23/09/2024
सहाद्री शीर्षे विमले वसंतम
गोदावरीतीर पवित्रदेशे
यध्दर्शनात् पातकनाशु नाशं
प्रमाणित तं त्रयम्बकमीशमीडे
कल भोलेनाथ की कृपा से मैंने अपनी 12 ज्योतिर्लिंग की यात्रा के 7वें ज्योतिर्लिंग श्री त्र्यंबकेश्वर महादेव के दर्शन पूरे किए। यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के नासिक जिले में ब्रह्मगिरी पर्वत के पास स्थित है। यहां पर स्थित ज्योतिर्लिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा एक साथ होती है।
नाशिक से यहां तक की दूरी लगभग 30 किमी है। यहां आने के लिए आपको नासिक रोड रेलवे स्टेशन के बाहर से ऑटो या टैक्सी मिल जायेगी। यहां से शेयरिंग टैक्सी और सीधी बस भी नासिक से उपलब्ध है। टैक्सी लगभग 1000, ऑटो का लगभग 500 रूपये लेते हैं, बस का किराया 70 रूपये का है।
गोदावरी नदी के किनारे स्थित त्र्यंबकेश्वर मंदिर काले पत्थरों से बना है। मंदिर का स्थापत्य अद्भुत है। इस मंदिर में कालसर्प शांति, त्रिपिंडी विधि और नारायण नागबलि की पूजा संपन्न होती है। जिन्हें भक्तजन अलग-अलग मुराद पूरी होने के लिए करवाते हैं।
यहां पर गौतम ऋषि ने तप करके शिवजी को प्रसन्न किया था और शिवजी यहां पर प्रकट हुए थे। गौतम ऋषि ने गौ हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए कठोर तप करके शिवजी से गंगा को यहां अवतरित होने का वरदान मांगा था। इसके फलस्वरूप दक्षिण की गंगा अर्थात गोदावरी का उद्गम हुआ।
तीन नेत्रों वाले शिवशंभु के यहाँ विराजमान होने के कारण इस जगह को त्र्यंबक (तीन नेत्रों वाले) कहा जाने लगा। उज्जैन और ओंकारेश्वर की ही तरह त्र्यंबकेश्वर महाराज को इस गाँव का राजा माना जाता है, इसलिए कहते हैं कि हर सोमवार को त्र्यंबकेश्वर के राजा अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं।
इस प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण तीसरे पेशवा बालाजी अर्थात नाना साहब पेशवा ने करवाया था। इस मंदिर का जीर्णोद्धार 1755 में शुरू हुआ था और 31 साल के लंबे समय के बाद 1786 में जाकर पूरा हुआ।