Sanatan Rules

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वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं
07/09/2024

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरुमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।

गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं

21/06/2024

श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र मंत्र (Shree Shiv Rudrashtak Stotra Mantra) को रुद्र कवच मंत्र के रूप में भी जाना जाता है। इन सभी मंत्रों में .....

24/12/2023

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् | सदा वसंतम हृदयारविंदे, भवम भवानी सहितं नमामि || मंगलम भगवान् व.....

रावण की तरह मन के विकारों का नाश हो,प्रभु श्रीराम का हृदय में सर्वदा वास हो।दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं।                ...
24/10/2023

रावण की तरह मन के विकारों का नाश हो,
प्रभु श्रीराम का हृदय में सर्वदा वास हो।
दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं।














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या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।     #नवरात्रि
15/10/2023

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।



#नवरात्रि

19/09/2023

गणेश चतुर्थी पर विघ्नहर्ता की कैसे करें पूजा

भगवान गणेश सभी देवताओं में सर्वप्रथम पूजनीय हैं अर्थात कोई भी शुभ कार्य करना है तब उसके लिए हमें सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करनी पड़ेगी। इसका कारण है कि कोई कार्य यदि सफल होता है तो उसका पूरा श्री गणेश भगवान को दिया जाता है क्योंकि भगवान गणेश बुद्धि के देवता है वह पितृ भक्त और मातृ भक्त है। उन्होंने अपने माता और पिता के आशीर्वाद से देवताओं में पहले पूजनीय होने का वरदान पाया। जिसके परिणाम स्वरूप कोई भी शुभ कार्य करने से पहले उनका नाम अवश्य लिया जाता है।

Ganesh Chaturthi 2022 : भगवान गणेश सभी देवताओं में सर्वप्रथम पूजनीय हैं गणेश चतुर्थी की शुभ मुहूर्त तिथि 30 अगस्त 2022 को दोपहर 3:35 पर .....

श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्ररुद्र मंत्र (Rudra Mantra) भगवान रूद्र को समर्पित है, जो भगवान शिव का ही रूप माने जाते हैं और...
04/09/2023

श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र

रुद्र मंत्र (Rudra Mantra) भगवान रूद्र को समर्पित है, जो भगवान शिव का ही रूप माने जाते हैं और व्यापक अर्थों में दोनों एक ही हैं। अर्थात सर्वशक्तिमान भगवान महादेव ही रुद्र हैं। रुद्र मंत्र (rudra mantra lyrics) के इष्ट देवता भगवान शिव ही हैं। रुद्र मंत्र की आवृत्तियों को बार-बार दोहराने अर्थात इनका जाप करने से भगवान शिव का पावन सानिध्य प्राप्त होता है और मंत्र जाप करने वाले की कोई भी इच्छा पूरी हो सकती है।

देवों के देव कहे जाने वाले महादेव शिव, जिन्हें रुद्र के नाम से भी जाना जाता है, रुद्र मंत्र (shiva rudra mantra) के जाप से शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की मनोवांछित इच्छाओं की पूर्ति भी कर देते हैं। भगवान शिव दुखों का नाश करने के लिए जब भी अपने संहारक रूप में आते हैं और उस काल में रौद्र रूप को रूप धारण करके सभी शत्रुओं को रुलाने से ही वे शिव रुद्र बन जाते हैं और इन्हीं की कृपा पाने के लिए रुद्र मंत्र का जाप करना चाहिए।

श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र मंत्र (Shree Shiv Rudrashtak Stotra Mantra) को रुद्र कवच मंत्र के रूप में भी जाना जाता है। इन सभी मंत्रों में चमत्कारी शक्तियां होती हैं। जो जातक इन मंत्रों का जाप करता है, नकारात्मक ऊर्जा उससे दूर रहती है। इस मंत्र के जाप के दौरान उपासक को भगवान रुद्र को फूल और शुद्ध जल अर्पित करना चाहिए। आप चाहें तो नियमित रूप से रुद्र मंत्र का जाप कर सकते हैं। हालांकि इन मंत्रों को वैदिक नियमों के अनुसार ही जाप किया जाना चाहिए।

श्री शिव रुद्राष्टक स्तोत्र मंत्र (Shree Shiv Rudrashtak Stotra Mantra) को रुद्र कवच मंत्र के रूप में भी जाना जाता है। इन सभी मंत्रों में .....

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