28/01/2026
क्या आप जानते है? हरम शरीफ़ (मक्का) के मताफ़ में कदम रखते ही ज़मीन ठंडी क्यों महसूस होती है जबकि ऊपर सूरज अपनी तपिश से रेत को भी जला दे, हवा को भी तपा दे? न कोई AC का सिस्टम, न कोई पानी की पाइप, न कोई मशीनरी बल्कि यह है एक अजीम ज़ेहन, एक मस्जिद-ए-हरम से मोहब्बत करने वाले दिल और एक खास संगमरमर की दास्तान।
यह कमाल है मिस्र के मशहूर इंजीनियर डॉ. मोहम्मद कमाल इस्माइल का वो शख़्स जिसने मक्का और मदीना के हरम की तौसीअ का नक़्शा बनाया। एक ऐसा इंसान जिसे अल्लाह तआला ने अद्भुत अक़्ल, नफ़ासत और इख़लास बख्शा था। उन्होंने ग्रीस के थासोस (Thassos) द्वीप का वह सफ़ेद संगमरमर चुना जिसकी खासियत है कि सूरज की रोशनी और गर्मी को वापस परावर्तित (Reflect) कर देता है। इसलिए तेज़ धूप में भी उसके टुकड़े बर्फ़ जैसे ठंडे रहते हैं। मताफ़ की जमीन पर यही पवित्र संगमरमर 5 सेंटीमीटर मोटा बिछाया गया, ताकि नीचे की तपिश ऊपर तक न आए, और लाखों ज़ायरीन के कदमों को सुकून मिले। कई लोग समझते हैं कि ज़मीन के नीचे ठंडा पानी चलाया जाता है लेकिन हक़ीक़त यह है कि यह सिर्फ़ अल्लाह की बनाई हुई एक “कुदरती नेमत” है।
एक करामती वाक़िआ सालों बाद जब मस्जिद-ए-नबवी ﷺ की तौसीअ शुरू हुई और उसी तरह का संगमरमर चाहिए था तो पता चला कि दुनिया में अब यह मार्बल मिल ही नहीं रहा। लेकिन अल्लाह तआला ने अपना करिश्मा दिखाया सऊदी अरब के एक पुराने गोदाम में यही थासोस मार्बल बड़ी मात्रा में सालों से अनछुआ रखा हुआ मिला! जैसे वह उसी घड़ी के लिए बचा कर रखा गया हो जब गोदाम के मालिक से कहा गया कि यह मार्बल रौज़ा-ए-रसूल ﷺ के आसपास इस्तेमाल होगा तो वह रो पड़ा और क़सम खाकर बोला: “अल्लाह की क़सम! इस पर मैं एक दिरहम भी नहीं लूंगा।”
ऐसा इख़लास ऐसा अदब ऐसी मोहब्बत जो सिर्फ़ नबी ﷺ के नाम पर दिलों से खुद निकले। अल्लाह तआला उस इंजीनियर पर अपनी रहमतों की बारिश फ़रमाए जिन्होंने हरम के फ़र्श को भी इबादत करने वालों के लिए राहत बना दिया। और उन्हें जन्नत-उल-फ़िरदौस में सबसे ऊँचा मुक़ाम अता फ़रमाए। आमीन, या रब्बुल आलमीन।