Manager : Surender Seeno Sagoo
प्रात समय नवकुंज महल में श्री राधा और नंदकिशोर ॥
दक्षिणकर मुक्ता श्यामा के तजत हंस अरु चिगत चकोर ॥१॥
तापर एक अधिक छबि उपजत ऊपर भ्रमर करत घनघोर ॥
सूरदास प्रभु अति सकुचाने रविशशि प्रकटत एकहि ठोर ॥२॥
"Om Namo Bhagwatey vasudevaye namah:"
कान्हा के नैन लड़े है, राधिका गोरी से...
कान्हा के नैन लड़े है, राधिका
गोरी से...
मैया मेरो ब्याह करवा दे, बृज की छोरी से...
मैया मेरो ब्याह करवा दे, बृज की छोरी से...
सपनो में रोज़ वो आये, मुझे सारी रात जगाये...
अपने घर से ला ला कर, मुझे माखन रोज़ खिलाये...
मैं बंध गया धीरे धीरे, प्रीत की डोरी से...
मैया मेरो ब्याह करवा दे, बृज की छोरी से..
वो दिखती है बड़ी भोली, कहती है खेलेंगे होली...
फागुन में लेके आना, तुम मस्तानो की टोली...
गया चैन जबसे लड़े है नैन, चाँद चकोरी से...
मैया मेरो ब्याह करवा दे, बृज की छोरी से...
मुझको बड़ी प्यारी लागे, दुनिया से न्यारी लागे...
मुझे शरम बहुत आती है, और क्या बतलाऊं आगे...
मैं तंग आया हूँ, उसकी जोरा जोरी से...
मैया मेरो ब्याह करवा दे, बृज की छोरी से...
राधा बिन कान्हा आधा, दोनों का एक इरादा..
तू मेरे मन की जाने, मैं और कहू क्या ज्यादा...
मोहन का मेल करा दे, प्रेम कटोरी से...
मैया मेरो ब्याह करवा दे, बृज की छोरी से...
कान्हा के नैन लड़े है, राधिका गोरी से...
कान्हा के नैन लड़े है, राधिका गोरी से...
मैया मेरो ब्याह करवा दे, बृज की छोरी से...
मैया मेरो ब्याह करवा दे, बृज की छोरी से...
कान्हा के इन मधुर शब्दों का आनंद लेते हुए मैया यशोदा, अपने छोटे से लाल को गले से लगा लेती है,, और सिर पर हाथ फेरते हुए वास्तल्य पूर्ण भाव से अपनी गोद में बिठा कर बलैया लेती हुई आँचल में छुपा लेती है...
!!..."Jai Jai meri Radha pyari ki"...!!
री राधे से रस ऊपजे, रस से रसना गाय...
हे! कृष्णप्रिया जू लाडली, तु मोपे रहियो सहाय..
श्री वृन्दावन के वृक्ष को मरम न जाने कोय...
जहाँ डाल डाल और पात पे श्री राधे राधे होय...
श्री वृन्दावन बानिक बन्यो जहाँ भ्रमर करत गुंजार...
अरी दुल्हिन प्यारी राधिका, अरे दूल्हा नन्दकुमार...
श्री वृन्दावन सो वन नहीं, बरसना सो गाँव...
बन्सीवट सो वट नहीं, श्री राधा नाम सो नाम...
सब द्वारन को छाँड़ि के, अरे आयी तेरे द्वार...
हे! वृषभानु की लाडली, तू मेरी ओर निहार...
श्री राधे मेरी स्वामिनी मैं राधे जी को दास...
जनम जनम मोहे दीजियो श्री वृन्दावन वास...
!!...."Apni Thakurani Shri Radhika Rani"....!!
जो राधा राधा कहते है, वो प्रिया शरण में रहते हैं...
करती है कृपा, वृषभानु सुता, वही महल बुलाये जाते है...
दरबार में राधा रानी के दुःख दर्द मिटाए जाते है...
दुनिया से सताये लोग यहाँ सीने से लगाये जाते है...
वो कृपामयी कहलाती है, रसिको के मन को भाती है...
दुनिया में जो बदनाम हुए, पलकों पे बिठाये जाते है...
दरबार में राधारानी के दुःख दर्द मिटाए जाते है...
दुनिया से सताये लोग यहाँ सीने से लगाये जाते है...
!! जय जय श्री राधे !!
!! जय जय श्री राधे !!
!! जय जय श्री राधे !!