मेरा सतगुरु Rssb

मेरा सतगुरु Rssb ❤️**संगत से विनती है पेज को LiKE follow ज़रूर कर लें जी"**❤️ सभी संगत को प्यार भरी"🙏"राधा स्वामी जी" 🙏 mera satguru rssb

😍"ये तस्वीर बताती है- गुरु के प्यारे जब बाबाजी से मिलने उनकी कोठी पहुँचते हैं, तो मकसद सिर्फ मुलाकात नहीं होता… मन अपने ...
26/08/2026

😍"ये तस्वीर बताती है- गुरु के प्यारे जब बाबाजी से मिलने उनकी कोठी पहुँचते हैं, तो मकसद सिर्फ मुलाकात नहीं होता… मन अपने सतगुरु के सान्निध्य से कुछ पल समेटने जाता है।" 🩷🙏

🩷"मुलाकात का समय भले ही गुजर जाए, लेकिन सतगुरु के साथ बिताए पलों की यादें उम्रभर मन को भीतर से रोशन करती रहती हैं।" ✨👏

😍"इस फोटो में बाबाजी के साथ "एकता मिशन के अध्यक्ष पवन मोंगा जी और मोनिका मोंगा जी" की यह मुलाकात भी ऐसा ही एक यादगार पल ...
24/08/2026

😍"इस फोटो में बाबाजी के साथ "एकता मिशन के अध्यक्ष पवन मोंगा जी और मोनिका मोंगा जी" की यह मुलाकात भी ऐसा ही एक यादगार पल है। चेहरे पर मुस्कान, मन में श्रद्धा और सामने बाबाजी का सान्निध्य—इससे खूबसूरत पल और क्या हो सकता है। 🙏🩷

"कुछ तस्वीरें सिर्फ कैमरे में कैद नहीं होतीं… वे एक खूबसूरत एहसास बनकर दिल में बस जाती हैं।" 🙏🩷

😍साखी: "एक बार एक सेवादार महाराज सावन सिंह जी के पास आया और बोला, “महाराज जी, मैं बहुत समय से सेवा कर रहा हूँ, लेकिन मन ...
23/08/2026

😍साखी: "एक बार एक सेवादार महाराज सावन सिंह जी के पास आया और बोला, “महाराज जी, मैं बहुत समय से सेवा कर रहा हूँ, लेकिन मन में अभी भी शांति नहीं है।”
🩷महाराज जी ने पूछा, “सेवा करते समय तुम्हारे मन में क्या भाव रहता है?” उसने कहा, “महाराज जी, मैं चाहता हूँ कि मेरी सेवा को देखा जाए और उसकी प्रशंसा हो।”
महाराज जी मुस्कुराए और बोले, “जिस सेवा में प्रशंसा की इच्छा हो, वह अभी सेवा नहीं, सौदा है। सेवा तो तब है जब करने वाला भी भूल जाए कि उसने कुछ किया है।”
🩷फिर उन्होंने समझाया, “सतगुरु को तुम्हारी सेवा की आवश्यकता नहीं है; आवश्यकता तुम्हें है। सेवा इसलिए दी जाती है कि तुम्हारा मन विनम्र हो, अहंकार कम हो और हृदय में प्रेम पैदा हो।”
उस दिन से वह सेवादार बिना किसी नाम, मान या प्रशंसा की इच्छा के सेवा करने लगा। धीरे-धीरे उसे समझ आया कि सेवा का फल बाहर मिलने वाला सम्मान नहीं, भीतर पैदा होने वाली विनम्रता है।

😍 New Post "यह फोटो दिखाती है -जहाँ बाबाजी और हुजूर जी के चरण पड़ते हैं, वहाँ केवल भीड़ नहीं जुटती—वहाँ वातावरण में एक ऐ...
22/08/2026

😍 New Post "यह फोटो दिखाती है -जहाँ बाबाजी और हुजूर जी के चरण पड़ते हैं, वहाँ केवल भीड़ नहीं जुटती—वहाँ वातावरण में एक ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा उतरती है, जिसे शब्दों में बाँधना कठिन है। ✨

🩷"दूर खड़े गुरु-प्रेमियों की आँखें बस एक झलक की तलाश में रहती हैं… कोई पास आने की कोशिश करता है, कोई हाथ जोड़कर वहीं ठहर जाता है। मानो उस एक दर्शन में ही मन की वर्षों पुरानी प्यास को सुकून मिल जाए। 🙏
संतों की मौजूदगी जगह को नहीं, इंसान के भीतर को पवित्र कर देती है। 🩷

😍New Post 👉"जब बाबाजी सत्संग सेंटर के दौरे पर पहुँचते हैं, तो माहौल सिर्फ़ एक मुलाक़ात का नहीं रहता—हर चेहरे पर दर्शन की...
21/08/2026

😍New Post 👉"जब बाबाजी सत्संग सेंटर के दौरे पर पहुँचते हैं, तो माहौल सिर्फ़ एक मुलाक़ात का नहीं रहता—हर चेहरे पर दर्शन की आस और हर दिल में प्रेम उमड़ पड़ता है। 🩷🙏

🩷"बैठी हुई संगत हो या आसपास सेवा में लगे सेवादार, हर कोई उस पल का इंतज़ार करता है जब बाबाजी की एक झलक मिल जाए। हाथ अपने आप जुड़ जाते हैं और दिल बस यही चाहता है कि कुछ पल नज़दीक से दर्शन हो जाएँ।

🩷"यहाँ पद, पहचान और VIP होने का भाव पीछे छूट जाता है—सामने होते हैं तो बस बाबाजी और उनके दर्शन की प्यासी संगत।

😍New Post 👉"बाबाजी जब अपनी कार से सत्संग सेंटर की ओर आते हैं, तो रास्ते के दोनों ओर खड़ी संगत और सेवादारों की निगाहें बस...
20/08/2026

😍New Post 👉"बाबाजी जब अपनी कार से सत्संग सेंटर की ओर आते हैं, तो रास्ते के दोनों ओर खड़ी संगत और सेवादारों की निगाहें बस उसी एक पल का इंतज़ार करती हैं—जब बाबाजी की कार सामने से गुज़रे और आँखों को उनके दर्शन की एक झलक मिल जाए।
घंटों खड़े रहने की थकान भी उस इंतज़ार के सामने छोटी लगती है। चेहरे शांत होते हैं, लेकिन आँखों में एक अलग ही प्यास दिखाई देती है। हर नज़र जैसे यही कहती है—“बस एक झलक मिल जाए, आज का इंतज़ार सफल हो जाएगा।”
शायद यही प्रेम है—जहाँ मिलने के लिए घंटों का इंतज़ार भी भारी नहीं लगता, और दर्शन की एक छोटी-सी झलक पूरे दिन को धन्य कर देती है। ❤️🙏

🩷"इस फोटो से पता चलता है-"बाबाजी जब किसी सत्संग सेंटर का का दौरा करते है, तो कैसे संगत बड़े प्रेम से अनुशासन में बाबाजी क...
19/08/2026

🩷"इस फोटो से पता चलता है-"बाबाजी जब किसी सत्संग सेंटर का का दौरा करते है, तो कैसे संगत बड़े प्रेम से अनुशासन में बाबाजी के दर्शन करने पहुँचती है और भावविभोर होकर बाबाजी जी से मिलते है"
😍 -"यह केवल एक मुलाकात नहीं होती, बल्कि श्रद्धा और सतगुरु के प्रति प्रेम से भरा हुआ ऐसा अनुभव होता है, जिसे संगत अपने साथ लेकर लौटती है। बाबाजी की मौजूदगी में हर चेहरा मुस्कुराता है और हर दिल यही महसूस करता है कि यह दर्शन जीवन का एक अनमोल पल है। 🙏❤️

😍New Post: "इस फोटो में बाबाजी अपनी बहिन जी" और उनके परिवार के साथ खड़े दिख रहे है, बाबाजी जी की Sister बाबाजी से मिलकर ब...
15/08/2026

😍New Post: "इस फोटो में बाबाजी अपनी बहिन जी" और उनके परिवार के साथ खड़े दिख रहे है, बाबाजी जी की Sister बाबाजी से मिलकर बहुत खुश दिख रही है, "राधा स्वामी जी"🙏

🌺जरूर पढ़े:👉"सेवा का असली फल — एक गहरी साखी "एक बार एक सेवादार कई वर्षों से आश्रम में सेवा कर रहा था। वह सुबह सबसे पहले प...
14/08/2026

🌺जरूर पढ़े:👉"सेवा का असली फल — एक गहरी साखी

"एक बार एक सेवादार कई वर्षों से आश्रम में सेवा कर रहा था। वह सुबह सबसे पहले पहुँचता और अपनी जिम्मेदारी पूरी लगन से निभाता। लोग उसकी मेहनत की प्रशंसा भी करते थे। लेकिन धीरे-धीरे उसके मन में यह भाव आने लगा कि “मैं दूसरों से ज्यादा सेवा करता हूँ।”

एक दिन उसे किसी दूसरे सेवादार की छोटी-सी गलती पर बहुत क्रोध आ गया। उसने उसे सबके सामने डाँट दिया। शाम को जब वह सतगुरु के पास पहुँचा तो सतगुरु ने उसके चेहरे की उदासी देखकर पूछा, “आज मन इतना भारी क्यों है?”

सेवादार ने सारी बात बता दी और कहा, “महाराज जी, मैं इतने वर्षों से सेवा कर रहा हूँ, फिर भी मेरे अंदर क्रोध और अहंकार क्यों है?”
सतगुरु ने शांत स्वर में कहा, “तुमने सेवा तो बहुत की, लेकिन कभी यह देखने की कोशिश नहीं की कि सेवा करते-करते तुम्हारे भीतर क्या बदल रहा है।”

सेवादार चुप हो गया।
सतगुरु ने आगे कहा, “अगर सेवा करने के बाद तुम्हें अपने से कम सेवा करने वाले व्यक्ति पर अभिमान होने लगे, तो समझो सेवा ने तुम्हारे हाथ तो व्यस्त रखे, लेकिन मन को अभी नहीं छुआ। सच्ची सेवा वह है जिसके बाद मनुष्य अपने गुण नहीं गिनता, बल्कि अपनी कमियाँ देखने लगता है।”

फिर सतगुरु ने एक सुंदर बात कही, “बेटा, सेवा का हिसाब मत रखा करो। यह मत सोचो कि मैंने आज कितनी सेवा की। बल्कि यह देखो कि आज सेवा ने मेरे अंदर से कितना ‘मैं’ कम किया।”

उस दिन से उस सेवादार ने अपनी सेवा का ढंग बदल दिया। अब वह किसी की प्रशंसा की प्रतीक्षा नहीं करता था। कोई धन्यवाद देता तो भी मुस्कुरा देता और कोई उसकी गलती निकालता तो भी शांत रहने की कोशिश करता।

कुछ समय बाद उसके एक साथी ने पूछा, “तुममें इतना बदलाव कैसे आ गया?”

😍वह बोला, “पहले मैं समझता था कि मैं सतगुरु की सेवा कर रहा हूँ। अब समझ आया है कि असल में सतगुरु मेरी सेवा के माध्यम से मेरे अंदर का अहंकार साफ कर रहे हैं।”

🌹साखी :😲👉"यह साखी महाराज चरन सिंह जी ने स्वयं सुनाया था और RSSB की प्रकाशित सामग्री में दर्ज है। यह महाराज सावन सिंह जी ...
14/08/2026

🌹साखी :😲👉"यह साखी महाराज चरन सिंह जी ने स्वयं सुनाया था और RSSB की प्रकाशित सामग्री में दर्ज है। यह महाराज सावन सिंह जी की करुणा और शिष्य की भीतर से बदलती हुई जिंदगी का सुंदर उदाहरण है।

बीसवीं सदी के शुरुआती समय में शादि नाम का एक डाकू हुआ करता था। वह लोगों के घरों में चोरी करता और कभी-कभी पशु भी चुरा लेता था। इतना ही नहीं, वह बीस आने-जाने वाले रास्ते पर बैठकर बेअस आने वाले सत्संगियों को डराता और कभी उनका सामान भी छीन लेता था।

कई सत्संगियों ने महाराज सावन सिंह जी से उसकी शिकायत की। लेकिन महाराज जी उसकी शिकायत सुनकर नाराज़ नहीं होते थे। वे बस मुस्करा देते और चुप रहते। �

एक दिन शादि के गाँव के एक सम्मानित व्यक्ति ने उसे रोककर पूछा—
“तुम लोगों को क्यों डराते हो? तुम्हें इससे क्या मिलता है?”
फिर उस व्यक्ति ने उसे महाराज सावन सिंह जी के बारे में बताया। शुरुआत में शादि ने कोई खास ध्यान नहीं दिया, लेकिन धीरे-धीरे वह उनकी बातें सुनने लगा।

कुछ समय बाद उसके मन में विचार आया—
“आखिर यह महाराज कौन हैं, जिनके लिए इतने लोग इतनी दूर से जाते हैं?”
एक दिन उसने स्वयं डेरा जाने का फैसला किया।
जिस रास्ते पर वह पहले सत्संगियों को डराया करता था, उसी रास्ते से वह अब महाराज सावन सिंह जी के दर्शन करने जा रहा था।

यहीं से उसके जीवन में बदलाव शुरू हुआ। जिस व्यक्ति को लोग डाकू और बदमाश के रूप में जानते थे, उसी के भीतर धीरे-धीरे भक्ति और प्रेम की आग जलने लगी। महाराज जी ने उसे उसकी पुरानी पहचान से नहीं देखा; उन्होंने उसके भीतर बदलने की संभावना देखी

🌸 इस प्रसंग की सबसे बड़ी सीख
कई बार दुनिया किसी इंसान को उसकी पुरानी गलतियों से पहचानती है, लेकिन सतगुरु उसके भीतर छिपे उस इंसान को देखता है जो अभी बनना बाकी है।

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