गौस ए पाक

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गौस ए पाक या सैय्यद मोहिय्युद्दीन अमरुल्लाह।
या शैख मोहय्युद्दीने फदलुल्लाह। ʿAbdul Qādir Gīlānī, known by admirers as Muḥyī l-Dīn Abū Muḥammad b.

Abū Sāliḥ ʿAbd al-Qādir al-Jīlānī al-Ḥasanī wa'l-Ḥusaynī, was a Hanbali Sunni Muslim preacher, ascetic, mystic, jurist, and theologian, known for being the eponymous founder of the Qadiriyya tariqa of Sufism.

Kichaucha Makdum Ashraf
14/07/2026

Kichaucha Makdum Ashraf

Tajuddin Pak ❤️Mashallah ❤️
11/07/2026

Tajuddin Pak ❤️

Mashallah ❤️

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर शहीद आयतुल्लाह अली खामेनेई का आख़िरी दीदार के लिए ताबूत सबके सामने आया।अल्लाह मरहूम को जन्नत ...
03/07/2026

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर शहीद आयतुल्लाह अली खामेनेई का आख़िरी दीदार के लिए ताबूत सबके सामने आया।

अल्लाह मरहूम को जन्नत नसीब करें।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राज़िऊन।मौलाना सलमान हुसैनी नदवी साहब के इंतक़ाल की खबर बेहद अफ़सोसनाक है, उनका जाना मिल्लत...
29/06/2026

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राज़िऊन।

मौलाना सलमान हुसैनी नदवी साहब के इंतक़ाल की खबर बेहद अफ़सोसनाक है, उनका जाना मिल्लत का बड़ा नुक़सान है।
अल्लाह से दुआ है कि उनके चाहने वालों को सब्र अता करे।

26/06/2026


सुब्हान अल्लाह! 🌹ज़रा इस छोटी सी उंगली पर ग़ौर कीजिए। इसके अंदर बिछी हुई बारीक रगें, नाज़ुक आ'साब और मज़बूत हड्डियों का ...
25/06/2026

सुब्हान अल्लाह! 🌹
ज़रा इस छोटी सी उंगली पर ग़ौर कीजिए। इसके अंदर बिछी हुई बारीक रगें, नाज़ुक आ'साब और मज़बूत हड्डियों का ऐसा हैरतअंगेज़ निज़ाम मौजूद है कि इंसान दंग रह जाए।

एक मामूली सी दिखने वाली उंगली में हर लम्हा ज़िंदगी धड़क रही है। हर हरकत, हर एहसास और हर पकड़ के पीछे अल्लाह की बेमिसाल कुदरत का शाहकार छिपा हुआ है।

जब एक छोटी सी उंगली में इतनी हिकमत, इतनी बारीकी और इतनी तदबीर नज़र आती है, तो सोचिए उस ख़ालिक की शान कितनी बुलन्द होगी जिसने पूरे इंसान को पैदा फ़रमाया।

बेशक, अल्लाह तआला सबसे बड़ा, सबसे दाना, सबसे हिकमत वाला और हर ऐब से पाक है।

एक देश दो कानून: वसीम रिजवी धर्म परिवर्तन करके जितेंद्र त्यागी बनता है, तो "घर वापसी" कहा जाता है।आयुष मालिक धर्म परिवर्...
14/06/2026

एक देश दो कानून: वसीम रिजवी धर्म परिवर्तन करके जितेंद्र त्यागी बनता है, तो "घर वापसी" कहा जाता है।

आयुष मालिक धर्म परिवर्तन करके मोहम्मद अली बनता है तो उसे "लव जिहाद" और "जबरन धर्मांतरण" कहा जाता है।

आखिर ये नजरिया कब बदलेगा?
नोट -: हम किसी भी धर्मांतरण का समर्थन नहीं करते!!

14/06/2026

Islam me 4 sadi ki sachchai

Jaror dekhe video

04/06/2026

इस्लाम को बाहर से जितना नुकसान नहीं पहुँचा, उससे कहीं ज़्यादा नुकसान अंदर की जाहिलियत ने पहुँचाया है।

जब इल्म की जगह जज़्बात, और हिकमत की जगह जल्दबाज़ी आ जाए, तो बातिल ताकतों को दीन पर हमला करने का मौका मिल जाता है।

आइए, इल्म हासिल करें, अपने अख़लाक़ को बेहतर बनाएं और दीन को सही समझ के साथ पेश करें।

“इस्लाम का असल दुश्मन जाहिल मुसलमान है, और इनके कंधों पे खड़े होकर बातिल ताकतें दीन पर हमले करती हैं।”

पंजाब के एक गांव ने जनाज़े की रस्म को बदल कर एक नया इतिहास रचा हैं ! जहां एक ग़रीब शख़्स का जनाजा कब्रिस्तान में पहुंचा ...
09/05/2026

पंजाब के एक गांव ने जनाज़े की रस्म को बदल कर एक नया इतिहास रचा हैं ! जहां एक ग़रीब शख़्स का जनाजा कब्रिस्तान में पहुंचा और सफें दुरूस्त हुई तो ईमाम साहब ने शामिल हुए लोगों सें मुखातिब होकर एक दिल सोज ऐलान किया !

ये मैय्यत जिसका जनाज़ा हम पढ़ने लगे हैं अपने घर का एकलौता (वाहिद) कफील और सहारा था ! सोगवारान (शौकाकुल) परिवार में सिर्फ एक बेवा और तीन छोटे बच्चें हैं !

इद्दत के अय्याम में उनके पास आमदानी का कोई जरिया नहीं है ! लिहाज़ा कब्रिस्तान के मैन गेट पर एक चादर बिछा दी गई हैं ! जो भी साहबे तौफीक बग़ैर किसी दिखलावे के अल्लाह की रज़ा के लिए एक रूपये सें लेकर अपनी हैसियत के मुताबिक जितनी रकम दे सकता हो वो वहां डाल दे !
तद्फीन के बाद जब चादर सें रकम जमा की गई तो वो एक लाख रुपए सें ज़्यादा थी !

किसी के दस रुपए थे तो किसी के सौ लेकिन इस मुस्तरका हमदर्दी ने यतीम बच्चों के लिए कई महीनों का मआस (ख़र्चा पानी) शुकून फराहम कर दिया, ताजियत सिर्फ हाथ उठाकर दुआ करने का नाम नहीं, बल्कि दु:ख की घड़ी में अमली सहारा बनने का नाम है !

हमारे नबी करीम सल्लललाहो अलैहि वस्सल्लम का फरमान हैं कि अगर कोई पौधा लगाएं और उससे किसी इंसान, परीन्दे या जानवर को कोई फायदा पंहुचे तो लगाने वाले को उसका भी सवाब मिलता रहता हैं, जन्नत का आसान रास्ता खल्के ख़ुदा की खिदमत में छुपा हुआ हैं !

आइये इस रिवायत को हर गांव व शहर में जिंदा करे ! जब भी किसी ऐसे का जनाजा हो जो घर का वाहिद कफील (अकेला कमाने वाला) था, तो वहां के उल्मा ए इकराम पाँच मिनट की इधर उधर की बात करने की बजाय ये ऐलान करें के "मरहूम के बच्चों के लिए अपना हिस्सा डालें" ताकि मरहूम के परिवार को म'आसी अखराजात और परेशानियां सें बचाया जा सकें और ये अमल सदका ए जरिया बन जाए - जज़ाक अल्लाह खैर !

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