India Eye IHRO/Think Girl Child

India Eye IHRO/Think Girl Child Think Girl Child is one of the 5 verticals of India Eye IHRO. We are working to make people aware about the beautiful gift given by god in the form of a Girl.

There are people who kill girl even before they are born. We are working our best to Stop Female Foeticide.

25/09/2016

"Child is a precious gift of God"....whether its a girl or a boy....

This October 16th, IndiaEye IHRO is celebrating the International Day of the Girl Child in collaboration with the United Nations Information Centre for India & Bhutan.

We would like to know your views if you have a Girl Child and how you feel to have her in your life!

As a parent how you see your daughter's dream..

Post your views...some of the best views will be listed in the upcoming special tabloid on the occasion of Girl Child!

Your views are welcome!!

25/09/2016

Hey everyone!!

IndiaEye IHRO is celebrating the International Day of the Girl Child in collaboration with the United Nations Information Centre for India and Bhutan on October 16th 2016.
A nation-wide essay writing and painting competitions have been kicked off....send your entries latest by October 1st!

Lets gear up!!
23/09/2016

Lets gear up!!

Let's cheer up for our daughters!!  Hurry up!!
14/09/2016

Let's cheer up for our daughters!! Hurry up!!

नन्हे से पंखों की ऊची उङान वह जो मुझे लगातार आगे बढ़ाता है, वो मेरा लक्ष्य है। - मोहम्मद अलीशायद इसी बात से प्रेरित हो क...
05/07/2016

नन्हे से पंखों की ऊची उङान


वह जो मुझे लगातार आगे बढ़ाता है, वो मेरा लक्ष्य है। - मोहम्मद अली

शायद इसी बात से प्रेरित हो कर 7 साल की एक कश्मीरी बच्ची ने अपने सपनों को साकार किया है । हौसलें से भरी ये बच्ची मोहम्म्द अली जैसा बनना चाहती है औऱ जिसकी शुरुआत उसने इतनी से उम्र मे ही शुरू कर दी । इतनी से कोमल हाथों ने खिलौने से खेलने की बजाए बॉक्सिंग के गलावाज को अपना साथी बनाया औऱ नई उङान भरने का फैसला लिया । कश्मीर के तर्कपोरा की रहने वाली तजामुल इस्लाम की पहली कश्मीरी लड़की है जो इटली में होने वाले वर्ल्ड किकबॉक्सिंग चैम्पियनशिप में भारत का नाम रोशन करेगीं जो कि नवंबर में होने वाला है
यही नही तजामुल ने कई अन्य ईनाम अपने नाम किए है तजामुल ने 2015 में दिल्ली में हुए नेशनल किकबॉक्सिंग चैम्पियनशिप में सब जूनियर कैटेगिरी में गोल्ड मेडल जीता था। जिसके बाद उसे वर्ल्ड किकबॉक्सिंग चैम्पियनशिप के लिए जगह मिली उसने कभी भी अपनी उम्र की फिक्र न करते हुए हमेशा अपने आप को मैदान में मजबूत बनाए रखा है इसका एक उदाहरण है जब तजामुल दूसरी कक्षा में थी तब उसका मुकाबला 13 साल के लङके से हुआ जिसको तजामुल ने सिर्फ 15 मिन्ट में हराया । तजामुल बॉक्सिंग की दुनिया में नाम कर अपने देश औऱ अपने माँ , बाप का नाम रोशन करना चाहती है । हम ये उम्मीद करते है कि ऐसा करने में वह कामयाब हो और वर्ल्ड किकबॉक्सिंग चैम्पियनशिप का खिताब उसी के नाम हो ।

-दिपाक्षी शर्मा

20/06/2016

20 रुपये से 120 करोङ तक का सफर

महिलाए आज के समय भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए काफी जतन करती है लेकिन उनके इरादे इतने मजबूत होते है कि खुदा भी उनके लिए रास्ते खोल देता है । यह ऐसे ही एक मिसाल बन कर आई है अनिता ज्योथि रेड्डी जो कि आज के समय अमेरिका की एक कंपनी की सीईओ है जिन्होने अपने सफर की शुरुआत पांच रुपये कमाने से की और आज वह करोङो का बिजनस संभालती है । रेड्डी अपने घर में दूसरे नबंर पर आती थी मां के देहांत के बाद उन्हें अनाथश्राम में डाल दिया गया जहां से उन्होने अपनी पढाई की 10वीं में पहले नबंर लाने के बाद भी गरीबी के चलते उन्हे अपनी पढाई छोङनी पढी बाद में 16 साल की उम्र मे ही उनका विवाह कर दिया गया और उनके दो बच्चे हुए । लेकिन अपने बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए उन्होनें नौकरी के लिए आवेदन किया और शिक्षक की नौकरी की । जहॉं उन्हे 120 ऱुपये तनख्वाह मिलती । अपने पति के अस्वीकृति के बावजुद भी वह अपने बच्चों के साथ हनमकोंडा शहर चली गई । जहां उन्होने टाईपिंग इंस्टीट्यूट ज्वॉइन किया औऱ साथ ही साथ दर्जी का काम शुरु कर रोज के 20 से 25 रुपये कमाने लगी । लेकिन सिलसिला यही थोङी खत्म होने वाला था बाद में लाइब्र्रेरियन की नौकरी मिली और ओपन स्कूल में दाखिला ले कर अपनी पढाई जारी रखी , बाद में वह बतौर गर्ल चाइल्ड डेवलेपमेंट ऑफिसर काम करने लगीं । लेकिन वो कहां रुकने वाली थी । एक दिन अमेरिका से आई अपनी कजन को देखा कर वह अचंभित रह गई क्योंकि उसकी बदली हुई जीवनशैली देख वह हैरान रह गई । और यही वाकिया बना रेड्डी के जिन्दगी में बदलाव का जिसके बाद से उन्होने अमेरिका में अपनी किस्मत आजमाने की ठानी ।जिसके बाद उन्होने वी. सी . एल कंप्यूटर में दाखिला लिया सॉफ्टवेयर सीखने । और पासर्पोट ,वीजा के लिए बंधोबस्त किया और अपने कजन के साथ चली गई । जहां एक दुकान मे उन्होने 12 घंटे नौकरी की और 60 डॉलर की पगार मिलती थी । इन तमाम मुश्किलों के बाद भी उन्होने हार नही मानी और अपनी कंपनी खोलने का निश्चय किया और जिसमे वह सफल हुई और ये साबित किया कि एक महिला भी सफल बिजनेसवुमेन बन सकती है । अब उनका एक औऱ सपना है कि वो हजार युवकों को अपनी कंपनी में प्लेसमेंट दें और एक स्कूल शुरु करें जिसमें एल. के . जी से लेकर पी . जी तक की पढाई हो । वह मनाती है कि महिलाओं को अपने भाई, पिता या पति पर निर्भर नही रहना चाहिए बल्कि अपने पैरों पर खङा होना चाहिए ।

-दिपाक्षी शर्मा
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18/06/2016

Bhawana Kath, Avani Chatuvedi and Mohana Singh are the first batch of female pilots inducted in an IAF fighter squadron.

18/06/2016

18/06/2016

man thinks he is a “HERO” but if he kills “HER” he’ll just remain a “0”

13/05/2016

बेटियाँ किसी से कम नही

उसी के ख्बाब को ताबीर के सांचों में ढाला है,

मैं वो बेटी हूं जिससे मां के आंगन में उजाला है

नही समझा है कुछ भी फर्क बेटे और बेटी में

मेरे मां बाप ने मुझे नाजों से पाला है….

इस बार की आईएस परिक्षा में 173वीं रैक प्राप्त करने वाली वत्सला पर ये पंक्तियां बिल्कुल सटीक बैठती हैं...बचपन से ही जुझारु प्रवृत्ति वाली वत्सला के लिए आएएस की परिक्षा पास करने के रास्ते में कई बाधाएं आईं...लेकिन वत्सला ने कभी हार नहीं पानी...वत्सला अपने माता-पिता के काफी करीब हैं...उनके पिता का सपना था कि उनकी बेटी आएएस बने...वत्सला ने इसके लिए काफी मेहनत भी की लेकिन एक दिन अचानक वत्सला को पता चला कि उनके पिता को कैंसर है..वत्सला के लिए उनके माता पिता ही सबकुछ थे...वत्सला पढ़ाई-लिखाई छोड़कर अपने पिता की सेवा में जी-जान से जुट गयीं...इलाज के लिए पिता को मुम्बई लेकर गयीं पिता के ठीक होने के बाद उन्होने दुबारा से अपनी पढाई शुरु कर दी । वत्सला का मानना है कि लङकियाँ मानसिक रुप से मजबूत होती हैं , उनको आत्माहत्या जैसे कदम न उठाते हुए डटकर परेशानियों का सामना करना चाहिए । उनका कहना है कि सभी लङकियों को उनके माता – पिता जैसे माता पिता मिलने चाहिए, वत्सला के माता-पिता को कभी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनकी दो बेटियां हैं...हमेशा उन्होनें अपनी दोनों बेटियों को सपोर्ट किया, उन्हें हमेशा प्रोत्साहन दिया..वत्सला कहतीं हैं कि ये उनके माता पिता का प्रोत्साहन और सपोर्ट ही है जिसकी वजह से आज उन्होंने ये मुकाम हासिल किया है...
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना प्रेरणास्त्रोत मानने वाली वत्सला का मानना है कि दुनिया में आए हो तो दुनिया के लिए कुछ कर के जाओ...
वत्सला बेटी बचाओ बेटी पढाओ के अभियान की तरीफ करते हुए कहती है कि इसका असर समाज में सकारात्मक तौर पर देखा जा सकता है क्योकि बेटियों की संख्या में काफी वृदि हुई है । वह IAS की तैयारी कर रहे उन तमाम विद्यार्थियों को यह संदेश देना चाहती है कि पूरी मेहनत और लगन के साथ तैयारी की जाए, तो सफलता जरुर मिलेगी..साथ ही उन मौकों औऱ सुविधाओं का फायदा उठाईयों जो अपके माता पिता बहुत मुश्किल से आपको दे पाते है । India EYE IHRO के विभाग वत्सला को उनकी सफलता के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके उजावाल भविष्य की कामना करता है औऱ उम्मीद करता है कि अगर बेटियों की ठीक से परवरिश की जाय तो कई ऐसी वत्सला माँ–बाप औऱ पूरे देश का नाम रोशन करेगी...
-दिपाक्षी शर्मा

09/05/2016

A girlchild brings joy, She is no less than a boy.

- A quote


07/05/2016

A girl is not a tension,
She is equal to "Ten-Sons"


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+911141010650

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