31/07/2016
*** बुद्धि सुखी तो सब सुखी ***
अक्सर आम मनुष्य की सोच ये होती है कि भौतिक संसाधनों की कमी के कारण सुखो का अभाव सा लगता है(सिर्फ अभाव लगता है अर्थात अभाव है नही परन्तु ये नकारात्मक सोच कि अभाव सा है, यहीं लक्षण सिद्ध करता है की ये मात्र एक नकारात्मक विचार है, जो बुद्धि द्वारा उत्पन्न किया हुआ है, अर्थात बुद्धि चाहे तो इसी विचार को सकारात्मक भाव में भी परिवर्तित कर सकती है)।।
इसी आधार पर ये भी सिद्ध हुआ की बुद्धि ही वास्तविक सुख का कारण है, भौतिक संसाधन नही।। मतलब ये हुआ की एक बुद्धि के द्वारा ही हम सम्पूर्ण जीवन सुख और आनंद में बिता सकते है।।
अक्सर इंसान को जहाँ अभाव(किसी वास्तु या इंसान की कमी) होती है उस अभाव को जब तक पा नही लेता, तब तक वह उस इच्छा को दुःख या अभाव का नाम दे देता है और इसी के सहारे जीवन व्यतीत करता है।।यहाँ तक कि जो सुख समय समय पर मिलते रहे, उन्हें भी ठीक से भोग नही पाता, क्योंकि उसकी दृष्टी तो उस दुःख पर रहती है जहा अभाव है।।
परन्तु यदि बुद्धि को उत्कृष्ट बना लिया जाए अर्थात उच्च उठा लिया जाए तो ये सब धारणाएं या ये सब खोने पाने का विचार खुद ही समाप्त होते चले जायेंगे।।। तब वह इंसान ये जान जायेगा कि जिस आनंद या सुख को वह भौतिक संसाधन या किसी व्यक्ति में ढूंढ़ रहा है वो वास्तव में उसमें है ही नही, वह तो उसके स्वयं के विचारों की अभिव्यक्ति है अर्थात वो सब होना न होना उसी व्यक्ति ने पैदा किया है।। अभाव तो था ही नहीं, सिर्फ और सिर्फ ये उसीकी कल्पना है।।जो वह स्वयं ही बदल सकता है और फिर से वही सुख व् आनंद को पा सकता है, जिसे वह वस्तुओ या व्यक्ति में ढूंढ़ रहा था।।
**मनिदास**