01/05/2025
मुख्य न्यायाधीश ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या और बढ़ाने की मांग की है।
*प्रधानमंत्री का जवाब*
माननीय जज साहब, आपको जनता की ओर से निम्न निर्देश हैं..
1:- आप सभी जस्टिस 10 बजे आएं - दोपहर 2 से 3 बजे के बीच लंच करें, फिर 4 बजे घर लौट जाएं। यह कब तक चलेगा??
2:- सुबह 9 बजे आएं और शाम 6 बजे तक डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिसकर्मी, नौकरशाह और कॉरपोरेट जगत के लोगों की तरह काम करें।
3:- शनिवार और रविवार को काम करें जैसा कि कई डॉक्टर और कुछ अधिकारी करते हैं।
4:- 1947 से 1 जून से 30 जून तक आप गर्मी की छुट्टियां मनाते हैं। जब पूरा सुप्रीम कोर्ट सेंट्रलाइज्ड एसी है तो जून में गर्मी की छुट्टियां क्यों??
5:- प्रत्येक जस्टिस को साल में केवल 15-20 दिन की छुट्टी लेनी होगी।
6:- जल्लीकट्टू, दहीहांडी जैसे मामलों में जानबूझ कर समय क्यों बर्बाद कर रहे हो?? 7:- कुछ पेशेवरों द्वारा दायर सैकड़ों बेकार जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करके अपना समय क्यों बर्बाद कर रहे हो?? 8:- EPFO बनाम पेंशनभोगी, कई मामलों में 3 न्यायपीठ और फिर 5 न्यायपीठ क्यों बनाते हो? 9:- देशद्रोहियों के लिए समीक्षा, फिर सुधार के लिए याचिका? गरीब लोगों के पास समय नहीं है, उनके लिए आप रात में भी कोर्ट क्यों खोलते हो??? 10:- आपको करदाताओं से करोड़ों का वेतन और सुविधाएँ मिलती हैं, लेकिन जनता के प्रति आपकी जवाबदेही शून्य है। 11:- आप AC बंगलों में रहते हैं, लग्जरी कारों में घूमते हैं, जनता के खर्च पर आपके पास विस्तृत सुरक्षा है, तो आप कड़ी मेहनत क्यों नहीं करते? 12:- आप सभी को कैबिनेट मंत्री की सुविधाएँ मिलेंगी। उम्र बढ़ने की कोई ज़रूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के कार्य दिवसों को बढ़ाकर कम से कम 300 दिन किया जाना चाहिए, जो साल में केवल 168 दिन काम करता है। जजों को 300 दिन काम करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए जबकि प्रधानमंत्री 365 दिन काम कर सकते हैं। बेचारे देशभक्त अब और बर्दाश्त नहीं कर सकते। न्यायपालिका सड़ चुकी है। इसमें सुधार की सख्त जरूरत है। कम से कम पांच ग्रुप भेजें* कुछ नहीं भेजेंगे लेकिन मुझे यकीन है आप जरूर भेजेंगे।