Hanslok

Hanslok Spiritual Knowledge |Satsang

UPCOMING PROGRAM DETAILS:
श्री हंस जयंती के उपलक्ष में
हरिद्वार में जनकल्याण सत्संग समारोह
दिनांक : 12 व 13 नवंबर, 2022 (शनि – रवि)�समय : सायं 6 बजे से 9 बजे तक
स्थान : ऋषिकुल कॉलेज मैदान, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)
संपर्क सूत्र: 8800291788, 8800291288

दिनांक 7 जून, 2026 को कुरुक्षेत्र में होने वाले संत सम्मेलन में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
01/06/2026

दिनांक 7 जून, 2026 को कुरुक्षेत्र में होने वाले संत सम्मेलन में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।

29/05/2026

मोह क्या है?
मोह केवल संसार की वस्तुओं से ही नहीं, बल्कि प्रेम और लगाव से भी जुड़ा होता है। चाहे संसार हो या भगवान, जहाँ प्रेम और लगाव है, वहाँ मोह का भाव भी होता है।


What Is Attachment?
Attachment is not limited to worldly things alone; wherever there is love and attachment, there is also a form of Moh (attachment), whether toward the world or toward God.

24/05/2026

उत्तराखंड : देवों की भूमि
उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि देवभूमि और आध्यात्मिक चेतना की पवित्र भूमि है। यहाँ की संस्कृति, भक्ति, चारधाम और दैविक ऊर्जा आज भी लोगों को अध्यात्म और श्रद्धा से जोड़ती है।


Uttarakhand: Land of Gods
Uttarakhand is not just a state; it is the sacred Land of Gods filled with spirituality, devotion, and divine energy. Its culture and holy Char Dham continue to inspire people toward faith and inner awakening.

पूजनीया कमला सजवाण जी की स्मृति में भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा - दक्षिणी दिल्ली के भाटी माइंस रोड स्थित सजवाण फार्म में दि...
22/05/2026

पूजनीया कमला सजवाण जी की स्मृति में भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा - दक्षिणी दिल्ली के भाटी माइंस रोड स्थित सजवाण फार्म में दिनांक 16 मई, 2026 को द हंस फाउंडेशन की प्रेरणास्रोत माता श्री मंगला जी की पूज्य माता स्वर्गीय श्रीमती कमला सजवाण जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सामाजिक, आध्यात्मिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने उपस्थित होकर दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा में माननीय लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. इंद्रेश कुमार जी एवं डॉ. कृष्ण गोपाल शर्मा जी, जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी श्री ललितानन्द गिरि जी महाराज, स्वामी श्री कालिदास बाबा, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, टिहरी सांसद श्रीमती माला राजलक्ष्मी शाह, महाराजा टिहरी श्री मनुजेंद्र शाह, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल, विधायक श्री प्रीतम सिंह, स्थानीय विधायक श्री करतार सिंह तंवर, पूर्व विधायक श्री हरेन्द्र अग्रवाल, नेपाल के काठमांडू स्थित दिव्य सेवा निकेतन की संस्थापिका साध्वी सुनीता बाई जी तथा स्थानीय पार्षद श्री सुंदर सिंह तंवर सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन, सगे-संबंधी एवं शुभचिंतक उपस्थित रहे।
श्रद्धांजलि सभा में स्वर्गीय कमला सजवाण जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वे अत्यंत सरल, सौम्य, परोपकारी एवं मिलनसार स्वभाव की महिला थीं। आध्यात्मिक चिंतन एवं धार्मिक-सामाजिक कार्यों में उनकी विशेष रुचि थी और वे सदैव सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेती थीं।
सभा में उपस्थित सभी लोगों ने स्वर्गीय कमला सजवाण जी के पुत्र श्री रविंदर सजवाण, ज्येष्ठ सुपुत्री माता श्री मंगला जी, श्री भोले जी महाराज तथा समस्त परिवारजनों को अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

21/05/2026

जीवन में धन का महत्व
जीवन में धन का बहुत महत्व है, क्योंकि यह शुभ कार्यों, सेवा और दूसरों की सहायता का साधन है। लेकिन परमात्मा तक पहुँचने के लिए केवल धन नहीं, बल्कि साधना और आध्यात्मिकता की आवश्यकता होती है।


Importance of Wealth in Life
Money holds great importance in life as it helps in good deeds, service, and helping others. But to attain the Divine, not wealth but spiritual practice and devotion are truly necessary.

17/05/2026

साधना किसे कहते है?
मनुष्य जीवन परमात्मा का अनमोल उपहार है। आत्मज्ञान और साधना के माध्यम से ही बहिर्मुखी मन अन्तःमुखी बनता है। जब मन परमात्मा के नाम में स्थिर होता है, तभी मुक्ति और आत्मिक शांति का मार्ग खुलता है।


What is Sadhana?
Human life is a precious gift from the Divine. Through self-realization and spiritual practice, the outward wandering mind turns inward. When the mind becomes absorbed in the Divine Name, the path to liberation and inner peace unfolds

10/05/2026

मन क्यों भटकता है?
मन इसलिए भटकता है क्योंकि हम उस पर नियंत्रण नहीं रख पाते। भजन और साधना के माध्यम से मन को स्थिर किया जा सकता है। यह चंचल मन इच्छाओं के पीछे दौड़ता है—इच्छा पूरी हो तो सुख, अधूरी रहे तो दुख देता है।


Why Does the Mind Wander?
The mind wanders because we fail to control it. Through devotion and spiritual practice, it can be stabilized. This restless mind keeps chasing desires—bringing happiness when fulfilled and sorrow when not.

हंसलोक परिवार श्रद्धापूर्वक पूजनीय माता श्रीमती कमला सजवाण जी के निधन पर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।“असतो म...
08/05/2026

हंसलोक परिवार श्रद्धापूर्वक पूजनीय माता श्रीमती कमला सजवाण जी के निधन पर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
“असतो मा सद्गमय ।
तमसो मा ज्योतिर्गमय ।
मृत्योर्मा अमृतं गमय ॥”

उनके श्रेष्ठ संस्कार सदैव स्मरणीय रहेंगे।
॥ ॐ शांति ॥

04/05/2026

आत्मा की शुद्धि कैसे हो?
आत्मा स्वभाव से शुद्ध है, अशुद्धि मन, चित्त और बुद्धि में होती है। सत्संग और गुरु की शरण से इनकी शुद्धि होती है, जिससे संदेह दूर होकर मन पवित्र बनता है और आत्मा का वास्तविक स्वरूप प्रकट होता है।


How Can the Soul Be Purified?
The soul is pure by nature, while impurity lies in the mind, intellect, and consciousness. Through satsang and guidance of a guru, these are purified, removing doubts and revealing the true essence of the soul as pure energy and power.

02/05/2026

The Hans Foundation - Empowering Communities

The Hans Foundation, along with its associated organisations Hans Cultural Centre, Shri Hanslok Jankalyan Samiti, Hansjyoti, Shivansh Farming, and Hans Gaushala, works under the guidance of Mata Shri Mangla Ji and Shri Bhole Ji Maharaj. Together, they serve society through healthcare, education, livelihood support, women’s empowerment, and social welfare, while also promoting innovation, organic farming, and community development.

Their annual socio-cultural events in Delhi and Haridwar include Matra Shakti Diwas (April), Paawan Janamutsav (July), and Hans Jayanti (November). These feature spiritual discourses, satsang, and bhajans. They also organise programs across cities and internationally, including Nepal.

Since its establishment in 2009, The Hans Foundation has expanded its work across health, education, disability support, climate action, and emergency response, marking 15 years of service in 2024. Hans Cultural Centre plays a key role in organising healthcare camps, disaster relief, education initiatives, and cultural programs, often supported by CSR partners.

The foundation’s hospitals provide affordable healthcare, while mobile units reach remote areas. Through all initiatives, the organisations remain committed to service, compassion, and building an inclusive future.

हंस फाउंडेशन - समुदायों का सशक्तिकरण

हंस फाउंडेशन, अपने सहयोगी संगठनों हंस कल्चरल सेंटर, श्री हंसलोक जनकल्याण समिति, हंसज्योति, शिवांश फार्मिंग और हंस गौशाला के साथ, माता श्री मंगला जी और श्री भोले जी महाराज के मार्गदर्शन में कार्य करता है।

ये सभी मिलकर स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में सेवा करते हैं, साथ ही नवाचार, जैविक खेती और सामुदायिक विकास को बढ़ावा देते हैं।

दिल्ली और हरिद्वार में आयोजित उनके वार्षिक सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मातृ शक्ति दिवस (अप्रैल), पावन जन्मोत्सव (जुलाई) और श्री हंस जयंती (नवंबर) शामिल हैं। इनमें आध्यात्मिक प्रवचन, सत्संग और भजन होते हैं। ये संस्थाएं विभिन्न शहरों और नेपाल सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कार्यक्रम आयोजित करती हैं।

2009 में स्थापित हंस फाउंडेशन ने 2024 में सेवा के 15 वर्ष पूरे किए हैं और यह संस्था स्वास्थ्य, शिक्षा, दिव्यांग सहायता, जलवायु संरक्षण और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में निरंतर कार्य कर रही है।

हंस कल्चरल सेंटर स्वास्थ्य शिविरों, आपदा राहत, शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिन्हें अक्सर सीएसआर साझेदारों का सहयोग मिलता है।

फाउंडेशन के अस्पताल निःशुल्क एवं किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करते हैं, जबकि मोबाइल टीमें दूरदराज के क्षेत्रों में जाकर सेवाएँ उपलब्ध कराती हैं। इन सभी प्रयासों के माध्यम से, ये संगठन सेवा, करुणा और एक समावेशी भविष्य के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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