16/06/2026
श्री कृष्ण कहते हैं — कर्मों में कुशलता ही योग है।"
(योगः कर्मसु कौशलम्)
जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों को पूर्ण निष्ठा, एकाग्रता और दक्षता के साथ करता है,
वही सच्चे अर्थों में योगी है।
योग केवल ध्यान या साधना नहीं, बल्कि हर कर्म को श्रेष्ठता से करना भी योग है। 🚩❤️