Hindu Uthan

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हिन्दू पुन: जगतगुरु बने इस और एक प्रभावी कदम हो|

03/10/2026

बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण के अंश
इज़राइल की पुकार....

75 साल पहले हमें मरने के लिए यहां लाया गया था। हमारे पास ना कोई देश था, ना कोई सेना थी। सात देशों ने हमारे विरुद्ध जंग छेड़ दी। हम सिर्फ 65,000 थे। हमें बचाने के लिए कोई नहीं था। हम पर हमले होते रहे, होते रहे।

लेबनान, सीरिया, ईराक़, जॉर्डन, मिस्र, लीबिया, सऊदी अरब जैसे कई देशों ने हमारे ऊपर कोई दया नहीं दिखाई। सभी लोग हमें मारना चाहते थे किंतु हम बच गये।

संयुक्त राष्ट्र ने हमें धरती दी, वह धरती जो 65 प्रतिशत रेगिस्तान थी। हमने उसको भी अपने खून से सींचा। हमने उसे ही अपना देश माना क्योंकि हमारे लिए वही सब कुछ था।

हम कुछ नहीं भूले, हम फिरऔन से बच गए। हम यूनान से बच गए। हम रोमन से बच गए। हम स्पेन से बच गए। हम हिटलर से बच गए। हम अरब देशों से बच गए। हम सद्दाम से बच गए। हम गद्दाफी से बच गए।
हम हमास से भी बचेंगे, हम हिजबुल्ला से भी बचेंगे और हम ईरान से भी बचेंगे।

हमारे जेरूसलम पर अब तक 52 बार आक्रमण किया गया, 23 बार घेरा गया, 39 बार तोड़ा गया, तीन बार बर्बाद किया गया, 44 बार कब्जा किया गया लेकिन हम अपने जेरूसलम को कभी नहीं भूले। वह हमारे हृदय में है, वह हमारे मस्तिष्क में है और जब तक हम रहेंगे, जेरूसलम हमारी आत्मा में रहेगा।

संसार ये याद रखें कि जिन्होंने हमें बर्बाद करना चाहा वह आज स्वयं नहीं है। मिस्र, लेबनान, बेबीलोन, यूनान, सिकंदर, रोमन सब खत्म हो गए हैं।

हम फिर भी बचे रहे।

हमें वे (इस्लामी) खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने हमारे रस्म रिवाज को कब्जाया। उन्होंने हमारे उपदेशों को कब्जाया। उन्होंने हमारी परंपरा को कब्जाया। उन्होंने हमारे पैगंबर को कब्जाया। कुछ समय पश्चात अब्राहम इब्राहिम कर दिए गए, सोलोमन सुलेमान हो गए, डेविड दाऊद बना दिए गए, मोजेज मूसा कर दिए गए...

फिर एक दिन... उन्होंने कहा तुम्हारा पैगंबर (मुहम्मद) आ गया है। हमने इसे नहीं स्वीकार नहीं किया। करते भी कैसे, उनके आने का समय नहीं आया था। उन्होंने कहा, स्वीकारो! कबूल लो! हमने नहीं कबूला। फिर हमें मारा गया। हमारे शहरों को कब्जाया गया, हमारे शहर यसरब को मदीना बना दिया गया। हम कत्ल हुए, भगा दिए गए...

मक्का के काबा में हम 2 लाख थे, मार दिए गए। हमें दुश्मन बता कर कत्ल किया गया, फिर सीरिया में, ओमान में यही हुआ। हम तीन लाख थे, मार दिए गए। ईराक़ में हम 2 लाख थे, तुर्की में चार लाख, हमें मारा जाता रहा, मारा जाता रहा। वे हमें मार रहे हैं, मारते जा रहे हैं। हमारे शहर, धन, दौलत, घर, पशु, मान-सम्मान सब कुछ कब्जाए जाते रहे फिर भी हम बचे रहे।

1300 सालों में करोड़ों यहूदियों को मारा गया फिर भी हम बचे रहे।

75 साल पहले वे हम पर थूकते थे, जलील करते थे, मारते थे। हमारी नियति यही थी किंतु हम स्वयं पर, अपने नेतृत्व पर, अपने विश्वास पर टिके रहे रहे।

आज हमारे पास एक अपना देश है। एक स्वयं की सेना है, एक छोटी अर्थव्यवस्था है। इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, फेसबुक, जैसी कई संस्थायें हमने इस दौर में बनाईं। आज हमारे चिकित्सक दवा बन रहे हैं, लेखक किताबें लिख रहे हैं, ये सबके लिए हैं , यह मानवता के कल्याण के लिए है।

हमने रेगिस्तान को हरियाली में बदला। हमारे फल, दवाएं, उपकरण, उपग्रह सभी के लिए है।

हम किसी के दुश्मन नहीं है, हमने किसी को खत्म करने की कसमें नहीं खाईं। हमें किसी को बर्बाद भी नहीं करना, हम साजिशें भी नहीं करते।

हम जीना चाहते हैं, सिर्फ सम्मान से, अपने देश में, अपनी जमीन पर, अपने घर में।

पिछले हजार सालों से हमें मिटाया गया, खदेड़ा गया, कब्जाया जाता रहा, हम मिटे नहीं, हारे नहीं और न आगे कभी हारेंगे। हम जीतेंगे, हम जीत कर रहेंगे, हम 3000 सालों से यरुशलम में ही थे। आज हम अपने पहले देश इजराइल में हैं। यह हमारा ही था, हमारा ही है और हमारा ही रहेगा, येरूसलम हमसे है और हम येरूसलम से हैं।

इस तरह की ऐसी जिजीविषा हम हिंदुओं में भी पनपनी चाहिए। मानसरोवर, काबुल, कंधार, पेशावर , लाहौर, ढाका, चटगांव अपनी संतानों की प्रतीक्षा में है।
🕉️🕉️🚩🚩
#साभार #फेसबुक

27/09/2026

श्रीलंका के 24-वर्षीय हिंदू युवक सिवारासा अणोजन को सऊदी अरब में इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अणोजन काम के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे, जहां उन्होंने ऑनलाइन भगवान शिव को निशाना बनाकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का जवाब दिया था। हालांकि अणोजन ने बाद में उस पोस्ट को हटाकर माफी भी मांग ली थी, लेकिन सऊदी की अदालत ने उन्हें यह कठोर सजा सुनाई है।
हिंदुओं अभी भी टाइम है तुम इन देशों और उनके कानूनों से कुछ सीखो। भारत समेत दुनिया के हिंदुओं को अपनी और सनातन के लिए सजग रहना ही पड़ेगा।

20/09/2026

ॐ श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै नमः॥

हे मातः शारदे देवि,
ज्ञानज्योतिः प्रदीपय।
मे बुद्धिं निर्मलां कुरु,
सद्बुद्धिं सततं दिश॥

चित्तं मे स्थिरं कुरु,
मनः प्रसन्नं सदा भवेत्।
शान्तिं देहि मनोमध्ये,
करुणां हृदये सृज॥

नित्यं मे बुद्धिविकासं,
ज्ञानवृद्धिं च देहि मे।
सत्यं वदितुम् सामर्थ्यं,
सत्कर्मसु रतिं कुरु॥

अहंकारं विनिर्मूल्य,
विवेकं मे विवर्धय।
दुःखे धैर्यं सुखे हर्षं,
सर्वभूतेषु मैत्रताम्॥

मातः सरस्वति देवि,
त्वमेव मम चेतना।
त्वमेव बुद्धिर्मे नित्यं,
त्वमेव ज्ञानदायिनी॥

प्रसन्नचित्तं मे नित्यं,
करुणापूर्णमानसम्।
विवेकयुक्तबुद्धिं च,
देहि मे शारदे नमः॥

ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥

17/09/2026

समुद्र की लहरों के बीच बसा मालदीव हमेशा से मुस्लिम देश नहीं था। आज सौ फीसदी मुस्लिम आबादी वाला यह खूबसूरत देश ठीक 900 साल पहले एक समृद्ध बौद्ध राष्ट्र हुआ करता था। 12वीं सदी (1153 ईस्वी) में राजा डोवेमी (कोइमाला) के एक फैसले ने पूरे द्वीप का इतिहास और भूगोल बदल दिया। लेकिन बौद्ध स्तूपों की भूमि अचानक इस्लामिक सल्तनत कैसे बन गई? क्या इसके पीछे अरब व्यापारी थे या कोई पौराणिक कथा? ये कहानी काफी दिलचस्प है।

मालदीव में इस्लाम अपनाने के 900 साल पूरे होने का जश्न
दरअसल मालदीव में रविवार को इस्लाम अपनाने के 900 हिजरी साल पूरे होने का जश्न मनाया गया है। इस मौके पर राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की अगुवाई में एक समारोह आयोजित किया गया। उन्होंने साल भर चलने वाले इस जश्न के लिए एक लोगो और स्लोगन लॉन्च किया और इस्लाम को 'द्वीप देश की संप्रभुता और आजादी की रक्षा करने वाली ढाल' बताया। यह सालगिरह मालदीव के आखिरी बौद्ध राजा के इस्लाम अपनाने (जो 548 हिजरी या 1153 ईस्वी में हुआ था) की याद में मनाई जा रही है। इस घटना ने राज्य को एक इस्लामिक सल्तनत में बदल दिया था। चूंकि हिजरी साल ग्रेगोरियन कैलेंडर के साल से लगभग 11 दिन छोटा होता है इसलिए मालदीव 900 इस्लामिक साल पूरे होने का जश्न मना रहा है जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से 873 साल होते हैं।

इस्लाम के आने से पहले सदियों तक बौद्ध धर्म ने मालदीव के धर्म, सामाजिक रिश्तों, वास्तुकला और मूर्तिकला को आकार दिया था। पुरातत्वविदों को स्तूप, मठ और मूंगे के पत्थर पर की गई नक्काशी मिली है जिन पर बौद्ध धर्म के साथ-साथ व्यापक हिंदू-बौद्ध, महायान और वज्रयान परंपराओं से जुड़ी आकृतियां बनी हैं। इनसे इस द्वीप समूह के प्राचीन इतिहास और भारत और श्रीलंका के साथ इसके संबंधों का पता चलता है।

21/08/2026

ਸੱਚ ਬੋਲਣਾ, ਕਰਤੱਵ ਨਿਭਾਉਣਾ, ਨਿਆਂ ਕਰਨਾ ਅਤੇ ਲੋਕ-ਕਲਿਆਣ ਕਰਨਾ ਹੀ ਧਰਮ ਦਾ ਮੂਲ ਭਾਵ ਹੈ

21/08/2026

सत्य बोलना, कर्तव्य निभाना, न्याय करना और लोक-कल्याण करना ही धर्म का मूल भाव है।

प्राचीन अरब और मूर्ति पूजा।
21/08/2026

प्राचीन अरब और मूर्ति पूजा।

19/08/2026

پاکستان کے بانی محمد علی جناح کے آباؤ اجداد کے ہندو پس منظر کا ذکر تاریخ میں ملتا ہے۔ اسی طرح پاکستان کی بڑی آبادی کے آباؤ اجداد برصغیر کے مقامی ہندو، بدھ مت اور دیگر معاشروں سے تعلق رکھتے تھے، جن کے خاندانوں نے مختلف تاریخی ادوار میں اسلام قبول کیا۔

اس کے باوجود پاکستان میں اپنی شناخت کو عرب اور ترک روایات سے جوڑنے کا رجحان نظر آتا ہے، جبکہ تاریخی اور ثقافتی اعتبار سے پاکستان کی سرزمین اور اس کی بڑی آبادی کی جڑیں اسی برصغیر کی قدیم تہذیبوں سے وابستہ ہیں۔

تاریخ کو تسلیم کرنا کسی مذہب کی توہین نہیں ہے۔ اپنی حقیقی تاریخی اور ثقافتی جڑوں کو سمجھنا ہی کسی بھی معاشرے کی شناخت کو مزید مضبوط بناتا ہے۔

19/08/2026

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के पूर्वजों के हिंदू पृष्ठभूमि से होने का उल्लेख इतिहास में मिलता है। इसी तरह, पाकिस्तान की बड़ी आबादी के पूर्वज भारतीय उपमहाद्वीप के स्थानीय हिंदू, बौद्ध और अन्य समुदायों से थे, जिनके वंशजों ने अलग-अलग ऐतिहासिक काल में इस्लाम स्वीकार किया।

इसके बावजूद पाकिस्तान में अपनी पहचान को अरब और तुर्क परंपराओं से जोड़ने की प्रवृत्ति दिखाई देती है। जबकि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से पाकिस्तान की भूमि और उसकी अधिकांश आबादी की जड़ें इसी भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ी हुई हैं।

इतिहास को स्वीकार करना किसी धर्म का अपमान नहीं है। अपनी वास्तविक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ों को समझना ही किसी समाज की पहचान को अधिक मजबूत बनाता है।

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