हैं
लेकिन आगे नहीं बढ़ पाते उन्नति नहीं कर पाते इसलिए हमें भी अपने जीवन में रूककर जांचना चाहिए कहीं हमारे जीवन में कोई पाप या बुरी लत का बंधन तो नहीं जो हमें आगे बढ़ने नहीं दे रहा.