28/08/2026
कबीर, मान अपमान सम कर जानै,
तजै जगत की आस ।
चाह रहित सांस रहित, कठोर शोक नहिं तास ||
भावार्थ - कबीर साहेब जी कहते हैं कि किसी भी भक्त के प्रति निर्देशित अपमान को अनदेखा करना आवश्यक है, चाहे वह किसी ने भी कहा हो। इसके बजाय, हमें उस व्यति की बुद्धि के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए और उनके शब्दों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। इसी प्रकार, हमें दूसरों से सम्मान प्राप्त करने की लालसा से बचना चाहिए, क्योंकि यह हमारे धर्मशास्त्र में बाधा उत्पन्न कर सकता है। संतुष्ट रहना और लाभ-हानि दोनों को ईश्वर का आशीर्वाद मानना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- Sant Rampal Ji Maharaj