26/01/2026
*जय श्री हरि*
*गुप्त नवरात्र में आठवीं भगवती मां बगलामुखी*
*10 महाविद्याओं का कोई भी मंत्र यज्ञ जप साधना करने के लिए योग्य गुरु का परामर्श अवश्य लें और योग्य गुरु की देख रेख में ही करें*
*काली तारा महाविद्या षोडसी भुवनेश्वरी। बाग्ला छिन्नमस्ता च विद्या धूमावती तथा।।*
*मातंगी त्रिपुरा चैव विद्या च कमलात्मिका। एता दश महाविद्या सिद्धिदा प्रकीर्तिता।।*
*माँ बगलामुखी पौराणिक कथा*
*एक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ, जिससे संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा इससे चारों ओर हाहाकार मच गया। संसार की रक्षा करना असंभव हो गया। यह तूफान सब कुछ नष्ट-भ्रष्ट करता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था, जिसे देख कर भगवान विष्णु जी चिंतित हो गए।*
*इस समस्या का कोई हल न पा कर वह भगवान शिव को स्मरण करने लगे, तब भगवान शिव ने कहा: शक्ति रूप के अतिरिक्त अन्य कोई इस विनाश को रोक नहीं सकता अत: आप उनकी शरण में जाएं।*
*तब भगवान विष्णु ने हरिद्रा सरोवर के निकट पहुंच कर कठोर तप किया। भगवान विष्णु के तप से देवी शक्ति प्रकट हुईं। उनकी साधना से महात्रिपुरसुंदरी प्रसन्न हुईं। सौराष्ट्र क्षेत्र की हरिद्रा झील में जलक्रीड़ा करती महापीतांबरा स्वरूप देवी के हृदय से दिव्य तेज उत्पन्न हुआ। इस तेज से ब्रह्मांडीय तूफान थम गया।*
*मंगलयुक्त चतुर्दशी की अर्धरात्रि में देवी शक्ति का देवी बगलामुखी के रूप में प्रादुर्भाव हुआ था। त्रैलोक्य स्तम्भिनी महाविद्या भगवती बगलामुखी ने प्रसन्न होकर भगवान विष्णु जी को इच्छित वर दिया और तब सृष्टि का विनाश रुक सका। देवी बगलामुखी को वीर रति भी कहा जाता है क्योंकि देवी स्वयं ब्रह्मास्त्र रूपिणी हैं। इनके शिव को महारुद्र कहा जाता है। इसीलिए देवी सिद्ध विद्या हैं। तांत्रिक इन्हें स्तंभन की देवी मानते हैं। गृहस्थों के लिए देवी समस्त प्रकार के संशयों का शमन करने वाली हैं।*
*दसमहाविधाओ मे से आठवी महाविधा है देवी बगलामुखी। इनकी उपासना इनके भक्त शत्रु नाश, वाकसिद्ध और वाद विवाद मे विजय के लिए करते है। इनमे सारे ब्राह्मण की शक्ति का समावेश है, इनकी उपासना से भक्त के जीवन की हर बाधा दूर होती है और शत्रुओ का नाश के साथ साथ बुरी शक्तियों का भी नाश करती है। देवी को बगलामुखी, पीताम्बरा, बगला, वल्गामुखी, वगलामुखी, ब्रह्मास्त्र विद्या आदि नामों से भी जाना जाता है।*
*ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानांवाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलयबुद्धि विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।*
*मॉं बगलामुखी स्तुति*
*या देवी सर्वभूतेषु पीतरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।*
*या देवी सर्वभूतेषु शत्रुहंता संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।*
*या देवी सर्वभूतेषु प्रेतनाशिनी संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।*
*या देवी सर्वभूतेषु रोगनाशिनी संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।*
*या देवी सर्वभूतेषु सर्वभयनाशिनी संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।*
*या देवी सर्वभूतेषु सर्वसम्पतिदायनी संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।*
*या देवी सर्वभूतेषु मगंलकारिणी संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।*
*या देवी सर्वभूतेषु मोक्षदायिनी संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।*
*या देवी सर्वभूतेषु बगलारूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः*
*जय श्री राम*