Cult of lord shiva

Cult of lord shiva Lord shiva ,Om namah shivaay

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20/11/2025

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https://www.youtube.com/shorts/uysdCXZ_Wwk  बिहार के बाद अब वेस्ट बंगाल में खेला ?
16/11/2025

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बिहार के बाद अब वेस्ट बंगाल में खेला ?

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बस्तर दशहरा : ऐसा जादू है मेरे बस्तर में, लोगों ने कहा कहीं और नहीं......
23/09/2025

बस्तर दशहरा : ऐसा जादू है मेरे बस्तर में, लोगों ने कहा कहीं और नहीं......



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31/12/2020
30/12/2020

सोमनाथ मन्दिर भूमंडल में दक्षिण एशिया स्थित भारतवर्ष के पश्चिमी छोर पर गुजरात नामक प्रदेश स्थित, अत्यन्त प्राचीन व ऐतिहा...
30/12/2020

सोमनाथ मन्दिर भूमंडल में दक्षिण एशिया स्थित भारतवर्ष के पश्चिमी छोर पर गुजरात नामक प्रदेश स्थित, अत्यन्त प्राचीन व ऐतिहासिक सूर्य मन्दिर का नाम है। यह भारतीय इतिहास तथा हिन्दुओं के चुनिन्दा और महत्वपूर्ण मन्दिरों में से एक है। इसे आज भी भारत के १२ ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना व जाना जाता है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में स्पष्ट है।

यह मंदिर हिंदू धर्म के उत्थान-पतन के इतिहास का प्रतीक रहा है। अत्यंत वैभवशाली होने के कारण इतिहास में कई बार यह मंदिर तोड़ा तथा पुनर्निर्मित किया गया। वर्तमान भवन के पुनर्निर्माण का आरंभ भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने करवाया और पहली दिसंबर 1955 को भारत के राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद जी ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। सोमनाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटन स्थल है। मंदिर प्रांगण में रात साढ़े सात से साढ़े आठ बजे तक एक घंटे का साउंड एंड लाइट शो चलता है, जिसमें सोमनाथ मंदिर के इतिहास का बड़ा ही सुंदर सचित्र वर्णन किया जाता है। लोककथाओं के अनुसार यहीं श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया था। इस कारण इस क्षेत्र का और भी महत्व बढ़ गया।

केदारनाथ हिमालय पर्वतमाला में बसा भारत के उत्तरांखण्ड राज्य का एक कस्बा है। यह रुद्रप्रयाग की एक नगर पंचायत है। यह हिन्द...
29/12/2020

केदारनाथ हिमालय पर्वतमाला में बसा भारत के उत्तरांखण्ड राज्य का एक कस्बा है। यह रुद्रप्रयाग की एक नगर पंचायत है। यह हिन्दू धर्म के अनुयाइयों के लिए पवित्र स्थान है। यहाँ स्थित केदारनाथ मंदिर का शिव लिंग १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है और हिन्दू धर्म के उत्तरांचल के चार धाम और पंच केदार में गिना जाता है। श्रीकेदारनाथ का मंदिर ३,५९३ मीटर की ऊँचाई पर बना हुआ एक भव्य एवं विशाल मंदिर है। इतनी ऊँचाई पर इस मंदिर को कैसे बनाया गया, इस बारे में आज भी पूर्ण सत्य ज्ञात नहीं हैं। सतयुग में शासन करने वाले राजा केदार के नाम पर इस स्थान का नाम केदार पड़ा। राजा केदार ने सात महाद्वीपों पर शासन और वे एक बहुत पुण्यात्मा राजा थे। उनकी एक पुत्री दो पुत्र थे । पुत्रका नाम कार्तिकेय (मोहन्याल) व गणेश था । गणेश बुद्दि व कार्तिकेय (मोहन्याल) शक्ति के राजा देवता के रुपमे संसार प्रसिद्द है ।उनकी एक पुत्री थी वृंदा जो देवी लक्ष्मी की एक आंशिक अवतार थी।[1] वृंदा ने ६०,००० वर्षों तक तपस्या की थी। वृंदा के नाम पर ही इस स्थान को वृंदावन भी कहा जाता है।

27/12/2020

नमो नमः

बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर पुणे से 110 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम की सह्याद्रि पर्वत माला...
26/12/2020

बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग भीमाशंकर पुणे से 110 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम की सह्याद्रि पर्वत माला में मौजूद 'भीमाशंकर मंदिर' भीमा नदी के किनारे स्थित है।
-यह नदी यहां से निकलते हुए दक्षिण पश्चिम दिशा में बहती हुई कर्नाटक के रायचूर जिले में कृष्णा नदी से जा मिलती है।
-यहां हर वर्ष महाशिवरात्री और हर महीने पड़ने वाली शिवरात्री के मौके पर भक्तों की भारी संख्या यहां दर्शन के लिए आती है।
-3,250 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर पूरे देश में आस्था के एक बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता है।
- मंदिर अत्यंत पुराना और कलात्मक है यहां की मूर्तियों से निरंतर पानी गिरता रहता है। मंदिर के पीछे दो कुंड भी हैं।

शिवाय के शिवा नहीं कोई
24/12/2020

शिवाय के शिवा नहीं कोई

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वरायनित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:॥मंदाकिनी सलिल चंदन चर्...
16/12/2020

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:॥
मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय
मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:॥
शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय
श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:॥
अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्।
अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्।।

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