03/10/2025
काबा ♥️ :- प्रथम भाग - एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण
"काबा' पर एक मुसलसल सिरीज़ शुरू कर रहा हूं जो इसके वैज्ञानिक महत्व, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक महत्व को समेटे हुए होगी...यह प्रातः पोस्ट ही होगी जिसकी सूचना पूर्व में दे दी जाएगी।
प्रस्तुत है सबसे पहले वैज्ञानिक महत्व......
मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र माने जाने वाले मक्का स्थिति "काबा" की नॉर्थ पोल से दूरी करीब 7,600 किमी है और साउथ पोल से दूरी करीब 12,400 किमी है।
"काबा" पृथ्वी के भूगोल में सबसे संतुलित स्थिति 21.42° उत्तरी अक्षांश और 39.83 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित है। यह स्थान पृथ्वी के भूमध्य रेखा (Equator) और ध्रुवों के बीच का "संतुलित क्षेत्र" माना जाता है और पृथ्वी के बिल्कुल मध्य भाग में होने के कारण यहां ज़मीन की जियो मैगनेटिक फील्ड सबसे अधिक बैलेंस है।
अर्थात यह स्थान न तो ध्रुवों के बहुत पास है और न ही सीधा भूमध्य रेखा पर, बल्कि एक "मध्यवर्ती" संतुलित स्थिति में है।
दरअसल पृथ्वी का मैग्नेटिक फील्ड और ध्रुवीय ऊर्जा प्रवाह भूमध्य रेखा से ध्रुवों तक फैला हुआ है। इसके कारण भू-चुंबकीय और भूगर्भीय दृष्टि से "मक्का" की भौगोलिक स्थिति इस ऊर्जा संतुलन के करीब बताई जाती है, जहाँ पृथ्वी की चुंबकीय रेखाएँ और गुरुत्वाकर्षण अपेक्षाकृत स्थिर रहते हैं।
वैज्ञानिकों ने नोट किया है कि मक्का की दिशा (Longitude 39.8°E) पर "चुंबकीय विचलन" (Magnetic Declination) बहुत न्यूनतम लगभग शून्य होता है और इसी कारण "किबला कम्पास" लगभग सीधे काबा की ओर इंगित कर सकता है।
"किबला कंपास" एक चुंबकीय भौतिक उपकरण है जिसमें एक सुई होती है। यह सुई पृथ्वी के साऊथ पोल और नार्थ पोल के मैगनेटिक चरित्र के अनुसार उत्तर-दक्षिण दिशा की तरफ होती है।
इस सुई की दिशा भौगोलिक स्थान के आधार पर सदैव "काबा" की ओर होती है और पूरी दुनिया में कहीं पर भी क़िब्ला कंपास का प्रयोग करें उसकी सूई की दिशा "काबा" की तरफ़ ही होगी और इसे ही भौतिक विज्ञान में अज़ीमुथ कोण (Azimuth Angle) के रूप में मापा जाता है।
जैसे भारत से "काबा" की दिश पश्चिम-उत्तर-पश्चिम (West-North-West) की ओर होती है। दिल्ली के लिए काबा कोण लगभग 255° पर है और ऐसे ही पूरी दुनिया में "काबा" अलग-अलग दिशाओं और कोण पर स्थित है मगर क़िब्ला कंपास की सूई हर जगह से "काबा" की ओर ही होगी।
काबा की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यह विश्व के सभी हिस्सों से आसानी से दिशा निर्धारण के लिए उपयोगी रहा है और जब GPS और गुगल मैप नहीं था तब भौतिक यंत्र "किबला कम्पास" की मदद से काबा को रिफरेंस प्वाइंट को आधार बताकर दुनिया सटीक दिशा पता करती थी और समुद्री जहाज समेत शेष दुनिया को अपने रास्ते के बारे में पता चलता था।
सीधे शब्दों में GPS और गुगल मैप के पहले दुनिया "काबा" को केंद्र बनाकर अपना रास्ता तलाशती थी और "काबा" सबको रास्ता दिखाता था...
पूरी दुनिया से "काबा" की सटीक दिशा "किबला कंपास" से पता चलने के कारण पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए एक ही दिशा में नमाज़ पढ़ने के लिए "काबा" को "क़िब्ला" के रूप में मानने का हुक्म हुआ और आज सारी दुनिया के मुसलमान एक "क़िब्ला" की तरफ़ मुंह करके नमाज़ अदा करते हैं।
"काबा" में पृथ्वी का मैगनेटिक फील्ड सबसे अधिक बैलेंस होने के कारण वहां दुनिया भर से गये लोगों को अपेक्षाकृत सबसे अधिक सुकून मिलता है और एक अलग तरह का एहसास होता है।
मुसलमान "काबा" का "तवाफ़" अर्थात "परिक्रमा" घड़ी की सूई के विपरित दिशा अर्थात "ऐंटी क्लाक" या "काउंटर क्लाक" वाइज़ करते हैं और इसी तरह पूरा युनिवर्स घूमता है..
सूर्य के चारों ओर ग्रह इसी ऐंटी क्लाक वाइज़ की दिशा में घूमते हैं..हमारा "मिल्की वे गैलेक्सी" अर्थात आकाशगंगा भी ऐंटी क्लाक वाइज़ घूमती है , इलेक्ट्रॉन भी न्युक्लियस के चारों ओर ऐंटी क्लाक वाइज़ घूमते हैं और हमारी पृथ्वी भी ऐंटी क्लाक वाइज़ घूमती है।
इसका अर्थ यह हुआ कि मुसलमान जब काबा का तवाफ़ करते हैं तो वह प्राकृतिक रूप से नेचुरल फ्ल़ो से जुड़ जाते हैं।
"काबा" पृथ्वी का सबसे पावरफुल जियो मैगनेटिक प्वाइंट है और जब लाखों मुसलमान एक साथ काउंटर क्लाक वाइज़ चलकर इसका तवाफ़ करते हैं तो इससे एक "यूनीफाइड इनर्जी फ़ील्ड" बनती है , वैसे ही जैसे इलेक्ट्रॉन्स एटम के चारों तरफ़ घूमते हैं तो एक इनर्जी बनती है।
मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में "युनिफाइड इनर्जी फ़ील्ड" पर काम किया जिससे गुरुत्वाकर्षण (gravity) और विद्युतचुंबकीय बल (electromagnetism) को एकीकृत किया जा सके मगर वह इसे सुलझाते इसके पहले ही चल बसे..
आज के युग में क्वांटम मैकेनिक्स और स्ट्रिंग थ्योरी जैसे क्षेत्रों में "युनिफाइड फील्ड थ्योरी" को और विकसित करने की कोशिश की जा रही है मगर अभी तक यह प्रयास असफल है।
कुरान में अल्लाह कहता है
﴿تُسَبِّحُ لَهُ السَّمَاوَاتُ السَّبْعُ وَالْأَرْضُ وَمَن فِيهِنَّ ۚ وَإِن مِّن شَيْءٍ إِلَّا يُسَبِّحُ بِحَمْدِهِ وَلَٰكِن لَّا تَفْقَهُونَ تَسْبِيحَهُمْ ۗ إِنَّهُ كَانَ حَلِيمًا غَفُورًا ﴾
[ الإسراء : 44]
अर्थात:- सातों आकाश और धरती और जो कोई भी है सब उसकी तस्बीह (महिमागान) करते हैं और ऐसी कोई चीज़ नहीं जो उसका गुणगान न करता हो। लेकिन तुम उनकी तस्बीह को नहीं समझते हो । निश्चय ही वह अत्यंत सहनशीलता, क्षमावान है :- सूरह अल इसरा आयत 44
अर्थात जब मुसलमान काबा का तवाफ़ कर रहे होते हैं तो वह पूरे ब्रह्मांड के साथ एक दिशा में उसकी तस्बीह कर रहे होते हैं... क्योंकि हर चीज़ एटम से बनी है तो ब्रह्मांड की हर चीज़ अल्लाह की तस्बीह कर रही होती है।
गणितीय भाषा में 1.618 को गोल्डन रेशियो (Golden Ratio) कहते हैं जिसे φ (फाई) के रूप में दर्शाया जाता है। यह एक विशेष गणितीय अनुपात है जो लगभग 1.618 के बराबर होता है।
इसे "दिव्य अनुपात" भी कहा जाता है क्योंकि यह भी कहा जाता है क्योंकि यह प्रकृति, कला, वास्तुकला और गणित में सामंजस्य और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है।
गोल्डन रेशियो तब प्राप्त होता है जब दो मात्राओं (a और b, जहां a > b) का अनुपात उनके योग और बड़ी मात्रा के अनुपात के बराबर होता है।
गणितीय रूप से:
a a+b
-- = --
b a
इसका मान φ = (1 + √5) / 2 = 1.6180339887 होता है।
यह यूनीक मैथमेटिकल प्रमोशन है जो दुनिया की बेस्ट आर्ट , बेस्ट आर्किटेक्चर, गैलेक्सी, ह्यूमन बाडी , और प्रकृति में पाया जाता है।
अर्थात इस दुनिया में जितनी यूनीक चीजें हैं उनका प्रपोशन निकाला जाए तो वह 1.618 होता है जिसे गोल्डन रेशियो कहा जाता है...
यही गोल्डन रेशियो "काबा" में भी पाया जाता है..
काबा से नार्थ पोल की दूरी करीब 7600 किलोमीटर, काबा से साउथ पोल की दूरी करीब 12400 किमी है और इन दोनों का इक्जैक्ट प्रपोशन 12400/7600 निकालें तो वह 1.618 अर्थात "गोल्डन रेशियो" हुआ जो काबा में इस पृथ्वी के जन्म के साथ ही मौजूद है...
अर्थात वैज्ञानिक रूप से "काबा" दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बिंदु है..और भौगोलिक स्थिति के कारण "काबा" को पृथ्वी का सबसे महत्वपूर्ण "आध्यात्मिक केंद्र" माना जाता है।
क्रमशः....
Zahid