31/12/2023
सत्संग सुनने की सही विधि
प्रस्तुत कहानी में दो पात्र हैं, दो मकोड़े। एक चीनी के गोदाम में रहता था, दूसरा नमक के गोदाम में।
एक दिन दोनों की मुलाकात हुई तो नमक वाले ने चीनी वाले को अपने गोदाम में रात्रिभोज के लिए निमंत्रित किया।
रात हुई तो चीनी वाला बढ़िया से तैयार होकर, नमक के गोदाम में पहुँचा। नमक वाले ने उसके सामने नमक परोसा। नमक जीभ पर रखते ही, थू थू थू थू करते हुए, चीनी वाले ने नमक थूक दिया। और कहा- हे भगवान! तूं इतनी कड़वी चीज खाता है? कल रात तूं मेरे गोदाम पर आना, मैं तुझे इस दुनिया की सब से स्वाद चीज चखाऊँगा।
अगली रात नमक वाला चीनी के गोदाम में पहुँचा। चीनी वाले ने चीनी परोसी। नमक वाले ने चीनी का दाना मुँह में रखा, और उसने भी थू थू थू थू करते हुए, चीनी थूक दी।
चीनी वाला बड़ा हैरान हुआ। पर वह सारी बात समझ गया कि जरूर यह अपने मुंह में नमक का दाना छिपाए है। इसीलिए इसे चीनी में स्वाद नहीं आया।
वह बोला- मकोड़े भाई! मैं पानी लाता हूँ। तूं एक बार अच्छी तरह कुल्ला कर ले, फिर तुझे चीनी का असली स्वाद मालूम पड़ेगा।
अपनी चाल पकड़ी जाने पर, नमक वाला मकोड़ा शर्मिंदा हो गया। उसने कुल्ला किया और फिर चीनी चखी। और तब उसकी प्रसन्नता का कोई ठिकाना न रहा।
सत्संग में भी दुनियावालों को भगवान की मीठी बात सुनाई जाती है पर वे अपने मन में संसार भर की कड़वी बातें दबाए रखते हैं। इसीलिए उन्हें कोई बात मीठी नहीं लगती, कड़वी लगती है।
अगर वे सत्संग सुनने से पहले, श्रद्धा के जल से, अच्छी तरह कुल्ला कर लें, अपने मन को खाली कर लें, तब उन्हें हर बात की असली मिठास का अनुभव हो जाए।
अपने mobile phone, अपने दुनियावी काम तथा मन को भटकाने वाली बातें केवल सत्संग सुनने के समय के लिए दूर कर दें तो ही सत्संग में आने की मिठास मिलेगी।
बोल मेरे श्री गुरु महाराज जी की जय