20/09/2025
✨ आवश्यक सूचना ✨
इस वर्ष नवरात्रों के पावन अवसर पर **माता मनसा देवी नरेला वाली का मेला** दिनांक **27, 28 और 29 सितम्बर 2025** को भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा।
👉 सभी श्रद्धालु एवं भक्तजन सपरिवार इस पावन मेले में पधारकर माता रानी के दर्शन का लाभ उठाएँ।
# # # विशेष आयोजन :
📅 **27 सितम्बर 2025 (शनिवार)**
⏰ प्रातः 6:00 बजे
📍 **पाना पपोसिया स्थित मंदिर से**
➡️ **माता के प्रमुख मंदिर तक शोभायात्रा** निकाली जाएगी।
🙏 सभी भक्तजन समय पर पहुँचकर इस शोभायात्रा और मेले की भव्यता में सहभागी बनें।
🙏🙏🙏**जय माता मंशा देवी की जय।** 🙏🙏🙏
*नरेला माता मंशा देवी ऐतिहासिक मेला शारदीय नवरात्रों में, **छठ और सातम** 27-09-2025 to 29-09-2025 के दिन भव्य **मेला पाना पपोशियान – नरेला दिल्ली-40 मे आयोजित है
नरेला में स्थित **माता मंशा देवी मंदिर** सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और एकता का प्रतीक है।
दशकों से यहाँ **साल में दो बार**, चैत्र और शारदीय नवरात्रों में, **छठ और सातम** के दिन भव्य **मेला आयोजित होता आया है।
दिल्ली के उत्तरी छोर पर बसे नरेला शहर का नाम न केवल व्यापारिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं भी दूर-दूर तक प्रसिद्ध हैं। उन्हीं में से एक है **माता मंशा देवी मेला जो नरेला में स्थित प्राचीन **माता मंशा देवी मंदिर** में आयोजित होता है। यह आयोजन नरेला ही नहीं, बल्कि आस-पास के 35-40 गाँवों के लिए भी आस्था, उत्सव और खेल भावना का अद्वितीय संगम है।
**ऐतिहासिक पृष्ठभूमि**
माना जाता है कि **माता मंशा देवी** का मंदिर सदियों पुराना है। नवरात्रों में माता के प्रति विशेष श्रद्धा और उत्साह दिखाई देता है। वर्षों से, **चैत्र** और **आश्विन (शारदीय)** नवरात्रों में यहां भव्य मेला का आयोजन होता आया है। परंपरा के अनुसार, **छठ और सातम के दिन** को मेला आयोजित किया जाता है।
मेला सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक धरोहर है। यहां बुजुर्ग अपने बचपन की यादें ताज़ा करते हैं,
**मेला और रथ यात्रा की परंपरा**
**मेला और मंदिर की झलक**
* नवरात्रों में माता मंशा देवी की **शोभायात्रा (रथ यात्रा)** पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से मंदिर लायी जाती है।
मेला **रथ यात्रा** से शुरू होता है। पाना पपोशियान मंदिर से माता मंशा देवी का रथ सजाकर निकाला जाता है। रथ को रस्सियों से भक्त खींचते हैं, और पूरे रास्ते “**जय माता दी**”**जय माता दी** “**माता मंशा देवी की जय**” के उद्घोष से वातावरण गूंज उठता है।
रथ के पीछे-पीछे महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग—सभी भक्तगण शामिल होते हैं। रथयात्रा भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ माता का स्वागत नरेला में स्थित **माता मंशा देवी मंदिर में होता है।
मंदिर के चारों ओर और मैदान में सैकड़ों दुकानें सजती हैं:
* **खाने-पीने के स्टॉल** – चाट, गोलगप्पे, जलेबी, समोसे, कुल्फी
* **खिलौनों की दुकानें** – बच्चों के लिए रंग-बिरंगे खिलौने
* **भक्ति सामग्री** – नारियल, चुनरी, अगरबत्ती, प्रसाद
भक्त लाइन में लगकर माता के दर्शन करते हैं। मंदिर के मुख्य द्वार के पास **चार मंजिला विशाल भवन** है, जिसमें कई कमरे बने हुए हैं। यह भवन ट्रस्ट द्वारा बनवाया गया है, ताकि दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालु और उनके परिवार ठहर सकें। नवरात्र के दौरान ये कमरे यत्रियों से भरे रहते हैं, और यहां **सेवा-भाव** से लोगों को ठहरने, भोजन और पानी की व्यवस्था की जाती है।
🙏🙏🙏**जय माता मंशा देवी की जय।** 🙏🙏🙏